राजस्थान के गांवों में चारागाह की जमीन पर अतिक्रमण करने वाले की अब खैर नहीं है।
This blog is aimed at documenting the initiatives undertaken for the conservation of the pastures by communities across Rajasthan as well as efforts by Government of Rajasthan and Civil Society Organisations across the State. Foundation for Ecological Security works in partnership with the Wasteland and Pasture Land Development Board for conservation of the commons. For views and comments write to rajasthanpastures@gmail.com
Wednesday, 30 July 2025
राजस्थान के गांवों में बनेगी समितियां, चारागाह जमीन से हटेगा दबंगों का अतिक्रमण; पंचायत राज ने दिए निर्देश
Monday, 28 July 2025
हरियाली तीज पर दौलपुरा में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान, 51 हजार पौधे रोपे गए
भीलवाड़ा। जिसके पास दूरदृष्टि होती है, वही जनहित के कार्यों को धरातल पर उतारने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश की सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग महिलाओं, युवाओं, किसानों और वंचितों के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है।" यह बात राज्य के उपमुख्यमंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने पंचायत समिति माण्डलगढ़ की ग्राम पंचायत दौलपुरा में आयोजित वृहद वृक्षारोपण महाअभियान कार्यक्रम में व्यक्त किए। “मुख्यमंत्री वृक्षारोपण महाअभियान के अंतर्गत एक पेड़ माँ के नाम” एवं “हरियाळो राजस्थान 2.0” के तहत उपमुख्यमंत्री बैरवा के मुख्य आतिथ्य में 'एक पेड़ माँ के नाम' वाटिका में 51,000 पौधों का वृक्षारोपण किया गया। यह आयोजन हरियाली तीज के शुभ अवसर पर संपन्न हुआ, जिसमें चारागाह भूमि पर सामूहिक रूप से पौधारोपण करते हुए ग्रामीणों, स्कूली बच्चों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने व्यापक सहभागिता निभाई।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान केवल पर्यावरण-संरक्षण तक सीमित न होकर भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम है। जब हम पौधे को अपने मां, पिता, गुरु या किसी महापुरुष के नाम समर्पित करते हैं, तो आत्मीय रिश्ता बनता है और उसकी परवरिश एक दायित्व बन जाती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए इस अभियान को “राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक” बताया और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा राज्य स्तर पर इसे गति देने को “सार्थक नेतृत्व का उदाहरण” कहा। कार्यक्रम में माण्डलगढ़ विधायक गोपाललाल शर्मा ने कहा कि “एक पौधा माँ के नाम” अभियान एक जन आंदोलन बन चुका है, और यह प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह कम से कम एक पौधा जरूर लगाए। उन्होंने कोविड काल के अनुभवों का ज़िक्र करते हुए प्रकृति के प्रति संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया।
फ्लैगशिप योजनाओं की समीक्षा की।
वृक्षारोपण कार्यक्रम के पश्चात उपमुख्यमंत्री बैरवा ने पंचायत समिति माण्डलगढ़ के सभागार में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की गई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रत्येक योजना नीतिगत प्रतिबद्धता और ज़मीनी प्रभाव के सिद्धांत पर आधारित है और इसमें किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों से सीधा फीडबैक लिया गया और अधिकारियों से वास्तविक आंकड़े एवं प्रगति रिपोर्ट प्राप्त की गई। समीक्षा बैठक के पश्चात उपमुख्यमंत्री ने प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से राज्य सरकार के विगत डेढ़ वर्ष के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियाँ साझा कीं। उन्होंने वर्तमान सरकार की नीतिगत स्पष्टता, सुशासन, महिला सशक्तिकरण, किसान कल्याण, युवा विकास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की तुलना पूर्ववर्ती सरकार की कुर्सी-केन्द्रित राजनीति से करते हुए बताया कि वर्तमान शासन विकास की गाथा लिख रहा है।
हरियाली तीज के अवसर पर जिले में हुआ 11 लाख पौधों का रोपण, अभियान के तहत लगाए जाएंगे कुल 32 लाख पौधे
जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने बताया कि हरियाली तीज के अवसर पर संपूर्ण जिले में एक दिवस में 11 लाख पौधों का रोपण किया गया है एवं अभियान के तहत जिले में इस वर्ष 32 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य लिया गया है। उन्होंने कहा कि समस्त अधिकारियों को सभी पौधों की जिओ टैगिंग करने हेतु निर्देशित किया गया है।
मूल ऑनलाइन लेख - https://rajasthan.punjabkesari.in/bhilwara/news/one-tree-in-the-name-of-mother--campaign-in-daulpura-on-hariyali-teej-2187988
जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बचाव का उपाय है हरयाळो राजस्थान
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव वर्तमान में सम्पूर्ण विश्व के लिए चिन्ता का विषय है। इन प्रभावों को सघन रूप से पौधरोपण कर काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
कोसेलाव गोचर भूमि पर पौधरोपण किया
Friday, 25 July 2025
गोशाला के लिए चारागाह भूमि का आवंटन हो सकेगा
भास्कर संवाददाता | सीकर
राज्य सरकार ने गोशालाओं के लिए गोचर चारागाह भूमि आवंटन में आ रही बाधाओं में शिथिलता प्रदान की है। जिला गोशाला विकास समिति के जिलाध्यक्ष मोदी ने बताया कि गोशालाओं को भूमि आवंटन में कई परेशानी आ रही थी। सीएम भजनलाल शर्मा ने इसका समाधान किया है। राजस्थान सरकार के राजस्व (ग्रुप-6) विभाग ने 22 जुलाई को इस बारे में आदेश निकाला है। आदेशानुसार गोशालाओं के लिए आवंटन के लिए उपयुक्त सिवायचक भूमि उपलब्ध नहीं है। गांव में पशुओं को चराने के लिए पर्याप्त मात्रा में चारागाह भूमि उपलब्ध है तो गोशाला के लिए चारागाह भूमि का आवंटन किया जा सकेगा। जिले की गोशालाओं के संचालकों ने जिलाध्यक्ष मोदी और सीएम का आभार जताया है।
मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/sikar/news/allotment-of-pasture-land-for-gaushala-will-be-possible-135523478.html
अंता के तामखेड़ा में अतिक्रमण हटाने की मांग:19 वें दिन जारी रहा समिति का धरना, बोले-चारागाह विकास समिति का गठन किया जाए
चरागाह भूमि पर अतिक्रमण नहीं होगा बर्दाश्त, समितियों को किया जाएगा सक्रिय
ग्राम पंचायतों को निर्देश: अतिक्रमण हटाएं, चरागाह विकास को दें गति अब हर पंचायत में बनेगी चरागाह समिति, सर्वे कर अतिक्रमण हटाया जाएगा
राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में चरागाह भूमि पर लगातार हो रहे अतिक्रमण को लेकर पंचायती राज विभाग सख्त हो गया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ग्राम पंचायतें चरागाह भूमि पर से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाएं और संबंधित समितियों को सक्रिय करें। भीलवाड़ा जिले में कई ग्राम पंचायते ऐसी है जहां चरागाह पर अतिक्रमण होने के साथ उस क्षेत्र में खनन तक हो रहा है। लेकिन जिला प्रशासन इस मामले में लंबे समय से चुप्पी साधे हुए है। पंचायत राज विभाग के उपायुक्त एवं उपशासन सचिव प्रथम इंद्रजीत सिंह ने आदेश में बताया गया है कि कई ग्राम पंचायतें अभी भी चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रही हैं, जो नियमों के खिलाफ है।
समितियों का गठन अनिवार्य
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 170 के अनुसार, हर ग्राम पंचायत में चरागाह विकास के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन अनिवार्य है। इस समिति की अध्यक्षता संबंधित वार्ड पंच करेगा, जबकि चार सदस्य ग्राम सभा द्वारा निर्वाचित किए जाएंगे। यह समिति चरागाह भूमि के संरक्षण, विकास और अतिक्रमण रोकने के लिए उत्तरदायी होगी।
अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया स्पष्ट
विभाग ने नियम 165 का हवाला देते हुए पंचायतों को जनवरी और जुलाई में चरागाह, आबादी भूमि व तालाबों पर अतिक्रमण सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद अतिक्रमण हटाने की विधिवत प्रक्रिया अपनाते हुए नोटिस, निषेधाज्ञा, बेदखली और पुलिस सहयोग लेने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जिला स्तर पर बनेगी निगरानी समिति
चरागाह विकास योजनाओं की समीक्षा और समन्वयन के लिए जिला प्रमुख की अध्यक्षता में जिला स्तरीय बंजर भूमि एवं चरागाह विकास समिति का गठन किया गया है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी इस समिति के नोडल अधिकारी होंगे।
10 सर्वाधिक अतिक्रमित पंचायतों की सूची मांगी
विभाग ने सभी जिलों से सबसे अधिक चरागाह अतिक्रमण वाली 10 ग्राम पंचायतों की सूची मांगी है। इसमें खसरा संख्या, अतिक्रमित क्षेत्रफल और अन्य विवरण शामिल हों।
शपथ पत्र लेना अनिवार्य
यदि किसी ग्राम पंचायत की ओर से अभी तक समिति गठित नहीं की गई है तो तत्काल गठन कर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही ग्राम विकास अधिकारी से शपथ पत्र लेकर यह भी दर्ज किया जाए कि अतिक्रमण सर्वे किया गया है तथा कार्यवाही प्रारंभ हो चुकी है।
विभाग करेगा निगरानी
पूर्व में 3 जनवरी 2025 को भी इस आशय का निर्देश जारी किया जा चुका है। लेकिन इसकी पालना नहीं हो पाई थी। अब यह आदेश जारी कर सुनिश्चित करने के साथ विभाग को नियमित रूप से कार्यवाही से अवगत कराने के लिए कहा गया है।
मूल ऑनलाइन लेख - https://www.patrika.com/bhilwara-news/encroachment-on-pasture-land-will-not-be-tolerated-committees-will-be-activated-19806124
Thursday, 24 July 2025
भीलवाड़ा में चारागाह भूमि में अवैध खनन का आरोप:पहले तहसीलदार को हटाया, अब SDM को किया गया APO
भीलवाड़ा में सुरास ग्राम में चारागाह भूमि पर अवैध खनन
भीलवाड़ा में सुरास ग्राम पंचायत क्षेत्र के लोगों ने डांग (चारागाह भूमि) में जिंदल शॉ लिमिटेड द्वारा खनिज लीज की आड़ में चारागाह भूमि पर अवैध खनन किए जाने के आरोप लगाए। जिला कलेक्टर को सुरास ग्रामवासियों द्वारा की गई शिकायत पर मांडल के उपखंड अधिकारी सीएल शर्मा ने निर्देश देते हुए निवर्तमान तहसीलदार सुमन गुर्जर को मौके पर भेज जांच के लिए भेजा।
इस पर तहसीलदार सुमन गुर्जर द्वारा मौका रिपोर्ट तैयार कर उपखंड अधिकारी को सौंपी गई। रिपोर्ट में पाया गया कि कंपनी को कुल 43.1921 हेक्टेयर भूमि लीज पर आराजी संख्या 2096/1 स्वीकृत थी, लेकिन इसके अतिरिक्त लगभग 4.7677 हेक्टेयर आरक्षित चारागाह भूमि आराजी संख्या 2096 तथा आराजी संख्या 1105 किस्म रास्ता पर भी खनन गतिविधियां पाई गईं।
वैध लीज के अनुरूप कार्य नहीं हुआ
रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया कि संबंधित स्थल पर न तो खनिज विभाग के मानक चिन्ह मौजूद थे और न ही वहां वैध लीज के अनुरूप कार्य हो रहा था। चारागाह भूमि में अवैध खनन स्पष्ट रूप से पाया गया। आरोप है कि जब उपखंड अधिकारी शर्मा ने इस अवैधता पर कार्रवाई आरंभ की, तो उन पर कई स्तरों से दबाव बनाए जाने लगे।
आरोप यह भी है कि जिंदल शॉ लिमिटेड द्वारा चारागाह भूमि को भी अपने लीज क्षेत्र में शामिल करवाने के लिए एक फाइल उपखंड कार्यालय में प्रस्तुत की गई थी, जिसे स्वीकृत करवाने के लिए भी दबाव डाला जा रहा था। इसी दौरान छुट्टी के दिन रविवार 20 जुलाई की देर शाम को कार्मिक विभाग ने उनका एपीओ आदेश जारी कर दिया।
जांच के बाद पहले तहसीलदार को हटाया और अब एसडीएम को
मामले में पूर्व में मौके पर जांच करने गई निवर्तमान तहसीलदार सुमन गुर्जर को मांडल से हटा कर कोटड़ी लगा दिया गया। अब मांडल एसडीएम सीएल शर्मा को एपीओ किए जाने के आदेश जारी कर दिए गए। हालांकि कार्मिक विभाग द्वारा जारी किए गए आदेश ने यह स्पष्ट कारण नहीं है कि अधिकारी को किस कारण हटाया गया है।
जानकारी के अनुसार- चारागाह भूमि और पेटा काश्त भूमि पर अवैध खनन का एक मामला वर्ष 2012-13 में भी ग्रामीणों ने उठाया था। तभी भी रिपोर्ट में अवैध खनन पाया गया था।
मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/bhilwara/news/jindals-illegal-mining-in-pasture-land-135518405.html
बिचपुरी गांव में दबंगों ने किया अतिक्रमण:ग्रामीणों ने चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटवाने को कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
ग्राम पंचायत बिचपुरी के ग्रामीण जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां सार्वजनिक चारागाह भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर जिला कलेक्टर कानाराम को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर अतिक्रमण हटाने की मांग की।
चारागाह भूमि पर किया निर्माण
ग्रामीणों ने बताया कि खसरा नंबर 1861/1869, 1841, 1837 सहित अन्य भूमि पर कुछ लोगों ने कच्चा-पक्का निर्माण, बोरिंग और खेती कर अवैध कब्जा कर लिया गया है। यह भूमि पशुओं की चराई के लिए आरक्षित है, जिस पर अतिक्रमण के कारण गांव के पशुपालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह भूमि वर्ष 1912 से चारागाह के रूप में चिन्हित है और वन विभाग की ओर से भी इसकी पुष्टि की जा चुकी है। इसके बावजूद कुछ प्रभावशाली लोगों ने इस पर कब्जा कर लिया है और निजी उपयोग में ले रहे हैं। इससे गांव की सार्वजनिक व्यवस्था और पशुधन की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि इस मामले में तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाए और चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। ज्ञापन देने वालों में राजाराम देवी मोती, फतेहसिंह गुर्जर, पवन गुर्जर, मोहन गौरीशंकर, सीता देवी, किशनलाल, रिंकु गुर्जर, कैलाश गुर्जर, बलराम गुर्जर, मौहरसिंह गुर्जर, तारा सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे जनआंदोलन करने को मजबूर होंगे।
मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/sawai-madhopur/news/the-bullies-encroached-upon-bichpuri-village-135520275.html
गांव के चारागाहों की जमीन पर कब्जा करना पड़ेगा भारी, पंचायतीराज मंत्री ने बनाई रूपरेखा
जिला परिषद सीईओ को बनाया बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समिति का नोडल अधिकारी गांव की चारागाह वाली जमीनों पर अगर कब्जा किया तो कब्जेधारियों की अब खैर नहीं। मंगलवार को पंचायती राज मंत्री ने इसके लिए सभी जिला परिषद के सीईओ, जिला प्रमुख, सरपंचों को कहा कि अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाएं। साथ ही गांवों में चारागाह समिति को वापस एक्टिव करें।
पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने प्रदेश की समस्त जिला परिषदों को आदेश जारी किए हैं। आदेश में कहा है कि पंचायतों के चारागाहों में उपयुक्त किस्म की घास, झाड़ियों और पौधों को विकसित किया जाए। विकास की राह में अतिक्रमण आएं तो उन्हें रोका जाए। रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं। इसके लिए पंचायत प्रत्येक गांव की चारागाह भूमि का नियंत्रण पांच व्यक्तियों की समिति को दें। जिसकी अध्यक्षता संबंधित गांव का वार्ड पंच करें और इस समिति के चार सदस्य ग्राम सभा निर्वाचित करे। चारागाह विकास, चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने, जल एवं भूमि संरक्षण किया जाए।
इसके लिए प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से 31 जुलाई 2017 को जारी आदेश के तहत काम हो। जिला स्तर पर विभिन्न विभागों के साथ समन्वय किया जाए। चारागाह विकास की योजना की समीक्षा के लिए राजस्थान कार्य विधि नियम 55 के अंतर्गत जिला प्रमुख की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समिति का गठन किया गया है। जिसका प्रशासनिक विभाग ग्रामीण विकास विभाग है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद जिला स्तर पर चारागाह भूमि विकास समिति के नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली जमीन से अतिक्रमण हटाने की ये होगी प्रक्रिया
- पंचायत की सार्वजनिक भूमियों पर अतिक्रमण के मामलों का पता लगाने के लिए प्रतिवर्ष जनवरी और जुलाई माह में आबादी भूमियों तालाब-तल और चरागाहों पर अतिचारीयो का सर्वेक्षण करने के लिए तीन पंचों की एक समिति बनाई जाएगी।
- ऐसे सभी अतिक्रमण की क्षेत्र के ब्यौरे और प्रकृति के साथ ग्राम विकास अधिकारी द्वारा एक रजिस्टर में तैयार किया जाएगा।
- पंचायत आबादी क्षेत्र में ऐसे अतिक्रमियों को भूमि की बेदखली के लिए नोटिस जारी करेगी।
- जब कभी पंचायत या उसके सदस्य या सचिव के ध्यान में लाया जाए कि अतिक्रमण किया जा रहा है। तो सरपंच की ओर से अतिक्रमण के विरुद्ध निषेधात्मक आज्ञा जारी करके तुरंत अतिक्रमण या निर्माण रोक दें। अन्यथा उसके खर्च व हरजाने पर ऐसा अधिग्रहण हटा दिया जाए और सुनवाई की तिथि तय कर पंचायत सुनवाई का समुचित अवसर देने के पश्चात उचित आदेश पारित करने की कार्रवाई करें।
- चारागाह भूमि या तालाब-तल पर पाए गए अतिक्रमण के सभी ऐसे मामलों की लिखित रिपोर्ट तहसीलदार को, मामले रजिस्टर करने और अतिचारियों को बेदखली के पंचायत के संकल्प के साथ किए जाने की कार्रवाई की जाए।
- पंचायत, पंचायत भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए सीधे ही या अपने क्षेत्र के उपखंड मजिस्ट्रेट को प्रार्थना करते हुए राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-110 के अनुसार पुलिस की सहायता भी ले सकती है।
- पंचायत यह भी सुनिश्चित करें कि तहसीलदार द्वारा चारागाह भूमि के अतिचारीयो पर अधिरोपित शासस्तीयो की सभी रकमे नियमानुसार पंचायत निधि में पूरी तरह जमा करा दी जाए।
Wednesday, 23 July 2025
चरागाहों पर अब नहीं चलेगा अवैध कब्जे का खेल, पंचायती राज विभाग सख्त
जयपुर (राजस्थान/ कमलेश जैन) चरागाहों पर अब नहीं चलेगा अवैध कब्जे का खेल, पंचायती राज विभाग सख्त...
जयपुर। पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि गांवों की चरागाह और सार्वजनिक भूमि ग्रामीणों की धरोहर हैं। इसे निजी स्वार्थ के लिए कब्जाना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम कर रही है।
शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर राजस्थान सरकार ने ग्राम पंचायतों की सार्वजनिक भूमि विशेषकर चरागाहों और तालाबों पर हो रहे अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इस दिशा में शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए ग्राम पंचायत स्तर पर चरागाह समितियों को फिर से सक्रिय करने और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
राज्य के पंचायती राज विभाग ने इस आदेश को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश की सभी जिला परिषदों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। ताकि गांवों की सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा सके और उनके संरक्षण व विकास के लिए प्रभावी तंत्र विकसित हो।
गांव-गांव में बनेगी चरागाह समिति, वार्ड पंच होंगे अध्यक्ष
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत में पांच सदस्यों की चरागाह समिति का गठन किया जाएगा। इसकी अध्यक्षता वार्ड पंच करेंगे, जबकि अन्य चार सदस्य ग्राम सभा द्वारा चुने जाएंगे। यह समिति चरागाहों की देखरेख, संरक्षण और अतिक्रमण हटाने के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएगी।
जिला स्तर पर भी निगरानी तंत्र होगा मजबूत
अतिक्रमण हटाने और चरागाह विकास कार्यों की निगरानी के लिए पहले से ही जिला प्रमुख की अध्यक्षता में बंजर भूमि एवं चरागाह विकास समिति का गठन किया गया है। इस समिति में विभिन्न विभागों के अधिकारी सदस्य होंगे और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा जिला कलेक्टरों को ब्लॉक और पंचायत स्तर पर समितियों के गठन के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं
पंचायतों को दिए गए ठोस दिशा-निर्देश
ग्राम पंचायतों को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जनवरी और जुलाई में सार्वजनिक भूमि का सर्वेक्षण कराया जाए, जिसमें चरागाह, तालाब और आबादी भूमि पर अतिक्रमण की जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके लिए तीन पंचों की एक समिति बनाई जाएगी और ग्राम विकास अधिकारी एक विशेष रजिस्टर में सारी प्रविष्टियां दर्ज करेंगे। यदि किसी भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है तो सरपंच तत्काल निषेधाज्ञा जारी कर निर्माण कार्य को रोक सकते हैं। इसके साथ ही अतिक्रमणकारियों को बेदखली का नोटिस भेजा जाएगा और तहसीलदार को रिपोर्ट की जाएगी। जरूरत पड़ने पर पंचायत पुलिस सहायता भी ले सकेगी।
ग्राम पंचायतों के लिए जारी किए गए प्रमुख दिशा-निर्देश
- जनवरी और जुलाई में पंचायत की सार्वजनिक भूमि (चरागाह, तालाब, आबादी भूमि) पर अतिक्रमण का सर्वे कराया जाएगा।
- तीन पंचों की समिति बनाएगी सर्वे और ग्राम विकास अधिकारी एक रजिस्टर में विवरण दर्ज करेंगे।
- अतिक्रमणकारियों को बेदखली का नोटिस जारी किया जाएगा।
- अतिक्रमण की जानकारी मिलते ही सरपंच निषेधाज्ञा जारी कर निर्माण रोक सकेंगे।
- चारागाह और तालाब की भूमि पर अतिक्रमण की रिपोर्ट तहसीलदार को भेजी जाएगी।
- पंचायत, अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस की सहायता ले सकती है (राज. पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 110)
- तहसीलदार द्वारा लगाए गए शास्तियां पंचायत निधि में जमा कराना अनिवार्य होगा।
आदेश में शामिल कुछ विशेष प्रावधान
अगर किसी पंचायत में अब तक चरागाह समिति गठित नहीं हुई है, तो उसका गठन तुरंत कराया जाए। ग्राम विकास अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वे अतिक्रमण की जानकारी रजिस्टर में दर्ज कर शपथ पत्र के साथ संलग्न करें। साथ ही खसरा नंबर सहित टॉप 10 अतिक्रमण प्रभावित ग्राम पंचायतों की सूची विभाग को भेजना अनिवार्य किया गया है।
पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गांवों की चरागाह और सार्वजनिक भूमि ग्रामीणों की धरोहर हैं। इसे निजी स्वार्थ के लिए कब्जाना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम कर रही है। किसी भी हालत में चरागाहों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।
मूल ऑनलाइन लेख -https://gexpressnews.com/51588
Tuesday, 22 July 2025
अतिक्रमण करने वालों की अब खेर नहीं,पंचायती राज विभाग ने की तैयारी
अतिक्रमण करने वालों की अब खेर नहीं,पंचायती राज विभाग ने की तैयारी
जयपुर। शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री श्री मदन दिलावर ने चारागाह भूमि पर वर्षों से हो रहे अतिक्रमण हटाने तथा चारागाह की सुरक्षा के लिए चारागाह समिति को पुनः क्रियाशील करने के अधिकारियों को आदेश दिया है। पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के आदेशों के अनुपम में विभाग ने प्रदेश की समस्त जिला परिषदों को आदेश जारी कर निर्देशित किया है कि पंचायत में चरागाहों मैं उपयुक्त किस्म की घास, झाड़ियां और पौधों के विकास के लिए तथा अतिक्रमण को रोकने के लिए सभी कदम उठाए जाएं। इसके लिए पंचायत प्रत्येक गांव की चरागाह भूमि का नियंत्रण पांच व्यक्तियों की समिति को दे। जिसकी अध्यक्षता संबंधित गांव का वार्ड पंच करें और इस समिति के चार सदस्य ग्राम सभा द्वारा निर्वाचित किए जाए। इसी प्रकार चारागाह विकास, चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने, जल एवं भूमि संरक्षण हेतु प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा दिनांक 31.07.017 को जारी आदेश के अनुसार ही जिला स्तर पर विभिन्न विभागों के साथ समन्वय करने एवं चारागाह विकास की योजना की समीक्षा हेतु राजस्थान कार्य विधि नियम 55 के अंतर्गत जिला प्रमुख की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समिति का गठन किया गया है। जिसका प्रशासनिक विभाग ग्रामीण विकास विभाग है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद जिला स्तर पर चारागाह भूमि विकास समिति के नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा पूर्व में ही समस्त जिला कलेक्टर को ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समिति के गठन हेतु निर्देशित किया हुआ है। ब्लॉक पंचायत समिति स्तर पर एवं ग्राम पंचायत स्तर पर बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समिति का गठन जिला कलेक्टर द्वारा किया जाना है। बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड द्वारा अनुमोदित समिति के सदस्यों एवं उत्तरदायित्व का विवरण भी निर्धारित किया जा चुका है। पंचायती राज विभाग के उपायुक्त एवं उप शासन सचिव प्रथम ने सभी जिला परिषदों को निर्देशित किया है कि ग्राम पंचायत की आबादी भूमि एवं चारगाह में हो रहे अतिक्रमण को चिन्हित कर अतिक्रमण हटाए जाने की पालना निरंतर किया जाना सुनिश्चित किया जाए तथा की गई कार्यवाही से विभाग को अवगत कराया जाना भी सुनिश्चित किया जाए।
ग्राम पंचायत के स्वामित्व वाली भूमि से अतिक्रमण हटाने की यह होगी प्रक्रिया
1- पंचायत की सार्वजनिक भूमियों पर अतिचार के मामलों का पता लगाने के लिए प्रतिवर्ष जनवरी और जुलाई माह में आबादी भूमियों तालाब-तल और चरागाहों पर अतिचारीयो का सर्वेक्षण करने के लिए तीन पंचों की एक समिति बनाई जाएगी।
2- ऐसे सभी अतिचार की क्षेत्र के ब्यौरे और अतिचार की प्रकृति के साथ ग्राम विकास अधिकारी द्वारा एक रजिस्टर में प्रविष्ट किया जाएगा।
मूल ऑनलाइन लेख - https://rajasthan.punjabkesari.in/jaipur/news/now-there-is-no-mercy-for-the-encroachers-2185256
Monday, 21 July 2025
चारागाह की पथरीली भूमि को समतल किया, अब हरा-भरा करने में जुटे ग्रामीण
- शाहपुरा में पर्यावरण संरक्षण का बीड़ा उठा लगाए छायादार पौधे
भास्कर न्यूज।ब्यावर
ग्राम पंचायत शाहपुरा में एक अभिनव पहल की जा रही है जिसके अंतर्गत गांव की बंजर और पथरीली चरागाह भूमि को हरे-भरे वन में तब्दील किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है, बल्कि ग्रामीणों के लिए एक स्वच्छ और शुद्ध वातावरण तैयार करना भी है। वर्ष 2024 में शुरू हुई इस परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य चारागाह की बंजर और पहाड़ी भूमि को समतल करना था।
ग्रामीणों ने इसका बीड़ा उठाया और मनरेगा तथा जन सहयोग से पथरीली जमीन को समतल करने का कार्य किया गया। पथरीले इलाके और पत्थरों से भरी जमीन को मनरेगा कर्मियों और जेसीबी की सहायता से समतल किया गया। इस कठिन कार्य के बाद भूमि को बीजारोपण के लिए तैयार किया गया। श्री उपवन में नीम, बरगद, पीपल, अर्जुन, नींबू, शीशम, अशोक, आम, करौंदा, नारंगी, आंवला और इमली जैसे विभिन्न प्रकार के फलदार और छायादार पौधे रोपे गए हैं। विभिन्न प्रकार के फूलों के पौधे भी लगाए गए हैं जो इस उपवन की सुंदरता को बढ़ाएंगे।
ग्राम पंचायत के प्रयासों से इस उपवन की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। मवेशियों से पौधों को बचाने के लिए 8 बीघा भूमि के चारों ओर मजबूत तारबंदी की गई है। उपवन में प्रवेश का एक मुख्य द्वार भी बनाया गया है। वर्तमान में मनरेगा श्रमिकों और अन्य कर्मचारियों को लगाकर इन पौधों की नियमित देखभाल की जा रही है जिसमें पानी की समुचित व्यवस्था भी शामिल है।
ग्राम पंचायत शाहपुरा में इस की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी है। पौधों को पानी देने के लिए जल संरक्षण का कार्य भी किया जा रहा है जिससे वर्षा जल का संरक्षण कर पौधों को हरा भरा रखा जा सके।
जैव विविधता को बढ़ावा देगी यह पहल ग्रामीणों ने इस उपवन की देखरेख और इसे सफल बनाने की जिम्मेदारी स्वयं ली है जो इस परियोजना को दीर्घकालिक सफलता की ओर अग्रसर करेगी। समय के साथ ये पौधे बड़े होकर शाहपुरा गांव के लिए एक शुद्ध और स्वच्छ वातावरण प्रदान करेंगे। यह उपवन न केवल जैव विविधता को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बनेगा कि कैसे बंजर भूमि को एक उपयोगी और सुंदर संसाधन में बदला जा सकता है। यह परियोजना निश्चित रूप से पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/ajmer/bayavar/news/the-rocky-land-of-the-pasture-was-leveled-now-the-villagers-are-busy-making-it-green-135494059.html
Sunday, 20 July 2025
Saturday, 19 July 2025
Chittorgarh
Community Members from Chiksi village of Chittorgarh district submitted letter/Gyapan to Collector, SSP & Tehsildar for removal of encroachment from Pastureland, Pathwari Chouk and Devsthan Bhumi.
Wednesday, 16 July 2025
राजस्थान: सुविचार अभियान फूलिया कलां क्षेत्र की बैठक संपन्न, 19 गांव में चरागाह विकसित करने की बनी योजना
संक्षेप
राजस्थान: सुविचार अभियान (सुरभि विहार चारागाह रक्षण अभियान) के तहत एसडी फाउंडेशन, अपना संस्थान, एफईएस एवं गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के सामूहिक तत्वाधान में फूलिया कलां
विस्तार
राजस्थान: सुविचार अभियान (सुरभि विहार चारागाह रक्षण अभियान) के तहत एसडी फाउंडेशन, अपना संस्थान, एफईएस एवं गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के सामूहिक तत्वाधान में फूलिया कलां क्षेत्र के चारागाह को विकसित करने के लिए बैठक ग्राम पंचायत राज्यास के पंचायत भवन में आयोजित हुई। शाहपुरा क्षेत्र के प्रभारी शिवराज सोनी ने बताया कि बैठक में आठ गांवों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस बैठक में सुविचार अभियान के विभाग सहसंयोजक सूर्य प्रकाश शर्मा ने ग्राम विकास के लिये चारागाह विकास को आधार बताया। उन्होंने कहा कि गांव में चारागाह विकास होगा तो पशुधन समृद्ध होगा। सुविचार अभियान के समन्वयक महेश नवहाल ने कहा कि चारागाह विकास गांव की संपूर्ण इकोलॉजी को ही बदल सकता है। भीलवाड़ा क्षेत्र में हर पंचायत में चरागाह की भूमि अवस्थित है। इस चरागाह को विकसित करना अपने क्षेत्र में जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण को भी बढ़ावा देगा।
चरागाह में जैव विविधता समृद्ध करने के लिए विविध प्रकार के स्थानीय प्रजाति के वृक्ष लगाए जाएंगे। इस पर ट्रेंच और एनीकट, चेक डैम आदि का निर्माण जल संरक्षण को भी बढ़ावा देगा और विकसित होने के पश्चात गांव के आसपास की पारिस्थितिकी तंत्र को ही बदला जा सकता है। एफईएस के सुरेश पाराशर ने कहा कि गांव में निजी जमीन के अलावा शामलाती भूमि का विकास करना गांव की समृद्धि का कारक हो सकता है। बैठक में सुविचार अभियान के जिला संयोजक गुदड़ मल गुर्जर, सहसंयोजक परमेश्वर प्रसाद कुमावत, एफईएस के कुलदीप नागर ने भी विचार रखें। बैठक में देवकिशन जोशी, शिवकुमार सोनी, हेमराज कुमावत, जगदीश प्रजापत, सोनाथ गुर्जर, सालगराम कुमावत, छोटू लाल बेरवा, भंवरलाल कुमावत सहित गांव के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में 19 गांव की सूची बनाई गई जिनमें चारागाह विकास की दिशा में काम करने का लक्ष्य लिया गया। इन गांवों में चारागाह दर्शन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिसे गांव के प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र के चारागाह को देखकर विकास का लक्ष्य ले सकेंगे।
मूल ऑनलाइन लेख -https://ncrsamacharlive.in/latest/rajasthan-suvichar-abhiyan-phuliya-kalan-area-meeting-concluded-plan-made-to-develop-pastures-in-19-villages
Monday, 14 July 2025
गोचर भूमि पर अवैध कब्जे का विरोध:ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर आंदोलन की चेतावनी दी, आवंटन रद्द करने की मांग
गोचर भूमि पर हो रहे अतिक्रमण के खिलाफ मुख्यमंत्री के नाम दिया ज्ञापन
फतेहपुर : कस्बे के उपखंड कार्यालय पर मुख्यमंत्री महोदय के नाम ज्ञापन दिया गया जिसमे फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में जहां-जहां चारागाह भूमि है वहां पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखे हैं। अतः है महोदय आपसे निवेदन है कि आप सर्वे करवाकर पूरी विधानसभा क्षेत्र में जहां-जहां अतिक्रमण कर रखे हैं चारागाह भूमि को खाली करवाया जाए। अगर इसी तरह अतिक्रमण होते रहे तो भविष्य में चारागाह भूमि समाप्त हो जाएगी। अतः है सरकार से निवेदन है की अतिक्रमणियों पर उचित कार्रवाई करी जाए। उच्च न्यायालय ने पहले से आदेश दे रखे हैं। चारागाह भूमि पर जहां भी अतिक्रमण है। उनको हटाया जाए सरकार से निवेदन है कि चारागाह भूमि को संरक्षण प्रदान किया जाए अगर समय रहते हुए कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
इस दौरान मौजूद रहे किसान नेता सुरेंद्र सोहु, शाहरुख खान गोडीया बड़ा, गोवर्धन कुल्हरी, अशोक गोदारा, सतपाल खटकड़, विजयपाल मील, महेश कड़वासरा, कर्मवीर धायल, विकास सैनी, श्याम सिंह गोरास, बाबूलाल बागडोदा, सरवर खा क़ायमसर, सुभाष सोहु, महेंद्र ज्याणी फदनपुरा, सीताराम जेठू, शाहरुख फतेहपुर अनेक लोग मौजूद रहे।
मूल ऑनलाइन लेख-https://janmanasshekhawati.com/news/161607
गोचर भूमि पर अतिक्रमण का विरोध:फतेहपुर में किसानों ने SDM को सौंपा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन, सर्वे करवाने की मांग
फतेहपुर में गोचर भूमि संघर्ष समिति ने सोमवार को उपखंड कार्यालय में एक ज्ञापन सौंपा। समिति के प्रतिनिधि सुरेंद्र साहू ने बताया कि फतेहपुर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चारागाह भूमि पर व्यापक अतिक्रमण की स्थिति बनी हुई है।
समिति ने सरकार से पूरी विधानसभा क्षेत्र में गोचर भूमि का सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अतिक्रमण की इस प्रवृत्ति को नहीं रोका गया तो भविष्य में चारागाह भूमि पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
कार्यक्रम में किसान नेता सुरेंद्र सोहु, शाहरुख खान, गोवर्धन कुल्हरी, अशोक गोदारा, सतपाल खटकड़, विजयपाल मील, महेश कड़वासरा, कर्मवीर धायल, विकास सैनी, श्याम सिंह गोरास, बाबूलाल, सरवर खान, सुभाष सोहु, महेंद्र ज्याणी, सीताराम जेठू और शाहरुख सहित कई लोग उपस्थित थे।
मूल ऑनलाइन लेख-https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/sikar/fatehpur/news/opposition-to-encroachment-on-grazing-land-135446663.html
Saturday, 12 July 2025
राजस्थान में बंजर भूमि होगी हरी-भरी, कृषि मंत्री मीणा ने दिए जिलेवार कार्य योजना बनाने के निर्देश
बंजर ज़मीन पर होंगे तेलीय पौधों के रोपण
डॉ. मीणा ने निर्देश दिया कि राज्य की बंजर भूमि को हरित बनाने के लिए जिलेवार कार्य योजना तैयार की जाए। उन्होंने रतनजोत, करंज जैसे अखाद्य तेलीय पौधों का अधिक से अधिक पौधारोपण करवाने की बात कही ताकि ग्रामीण क्षेत्र में हरियाली बढ़े और लोगों की आय में भी इजाफा हो। उन्होंने कहा कि इस दिशा में दीर्घकालिक योजना तैयार कर पूरे राज्य में कार्यवाही शुरू की जाए।
बायोडीज़ल मिलावट पर सख्ती के संकेत
ग्रामीण विकास मंत्री ने बायोफ्यूल प्राधिकरण द्वारा जारी राजस्थान जैव ईंधन नियम–2019 में संशोधन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मिलावटी बायोडीजल (B–100) के विनिर्माताओं और खुदरा विक्रेताओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान शामिल किया जाए और इसे सक्षम स्तर से प्रभावी रूप दिया जाए।
मूल ऑनलाइन लेख- https://www.krishakjagat.org/news/barren-land-in-rajasthan-will-become-green-agriculture-minister-meena-gave-instructions-to-prepare-district-wise-action-plan/
दो जिलों के चारागाहों में वन विभाग उगाएगा घास:बबूल की झाड़ियां हटाकर 2.10 करोड़ से वन विभाग 4375 बीघा जमीन पर विकसित कर रहा है चारागाह
वन विभाग बाड़मेर व बालोतरा जिले में पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाने वाली बबूल व कीकर की झाड़ियों को हटाते हुए 4375 बीघा जमीन पर 2 करोड़ 10 लाख रुपए की लागत से चारागाह विकसित कर रहा है। जिले में ऐसा पहली बार हो रहा है जब शुष्क वन अनुसंधान संस्थान आफरी जोधपुर की रिपोर्ट के आधार पर बबूल हटाने के साथ घास के मैदान विकसित किए जा रहे हैं।
विभाग की ओर से पशुपालकों को ग्राम समितियों की निर्धारित कीमत पर एक साल बाद घास उपलब्ध करवाई जाएगी।बहुतायत से उगने वाले विलायती बबूल व कीकर को हटाते हुए वन विभाग कुमट, रोहिड़ा, बेर, खेजड़ी, गूंदा, गूंदी, जाल सहित चौड़ी पत्ती व कांटेदार पौधे लगा रहा है, जो यहां के पारिस्थितिकी तंत्र के अनुकूल हैं।आफरी के वैज्ञानिकों का कहना है कि विलायती बबूल व कीकर जिन स्थानों पर पनपते हैं, वहां अन्य वनस्पति नहीं पनपती।
ऐसे में हमारे परंपरागत घास के मैदान नष्ट हो रहे हैं। विभाग की ओर से बारिश के शुरू होने के साथ सेवण, धामण और करड़ घास के चारागाह विकसित किए जा रहे हैं।अब जिले में पशुओं के लिए घास की कमी नहीं होगी। विभाग का दावा है कि अब पशुपालकों को चारे के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।बाड़मेर व बालोतरा जिले की चौहटन रेंज, शिव, बायतु, बालोतरा व सिवाना रेंज में करीब एक साल बाद पशुपालकों को घास उपलब्ध होगी।
मूल ऑनलाइन लेख- https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/barmer/news/the-forest-department-is-developing-pastures-on-4375-bighas-of-land-by-removing-acacia-bushes-at-a-cost-of-rs-210-crore-135419991.html
देवमाली, केलू गांव में चारागाह भूमि पर अतिक्रमण, कलेक्टर से की शिकायत
ब्यावर। निकटवर्ती ग्राम देवमाली और केलू के ग्रामीणों ने अपनी चारागाह भूमि पर असामाजिक तत्वों द्वारा किए गए अतिक्रमण को लेकर जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव की चारागाह भूमि पर अवैध रूप से पत्थर और कांटे डालकर बाड़ बना ली गई है जिससे पशुपालकों को अपने जानवरों को चराने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि असामाजिक तत्व खुलेआम जमीन पर क कब्जा कर रहे हैं और किसी भी जानवर को चरने नहीं दे रहे हैं। जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो अतिक्रमी मारपीट पर उतारू हो गए।
इस स्थिति से पशुपालकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पशुधन के लिए चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में पहले भी कई बार संपर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है और मसूदा उपखंड अधिकारी को भी ज्ञापन दिया है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से जल्द से जल्द इस मामले में हस्तक्षेप कर अतिक्रमण हटाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। ज्ञापन सौंपने वालों में उप सरपंच बालूराम चौधरी, सांवरलाल चौधरी, चंद्राराम, घासीराम, मंगलाराम और भानु सिंह सहित अन्य ग्रामीण शामिल थे।
मूल ऑनलाइन लेख- https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/ajmer/bayavar/news/encroachment-on-pasture-land-in-devmali-kelu-village-complaint-made-to-the-collector-135426015.html
Friday, 11 July 2025
थामखेड़ा में चरागाह भूमि पर अतिक्रमण का विरोध:तहसील कार्यालय के बाहर पांचवें दिन भी ग्रामीणों का धरना जारी, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
अंता में ग्राम विकास समिति थामखेड़ा के नेतृत्व में चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। तहसील कार्यालय के बाहर ग्रामीणों का धरना पांचवें दिन भी चल रहा है।
थामखेड़ा गांव में लंबे समय से चरागाह भूमि पर अवैध कब्जे की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की है। लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी कारण ग्रामीणों को धरना प्रदर्शन का रास्ता चुनना पड़ा।
धरने में रामचंद्र मीणा, राधेश्याम मीणा, राजेंद्र मीणा, पन्नालाल सुमन, कालूलाल सुमन, भेरूलाल मेंबर, अरविंद सुमन, हरिओम सुमन शामिल रहे। आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष ओम गोचर भी धरनास्थल पर मौजूद रहे।
मूल ऑनलाइन लेख- https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/baran/anta/news/opposition-to-encroachment-on-pasture-land-in-thamkheda-135423794.html
चारागाह भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई:झालावाड़ के लूणाखेड़ी में 100 बीघा जमीन कराई खाली, ग्रामीणों ने जताया आभार
झालावाड़ जिले में चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई की गई। गंगधार उपखंड के लूणाखेड़ी गांव में एसडीएम छत्रपाल सिंह चौधरी और तहसीलदार जतिन दिनकर की टीम ने 100 बीघा जमीन को खाली कराया।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों बीघा चारागाह भूमि प्रभावशाली लोगों के कब्जे में है। इस कारण किसान और ग्रामीण लगातार प्रशासन को ज्ञापन सौंप रहे हैं। चारागाह भूमि पर अतिक्रमण से गोवंश सड़कों पर आ गए हैं। इससे कई जगह दुर्घटनाएं भी हो रही हैं।
राजस्व विभाग की सक्रियता से हजारों बीघा चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा सकता है। इससे क्षेत्र के पशुओं को चारे के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। आज की कार्रवाई के बाद ग्रामीणों ने एसडीएम का आभार व्यक्त किया।
मूल ऑनलाइन लेख- https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/news/action-against-encroachment-on-pasture-land-135423524.html
Thursday, 10 July 2025
चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग:दबंगों पर लगाया कब्जा करने का आरोप, उपखंड अधिकारी से मिले ग्रामीण
झालावाड़ के गंगाधर उपखंड क्षेत्र के रणायरा गांव में चारागाह भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में उपखंड अधिकारी और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा है।
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दबंग लोगों ने गांव की चारागाह भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। इससे पशुओं के चरने की जगह नहीं बची है। ग्रामीणों ने चारागाह भूमि की पैमाइश की मांग की है। साथ ही ग्राम पंचायत खाता भूमि, नई आबादी ग्राम रणायरा की 5 बीघा भूमि और श्मशान घाट से भी अतिक्रमण हटाने की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान पुर सिंह, राम सिंह, गोपाल सिंह, मांगू सिंह, श्याम सिंह, गोपाल, हीरालाल, बद्री सिंह, जगदीश शर्मा, प्रह्लाद सिंह और भंवर सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है।
मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/news/demand-to-remove-encroachment-from-pasture-land-135415472.html
Wednesday, 9 July 2025
हरियालो राजस्थान और अरावली विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में किरोड़ी लाल मीणा ने दिए अहम निर्देश
उन्होंने राज्य में बंजर भूमि को हरा-भरा बनाने व ग्रामीण जनसमुदाय की आय बढ़ाने हेतु बंजर भूमि पर अखाद्य तेलीय पौधे जैसे रतनजोत, करज आदि का अधिक से अधिक पौधारोपण कराने के संबंध में जिलेवार कार्य योजना तैयार करवाकर दीर्घकालीन योजना सम्पूर्ण राज्य के लिये बनाते हुये कार्यवाही करने के निर्देश प्रदान किये है। उन्होंने बायोफ्यूल प्राधिकरण और बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड की शीघ्र बैठक आयोजित कर भविष्य की कार्ययोजना निर्धारित करने पर जोर दिया।
राजस्थान में वृक्षारोपण महाभियान के तहत ‘‘एक पेड़ माँ के नाम’’ की तर्ज पर हरियालो राजस्थान अभियान की शुरूआत गत वर्ष 7 जुलाई से की गई थी, जिसके तहत 7 करोड़ पौधारोपण कर राजस्थान पूरे देश में प्रथम स्थान पर रहा। इस कार्यक्रम का ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान द्वारा विकसित ‘‘हरियालो राजस्थान ऐप ’’के माध्यम से जियो टैगिंग भी किया जा रहा है। इस ऐप में रीयल टाईम के आधार पर पौधारोपण की ऑनलाईन प्रगति दर्ज करने का प्रावधान है।
वर्ष 2025-26 में सम्पूर्ण राज्य में 10 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित है, जिसमें से ग्रामीण विकास विभाग, पंचायतीराज विभाग तथा जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग को संयुक्त रूप से 2 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य आवंटित किया गया है। जिसमें अब तक 1 करोड 9 लाख पौधे 50 से ज्यादा विभागों द्वारा लगाये गए है। इसमें महात्मा गांधी नरेगा, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग सबसे अधिक लगभग 70 लाख पौधारोपण कर सबसे आगे है।
हरियालो राजस्थान के अन्तर्गत सम्पूर्ण राज्य में किये जा रहे पौधारोपण के जिलेवार, विभागवार, प्रजातिवार मॉनिटरिंग हरियालो राजस्थान ऐप के माध्यम से की जा रही है। महात्मा गांधी नरेगा योजना के अन्तर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्थापित की जा रही 12 हजार से अधिक पंचायत पौधशालाओं की जियो टैगिंग व मॉनिटरिंग भी की जा रही है। किरोडीलाल ने वर्तमान में अरावली संस्थान द्वारा किए जा रहे क्षमतावर्धन, प्रशिक्षण एवं अध्ययन कार्यों की सराहना की तथा निर्देशित किया कि अरावली द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी अन्य विभागों को भी अवगत कराई जाने की आवश्यकता है जिससे अन्य विभाग भी उक्त कार्यों हेतु अरावली की सेवायें ले सकें। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव ग्रामीण विकास विभाग श्रेया गुहा, शासन सचिव ग्रामीण विकास पुष्पा सत्यानी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी बायो्फ्यूल प्राधिकरण जुगल किशोर मीणा तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
मूल ऑनलाइन लेख - https://www.mahanagartimes.com/post/review-meeting-of-kirori-lal-meena
रमायमहू में चार सौ बीघा चारागाह भूमि पर लोगों ने कर रखा है अतिक्रमण
- चारागाह भूमि पर कब्जा, ग्रामीणों का प्रदर्शन
भास्कर न्यूज | पिड़ावा
रमाय दलपत ग्राम पंचायत के रमायमहू गांव में चार सौ बीघा चारागाह भूमि पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। इससे नाराज ग्रामीणों ने उपखंड कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया कि इस भूमि पर गांव के पशु चरते हैं। अब कुछ लोगों ने इस पर कब्जा कर लिया है। तारबंदी कर दी है। पशु चराने ले जाने पर अतिक्रमी लाठियों से उन्हें भगा देते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि 20 से 25 साल पहले इस भूमि से अतिक्रमण हटाया था। उसके बाद से अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब फिर से अतिक्रमण बढ़ गया है। पशुओं के लिए चरने की जगह नहीं बची है। इससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने मांग की कि चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जाए। ज्ञापन देने वालों में मेहरबान सिंह, मानसिंह, रणजीत सिंह, गुमान सिंह, गोपाल सिंह, बालू सिंह, भेरूसिंह, नारायण सिंह, ईश्वर सिंह और श्याम सिंह शामिल रहे।
मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/pirawa/news/people-have-encroached-upon-four-hundred-bighas-of-pasture-land-in-ramayamahu-135403076.html
Tuesday, 8 July 2025
लूनी की पुकार: प्रदूषण की पीड़ा से कराह रही, यह मात्र एक नदी नहीं, समूचे रेगिस्तान की आत्मा का संकट है: पश्चिमी राजस्थान की सांस्कृतिक धड़कन और जीवनधारा लूणी नदी आज स्वयं जीवन के लिए तरस रही है।
योगेंद्र सेन, बाड़मेर।
पश्चिमी राजस्थान की सांस्कृतिक धड़कन और जीवनधारा लूणी नदी आज स्वयं जीवन के लिए तरस रही है। जो कभी गांवों को सींचती थी, चारागाहों को जीवन देती थी, वही नदी अब प्रदूषण की पीड़ा से कराह रही है। यह मात्र एक नदी का नहीं, बल्कि समूचे रेगिस्तान की आत्मा का संकट है।
पिछले कुछ दशकों में औद्योगिक इकाइयों ने इस धारा को ऐसा विष दिया कि उसकी पारंपरिक शुद्धता ही नष्ट हो गई। जहरीला रासायनिक अपशिष्ट खेतों की हरियाली निगल गया। हजारों किसान रोजगार और ज़मीन दोनों से बेदखल हो गए। लूणी के किनारे की वो उपजाऊ भूमि, जहां कभी अन्न के खेत लहराते थे, आज बंजर और वीरान पड़ी है। गांव खाली हो रहे हैं, लोग पलायन को विवश हैं।यह संकट केवल पर्यावरणीय नहीं है, यह हमारी सांस्कृतिक स्मृति और पारंपरिक जीवनशैली पर भी गहरा आघात है।
ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा बालोतरा के पादरू में की गई घोषणा-जैसे सूखे होंठों को ताजगी मिल गई हो। प्रस्ताव है कि जोधपुर से कच्छ के रण तक एक पाइपलाइन बिछाई जाएगी। जोधपुर, पाली, बालोतरा, जसोल और बिठूजा से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट को ड्रेन सिस्टम के माध्यम से कच्छ की खाड़ी तक ले जाया जाएगा।
यह योजना, केवल एक बुनियादी ढांचा नहीं, बल्कि मरुस्थल के पुनर्जीवन की कथा का प्रारंभ हो सकती है। लूणी में फिर से सांसें लौट सकती हैं। खेतों में हरियाली लौटेगी, गांवों में चहल-पहल बढ़ेगी, पलायन रुकेगा। उद्योगों को नियमन के साथ राहत मिलेगी, जिससे आर्थिक स्थायित्व और निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा।
और सबसे बड़ी बात-लूणी को नया जीवन मिलेगा। यह नदी केवल जल की नहीं, बल्कि लोकजीवन, लोकगाथा, लोकआस्था और पहचान की वाहक है। लेकिन यह सपना तभी साकार होगा जब सरकार, प्रशासन और उद्योग जगत एक लक्ष्य, एक निष्ठा और एक दृष्टि से कार्य करें। योजना की डीपीआर को त्वरित स्वीकृति, जमीन अधिग्रहण में पारदर्शिता और क्रियान्वयन की सघन निगरानी अत्यंत आवश्यक होगी।
यह केवल एक ड्रेनेज प्रोजेक्ट नहीं, रेगिस्तान की उम्मीदों की पाइपलाइन है। यह प्रदूषण से मुक्ति का ही नहीं, भविष्य को सुरक्षित रखने का मार्ग है। सरकार को चाहिए कि इसे केवल बजट की फाइलों तक सीमित न रखे, बल्कि इसे रेगिस्तान की आत्मा को बचाने का जन-अभियान बनाए।
मूल ऑनलाइन लेख - https://www.patrika.com/barmer-news/the-call-of-luni-waning-in-the-pain-of-pollution-it-is-not-just-a-river-it-is-the-crisis-of-the-soul-of-the-entire-desert-19758847
किशनगढ़ के गांवों को मिलेगी खेलों की नई पहचान:मनरेगा के तहत बनेंगे खेल संकुल, चारागाह और बंजर जमीन पर बन सकेगा खेल मैदान
ग्रामीण युवाओं को खेलों से जोड़कर उन्हें फिट और भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में अब किशनगढ़ के गांवों में बड़ी पहल शुरू होने जा रही है। सरकार की ओर से मनरेगा योजना के तहत अब ग्राम पंचायतों में खेल संकुल (स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स) विकसित किए जाएंगे। इसके लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब स्थानीय स्तर पर जमीन की उपलब्धता के आधार पर कार्य प्रारंभ होगा।
पंचायत समिति किशनगढ़ के अधिकारियों के अनुसार गांवों में पड़ी खाली चारागाह, बंजर या गैर उपयोगी जमीन का उपयोग खेल मैदानों के विकास में किया जाएगा। इससे न केवल भूमि का सही उपयोग होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी खेल गतिविधियों में भाग लेने का स्थायी मंच मिलेगा। ग्रामीण युवाओं को खेलों से जोड़ने और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करने के लिए अब मनरेगा योजना का उपयोग केवल श्रम आधारित कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके तहत किशनगढ़ क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में आधुनिक खेल संकुल (स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स) बनाए जाएंगे। सरकार द्वारा जारी नवीन दिशा-निर्देशों के तहत अब प्रत्येक पंचायत में उपलब्ध जमीन के अनुसार खेल सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इससे गांवों में वर्षों से खाली पड़ी चारागाह और बंजर भूमि अब खेल गतिविधियों से गुलजार होगी।
सरकार की मंशा है कि खेल संकुल के माध्यम से गांव के युवाओं को खेलों के प्रति आकर्षित किया जाए ताकि वे फिट रहें, अनुशासित जीवन अपनाएं और भविष्य में खेलों को कॅरियर के रूप में भी देख सकें। पंचायत समिति अधिकारियों के अनुसार यह योजना ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को सामने लाने में भी मददगार साबित होगी।
तय किया गया है कि पंचायत स्तर पर उपलब्ध भूमि के आकार के अनुसार खेल गतिविधियों की योजना बनाई जाएगी। पंचायत क्षेत्र में एक एकड़ से कम भूमि उपलब्ध है, तो वहां ओपन जिम, हाई जंप व लॉन्ग जंप की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। एक से डेढ़ एकड़ जमीन होने पर बास्केटबॉल और टेनिस कोर्ट बन सकेंगे, वहीं डेढ़ से तीन एकड़ जमीन वाले क्षेत्रों में फुटबॉल और हॉकी मैदान विकसित होंगे। पंचायत के पास तीन एकड़ से अधिक भूमि है तो वहां पूर्ण आकार का क्रिकेट मैदान बनाया जाएगा।
बीडीओ रेखा मीणा ने बताया कि खेल संकुलों के सुचारू संचालन और देखरेख के लिए सरकार ने त्रिस्तरीय समिति प्रणाली की भी घोषणा की है। जिला स्तर पर जिलाधीश, जिला खेल अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कार्य होगा, जबकि ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दी गई है, जिससे खेल मैदानों का रखरखाव और नियमित गतिविधियों का आयोजन सुनिश्चित किया जा सके।
अब तक मनरेगा योजना मुख्य रूप से जल संरक्षण, सड़क निर्माण और मजदूरी आधारित कार्यों के लिए जानी जाती थी, लेकिन खेलों को इससे जोड़ना सरकार के नवाचार की दिशा में एक सशक्त प्रयास माना जा रहा है।
मूल ऑनलाइन लेख- https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/ajmer/kishangarh/news/kishangarh-villages-will-get-a-new-identity-for-sports-135398812.html
मनरेगा में 65 कार्यों के लिए 491 लाख रु. स्वीकृत, पौधरोपण से छाएगी हरियाली
जोधपुर। मनरेगा व कन्वर्जेंस के तहत वर्ष 2025-26 में जोधपुर-फलोदी की ग्राम पंचायतों के राजकीय विद्यालयों के परिसरों, मुक्तिधाम स्थलों एवं चारागाह भूमि में 65 पौधारोपण के कार्य करवाए जाएंगे। जिसके लिए 491.26 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की है।
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार मिश्रा ने बताया कि पंचायत समिति पीपाड़ की ग्राम पंचायतों में पौधारोपण के 5 कार्यों के लिये 35.65 लाख रुपए, पंचायत समिति ओसियां की ग्राम पंचायतों में पौधारोपण के 04 कार्यों के लिये 33.80 लाख रूपये, पंचायत समिति मण्डोर की सुरपुरा ग्राम पंचायत में पौधारोपण कार्यों के लिये 10.00 लाख रूपये, पंचायत समिति भोपालगढ़ की ग्राम पंचायतों में 08 कार्यों हेतु पौधारोपण, चारागाह एवं मेड़बंदी के लिये 111.19 लाख रूपये, पंचायत समिति बिलाड़ा की ग्राम पंचायतों में 07 पौधारोपण कार्यों के लिये 64.16 लाख रूपये, पंचायत समिति पीपाड़ शहर की ग्राम पंचायतों में 05 पौधारोपण कार्यों के लिये 1.90 लाख रूपये, पंचायत समिति भोपालगढ़ की ग्राम पंचायतों में 02 पौधारोपण कार्यों के लिये 14.24 लाख रूपये, पंचायत समिति लोहावट की भीकमकोर ग्राम पंचायत के नागणेची मंदिर में पौधारोपण के लिये 8.60 लाख रूपये, पंचायत समिति लूणी की ग्राम पंचायतों के 10 कार्यों के लिये 93.90 लाख रुपए की राशि से पौधारोपण कार्य करवाए जायेंगें।
उन्होंने बताया कि इसी क्रम में फलोदी जिले की पंचायत समिति फलोदी की ग्राम पंचायतों में भी 21 कार्यों के लिये 117.82 लाख रुपए की वित्तीय राशि की स्वीकृति प्रदान की गई है, इस राशि से महात्मा गांधी नरेगा योजना एवं कन्वर्जेंस के तहत सभी क्षेत्रों में पौधारोपण सम्बन्धी विकास कार्य करवाए जाएंगे।
मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jodhpur/news/rs-491-lakh-sanctioned-for-65-works-in-mnrega-greenery-will-spread-due-to-plantation-135396733.html
Monday, 7 July 2025
चारागाह भूमि पर अतिक्रमण का विरोध:ग्रामीणों ने गाय के साथ निकाली रैली, तहसील कार्यालय पर दिया धरना
तामखेड़ा में चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया। ग्राम विकास सेवा समिति के नेतृत्व में ग्रामवासी सरदार वल्लभ भाई पटेल स्टेडियम में एकत्र हुए।
प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लेकर और गाय के साथ मुख्य बाजार से होते हुए तहसील कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने शासन-प्रशासन की कार्यवाही पर सवाल उठाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक चारागाह भूमि अतिक्रमण मुक्त नहीं होगी, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।
प्रदर्शन में भेरूलाल सुमन, कालूलाल सुमन, मदनलाल राणा, छीतरलाल सुमन समेत कई ग्रामवासी शामिल हुए। सभी ने चारागाह भूमि को मुक्त कराने की मांग की। आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष ओम गोचर ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की।
मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/baran/anta/news/opposition-to-encroachment-on-pasture-land-135393530.html
Friday, 4 July 2025
सलोतिया में 176 बीघा चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाया
मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/sunel/news/encroachment-removed-from-176-bigha-grazing-land-in-salotia-135367007.html
झुंझुनूं के आबूसर में चारागाह की जमीन से हटाया अतिक्रमण:लोकायुक्त के आदेश पर प्रशासन सक्रिय; JCB से गिराई दीवार
Thursday, 3 July 2025
रीझवास में 108 बीघा चारागाह भूमि को किया अतिक्रमण मुक्त कलेक्टर के निर्देश पर तहसील प्रशासन ने की कार्रवाई
सूरौठ।स्मार्ट हलचल|गांव रीझवास में गुरुवार को तहसील प्रशासन ने करीब 108 बीघा चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने की कार्रवाई की। करौली जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा के निर्देश पर गांव रीझवास पहुंची राजस्व विभाग की टीम ने चारागाह भूमि का सीमा ज्ञान किया तथा जेसीबी से खुदाई करवा कर भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया। इस दौरान काफी संख्या में पुलिस जाब्ता तैनात रहा।
पिछले दिनों गोचर मुक्त संघर्ष समिति रीझवास के सदस्यों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर गांव की चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाने की मांग की थी। कलेक्टर के निर्देश पर गुरुवार को सूरौठ तहसीलदार संजीव धाकड़, शेरपुर नायब तहसीलदार हरिशंकर शर्मा, गिरदावर लक्ष्मी नारायण शर्मा, रूमाली बाई मीणा, रामकेश भागौड, पटवारी श्याम सिंह सोलंकी, दिनेश बारोलिया, पंकज जाटव, अमित डागुर, रघुनाथ जाटव, विजयपाल सहित कई राजस्व कर्मी जेसीबी लेकर गांव रीझवास पहुंचे तथा गांव की करीब 108 बीघा चारागाह भूमि का सीमा ज्ञान किया। तहसील प्रशासन ने जेसीबी से चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया। सीमा ज्ञान एवं अतिक्रमण मुक्त करने की कार्रवाई के दौरान काफी भीड़ मौजूद रही। कार्रवाई के अवसर पर 50 से अधिक पुलिसकर्मी उपस्थित रहे। तहसीलदार संजीव धाकड़ ने बताया कि गांव रीझवास में चारागाह भूमि पर अतिक्रमण करने वाले लोगों के खिलाफ पूर्व में भी धारा 91 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की गई थी।अब कलेक्टर के निर्देश पर चारागाह भूमि का सीमा ज्ञान करवा कर अतिक्रमण मुक्त करने की कार्रवाई की गई है। अतिक्रमण मुक्त चारागाह भूमि को विकास एवं संरक्षण के लिए ग्राम पंचायत बाईजट्ट को सुपुर्द किया जाएगा।
मूल ऑनलाइन लेख - https://smarthalchal.com/grazing-land-freed-from-encroachment/
Wednesday, 2 July 2025
मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के कार्यों का किया निरीक्षणबंजार चारागाह भूमि हुई विकसित
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वजपुरा के ग्रामवासियों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देकर अतिक्रमण का विरोध जताया। ज्ञापन में बताया कि वजपुरा के अन्तर्गत राजस्व गांव राठौड़ों क...
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एक माह में कानूनी प्रक्रिया पूरी कर अतिक्रमण हटाने का आश्वासन देने पर धरना हटाया देई गोशाला के लिए आवंटित व चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने क...
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शहर में भूमाफिया चारागाह भूमि पर कब्जा करने के लिए वहां उगे बंबूल उखाड़ने में लगे हुए हैं। चारागाह भूमि पर अतिक्रमण रोकने के लिए विहिप कार्य...

