Monday, 21 July 2025

चारागाह की पथरीली भूमि को समतल किया, अब हरा-भरा करने में जुटे ग्रामीण


  • शाहपुरा में पर्यावरण संरक्षण का बीड़ा उठा लगाए छायादार पौधे

भास्कर न्यूज।ब्यावर

ग्राम पंचायत शाहपुरा में एक अभिनव पहल की जा रही है जिसके अंतर्गत गांव की बंजर और पथरीली चरागाह भूमि को हरे-भरे वन में तब्दील किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है, बल्कि ग्रामीणों के लिए एक स्वच्छ और शुद्ध वातावरण तैयार करना भी है। वर्ष 2024 में शुरू हुई इस परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य चारागाह की बंजर और पहाड़ी भूमि को समतल करना था।

ग्रामीणों ने इसका बीड़ा उठाया और मनरेगा तथा जन सहयोग से पथरीली जमीन को समतल करने का कार्य किया गया। पथरीले इलाके और पत्थरों से भरी जमीन को मनरेगा कर्मियों और जेसीबी की सहायता से समतल किया गया। इस कठिन कार्य के बाद भूमि को बीजारोपण के लिए तैयार किया गया। श्री उपवन में नीम, बरगद, पीपल, अर्जुन, नींबू, शीशम, अशोक, आम, करौंदा, नारंगी, आंवला और इमली जैसे विभिन्न प्रकार के फलदार और छायादार पौधे रोपे गए हैं। विभिन्न प्रकार के फूलों के पौधे भी लगाए गए हैं जो इस उपवन की सुंदरता को बढ़ाएंगे।

ग्राम पंचायत के प्रयासों से इस उपवन की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। मवेशियों से पौधों को बचाने के लिए 8 बीघा भूमि के चारों ओर मजबूत तारबंदी की गई है। उपवन में प्रवेश का एक मुख्य द्वार भी बनाया गया है। वर्तमान में मनरेगा श्रमिकों और अन्य कर्मचारियों को लगाकर इन पौधों की नियमित देखभाल की जा रही है जिसमें पानी की समुचित व्यवस्था भी शामिल है।

ग्राम पंचायत शाहपुरा में इस की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी है। पौधों को पानी देने के लिए जल संरक्षण का कार्य भी किया जा रहा है जिससे वर्षा जल का संरक्षण कर पौधों को हरा भरा रखा जा सके।

जैव विविधता को बढ़ावा देगी यह पहल ग्रामीणों ने इस उपवन की देखरेख और इसे सफल बनाने की जिम्मेदारी स्वयं ली है जो इस परियोजना को दीर्घकालिक सफलता की ओर अग्रसर करेगी। समय के साथ ये पौधे बड़े होकर शाहपुरा गांव के लिए एक शुद्ध और स्वच्छ वातावरण प्रदान करेंगे। यह उपवन न केवल जैव विविधता को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बनेगा कि कैसे बंजर भूमि को एक उपयोगी और सुंदर संसाधन में बदला जा सकता है। यह परियोजना निश्चित रूप से पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/ajmer/bayavar/news/the-rocky-land-of-the-pasture-was-leveled-now-the-villagers-are-busy-making-it-green-135494059.html

Saturday, 19 July 2025

Chittorgarh

 

Community Members from Chiksi village of Chittorgarh district submitted letter/Gyapan to Collector, SSP & Tehsildar for removal of encroachment from Pastureland, Pathwari Chouk and Devsthan Bhumi.

Wednesday, 16 July 2025

राजस्थान: सुविचार अभियान फूलिया कलां क्षेत्र की बैठक संपन्न, 19 गांव में चरागाह विकसित करने की बनी योजना

 

संक्षेप

राजस्थान: सुविचार अभियान (सुरभि  विहार चारागाह रक्षण अभियान) के तहत एसडी फाउंडेशन, अपना संस्थान, एफईएस एवं गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के सामूहिक तत्वाधान में फूलिया कलां

विस्तार

राजस्थान: सुविचार अभियान (सुरभि  विहार चारागाह रक्षण अभियान) के तहत एसडी फाउंडेशन, अपना संस्थान, एफईएस एवं गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के सामूहिक तत्वाधान में फूलिया कलां क्षेत्र के चारागाह को विकसित करने के लिए बैठक ग्राम पंचायत राज्यास के पंचायत भवन में आयोजित हुई। शाहपुरा क्षेत्र के  प्रभारी शिवराज सोनी ने बताया कि बैठक में आठ गांवों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस बैठक में सुविचार अभियान के विभाग सहसंयोजक सूर्य प्रकाश शर्मा ने ग्राम विकास के लिये चारागाह विकास को आधार बताया। उन्होंने कहा कि गांव में चारागाह विकास होगा तो पशुधन समृद्ध होगा। सुविचार अभियान के समन्वयक  महेश नवहाल ने कहा कि चारागाह विकास गांव की संपूर्ण इकोलॉजी को ही बदल सकता है। भीलवाड़ा क्षेत्र में हर पंचायत में चरागाह की भूमि अवस्थित है। इस चरागाह को विकसित करना अपने क्षेत्र में जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण को भी बढ़ावा देगा। 

चरागाह में जैव विविधता समृद्ध करने के लिए विविध प्रकार के स्थानीय प्रजाति के वृक्ष लगाए जाएंगे। इस पर ट्रेंच और एनीकट, चेक डैम आदि का निर्माण जल संरक्षण को भी बढ़ावा देगा और विकसित होने के पश्चात गांव के आसपास की पारिस्थितिकी तंत्र को ही बदला जा सकता है। एफईएस के  सुरेश पाराशर ने कहा कि गांव में निजी जमीन के अलावा शामलाती भूमि का विकास करना गांव की समृद्धि का कारक हो सकता है। बैठक में सुविचार अभियान के जिला संयोजक गुदड़ मल गुर्जर, सहसंयोजक परमेश्वर प्रसाद कुमावत, एफईएस के कुलदीप नागर ने भी विचार रखें। बैठक में देवकिशन जोशी, शिवकुमार सोनी, हेमराज कुमावत, जगदीश प्रजापत, सोनाथ गुर्जर, सालगराम कुमावत, छोटू लाल बेरवा, भंवरलाल कुमावत सहित गांव के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में 19 गांव की सूची बनाई गई जिनमें चारागाह विकास की दिशा में काम करने का लक्ष्य लिया गया। इन गांवों में चारागाह दर्शन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिसे गांव के प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र के चारागाह को देखकर विकास का लक्ष्य ले सकेंगे।

मूल ऑनलाइन लेख -https://ncrsamacharlive.in/latest/rajasthan-suvichar-abhiyan-phuliya-kalan-area-meeting-concluded-plan-made-to-develop-pastures-in-19-villages

Monday, 14 July 2025

गोचर भूमि पर अवैध कब्जे का विरोध:ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर आंदोलन की चेतावनी दी, आवंटन रद्द करने की मांग

सीकर जिले के त्रिलोकपुरा गांव में गोचर (चारागाह) भूमि पर अवैध आवंटन और कब्जे को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने सोमवार को चारागाह बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और विरोध-प्रदर्शन किया। चारागाह भूमि पर किए गए अवैध आवंटन को रद्द करने की मांग की गई।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस भूमि पर निजी शिक्षण संस्थानों के लिए अवैधानिक रूप से आवंटन किया गया, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है। त्रिलोकपुरा गांव में खसरा नंबर 187 और खसरा नंबर 231 की चारागाह भूमि में से 4 हेक्टेयर और 6 हेक्टेयर का हिस्सा मामराज अग्रवाल फाउंडेशन, कोलकाता और अक्षपूर्णा मेडिकल प्रशिक्षण संस्थान, सीकर के नाम 30 वर्षीय लीज पर आवंटित किया गया। इस आवंटन के तहत सीनियर सेकेंडरी स्कूल, व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र, आईटीआई, नर्सिंग कॉलेज और डेंटल कॉलेज जैसे संस्थानों की स्थापना का दावा किया गया है।
कलेक्टर को ज्ञापन देने आए ग्रामीण।
ग्रामीणों का कहना है- यह आवंटन राजस्थान टेनेन्सी एक्ट का उल्लंघन है, जो चारागाह भूमि पर शिक्षण संस्थानों के लिए आवंटन को प्रतिबंधित करता है। साल 2019 में राजस्थान हाईकोर्ट ने इस अवैध आवंटन पर स्थगन आदेश जारी किया था। इसके बावजूद, 12 जुलाई 2025 को आवंटित भूमि पर जबरन पत्थर रोपने की कार्यवाही शुरू की गई जिसे ग्रामीणों में आक्रोश है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने अवैध कार्य करने वालों का साथ दिया। त्रिलोकपुरा में चारागाह भूमि के अभाव में पशुधन के लिए चारा और पानी की भारी समस्या उत्पन्न हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कोई दूसरी गोचर भूमि उपलब्ध नहीं है, जिससे पशुपालकों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। चारागाह बचाओ संघर्ष समिति ने इस मुद्दे को लेकर ग्राम पंचायत सुजावास के सहयोग से आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

मूल ऑनलाइन लेख-https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/sikar/news/protest-against-illegal-occupation-of-grazing-land-in-sikar-135445904.html



गोचर भूमि पर हो रहे अतिक्रमण के खिलाफ मुख्यमंत्री के नाम दिया ज्ञापन


फतेहपुर : कस्बे के उपखंड कार्यालय पर मुख्यमंत्री महोदय के नाम ज्ञापन दिया गया जिसमे फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में जहां-जहां चारागाह भूमि है वहां पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखे हैं। अतः है महोदय आपसे निवेदन है कि आप सर्वे करवाकर पूरी विधानसभा क्षेत्र में जहां-जहां अतिक्रमण कर रखे हैं चारागाह भूमि को खाली करवाया जाए। अगर इसी तरह अतिक्रमण होते रहे तो भविष्य में चारागाह भूमि समाप्त हो जाएगी। अतः है सरकार से निवेदन है की अतिक्रमणियों पर उचित कार्रवाई करी जाए। उच्च न्यायालय ने पहले से आदेश दे रखे हैं। चारागाह भूमि पर जहां भी अतिक्रमण है। उनको हटाया जाए सरकार से निवेदन है कि चारागाह भूमि को संरक्षण प्रदान किया जाए अगर समय रहते हुए कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

इस दौरान मौजूद रहे किसान नेता सुरेंद्र सोहु, शाहरुख खान गोडीया बड़ा, गोवर्धन कुल्हरी, अशोक गोदारा, सतपाल खटकड़, विजयपाल मील, महेश कड़वासरा, कर्मवीर धायल, विकास सैनी, श्याम सिंह गोरास, बाबूलाल बागडोदा, सरवर खा क़ायमसर, सुभाष सोहु, महेंद्र ज्याणी फदनपुरा, सीताराम जेठू, शाहरुख फतेहपुर अनेक लोग मौजूद रहे।

मूल ऑनलाइन लेख-https://janmanasshekhawati.com/news/161607

गोचर भूमि पर अतिक्रमण का विरोध:फतेहपुर में किसानों ने SDM को सौंपा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन, सर्वे करवाने की मांग

 

फतेहपुर में गोचर भूमि संघर्ष समिति ने सोमवार को उपखंड कार्यालय में एक ज्ञापन सौंपा। समिति के प्रतिनिधि सुरेंद्र साहू ने बताया कि फतेहपुर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चारागाह भूमि पर व्यापक अतिक्रमण की स्थिति बनी हुई है।

समिति ने सरकार से पूरी विधानसभा क्षेत्र में गोचर भूमि का सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अतिक्रमण की इस प्रवृत्ति को नहीं रोका गया तो भविष्य में चारागाह भूमि पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

कार्यक्रम में किसान नेता सुरेंद्र सोहु, शाहरुख खान, गोवर्धन कुल्हरी, अशोक गोदारा, सतपाल खटकड़, विजयपाल मील, महेश कड़वासरा, कर्मवीर धायल, विकास सैनी, श्याम सिंह गोरास, बाबूलाल, सरवर खान, सुभाष सोहु, महेंद्र ज्याणी, सीताराम जेठू और शाहरुख सहित कई लोग उपस्थित थे।

मूल ऑनलाइन लेख-https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/sikar/fatehpur/news/opposition-to-encroachment-on-grazing-land-135446663.html

Saturday, 12 July 2025

राजस्थान में बंजर भूमि होगी हरी-भरी, कृषि मंत्री मीणा ने दिए जिलेवार कार्य योजना बनाने के निर्देश


12 जुलाई 2025, भोपाल: राजस्थान में बंजर भूमि होगी हरी-भरी, कृषि मंत्री मीणा ने दिए जिलेवार कार्य योजना बनाने के निर्देश – राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की अध्यक्षता में बुधवार को जयपुर स्थित शासन सचिवालय में ‘हरियालो राजस्थान’, बायोफ्यूल प्राधिकरण, बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड और अरावली संस्थान द्वारा संचालित योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मंत्री ने संबंधित विभागों को योजनाओं को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

बंजर ज़मीन पर होंगे तेलीय पौधों के रोपण

डॉ. मीणा ने निर्देश दिया कि राज्य की बंजर भूमि को हरित बनाने के लिए जिलेवार कार्य योजना तैयार की जाए। उन्होंने रतनजोत, करंज जैसे अखाद्य तेलीय पौधों का अधिक से अधिक पौधारोपण करवाने की बात कही ताकि ग्रामीण क्षेत्र में हरियाली बढ़े और लोगों की आय में भी इजाफा हो। उन्होंने कहा कि इस दिशा में दीर्घकालिक योजना तैयार कर पूरे राज्य में कार्यवाही शुरू की जाए।

बायोडीज़ल मिलावट पर सख्ती के संकेत

ग्रामीण विकास मंत्री ने बायोफ्यूल प्राधिकरण द्वारा जारी राजस्थान जैव ईंधन नियम–2019 में संशोधन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मिलावटी बायोडीजल (B–100) के विनिर्माताओं और खुदरा विक्रेताओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान शामिल किया जाए और इसे सक्षम स्तर से प्रभावी रूप दिया जाए।

मूल ऑनलाइन लेख- https://www.krishakjagat.org/news/barren-land-in-rajasthan-will-become-green-agriculture-minister-meena-gave-instructions-to-prepare-district-wise-action-plan/

दो जिलों के चारागाहों में वन विभाग उगाएगा घास:बबूल की झाड़ियां हटाकर 2.10 करोड़ से वन विभाग 4375 बीघा जमीन पर विकसित कर रहा है चारागाह

 वन विभाग बाड़मेर व बालोतरा जिले में पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाने वाली बबूल व कीकर की झाड़ियों को हटाते हुए 4375 बीघा जमीन पर 2 करोड़ 10 लाख रुपए की लागत से चारागाह विकसित कर रहा है। जिले में ऐसा पहली बार हो रहा है जब शुष्क वन अनुसंधान संस्थान आफरी जोधपुर की रिपोर्ट के आधार पर बबूल हटाने के साथ घास के मैदान विकसित किए जा रहे हैं।

विभाग की ओर से पशुपालकों को ग्राम समितियों की निर्धारित कीमत पर एक साल बाद घास उपलब्ध करवाई जाएगी।बहुतायत से उगने वाले विलायती बबूल व कीकर को हटाते हुए वन विभाग कुमट, रोहिड़ा, बेर, खेजड़ी, गूंदा, गूंदी, जाल सहित चौड़ी पत्ती व कांटेदार पौधे लगा रहा है, जो यहां के पारिस्थितिकी तंत्र के अनुकूल हैं।आफरी के वैज्ञानिकों का कहना है कि विलायती बबूल व कीकर जिन स्थानों पर पनपते हैं, वहां अन्य वनस्पति नहीं पनपती।

ऐसे में हमारे परंपरागत घास के मैदान नष्ट हो रहे हैं। विभाग की ओर से बारिश के शुरू होने के साथ सेवण, धामण और करड़ घास के चारागाह विकसित किए जा रहे हैं।अब जिले में पशुओं के लिए घास की कमी नहीं होगी। विभाग का दावा है कि अब पशुपालकों को चारे के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।बाड़मेर व बालोतरा जिले की चौहटन रेंज, शिव, बायतु, बालोतरा व सिवाना रेंज में करीब एक साल बाद पशुपालकों को घास उपलब्ध होगी।

मूल ऑनलाइन लेख- https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/barmer/news/the-forest-department-is-developing-pastures-on-4375-bighas-of-land-by-removing-acacia-bushes-at-a-cost-of-rs-210-crore-135419991.html


देवमाली, केलू गांव में चारागाह भूमि पर अतिक्रमण, कलेक्टर से की शिकायत


ब्यावर। निकटवर्ती ग्राम देवमाली और केलू के ग्रामीणों ने अपनी चारागाह भूमि पर असामाजिक तत्वों द्वारा किए गए अतिक्रमण को लेकर जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव की चारागाह भूमि पर अवैध रूप से पत्थर और कांटे डालकर बाड़ बना ली गई है जिससे पशुपालकों को अपने जानवरों को चराने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि असामाजिक तत्व खुलेआम जमीन पर क कब्जा कर रहे हैं और किसी भी जानवर को चरने नहीं दे रहे हैं। जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो अतिक्रमी मारपीट पर उतारू हो गए।

इस स्थिति से पशुपालकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पशुधन के लिए चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में पहले भी कई बार संपर्क पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है और मसूदा उपखंड अधिकारी को भी ज्ञापन दिया है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से जल्द से जल्द इस मामले में हस्तक्षेप कर अतिक्रमण हटाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। ज्ञापन सौंपने वालों में उप सरपंच बालूराम चौधरी, सांवरलाल चौधरी, चंद्राराम, घासीराम, मंगलाराम और भानु सिंह सहित अन्य ग्रामीण शामिल थे।

मूल ऑनलाइन लेख- https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/ajmer/bayavar/news/encroachment-on-pasture-land-in-devmali-kelu-village-complaint-made-to-the-collector-135426015.html

Friday, 11 July 2025

थामखेड़ा में चरागाह भूमि पर अतिक्रमण का विरोध:तहसील कार्यालय के बाहर पांचवें दिन भी ग्रामीणों का धरना जारी, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

 

अंता में ग्राम विकास समिति थामखेड़ा के नेतृत्व में चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी है। तहसील कार्यालय के बाहर ग्रामीणों का धरना पांचवें दिन भी चल रहा है।

थामखेड़ा गांव में लंबे समय से चरागाह भूमि पर अवैध कब्जे की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की है। लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी कारण ग्रामीणों को धरना प्रदर्शन का रास्ता चुनना पड़ा।

धरने में रामचंद्र मीणा, राधेश्याम मीणा, राजेंद्र मीणा, पन्नालाल सुमन, कालूलाल सुमन, भेरूलाल मेंबर, अरविंद सुमन, हरिओम सुमन शामिल रहे। आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष ओम गोचर भी धरनास्थल पर मौजूद रहे।

मूल ऑनलाइन लेख- https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/baran/anta/news/opposition-to-encroachment-on-pasture-land-in-thamkheda-135423794.html

चारागाह भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई:झालावाड़ के लूणाखेड़ी में 100 बीघा जमीन कराई खाली, ग्रामीणों ने जताया आभार


चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई की गई।

झालावाड़ जिले में चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई की गई। गंगधार उपखंड के लूणाखेड़ी गांव में एसडीएम छत्रपाल सिंह चौधरी और तहसीलदार जतिन दिनकर की टीम ने 100 बीघा जमीन को खाली कराया।

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों बीघा चारागाह भूमि प्रभावशाली लोगों के कब्जे में है। इस कारण किसान और ग्रामीण लगातार प्रशासन को ज्ञापन सौंप रहे हैं। चारागाह भूमि पर अतिक्रमण से गोवंश सड़कों पर आ गए हैं। इससे कई जगह दुर्घटनाएं भी हो रही हैं।

राजस्व विभाग की सक्रियता से हजारों बीघा चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा सकता है। इससे क्षेत्र के पशुओं को चारे के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। आज की कार्रवाई के बाद ग्रामीणों ने एसडीएम का आभार व्यक्त किया।

मूल ऑनलाइन लेख- https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/news/action-against-encroachment-on-pasture-land-135423524.html

Thursday, 10 July 2025

चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग:दबंगों पर लगाया कब्जा करने का आरोप, उपखंड अधिकारी से मिले ग्रामीण

 

ग्रामीणों ने चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग की है।

झालावाड़ के गंगाधर उपखंड क्षेत्र के रणायरा गांव में चारागाह भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में उपखंड अधिकारी और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा है।

ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दबंग लोगों ने गांव की चारागाह भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। इससे पशुओं के चरने की जगह नहीं बची है। ग्रामीणों ने चारागाह भूमि की पैमाइश की मांग की है। साथ ही ग्राम पंचायत खाता भूमि, नई आबादी ग्राम रणायरा की 5 बीघा भूमि और श्मशान घाट से भी अतिक्रमण हटाने की मांग की है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान पुर सिंह, राम सिंह, गोपाल सिंह, मांगू सिंह, श्याम सिंह, गोपाल, हीरालाल, बद्री सिंह, जगदीश शर्मा, प्रह्लाद सिंह और भंवर सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/news/demand-to-remove-encroachment-from-pasture-land-135415472.html

Wednesday, 9 July 2025

हरियालो राजस्थान और अरावली विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में किरोड़ी लाल मीणा ने दिए अहम निर्देश


जयपुर। ग्रामीण विकास मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की अध्यक्षता में शासन सचिवालय, जयपुर में मिशन हरियालो राजस्थान, बायोफ्यूल प्राधिकरण, बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड और अरावली (एसोसिएशन फॉर रूरल एडवांसमेंट थ्रू वालंट्री एक्शन एंड लोकल इन्ववोल्वेमेंट) द्वारा संचालित कार्यों की समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में मंत्री द्वारा इनके सुदृढीकरण के निर्देश दिये गये हैं। ग्रामीण विकास मंत्री ने बायोफ्यूल प्राधिकरण विभाग द्वारा जारी राजस्थान जैव ईंधन नियम-2019 में आवश्यक संशोधन कर मिलावटी बायोडीजल (B–100) के विनिर्माताओं एवं खुदरा विक्रेताओं के विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही के प्रावधान का समावेश कर सक्षम स्तर से प्रभावी नियम बनाये जाने के निर्देश दिये।

उन्होंने राज्य में बंजर भूमि को हरा-भरा बनाने व ग्रामीण जनसमुदाय की आय बढ़ाने हेतु बंजर भूमि पर अखाद्य तेलीय पौधे जैसे रतनजोत, करज आदि का अधिक से अधिक पौधारोपण कराने के संबंध में जिलेवार कार्य योजना तैयार करवाकर दीर्घकालीन योजना सम्पूर्ण राज्य के लिये बनाते हुये कार्यवाही करने के निर्देश प्रदान किये है। उन्होंने बायोफ्यूल प्राधिकरण और बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड की शीघ्र बैठक आयोजित कर भविष्य की कार्ययोजना निर्धारित करने पर जोर दिया।

राजस्थान में वृक्षारोपण महाभियान के तहत ‘‘एक पेड़ माँ के नाम’’ की तर्ज पर हरियालो राजस्थान अभियान की शुरूआत गत वर्ष 7 जुलाई से की गई थी, जिसके तहत 7 करोड़ पौधारोपण कर राजस्थान पूरे देश में प्रथम स्थान पर रहा। इस कार्यक्रम का ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान द्वारा विकसित ‘‘हरियालो राजस्थान ऐप ’’के माध्यम से जियो टैगिंग भी किया जा रहा है। इस ऐप में रीयल टाईम के आधार पर पौधारोपण की ऑनलाईन प्रगति दर्ज करने का प्रावधान है।

वर्ष 2025-26 में सम्पूर्ण राज्य में 10 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित है, जिसमें से ग्रामीण विकास विभाग, पंचायतीराज विभाग तथा जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग को संयुक्त रूप से 2 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य आवंटित किया गया है। जिसमें अब तक 1 करोड 9 लाख पौधे 50 से ज्यादा विभागों द्वारा लगाये गए है। इसमें महात्मा गांधी नरेगा, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग सबसे अधिक लगभग 70 लाख पौधारोपण कर सबसे आगे है।

हरियालो राजस्थान के अन्तर्गत सम्पूर्ण राज्य में किये जा रहे पौधारोपण के जिलेवार, विभागवार, प्रजातिवार मॉनिटरिंग हरियालो राजस्थान ऐप के माध्यम से की जा रही है। महात्मा गांधी नरेगा योजना के अन्तर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्थापित की जा रही 12 हजार से अधिक पंचायत पौधशालाओं की जियो टैगिंग व मॉनिटरिंग भी की जा रही है। किरोडीलाल ने वर्तमान में अरावली संस्थान द्वारा किए जा रहे क्षमतावर्धन, प्रशिक्षण एवं अध्ययन कार्यों की सराहना की तथा निर्देशित किया कि अरावली द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी अन्य विभागों को भी अवगत कराई जाने की आवश्यकता है जिससे अन्य विभाग भी उक्त कार्यों हेतु अरावली की सेवायें ले सकें। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव ग्रामीण विकास विभाग श्रेया गुहा, शासन सचिव ग्रामीण विकास पुष्पा सत्यानी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी बायो्फ्यूल प्राधिकरण जुगल किशोर मीणा तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.mahanagartimes.com/post/review-meeting-of-kirori-lal-meena




रमायमहू में चार सौ बीघा चारागाह भूमि पर लोगों ने कर रखा है अतिक्रमण


  • चारागाह भूमि पर कब्जा, ग्रामीणों का प्रदर्शन

भास्कर न्यूज | पिड़ावा

रमाय दलपत ग्राम पंचायत के रमायमहू गांव में चार सौ बीघा चारागाह भूमि पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। इससे नाराज ग्रामीणों ने उपखंड कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में बताया कि इस भूमि पर गांव के पशु चरते हैं। अब कुछ लोगों ने इस पर कब्जा कर लिया है। तारबंदी कर दी है। पशु चराने ले जाने पर अतिक्रमी लाठियों से उन्हें भगा देते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि 20 से 25 साल पहले इस भूमि से अतिक्रमण हटाया था। उसके बाद से अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब फिर से अतिक्रमण बढ़ गया है। पशुओं के लिए चरने की जगह नहीं बची है। इससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने मांग की कि चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जाए। ज्ञापन देने वालों में मेहरबान सिंह, मानसिंह, रणजीत सिंह, गुमान सिंह, गोपाल सिंह, बालू सिंह, भेरूसिंह, नारायण सिंह, ईश्वर सिंह और श्याम सिंह शामिल रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/pirawa/news/people-have-encroached-upon-four-hundred-bighas-of-pasture-land-in-ramayamahu-135403076.html

Tuesday, 8 July 2025

लूनी की पुकार: प्रदूषण की पीड़ा से कराह रही, यह मात्र एक नदी नहीं, समूचे रेगिस्तान की आत्मा का संकट है: पश्चिमी राजस्थान की सांस्कृतिक धड़कन और जीवनधारा लूणी नदी आज स्वयं जीवन के लिए तरस रही है।


बालोतरा जिले के डोली अराबा क्षेत्र के खेतों और भूमि पर भरा रसायनयुक्त प्रदूषित पानी।

योगेंद्र सेन, बाड़मेर।

पश्चिमी राजस्थान की सांस्कृतिक धड़कन और जीवनधारा लूणी नदी आज स्वयं जीवन के लिए तरस रही है। जो कभी गांवों को सींचती थी, चारागाहों को जीवन देती थी, वही नदी अब प्रदूषण की पीड़ा से कराह रही है। यह मात्र एक नदी का नहीं, बल्कि समूचे रेगिस्तान की आत्मा का संकट है।

पिछले कुछ दशकों में औद्योगिक इकाइयों ने इस धारा को ऐसा विष दिया कि उसकी पारंपरिक शुद्धता ही नष्ट हो गई। जहरीला रासायनिक अपशिष्ट खेतों की हरियाली निगल गया। हजारों किसान रोजगार और ज़मीन दोनों से बेदखल हो गए। लूणी के किनारे की वो उपजाऊ भूमि, जहां कभी अन्न के खेत लहराते थे, आज बंजर और वीरान पड़ी है। गांव खाली हो रहे हैं, लोग पलायन को विवश हैं।यह संकट केवल पर्यावरणीय नहीं है, यह हमारी सांस्कृतिक स्मृति और पारंपरिक जीवनशैली पर भी गहरा आघात है।

ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा बालोतरा के पादरू में की गई घोषणा-जैसे सूखे होंठों को ताजगी मिल गई हो। प्रस्ताव है कि जोधपुर से कच्छ के रण तक एक पाइपलाइन बिछाई जाएगी। जोधपुर, पाली, बालोतरा, जसोल और बिठूजा से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट को ड्रेन सिस्टम के माध्यम से कच्छ की खाड़ी तक ले जाया जाएगा।

यह योजना, केवल एक बुनियादी ढांचा नहीं, बल्कि मरुस्थल के पुनर्जीवन की कथा का प्रारंभ हो सकती है। लूणी में फिर से सांसें लौट सकती हैं। खेतों में हरियाली लौटेगी, गांवों में चहल-पहल बढ़ेगी, पलायन रुकेगा। उद्योगों को नियमन के साथ राहत मिलेगी, जिससे आर्थिक स्थायित्व और निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा।

और सबसे बड़ी बात-लूणी को नया जीवन मिलेगा। यह नदी केवल जल की नहीं, बल्कि लोकजीवन, लोकगाथा, लोकआस्था और पहचान की वाहक है। लेकिन यह सपना तभी साकार होगा जब सरकार, प्रशासन और उद्योग जगत एक लक्ष्य, एक निष्ठा और एक दृष्टि से कार्य करें। योजना की डीपीआर को त्वरित स्वीकृति, जमीन अधिग्रहण में पारदर्शिता और क्रियान्वयन की सघन निगरानी अत्यंत आवश्यक होगी।

यह केवल एक ड्रेनेज प्रोजेक्ट नहीं, रेगिस्तान की उम्मीदों की पाइपलाइन है। यह प्रदूषण से मुक्ति का ही नहीं, भविष्य को सुरक्षित रखने का मार्ग है। सरकार को चाहिए कि इसे केवल बजट की फाइलों तक सीमित न रखे, बल्कि इसे रेगिस्तान की आत्मा को बचाने का जन-अभियान बनाए।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.patrika.com/barmer-news/the-call-of-luni-waning-in-the-pain-of-pollution-it-is-not-just-a-river-it-is-the-crisis-of-the-soul-of-the-entire-desert-19758847

किशनगढ़ के गांवों को मिलेगी खेलों की नई पहचान:मनरेगा के तहत बनेंगे खेल संकुल, चारागाह और बंजर जमीन पर बन सकेगा खेल मैदान

ग्रामीण युवाओं को खेलों से जोड़कर उन्हें फिट और भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में अब किशनगढ़ के गांवों में बड़ी पहल शुरू होने जा रही है। सरकार की ओर से मनरेगा योजना के तहत अब ग्राम पंचायतों में खेल संकुल (स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स) विकसित किए जाएंगे। इसके लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब स्थानीय स्तर पर जमीन की उपलब्धता के आधार पर कार्य प्रारंभ होगा।

पंचायत समिति किशनगढ़ के अधिकारियों के अनुसार गांवों में पड़ी खाली चारागाह, बंजर या गैर उपयोगी जमीन का उपयोग खेल मैदानों के विकास में किया जाएगा। इससे न केवल भूमि का सही उपयोग होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी खेल गतिविधियों में भाग लेने का स्थायी मंच मिलेगा। ग्रामीण युवाओं को खेलों से जोड़ने और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करने के लिए अब मनरेगा योजना का उपयोग केवल श्रम आधारित कार्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके तहत किशनगढ़ क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में आधुनिक खेल संकुल (स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स) बनाए जाएंगे। सरकार द्वारा जारी नवीन दिशा-निर्देशों के तहत अब प्रत्येक पंचायत में उपलब्ध जमीन के अनुसार खेल सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इससे गांवों में वर्षों से खाली पड़ी चारागाह और बंजर भूमि अब खेल गतिविधियों से गुलजार होगी।

सरकार की मंशा है कि खेल संकुल के माध्यम से गांव के युवाओं को खेलों के प्रति आकर्षित किया जाए ताकि वे फिट रहें, अनुशासित जीवन अपनाएं और भविष्य में खेलों को कॅरियर के रूप में भी देख सकें। पंचायत समिति अधिकारियों के अनुसार यह योजना ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को सामने लाने में भी मददगार साबित होगी।

तय किया गया है कि पंचायत स्तर पर उपलब्ध भूमि के आकार के अनुसार खेल गतिविधियों की योजना बनाई जाएगी। पंचायत क्षेत्र में एक एकड़ से कम भूमि उपलब्ध है, तो वहां ओपन जिम, हाई जंप व लॉन्ग जंप की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। एक से डेढ़ एकड़ जमीन होने पर बास्केटबॉल और टेनिस कोर्ट बन सकेंगे, वहीं डेढ़ से तीन एकड़ जमीन वाले क्षेत्रों में फुटबॉल और हॉकी मैदान विकसित होंगे। पंचायत के पास तीन एकड़ से अधिक भूमि है तो वहां पूर्ण आकार का क्रिकेट मैदान बनाया जाएगा।

बीडीओ रेखा मीणा ने बताया कि खेल संकुलों के सुचारू संचालन और देखरेख के लिए सरकार ने त्रिस्तरीय समिति प्रणाली की भी घोषणा की है। जिला स्तर पर जिलाधीश, जिला खेल अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कार्य होगा, जबकि ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दी गई है, जिससे खेल मैदानों का रखरखाव और नियमित गतिविधियों का आयोजन सुनिश्चित किया जा सके।

अब तक मनरेगा योजना मुख्य रूप से जल संरक्षण, सड़क निर्माण और मजदूरी आधारित कार्यों के लिए जानी जाती थी, लेकिन खेलों को इससे जोड़ना सरकार के नवाचार की दिशा में एक सशक्त प्रयास माना जा रहा है।

मूल ऑनलाइन लेख- https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/ajmer/kishangarh/news/kishangarh-villages-will-get-a-new-identity-for-sports-135398812.html

मनरेगा में 65 कार्यों के लिए 491 लाख रु. स्वीकृत, पौधरोपण से छाएगी हरियाली

 जोधपुर। मनरेगा व कन्वर्जेंस के तहत वर्ष 2025-26 में जोधपुर-फलोदी की ग्राम पंचायतों के राजकीय विद्यालयों के परिसरों, मुक्तिधाम स्थलों एवं चारागाह भूमि में 65 पौधारोपण के कार्य करवाए जाएंगे। जिसके लिए 491.26 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की है।

जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार मिश्रा ने बताया कि पंचायत समिति पीपाड़ की ग्राम पंचायतों में पौधारोपण के 5 कार्यों के लिये 35.65 लाख रुपए, पंचायत समिति ओसियां की ग्राम पंचायतों में पौधारोपण के 04 कार्यों के लिये 33.80 लाख रूपये, पंचायत समिति मण्डोर की सुरपुरा ग्राम पंचायत में पौधारोपण कार्यों के लिये 10.00 लाख रूपये, पंचायत समिति भोपालगढ़ की ग्राम पंचायतों में 08 कार्यों हेतु पौधारोपण, चारागाह एवं मेड़बंदी के लिये 111.19 लाख रूपये, पंचायत समिति बिलाड़ा की ग्राम पंचायतों में 07 पौधारोपण कार्यों के लिये 64.16 लाख रूपये, पंचायत समिति पीपाड़ शहर की ग्राम पंचायतों में 05 पौधारोपण कार्यों के लिये 1.90 लाख रूपये, पंचायत समिति भोपालगढ़ की ग्राम पंचायतों में 02 पौधारोपण कार्यों के लिये 14.24 लाख रूपये, पंचायत समिति लोहावट की भीकमकोर ग्राम पंचायत के नागणेची मंदिर में पौधारोपण के लिये 8.60 लाख रूपये, पंचायत समिति लूणी की ग्राम पंचायतों के 10 कार्यों के लिये 93.90 लाख रुपए की राशि से पौधारोपण कार्य करवाए जायेंगें।

उन्होंने बताया कि इसी क्रम में फलोदी जिले की पंचायत समिति फलोदी की ग्राम पंचायतों में भी 21 कार्यों के लिये 117.82 लाख रुपए की वित्तीय राशि की स्वीकृति प्रदान की गई है, इस राशि से महात्मा गांधी नरेगा योजना एवं कन्वर्जेंस के तहत सभी क्षेत्रों में पौधारोपण सम्बन्धी विकास कार्य करवाए जाएंगे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jodhpur/news/rs-491-lakh-sanctioned-for-65-works-in-mnrega-greenery-will-spread-due-to-plantation-135396733.html

Monday, 7 July 2025

चारागाह भूमि पर अतिक्रमण का विरोध:ग्रामीणों ने गाय के साथ निकाली रैली, तहसील कार्यालय पर दिया धरना


तामखेड़ा में चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया। ग्राम विकास सेवा समिति के नेतृत्व में ग्रामवासी सरदार वल्लभ भाई पटेल स्टेडियम में एकत्र हुए।

प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लेकर और गाय के साथ मुख्य बाजार से होते हुए तहसील कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने शासन-प्रशासन की कार्यवाही पर सवाल उठाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक चारागाह भूमि अतिक्रमण मुक्त नहीं होगी, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।

प्रदर्शन में भेरूलाल सुमन, कालूलाल सुमन, मदनलाल राणा, छीतरलाल सुमन समेत कई ग्रामवासी शामिल हुए। सभी ने चारागाह भूमि को मुक्त कराने की मांग की। आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष ओम गोचर ने धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/baran/anta/news/opposition-to-encroachment-on-pasture-land-135393530.html

Friday, 4 July 2025

सलोतिया में 176 बीघा चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाया


सुनेल| सलोतिया ग्राम पंचायत मेंपं. दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़े में गुरुवार को शिविर प्रभारी तहसीलदार अजहर बेग को ग्राम पंचायत ने चारागाह भूमि को मुक्त करने के लिएलिखित में प्रार्थना पत्र पेश किया। इस पर तुरंत संज्ञान लेकर सावल मशीन से 176 बीघा जमीन को अतिक्रमण मुक्त करवाया और ग्राम पंचायत को सौंप दी। वहीं शिविर में शिविर मेंकाश्तकारों कि कृषि भूमि केनामांतरण, रास्तों का खुलासा एवं 3 सहमति बंटवारे कर कुल 11 काश्तकारों को लाभान्वित किया।शिविर में विकास अधिकारी संजय शर्मा, प्रशासक इंद्रसिंह सिसोदिया, ग्राम विकास अधिकारी रामगोपाल नागर, कानूनगो रियाज खान, परसराम धाकड़ सहित जनप्रतिनिधि तथा ग्रामीण मौजूद रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/sunel/news/encroachment-removed-from-176-bigha-grazing-land-in-salotia-135367007.html

झुंझुनूं के आबूसर में चारागाह की जमीन से हटाया अतिक्रमण:लोकायुक्त के आदेश पर प्रशासन सक्रिय; JCB से गिराई दीवार

चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई

झुंझुनूं जिले की आबूसर ग्राम पंचायत क्षेत्र की चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी। यह कार्रवाई लोकायुक्त के निर्देश के पालन में की गई। शुक्रवार सुबह तहसीलदार महेंद्र मूंड के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम, पुलिस जाप्ते और जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई
3 गांवों में कार्रवाई

कार्रवाई पंचायत के तीन गांवों- अणगासर, दुर्जनपुरा और आबूसर में एक साथ चली। ग्रामीण कई कई साल से इन गांवों की चारागाह भूमि पर अवैध कब्जों की शिकायतें कर रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि चारागाह भूमि पर अस्थायी निर्माण, चारदीवारियां और निजी उपयोग के निर्माण कर रखे थे, जिससे मवेशियों के लिए चराई की जगह नहीं बची थी।

एक शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त कार्यालय में इसकी शिकायत दर्ज करवाई। लोकायुक्त ने झुंझुनूं जिला प्रशासन से विस्तृत स्पष्टीकरण रिपोर्ट तलब की थी। जवाब के दौरान स्पष्ट हुआ कि चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने के आदेश पहले ही दिए जा चुके थे, लेकिन अमल नहीं हो पाया। इसके बाद लोकायुक्त के आदेश पर सख्त कार्रवाई करते हुए गुरुवार को जेसीबी मशीनों की मदद से अतिक्रमण हटाया जाने लगा।

लोकायुक्त के आदेश पर प्रशासन सक्रिय
रिहायशी मकान नहीं तोड़ रहे

तहसीलदार महेंद्र मूंड ने बताया कि कार्रवाई के दौरान केवल चारागाह भूमि पर बने अवैध कब्जों को ही हटाया जा रहा है। रिहायशी मकानों को नहीं छेड़ा जा रहा है। फोकस सिर्फ चारदीवारियों, टीनशेड, गोदाम या अस्थायी निर्माण पर है जो सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए थे।

कार्रवाई पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से की जा रही है और मौके पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल भी तैनात है ताकि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े। प्रशासन ने पहले से ही कब्जाधारियों को नोटिस देकर स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दी थी, लेकिन बहुत से लोगों ने अनदेखी की। अब प्रशासनिक टीम सख्ती से कार्रवाई को अंजाम दे रही है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhunjhunu/news/action-to-remove-encroachment-from-pasture-land-135370856.html


Thursday, 3 July 2025

रीझवास में 108 बीघा चारागाह भूमि को किया अतिक्रमण मुक्त कलेक्टर के निर्देश पर तहसील प्रशासन ने की कार्रवाई

सूरौठ।स्मार्ट हलचल|गांव रीझवास में गुरुवार को तहसील प्रशासन ने करीब 108 बीघा चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने की कार्रवाई की। करौली जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा के निर्देश पर गांव रीझवास पहुंची राजस्व विभाग की टीम ने चारागाह भूमि का सीमा ज्ञान किया तथा जेसीबी से खुदाई करवा कर भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया। इस दौरान काफी संख्या में पुलिस जाब्ता तैनात रहा।

पिछले दिनों गोचर मुक्त संघर्ष समिति रीझवास के सदस्यों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर गांव की चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाने की मांग की थी। कलेक्टर के निर्देश पर गुरुवार को सूरौठ तहसीलदार संजीव धाकड़, शेरपुर नायब तहसीलदार हरिशंकर शर्मा, गिरदावर लक्ष्मी नारायण शर्मा, रूमाली बाई मीणा, रामकेश भागौड, पटवारी श्याम सिंह सोलंकी, दिनेश बारोलिया, पंकज जाटव, अमित डागुर, रघुनाथ जाटव, विजयपाल सहित कई राजस्व कर्मी जेसीबी लेकर गांव रीझवास पहुंचे तथा गांव की करीब 108 बीघा चारागाह भूमि का सीमा ज्ञान किया। तहसील प्रशासन ने जेसीबी से चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया। सीमा ज्ञान एवं अतिक्रमण मुक्त करने की कार्रवाई के दौरान काफी भीड़ मौजूद रही। कार्रवाई के अवसर पर 50 से अधिक पुलिसकर्मी उपस्थित रहे। तहसीलदार संजीव धाकड़ ने बताया कि गांव रीझवास में चारागाह भूमि पर अतिक्रमण करने वाले लोगों के खिलाफ पूर्व में भी धारा 91 के तहत नियमानुसार कार्रवाई की गई थी।अब कलेक्टर के निर्देश पर चारागाह भूमि का सीमा ज्ञान करवा कर अतिक्रमण मुक्त करने की कार्रवाई की गई है। अतिक्रमण मुक्त चारागाह भूमि को विकास एवं संरक्षण के लिए ग्राम पंचायत बाईजट्ट को सुपुर्द किया जाएगा।

मूल ऑनलाइन लेख - https://smarthalchal.com/grazing-land-freed-from-encroachment/


Wednesday, 2 July 2025

मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के कार्यों का किया निरीक्षणबंजार चारागाह भूमि हुई विकसित

मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के कार्यों का किया निरीक्षण

बंजार चारागाह भूमि हुई विकसित

अजमेर दिनांक 2 जुलाई 2025 जिला परिषद अजमेर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राम प्रकाश द्वारा मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के प्रथम चरण अंतर्गत ग्राम पंचायत टिकवाड़ा पंचायत समिति किशनगढ़ में संपादित किए गए जल ग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग के कार्यों का निरीक्षण किया जिसमें जल संरक्षण एवं संग्रहण से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन करते हुए जिसमें पक्का चेक डैम, सामुदायिक टांका निर्माण, पार्कोलेशन टैंक, नाला बैंक स्टेबलाइजेशन तथा नवाचार के रूप में बनाए जा रहे रिचार्ज शाफ्ट के कार्यों का मौके पर निरीक्षण किया। विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता दिलीप जादवानी ने निरीक्षण के दौरान उक्त समस्त गतिविधियों की उपयोगिता एवं भराव क्षमता लागत तथा भविष्य में होने वाले लाभ के विषय में मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद अजमेर को अवगत कराया। जय सिंह रावत अधिशासी अभियंता पंचायत समिति किशनगढ़ द्वारा ग्राम पंचायत में पांच हेक्टर भूमि जो गत 1 वर्ष पूर्व बंजर पड़ी थी उस भूमि पर कराए गए चारागाह विकास कार्य के संदर्भ में जानकारी दी गई। राम प्रकाश मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद अजमेर द्वारा जल संग्रहण एवं जल संरक्षण के विकास कार्यों का अवलोकन करते हुए बताया कि यह कार्य वर्षा ऋतु में पानी की हर बूंद बचाना हर ग्रामवासी को इस बारे में सोचना होगा और अधिक से अधिक जल संरक्षण ढांचों का निर्माण सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं भामाशाहों के माध्यम से करने होंगे जिससे वर्षा ऋतु का जल व्यर्थ न बहे, ताकि आने वाली पीढियो के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। शलभ टंडन ए एन ने बताया कि ग्राम पंचायत टिकवाड़ा में ग्राम वासियों के सहयोग से बंजर एवं अनुपयोगी पांच हेक्टर की भूमि को चारागाह विकसित करने हेतु प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 जल ग्रहण घटक योजना अंतर्गत विकसित किया जा रहा है जिसमें चारागाह भूमि पर विलायती बबूल को मशीन की मदद से पूरी भूमि की सफाई की गई उसके बाद 2000 खड़े पौधारोपण हेतु खोदे गए, मानसून पूर्व 1400 वानिकी छायादार वृक्ष एवं 6000 फलदार पौधे लगाए गए, पौधों की सुरक्षा हेतु तारबंदी की गई तथा सिंचाई सुविधाओं के लिए ड्रिप इरीगेशन सोलर पंप के माध्यम से कार्य किए गए। आज अनुपयोगी एवं बंजर भूमि की उपयोगिता चारागाह विकास कार्य से परिलक्षित हो रही है। निकट भविष्य में ग्राम पंचायत को इस चारागाह से निजी आय प्रारंभ हो जाएगी साथ ही पशुओं के लिए उन्नत किस्म का चारा भी उपलब्ध होगा। रामप्रकाश मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद अजमेर ने विभाग के अभियंताओं को निर्देश दिए की हरियालो राजस्थान के अंतर्गत अधिक से अधिक पौधारोपण के कार्य कराए जावे तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रगति की कैप्चर की जाए।

मूल ऑनलाइन लेख - https://awazrajasthanki.com/archives/7159

Tuesday, 1 July 2025

महाराजपुरा में चारागाह भूमि के आवंटन पर विवाद:धरने पर बैठे; कहा- जमीदार को गलत तरीके से दी जमीन, विधायक ने समझाइश कर मामला शांत किया

लालसोट क्षेत्र के महाराजपुरा गांव में चारागाह भूमि के आवंटन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने एक व्यक्ति को गलत तरीके से जमीन आवंटन का आरोप लगाते हुए ग्राम पंचायत के बाहर धरना शुरू कर दिया है।

ग्रामीणों ने बताया - विवादित भूमि खसरा संख्या 436/193 पर स्थित चारागाह और सिवायचक भूमि है। आरोप है कि जिस व्यक्ति को यह जमीन आवंटित की गई है, वह पहले से ही बड़ा जमींदार है। प्रशासन ने रात के समय आवंटी की जमीन का सीमा ज्ञान करवाया।


इस जमीन पर पहले से तीन एनीकट बने हुए थे और हरे पेड़-पौधे भी थे। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में एनीकट और वृक्षों को नष्ट कर दिया गया। साथ ही जमीन की चारों तरफ तारबंदी कर दी गई, जिससे गांव का रास्ता और पशुओं के चरने का स्थान बंद हो गया।

ग्रामीणों ने बताया कि जब वे समझाने गए तो आवंटी पक्ष ने फायरिंग की और धारदार हथियार दिखाए। विरोध में ग्रामीणों ने पंचायत भवन का लोकार्पण और पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल शिविर का बहिष्कार किया है। उपखंड अधिकारी विजेंद्र मीणा ने कहा कि अगर आवंटन नियम विरुद्ध हुआ है तो ग्रामीण अपील कर सकते हैं। गलत आवंटन पाए जाने पर उसे रद्द कर दिया जाएगा। प्रशासन ग्रामीणों से बातचीत कर रहा है।


ग्राम पंचायत के नए भवन का उद्घाटन करने पहुंचे विधायक रामबिलास मीणा ने ग्रामीणों से समझाइस की। विधायक व एसडीएम विजेंद्र मीणा के आश्वासन पर ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन समाप्त किया। उसके बाद पंचायत भवन का विधिवत उद्घाटन किया और पंचायत में आयोजित होने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल शिविर का भी आयोजन किया गया।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/dausa/lalsot/news/dispute-over-allotment-of-pasture-land-in-maharajpura-135343287.html

सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण का विरोध:पगारिया में चारागाह और सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग, शिविर प्रभारी को सौंपा ज्ञापन

राष्ट्रीय किसान संघ ने मंगलवार को भवानीमंडी उपखंड के पगारिया गांव में शिविर प्रभारी को ज्ञापन सौंपा। इसमें चारागाह भूमि, सरकारी भूमि, गोचर और पीडब्ल्यूडी विभाग की जमीनों से अतिक्रमण हटाने की मांग की गई है।

किसान संघ के कार्यकर्ताओं ने बताया कि पगारिया में सरकारी जमीनों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो रहा है। उन्होंने राज्य सरकार और जिला-तहसील प्रशासन से अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष टीमों के गठन की मांग की है।

संगठन ने गोचर भूमि को भी अतिक्रमण मुक्त कराने पर जोर दिया है। उनकी मांग है कि गायों के चरने के लिए इन जमीनों को खाली कराया जाए। किसान संघ ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे जन आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

मूल ऑनलाइन लेख -https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/bhawani-mandi/news/opposition-to-encroachment-on-government-lands-135350732.html