This blog is aimed at documenting the initiatives undertaken for the conservation of the pastures by communities across Rajasthan as well as efforts by Government of Rajasthan and Civil Society Organisations across the State. Foundation for Ecological Security works in partnership with the Wasteland and Pasture Land Development Board for conservation of the commons. For views and comments write to rajasthanpastures@gmail.com
Wednesday, 12 November 2025
पंचायती राज संस्थाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने की आवश्यकता है: चतुर्वेदी
Tuesday, 11 November 2025
पंचायती राज संस्थाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने पर हुआ मंथन
-राज्य वित्त आयोग की कार्यशाला सम्पन्न भरतपुर। भरतपुर संभाग की पंचायती राज संस्थाओं के ढांचे को मजबूत करने, ग्रामीण विकास, योजनाओं, नवीन आय स्रोतों, नवाचारों और सुझावों पर मंथन के उद्देश्य से मंगलवार को नगर निगम सभागार में सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्ववित्त पोषित योजनाओं और जनसहभागिता आधारित आय के नए स्रोत विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पंचायतों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने हेतु सूचना सहायक कार्मिकों की नियुक्ति, निजी संपत्तियों के रखरखाव के लिए पृथक मद सृजित करने और सामुदायिक भवनों, सुलभ शौचालयों, नालियों की सफाई एवं ड्रेनेज सिस्टम को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को पारदर्शिता से पूरा कर ग्राम पंचायतों को मॉडल पंचायतों के रूप में विकसित किया जाए। साथ ही सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों का सहयोग लें। धौलपुर जिले में डिजिटल लाइब्रेरी संचालन जैसे नवाचारों का व्यापक प्रचार करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं की आर्थिक सुदृढ़ता से ग्रामीण विकास की गति तेज होगी, जिससे आमजन को मूलभूत सुविधाएं जैसे पेयजल, सड़क, नाली एवं स्वच्छता बेहतर रूप में मिलेंगी। करौली जिले में मदन मोहन जी मंदिर मेले के विकास एवं आय स्त्रोतों के विस्तार की योजना बनाने तथा चारागाह भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए टीम गठन के निर्देश दिए।
सम्भागीय आयुक्त डॉ. टीना सोनी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण हेतु निर्धारित 2 प्रतिशत निधि में वृद्धि की अनुशंसा की जाएगी। उन्होंने भरतपुर संभाग की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जिलों को पृथक फंड प्रावधान देने की बात कही। साथ ही जल संसाधन सुधार, तालाबों, नालों, बावड़ियों और हेरिटेज स्थलों के संरक्षण हेतु विशेष अनुदान देने का सुझाव दिया। आयोग के सदस्य सचिव नरेश ठकराल ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं को अपना स्वयं का बजट तैयार करने और व्यय योजना बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने आयोग द्वारा आयोजित संवाद कार्यशालाओं की जानकारी दी और कहा कि सभी पंचायतें प्रश्नावलियों से संबंधित सूचना आयोग की वेबसाइट पर भेजें।
कार्यशाला में आए प्रमुख सुझाव
भरतपुर के सीईओ मृदुल सिंह ने नए डीग जिले में आधारभूत सुविधाओं की कमी को देखते हुए अतिरिक्त अनुदान, डीग जिला परिषद के लिए सभागार निर्माण, पंचायत संपत्तियों के रखरखाव और आय वृद्धि उपायों पर बल दिया। करौली जिले के सीईओ ने सिवायचक भूमि, चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने हेतु प्रशासनिक एडीएम और एसडीएम की अध्यक्षता में टीम गठन, मत्स्य पालन को आय स्रोत के रूप में बढ़ावा देने, तकनीकी कार्मिकों की नियुक्ति, और आपदा प्रबंधन व रखरखाव कार्यों के लिए अतिरिक्त फंड प्रावधान की अनुशंसा की। सवाई माधोपुर सीईओ ने पंचायती राज के विकास कार्यों के लिये आने वाली राशि की बेहतर तरीके से मॉनिटंिरंग की जा सके इसके लिये लेखा कार्मिकों की उपलब्ध करवाने का सुझाव दिया।
बैठक में जिला प्रमुख सवाई माधोपुर सुदामा मीणा, संभाग के सभी प्रधान , धौलपुर सीईओ निवृत्ति सोमनाथ, सवाईमाधोपुर सीईओ गौरव बुडानिया, करौली सीईओ शिवचरण मीणा, एसीईओ रेखा रानी, ब्लॉक विकास अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
मूल ऑनलाइन लेख -https://www.khaskhabar.com/local/rajasthan/bharatpur-news/news-discussion-on-making-panchayati-raj-institutions-self-reliant-and-empowered-news-hindi-1-767052-KKN.html
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