Thursday, 13 November 2025

देवमगरी की चरागाह भूमि में किए जा रहे खनन को ग्रामीणों ने रुकवाया

भास्कर न्यूज | मसूदा

ग्राम देवमगरी की चारागाह भूमि में किए जा रहे खनन को मौके पर जाकर ग्रामीणों ने रुकवाया। जानकारी के अनुसार देवमगरी में स्थित चरागाह भूमि पर कुछ व्यक्ति जेसीबी लेकर खनन कार्य करने लगे।

इसकी जानकारी ग्रामीणों को मिलने पर ग्रामीणों ने खनन कर्ताओं से जानकारी चाही तो उन्होंने प्रतिष्ठित नेताओं के नाम से लीज होने की जानकारी दी, लेकिन ग्राम वासियों के विरोध के चलते खनन कार्य को बंद कर दिया गया। ग्राम वासियों का कहना है कि यह चारागाह भूमि हमारे जानवरों के चरने के लिए है लेकिन इसमें पत्थर होने से आए दिन खनन कर्ताओं द्वारा आकर खनन किया जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि लीज हो जाने पर भी ग्रामवासी किसी हालत में खनन नहीं करने देंगे। मौके पर सांवरलाल गुर्जर, समाजसेवी रामदेव, रामराज गुर्जर, रामलाल गुर्जर, प्रभु लाल गुर्जर आदि ने मौके पर जाकर खनन को बंद करवाया। इस संदर्भ में पटवारी गणेश गुर्जर से जानकारी जाने पर बताया कि इस संदर्भ में किसी को लीज आवंटन होने की जानकारी नहीं है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/ajmer/masuda/news/villagers-stopped-mining-in-the-pasture-land-of-devmagri-136403118.html

Wednesday, 12 November 2025

पंचायती राज संस्थाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने की आवश्यकता है: चतुर्वेदी

भासकर न्यूज। भरतपुर

पंचायती राज संस्थाओं को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने की आवश्यकता है, जिसके लिए स्ववित्त पोषित योजनाओं और जनसहभागिता आधारित आय के नए स्रोत विकसित करने की जरूरत है। ये बात मंगलवार को सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने भरतपुर संभाग की पंचायती राज संस्थाओं के ढांचे को मजबूत करने, ग्रामीण विकास, योजनाओं, नवीन आय स्रोतों, नवाचारों और सुझावों पर मंथन के उद्देश्य से नगर निगम सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि पंचायतों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने ​के लिए जिला सूचना सहायक कार्मिकों की नियुक्ति, निजी संपत्तियों के रखरखाव के लिए पृथक मद सृजित करने और सामुदायिक भवनों, सुलभ शौचालयों, नालियों की सफाई एवं ड्रेनेज सिस्टम को प्राथमिकता देने की बात कही। धौलपुर जिले में डिजिटल लाइब्रेरी संचालन जैसे नवाचारों का व्यापक प्रचार करने पर भी बल दिया।

उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं की आर्थिक सुदृढ़ता से ग्रामीण विकास की गति तेज होगी, जिससे आमजन को मूलभूत सुविधाएं जैसे पेयजल, सड़क, नाली एवं स्वच्छता बेहतर रूप में मिलेंगी। करौली जिले में मदन मोहन जी मंदिर मेले के विकास एवं आय स्रोतों के विस्तार की योजना बनाने तथा चारागाह भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए टीम गठन के निर्देश दिए। संभागीय आयुक्त डॉ. टीना सोनी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण हेतु निर्धारित 2 प्रतिशत निधि में वृद्धि की अनुशंसा की जाएगी।

उन्होंने भरतपुर संभाग की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जिलों को पृथक फंड प्रावधान देने की बात कही। साथ ही जल संसाधन सुधार, तालाबों, नालों, बावडिय़ों और हेरिटेज स्थलों के संरक्षण हेतु विशेष अनुदान देने का सुझाव दिया। आयोग के सदस्य सचिव नरेश ठकराल ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं को अपना स्वयं का बजट तैयार करने और व्यय योजना बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। बैठक में जिला प्रमुख सवाई माधोपुर सुदामा मीणा, संभाग के सभी प्रधान, भरतपुर सीईओ मृदुल सिंह, धौलपुर सीईओ निवृत्ति सोमनाथ, सवाईमाधोपुर सीईओ गौरव बुडानिया, करौली सीईओ शिवचरण मीणा, एसीईओ रेखा रानी, ब्लॉक विकास अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं पंचायती राज प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बैठक में आए ये प्रमुख सुझाव...

भरतपुर के सीईओ मृदुल सिंह ने नए डीग जिले में आधारभूत सुविधाओं की कमी को देखते हुए अतिरिक्त अनुदान, डीग जिला परिषद के लिए सभागार निर्माण, पंचायत संपत्तियों के रखरखाव और आय वृद्धि उपायों पर बल दिया। करौली जिले के सीईओ शिवचरण मीणा ने सिवायचक भूमि, चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासनिक एडीएम और एसडीएम की अध्यक्षता में टीम गठन, मत्स्य पालन को आय स्रोत के रूप में बढ़ावा देने, तकनीकी कार्मिकों की नियुक्ति और आपदा प्रबंधन व रखरखाव कार्यों के लिए अतिरिक्त फंड प्रावधान की अनुशंसा की। सवाई माधोपुर सीईओ गौरव बुडानिया ने पंचायती राज के विकास कार्यों के लिए आने वाली राशि की बेहतर तरीके से मॉनिटरिंग की जा सके, इसके लिए लेखा कार्मिकों की उपलब्ध करवाने का सुझाव दिया।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/bharatpur/news/there-is-a-need-to-make-panchayati-raj-institutions-self-reliant-and-strong-chaturvedi-136396708.html

हरित क्रांति के लिए लीज धारक को लगाने थे 18 हजार पेड़, उसने चारागाह से उखाड़ कर फेंके 70 से ज्यादा पेड़


भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा

आकोला एरिया के चांदगढ़ में बनास नदी में बजरी खनन करने वाली लीज कम्पनी को हरित क्रांति लाने के 18000 पेड़ लगाने थे। उसने लगाने की जगह पर चारागाह भूमि से खेजड़ी, नीम व बबूल के 70 से ज्यादा पेड़ जड़ सहित उखाड़ दिए। इन उखाड़े हुए पेड़ों से उसने नदी में आने-जाने के लिए नए मार्ग का निर्माण किया। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण राजस्थान की ओर से जारी पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) के अनुसार लीज धारक मेसर्स महादेव एनक्लेव प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी को चारागाह 25 हैक्टेयर जमीन पर 51 लाख रुपए की लागत से 18000 पेड़ लगाने थे।

पेड़ों की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड लगाए जाने चाहिए थे। लीज धारक को चारागाह में देशी बबूल, शीशम, बांस, खजूर, गुलर, करंज, अर्जुन, जामुन, झाड़ियां, संभालू या शिवारी, कचनार, अरंडी आदि के पेड़ पौधे लगाने थे। पेड़ पौधों को पंचायत की ओर दी गई जमीन और आने-जाने वाले रास्ते के दोनों और लगाया जाना था। साथ ही घास भी लगाई जानी थी। लीज धारक ने मौके पर एक भी पेड़ नहीं लगाया। लेकिन नदी के मार्ग बनाने के लिए उसने खेजड़ी, नीम व बबूल के पेड़ जड़ समेत उखाड़ दिए। ग्रामीणों के अनुसार लीज धारक ने चारागाह से खेजड़ी और नीम के बीस-बीस और तीस बबूल के पेड़ों को जड़ समेत उखाड़ दिया। बनास नदी से बजरी भरकर ले जाता ट्रैक्टर।

टीपी प्वॉइंट तक जाने के लिए चारागाह में मोरम डालकर बनाई सड़क: आकोला एरिया के चांदगढ़ में बनास नदी में जाने को लिए चारागाह पर कई रास्ते बना दी गए हैं। यहां पर बड़े-बड़े वाहन डम्पर, एलएनटी, जेसीबी, टैक्टर-ट्रॉली आदि वाहन निकल रहे हैं। चारागाह दो भागोें में बंटा हुआ है। इसमें से गांव में आने-जाने के लिए सड़क निकल रही है। मुख्य सड़क के एक ओर बीस हैक्टेयर और दूसरी ओर पांच हैक्टेयर जमीन पर चारागाह है। पांच हैक्टेयर जमीन पर लीज धारक ने इलेक्ट्रिक कांटा (टीपी प्वाइंट) लगा रखा है। इस टीपी प्वाइंट तक जाने के लिए उसने चारागाह में ही मोरम डालकर सड़क का निर्माण कर दिया है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/bhilwara/news/the-lease-holder-was-supposed-to-plant-18000-trees-for-the-green-revolution-but-he-uprooted-and-threw-away-more-than-70-trees-from-the-pasture-136396134.html


Tuesday, 11 November 2025

पंचायती राज संस्थाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने पर हुआ मंथन


-राज्य वित्त आयोग की कार्यशाला सम्पन्न भरतपुर। भरतपुर संभाग की पंचायती राज संस्थाओं के ढांचे को मजबूत करने, ग्रामीण विकास, योजनाओं, नवीन आय स्रोतों, नवाचारों और सुझावों पर मंथन के उद्देश्य से मंगलवार को नगर निगम सभागार में सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्ववित्त पोषित योजनाओं और जनसहभागिता आधारित आय के नए स्रोत विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पंचायतों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने हेतु सूचना सहायक कार्मिकों की नियुक्ति, निजी संपत्तियों के रखरखाव के लिए पृथक मद सृजित करने और सामुदायिक भवनों, सुलभ शौचालयों, नालियों की सफाई एवं ड्रेनेज सिस्टम को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को पारदर्शिता से पूरा कर ग्राम पंचायतों को मॉडल पंचायतों के रूप में विकसित किया जाए। साथ ही सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों का सहयोग लें। धौलपुर जिले में डिजिटल लाइब्रेरी संचालन जैसे नवाचारों का व्यापक प्रचार करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं की आर्थिक सुदृढ़ता से ग्रामीण विकास की गति तेज होगी, जिससे आमजन को मूलभूत सुविधाएं जैसे पेयजल, सड़क, नाली एवं स्वच्छता बेहतर रूप में मिलेंगी। करौली जिले में मदन मोहन जी मंदिर मेले के विकास एवं आय स्त्रोतों के विस्तार की योजना बनाने तथा चारागाह भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए टीम गठन के निर्देश दिए।

सम्भागीय आयुक्त डॉ. टीना सोनी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण हेतु निर्धारित 2 प्रतिशत निधि में वृद्धि की अनुशंसा की जाएगी। उन्होंने भरतपुर संभाग की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जिलों को पृथक फंड प्रावधान देने की बात कही। साथ ही जल संसाधन सुधार, तालाबों, नालों, बावड़ियों और हेरिटेज स्थलों के संरक्षण हेतु विशेष अनुदान देने का सुझाव दिया। आयोग के सदस्य सचिव नरेश ठकराल ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं को अपना स्वयं का बजट तैयार करने और व्यय योजना बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने आयोग द्वारा आयोजित संवाद कार्यशालाओं की जानकारी दी और कहा कि सभी पंचायतें प्रश्नावलियों से संबंधित सूचना आयोग की वेबसाइट पर भेजें।

कार्यशाला में आए प्रमुख सुझाव

भरतपुर के सीईओ मृदुल सिंह ने नए डीग जिले में आधारभूत सुविधाओं की कमी को देखते हुए अतिरिक्त अनुदान, डीग जिला परिषद के लिए सभागार निर्माण, पंचायत संपत्तियों के रखरखाव और आय वृद्धि उपायों पर बल दिया। करौली जिले के सीईओ ने सिवायचक भूमि, चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने हेतु प्रशासनिक एडीएम और एसडीएम की अध्यक्षता में टीम गठन, मत्स्य पालन को आय स्रोत के रूप में बढ़ावा देने, तकनीकी कार्मिकों की नियुक्ति, और आपदा प्रबंधन व रखरखाव कार्यों के लिए अतिरिक्त फंड प्रावधान की अनुशंसा की। सवाई माधोपुर सीईओ ने पंचायती राज के विकास कार्यों के लिये आने वाली राशि की बेहतर तरीके से मॉनिटंिरंग की जा सके इसके लिये लेखा कार्मिकों की उपलब्ध करवाने का सुझाव दिया।

बैठक में जिला प्रमुख सवाई माधोपुर सुदामा मीणा, संभाग के सभी प्रधान , धौलपुर सीईओ निवृत्ति सोमनाथ, सवाईमाधोपुर सीईओ गौरव बुडानिया, करौली सीईओ शिवचरण मीणा, एसीईओ रेखा रानी, ब्लॉक विकास अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

मूल ऑनलाइन लेख -https://www.khaskhabar.com/local/rajasthan/bharatpur-news/news-discussion-on-making-panchayati-raj-institutions-self-reliant-and-empowered-news-hindi-1-767052-KKN.html

मकसूदनपुरा में 120 बीघा चारागाह भूमि से हटाया अतिक्रमण:जिला कलेक्टर के निर्देश पर हुई कार्रवाई, गिरदावर धर्म सिंह रहे मौजूद

मलारना डूंगर उपखंड की मकसूदनपुरा ग्राम पंचायत में 120 बीघा चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाया गया। यह कार्रवाई जिला कलेक्टर के निर्देश पर कार्रवाई हुई।

उप जिला कलेक्टर और तहसीलदार मलारना डूंगर के आदेशानुसार गिरदावर धर्मसिंह गुर्जर, रूपसिंह मीणा, पटवारी प्रेमराज गुर्जर और नीरज शर्मा के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई की।

मलारना स्टेशन चौकी इंचार्ज कमलेश शर्मा पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर मौजूद रहे। प्रशासक पति मोहरसिंह गुर्जर की उपस्थिति में चार जेसीबी मशीनों की मदद से भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया।

अधिकारियों ने बताया कि लगभग 150 बीघा अन्य भूमि को भी आगामी आदेशों पर अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। स्थानीय लोगों ने कुल 300 बीघा से अधिक चारागाह भूमि पर अतिक्रमण कर रखा है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/sawai-madhopur/malarna-doongar/news/encroachment-removed-from-120-bigha-pasture-land-in-maksudanpura-136393678.html




Saturday, 8 November 2025

बस्सी में 50 करोड़ की सरकारी भूमि अतिक्रमण मुक्त, जेडीए का चला पंजा


जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने गुरुवार को जोन-13 क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए आगरा रोड मुख्य हाइवे के पास बस्सी रीको के पास करीब 12 बीघा सरकारी भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई।

– जेडीए की कार्रवाई, अवैध कॉलोनी बसाने का प्रयास नाकाम

– तीन किमी क्षेत्र में सड़क सीमा भी कराई खाली

बस्सी. जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने गुरुवार को जोन-13 क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए आगरा रोड मुख्य हाइवे के पास बस्सी रीको के पास करीब 12 बीघा सरकारी भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई। इस भूमि की कीमत लगभग 50 करोड़ रुपए आंकी गई है। साथ ही जोन-8 में रीको कांटा से डिग्गी मालपुरा रोड तक करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र में सड़क सीमा से अतिक्रमण हटाया गया है।

यह कार्रवाई उप महानिरीक्षक पुलिस राहुल कोटोकी के निर्देशन में प्रवर्तन दस्ते ने की है। बस्सी में जेडीए स्वामित्व की चारागाह भूमि पर कुछ लोगों ने फार्महाउस, चारदीवारी और तारबंदी कर कब्जा कर लिया था। टीम ने जेसीबी मशीनों की मदद से सभी निर्माण ध्वस्त कर भूमि खाली कराई है।

इसी तरह बस्सी क्षेत्र में एक अन्य स्थान पर निजी खातेदारी भूमि में नाले की सरकारी भूमि मिलाकर अवैध कॉलोनी बसाने का प्रयास किया जा रहा था। वहां मिट्टी-ग्रेवल सड़कों और चार दीवारी को तोड़कर अवैध निर्माण हटाए गए। जोन-8 क्षेत्र में रीको कांटा से डिग्गी मालपुरा रोड तक करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र में सड़क सीमा पर बने चबूतरों, टीनशेड, झुग्गियों, ठेलों और बैनरों को भी हटाया गया।

डीआईजी राहुल कोटोकी ने बताया कि जेडीए प्रवर्तन शाखा अब तक वर्ष 2024 में 817 बीघा और 2025 में 611 बीघा यानी कुल 1428 बीघा सरकारी भूमि अतिक्रमण मुक्त करा चुकी है। अब तक 710 अवैध कॉलोनियां ध्वस्त की जा चुकी हैं। जेडीए की कार्रवाई – बस्सी में 12 बीघा सरकारी भूमि मुक्त – कीमत लगभग 50 करोड़ रुपए – अवैध कॉलोनी बसाने का प्रयास नाकाम दो वर्ष की कार्रवाई – 2024 में 817 बीघा भूमि मुक्त – 2025 में 611 बीघा भूमि मुक्त – कुल 710 अवैध कॉलोनियां ध्वस्त।

मूल ऑनलाइन लेख- https://www.patrika.com/videos/bassi-news/government-land-worth-rs-50-crore-in-bassi-freed-from-encroachment-jda-takes-action-20086784


Sunday, 2 November 2025

महवा में चारागाह भूमि पर अतिक्रमण:ग्रामीणों ने विधायक से की शिकायत, बोले-तहसीलदार के बेदखली आदेश के बावजूद निर्माण जारी


महवा उपखंड क्षेत्र के पाड़ली गांव में चारागाह भूमि पर अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों ने विधायक राजेंद्र मीना से शिकायत की है। ग्रामीणों का आरोप है कि तहसीलदार द्वारा बेदखली के आदेश जारी होने के बावजूद सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण जारी है, जिससे उनमें आक्रोश है।

ग्रामीण खोहरा मुल्ला स्थित जनसुनवाई केंद्र पहुंचे और विधायक को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि पाड़ली गांव में करीब 2 बीघा चारागाह भूमि पर कुछ लोग कच्चा और पक्का निर्माण कर अतिक्रमण कर रहे हैं। पहले अस्थायी झोपड़ियां बनाई गईं, अब पुख्ता निर्माण कर चारागाह को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

ग्रामीणों ने विधायक को बताया कि इस मामले में पूर्व में तहसीलदार ने अतिक्रमियों को चारागाह भूमि से बेदखल करने के आदेश जारी किए थे। हालांकि, प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस स्थिति से ग्रामीणों और अतिक्रमणकारियों के बीच विवाद की आशंका बनी हुई है।

ग्रामीणों की शिकायत पर विधायक राजेंद्र मीना ने एसडीएम मनीषा रेशम और तहसीलदार महवा को निर्देश दिए हैं कि अतिक्रमण पर किए जा रहे निर्माण को तुरंत रोका जाए और चारागाह भूमि से अवैध कब्जे हटाए जाएं।

मूल ऑनलाइन लेख -https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/dausa/mahwa/news/encroachment-on-pasture-land-in-mahwa-136317626.html