Friday, 31 October 2025

खेड़ी में चरागाह भूमि पर कब्जा, लोगों में आक्रोश

 ग्राम पंचायत खेड़ी में चरागाह भूमि पर खनन माफियाओं द्वारा किए गए अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने तहसीलदार कार्यालय पहुंचकर एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा।

उन्होंने चरागाह भूमि से अवैध क्रेशर व झोपड़ियों को हटवाने की मांग की।ग्रामीणों का कहना है कि खसरा नंबर 2796 से लेकर आबादी क्षेत्र खसरा नंबर 2296 तक फैली चारागाह भूमि पर कुछ बाहरी लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। इन लोगों ने न केवल चारागाह भूमि पर झोपड़ियों और क्रेशर लगा लिए हैं, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को इस क्षेत्र में अपने पशु चराने से रोक भी दिया है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कब्जाधारियों ने दबंगई दिखाते हुए पशु चराने वाले ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार किया। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि खनन माफियाओं ने गांव के कुछ पशुपालकों की बकरियों पर डंडों से हमला किया, जिससे कई बकरियों घायल हो गईं। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में भय और रोष का माहौल बना हुआ है।ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि गांव की सार्वजनिक चारागाह भूमि है, जिस पर पूरे गांव के पशु निर्भर हैं। यदि यह भूमि अवैध कब्जे में चली गई तो पशुपालकों को अपने पशुओं के लिए चारे की भारी समस्या का सामना करना पड़ेगा।

ग्रामीण प्रतिनिधियों ने तहसीलदार से मांग की कि इस चरागाह भूमि को तत्काल अतिक्रमण मुक्त करवाया जाए और खनन माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए तहसीलदार ने हल्का पटवारी को मौके पर जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।शिकायत देने वाले ग्रामीणों में ओ.पी. खेड़ी, सुनील खेड़ी, गणेश मीना, हरिशंकर मीना, धारा सादपुरा, तुलसी मीना, हेमराज मेरेड़ा सहित कई अन्य ग्रामीण मौजूद थे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि चरागाह भूमि को बचाने के लिए स्थायी सीमांकन कर चिह्निकरण पत्थर लगवाए जाएं, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस भूमि पर दोबारा कब्जा न कर सके।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/karauli/todabhim/news/occupation-of-pasture-land-in-khedi-anger-among-people-136294521.html

Wednesday, 29 October 2025

हिंडौली में चारागाह भूमि से अतिक्रमण चिह्नित करने के निर्देश:उपखंड अधिकारी ने कहा- प्रभावित किसानों की समस्या को दे प्राथमिकता

 

हिण्डौली में उपखंड अधिकारी शिवराज मीणा की अध्यक्षता में उपखंड कार्यालय में साप्ताहिक ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में विभिन्न विभागों के कार्यों, योजनाओं की प्रगति और आमजन की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में अतिक्रमणों की समीक्षा

उपखंड अधिकारी मीणा ने तहसीलदार हिण्डौली और पंचायत समिति विकास अधिकारी से सिवायचक और चारागाह भूमि पर हो रहे अतिक्रमणों की समीक्षा की। उन्होंने इन अतिक्रमणों को तत्काल चिह्नित करने और उन्हें स्थायी स्वरूप लेने से रोकने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।

अतिक्रमणों को चिह्नित करने के निर्देश

इसके साथ ही बिजली निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अतिक्रमित भूमि पर विद्युत कनेक्शन जारी करने से पहले भूमि का सत्यापन अनिवार्य रूप से करें। बैठक में पंचायत समिति के विकास अधिकारी को सामाजिक सुरक्षा पेंशन और पालनहार योजना के सत्यापन कार्य शीघ्र पूरा करने तथा लाभार्थियों को समय पर सहायता राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। खाद्य सुरक्षा योजना के 1100 से अधिक लंबित आवेदनों की गहन जांच कर रिपोर्ट जल्द भेजने को भी कहा गया।

किसानों को राहत देने को बताया प्राथमिकता

उपखंड अधिकारी मीणा ने आपदा प्रबंधन (एसडीआरएफ) के लंबित मामलों, डी आईएमएस पोर्टल पर सहायता से जुड़े प्रकरणों और राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं की स्थिति पर भी जानकारी ली। उन्होंने हाल ही में हुई वर्षा से फसलों को हुए नुकसान का जायजा लेते हुए कृषि विभाग को प्रभावित किसानों के फसल बीमा दावे और राज्य सरकार से राहत सहायता के प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए।

राजस्व, पंचायतीराज, कृषि और अन्य विभागों के कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बैठक में आगामी बूंदी उत्सव 2025 के सफल आयोजन को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान तहसीलदार रतनलाल मीणा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

मूल ऑनलाइन लेख -https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/bundi/hindoli/news/to-mark-encroachment-from-siwaychak-pasture-land-in-hindauli-136282602.html

केलाकाबास में चारागाह भूमि से अतिक्रमण चला पीला पंजा:चारागाह भूमि पर बने कच्चे-पक्के निर्माणों को ध्वस्त किया

 

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में शिकायत के बाद प्रशासन ने बुधवार 29 अक्टूबर को आंधी तहसील के केलाकाबास ग्राम पंचायत स्थित चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की। यह कार्रवाई आंधी तहसीलदार प्रांजल कंवर के नेतृत्व में की गई। ग्राम पंचायत केलाकाबास की चारागाह भूमि पर कई वर्षों से कुछ लोगों द्वारा अवैध कब्जे किए गए थे।

ग्रामीणों ने इसकी शिकायत स्थानीय प्रशासन को बार-बार दी थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अंततः ग्रामीणों द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। तहसील प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की।

इस दौरान लगभग दो जेसीबी मशीनों और कई ट्रैक्टरों की मदद से चारागाह भूमि पर बने कच्चे-पक्के निर्माणों को ध्वस्त किया गया। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए रायसर थाना प्रभारी हरदयाल मीणा पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर तैनात रहे। आंधी तहसीलदार प्रांजल कंवर ने बताया कि यह कार्रवाई उच्च अधिकारियों के निर्देश और मुख्यमंत्री कार्यालय के संज्ञान के बाद की गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर उसे उसके मूल स्वरूप में लाना है।

ग्रामीणों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम काफी समय से लंबित था और अब उम्मीद है कि चारागाह भूमि का उपयोग पशुओं के हित में किया जा सकेगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में सरकारी भूमि पर दोबारा अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस दौरान आंधी नायब तहसीलदार श्रवण कुमार मीणा, रायसर गिरधावर पूजा मीणा, बहलोड़ पटवारी दीनदयाल मीणा, रायसर चंदा बुनकर, माथासुला पटवारी कालूराम मीणा, अतिरिक्त विकास अधिकारी बाबूलाल मीणा, वीडीओ देशराज बैरवा, आंधी टीआरडी बीरबल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaipur/aandhi/news/yellow-claw-moves-to-encroach-pasture-land-in-kelakabas-136282864.html

चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग:मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

प्रतापगढ़ जिले की छोटीसादड़ी तहसील के ग्राम भाटखेड़ा, पंचायत गागरोल के ग्रामीणों ने बुधवार को मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने गांव की चारागाह भूमि पर हो रहे अवैध कब्जों को तुरंत हटाने और असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि गांव की चारागाह (चरनोट) भूमि पर कुछ प्रभावशाली लोगों ने अवैध कब्जे कर रखे हैं। इन कब्जाधारियों ने न केवल भूमि पर निर्माण कर लिया है, बल्कि उसे दूसरों को बेच भी रहे हैं।जब ग्रामीण अपने पशुओं को चराने के लिए चारागाह पर ले जाते हैं, तो कब्जाधारी उन्हें भगा देते हैं। विरोध करने पर गाली-गलौच और मारपीट की धमकियां दी जाती हैं, जिससे गांव में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर पूर्व में भी कई बार सरपंच, सचिव और पटवारी को शिकायतें दी हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने 6 अक्टूबर 2025 को भी जिला कलेक्टर प्रतापगढ़ को ज्ञापन दिया था, मगर कार्रवाई न होने से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। आज दोपहर 4 बजे जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि मौके पर जांच कर चारागाह भूमि को मुक्त करवाया जाए। साथ ही, कब्जाधारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और ग्रामवासियों को राहत प्रदान की जाए।

ज्ञापन देने वालों में किशोर पाटीदार, रामनिवास, मुकेश शर्मा, दिलखुश, शिवलाल, दीपक, बाबूलाल पाटीदार, टिकेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल थे।

मूल ऑनलाइन लेख -https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/pratapgarh/news/demand-to-remove-encroachment-from-pasture-land-136283839.html

Tuesday, 28 October 2025

खटवा गांव में चारागाह भूमि पर जेसीबी चलने से भड़के ग्रामीण — गौसेवकों में आक्रोश, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग


लालसोट । उपखंड क्षेत्र के खटवा गांव में यज्ञशाला के पास स्थित चारागाह भूमि पर जेसीबी चलाकर बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए जाने से ग्रामीणों और गौसेवकों में भारी नाराजगी फैल गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि वर्षों से गौमाता के चारा-पानी के लिए उपयोग में ली जाती रही है, लेकिन अब कुछ लोगों ने अवैध रूप से इस भूमि को क्षतिग्रस्त कर दिया है। गौसेवा स्थल पर जेसीबी चलने से भड़के ग्रामीण: गौसेवकों ने बताया कि यह चारागाह भूमि हमेशा से खाली रही है और लंबी वायरस (कोविड काल) के दौरान इस भूमि को गौमाता के संरक्षण स्थल के रूप में इस्तेमाल किया गया था। उस समय गौसेवक प्रतिदिन गायों के लिए चारा और पानी की व्यवस्था करते थे।उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में कुछ भू-माफिया तत्वों ने इस भूमि पर जेसीबी चलाकर गहरे गड्ढे खोद दिए, जिससे भूमि बर्बाद हो गई और अब वहां पशुओं के लिए चारा-पानी की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है।

ऑनलाइन शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई:

ग्रामवासियों ने बताया कि इस अवैध गतिविधि की शिकायत ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक कोई प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा और न ही किसी के खिलाफ कार्रवाई की गई।इस लापरवाही को लेकर ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि चारागाह भूमि गांव की सार्वजनिक संपत्ति है और इस पर किसी प्रकार का अतिक्रमण या तोड़फोड़ असहनीय है।

माली महासभा के पदाधिकारियों और गौसेवकों ने किया विरोध प्रदर्शन:

मौके पर माली महासभा लालसोट के महासचिव कांजी सैनी, नानूराम, कमलेश भाई, आशाराम सैनी, जीतू सैनी, धनुष राज, गोतम सैनी सहित अन्य गौसेवक और ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने एकजुट होकर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

गौसेवकों की मांग — चारागाह भूमि का सीमांकन और संरक्षण:

गौसेवकों ने कहा कि चारागाह भूमि सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि गौसेवा की आस्था और परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल इस भूमि का सीमांकन कर बाड़बंदी करवाई जाए, ताकि भविष्य में कोई इस पवित्र स्थल को नुकसान न पहुंचा सके।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे गांव स्तर पर धरना प्रदर्शन कर आंदोलन करेंगे।गौसेवकों ने कहा कि यह लड़ाई केवल चारागाह भूमि की नहीं, बल्कि गौमाता की सेवा और संरक्षण की भावना की रक्षा के लिए है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.khaskhabar.com/local/rajasthan/dausa-news/news-villagers-in-khatwa-village-are-enraged-by-the-use-of-a-jcb-on-pasture-land%E2%80%94cow-protectors-are-angry-demanding-strict-action-from-the-administration-news-hindi-1-763237-KKN.html

मैनपुरी में चारागाह भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई गई:उपजिलाधिकारी के निर्देश पर पहल, नगला देवी में तहसील प्रशासन की कार्रवाई

 

मौके पर मौजूद पुलिस व लोग।

तहसील प्रशासन ने उपजिलाधिकारी संध्या शर्मा के निर्देश पर नगला देवी ग्राम पंचायत में चारागाह की 85 बीघा भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। यह कार्रवाई सोमवार देर शाम तक चली।

ग्राम पंचायत नगला देवी में गौशाला के पास कुल 150 बीघा भूमि भू-अभिलेखों में चारागाह के रूप में दर्ज है। इसमें से लगभग 115 बीघा जमीन पर लंबे समय से अवैध कब्जा था। राजस्व विभाग द्वारा पहले भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन कुछ समय बाद फिर से कब्जा कर लिया जाता था।

नायब तहसीलदार अजय कुमार के नेतृत्व में राजस्व टीम और भारी पुलिस बल ट्रैक्टरों के साथ नगला देवी गौशाला के पास पहुंचा। अतिक्रमणकारियों में इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया।

भूलेख निरीक्षक रामप्रसाद सैनी ने लेखपाल राज कपूर वर्मा, अरविंद कुमार, कौशलेंद्र सिंह, सचिन कुमार और नवनीत मौर्य को खाता संख्या 01,111,093 की पैमाइश करने का निर्देश दिया। शाम 6 बजे तक चली नाप-जोख के बाद लगभग 85 बीघा जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। अवैध कब्जेधारियों द्वारा बनाई गई मेड़ों को जुतवाकर भूमि को एक चक का रूप दिया गया।

अवैध कब्जाधारकों को सख्त चेतावनी दी गई है कि यदि उन्होंने दोबारा अतिक्रमण करने का प्रयास किया, तो उनके खिलाफ नियमानुसार मुकदमा दर्ज कर जुर्माना वसूला जाएगा। इस अभियान में मुख्य आरक्षी कीरतपाल सिंह के नेतृत्व में एक दर्जन पुलिसकर्मी शामिल थे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/uttar-pradesh/mainpuri/bewar/news/grazing-land-in-mainpuri-was-freed-from-encroachment-136276663.html


Sunday, 26 October 2025

मांडल क्षेत्र में चारागाह पर अवैध मिट्टी खनन का मामला:ग्रामीणों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा, कार्रवाई की मांग

 

मांडल तहसील के हिसनिया सहित कई गांवों में चारागाह भूमि पर अवैध मिट्टी खनन का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने इस अवैध खनन का विरोध किया, लेकिन खनन माफिया ने उनकी बात को नजरअंदाज करते हुए काम जारी रखा।

इसके बाद शनिवार शाम को आक्रोशित ग्रामीणों ने मांडल तहसीलदार उत्तम जांगिड़ को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।

तहसीलदार उत्तम जांगिड़ ने ग्रामीणों से ज्ञापन मिलने के बाद आश्वासन देते हुए कहा कि राजस्व और पुलिस विभाग की एक संयुक्त टीम शीघ्र ही मौके पर भेजी जाएगी। अवैध खनन में लिप्त व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संबंधित माफियाओं को पाबंद किया जाएगा।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की अनदेखी के कारण खनन माफिया के हौसले बुलंद हैं और वे सरकारी भूमि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/bhilwara/mandal/news/case-of-illegal-soil-mining-on-pasture-land-in-mandal-area-136258049.html

Saturday, 25 October 2025

सुनेल और सामरिया में ग्रामीण सेवा शिविर:गौ चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग, विहिप ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन


सुनेल और सामरिया ग्राम पंचायतों में ग्रामीण सेवा शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में ग्रामीणों ने जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाया और कई पट्टे व प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

इसी दौरान, ग्रामीणों, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल ने गौ चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग को लेकर तहसीलदार और एसडीएम को ज्ञापन सौंपे।

सुनेल ग्राम पंचायत के अंबेडकर भवन, सलोतिया रोड पर आयोजित शिविर में ग्रामीणों और संगठनों ने सुनेल तहसीलदार अजहर बेग को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में बताया गया कि सुनेल ग्राम पंचायत में लगभग 355 बीघा गौ चारागाह भूमि है, जिस पर दबंग लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। इससे बेसहारा गोवंशों के चरने के लिए जगह नहीं बची है।

गोवंशों पर अत्याचार का भी जिक्र किया

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि गोवंशों पर अत्याचार के मामले भी सामने आए हैं, जिनमें उन्हें धारदार हथियारों या लाठी-डंडों से घायल किया जाता है। सुनेल नगर में एक गोशाला है, जिसमें लगभग 450 गोवंशों का संधारण होता है, लेकिन इसके बावजूद सैकड़ों गोवंश सड़कों पर घूम रहे हैं।

जय श्री कृष्ण गौशाला समिति सुनेल के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार सोनी ने बताया कि गोशाला अपनी क्षमता के अनुरूप गोवंशों का संधारण कर रही है, लेकिन अतिक्रमण के कारण उन्हें चराने के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने गौ चारागाह भूमि को मुक्त करने का आह्वान किया।

ग्राम विकास अधिकारी सुनेल, सुरेश कुमार जैन ने भी तहसीलदार को चारागाह भूमि की स्थिति पर चिंता व्यक्त की और संबंधित विभाग को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का आग्रह किया। इधर, ग्राम पंचायत सामरिया में भी चारागाह भूमि को मुक्त कराने और अवैध खनन रोकने के संबंध में एसडीएम दिनेश कुमार को ज्ञापन सौंपा गया।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/sunel/news/rural-service-camps-in-sunel-and-samaria-136253014.html

Thursday, 23 October 2025

दौसा के चरागाह भूमि आवंटन के विरोध में धरना जारी:मशाल जुलूस और काली दीपावली से जताया नाराजगी, आवंटन को रद्द करने की मांग

दौसा के कुतकपुर गांव में ग्रामीणों का एक माह से धरना प्रदर्शन जारी है।

दौसा के महवा उपखंड क्षेत्र के कुतकपुर गांव में चरागाह भूमि को बिजली जीएसएस के लिए आवंटित करने के विरोध में ग्रामीणों का धरना पिछले एक माह से जारी है। बावजूद इसके, प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों में आक्रोश है।

मशाल जुलूस और काली दीपावली से जताया विरोध

पिछले दिनों ग्रामीणों ने मशाल जुलूस निकालकर नारेबाजी की थी और काली दीपावली मनाकर प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि जब तक आवंटन रद्द नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

ग्राम सभा की सहमति के बिना आवंटन का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन ने ग्राम सभा की सहमति के बिना चारागाह भूमि को बिजली जीएसएस के लिए आवंटित कर दिया। जबकि नियमानुसार ग्राम सभा की सहमति जरूरी होती है। इस आवंटन से किसानों और पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में जब तक भूमि का आवंटन रद्द नहीं होगा, तब तक अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।

संघर्ष समिति की मांग

मामले को लेकर 5 दिन पहले ग्रामीणों ने मशाल जुलूस निकाला था। जुलूस गांव से शुरू होकर हिंडौन रोड़ से होते हुए विधायक सेवा केंद्र तक पहुंचा, जहां से वापस चरागाह भूमि पहुंचकर सम्पन्न हुआ। जुलूस में शामिल युवाओं ने चरागाह आवंटन को रद्द करने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था। यहां के लोगों की मुख्य मांग है कि चरागाह आवंटन को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।

धरने में शामिल ग्रामीण

धरने में एडवोकेट भंवर सिंह, शीशराम पटेल, चतरे पटेल, गिलाहड़ी पटेल, रामभान गुर्जर, रणजीत बैंसला, विजय सिंह पटेल, बच्चू सिंह और गोविंद पटेल समेत 33 पंच-पटेल लगातार भाग ले रहे हैं।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/dausa/news/protest-in-dausa-for-a-month-136235625.html

Saturday, 18 October 2025

Rajasthan: 'गोचर बचाओ' को लेकर महाआंदोलन के संकेत, संतों ने सरकार को चेताया; कहा- रेल रोको या बीकानेर बंद से पीछे नहीं हटेंगे

यह आंदोलन अब केवल भूमि के एक टुकड़े को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आस्था, पर्यावरण, गौवंश और संस्कृति की रक्षा का सवाल बन गया है.

Rajasthan News: बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा गोचर और ओरण भूमि के अधिग्रहण (Acquisition) के खिलाफ अब जनमानस और संत समाज पूरी तरह एकजुट हो गया है. शनिवार को रानी बाजार स्थित आनंद आश्रम में संतों का एक विशाल सम्मेलन आयोजित किया गया, जहां से 'गौचर ओरण बचाओ संघर्ष समिति' ने सरकार को दो-टूक चेतावनी जारी की है. समिति ने स्पष्ट कहा है कि यदि गोचर भूमि के अधिग्रहण का आदेश तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो संतों के सान्निध्य में एक 'गोचर बचाओ महाआंदोलन' शुरू किया जाएगा, जिसमें किसी भी हद तक जाने से परहेज नहीं किया जाएगा.

'गोचर जीवन का आधार है'

इस आंदोलन को सबसे बड़ा समर्थन संत समाज से मिल रहा है, जिन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि गोचर भूमि की किस्म बदलने का कोई भी प्रयास 'प्राणी मात्र' के हितों पर सीधा हमला माना जाएगा. महंत क्षमाराम महाराज ने इस मुद्दे की गंभीरता बताते हुए कहा, 'बीकानेर की गोचर भूमि केवल जमीन नहीं है, बल्कि गौवंश सहित समस्त प्राणी मात्र के जीवन का आधार है. यदि सरकार इसकी किस्म बदलने की कोशिश करती है, तो यह प्राणी मात्र के हितों पर सीधा कुठाराघात होगा. अंधे विकास की यह दौड़ विनाश को आमंत्रित कर रही है.'

'किसी भी कीमत पर हानि बर्दाश्त नहीं'

वहीं, स्वामी विमर्शानंद गिरि ने सरकार को चेताते हुए कहा, 'गौ, गोचर, गंगा, गीता, गायत्री और गोरी हमारी संस्कृति के प्रतीक हैं. बीकानेर, नथानियान, गंगाशहर, भीनासर, उदयरामसर सहित 188 गांवों की गोचर भूमि की हानि किसी भी कीमत पर नहीं होने दी जाएगी.'

'जरूरत पड़ी तो संत धरना-महापड़ाव करेंगे'

उधर, संत किशोरीदास महाराज ने भी जनशक्ति का हवाला देते हुए कहा, 'गोचर हमारी आस्था, धर्म और पर्यावरण का आधार है. यह भूमि सरकारी नहीं, बल्कि बीकानेर की जनता के पैसों से छुड़वाई गई है. यदि आवश्यकता पड़ी, तो हजारों संत बीकानेर में धरना और महापड़ाव करेंगे.'

'समय रहते आदेश नहीं बदला तो...'

योगी विलास नाथ महाराज ने इस आंदोलन को जनआंदोलन बताते हुए कहा कि सरकार ने समय रहते आदेश नहीं बदले तो संत समाज भी विरोध के लिए सड़क पर उतरने को तैयार है.

समिति का ऐलान- अब आर-पार की लड़ाई

संघर्ष समिति के संयोजक शिवकुमार गहलोत ने बताया कि जनता की भावनाओं को प्रशासन लगातार नजरअंदाज कर रहा है. गहलोत ने जानकारी दी कि बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) के इस अधिग्रहण के खिलाफ अब तक 37 हजार से अधिक आपत्तियां आधिकारिक रूप से दर्ज करवाई जा चुकी हैं. उन्होंने ऐलान किया कि यदि जल्द ही सरकार ने इस मुद्दे पर जनता के पक्ष में निर्णय नहीं लिया, तो संगठन आर-पार की लड़ाई लड़ेगा. इसमें रेल रोको, बीकानेर बंद या आमरण अनशन जैसे सख्त कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटा जाएगा.

'पूर्व मंत्री समेत 6 विधायकों का मिला समर्थन'

गहलोत ने यह भी बताया कि इस आंदोलन को पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी, कोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी और बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास सहित छह विधायकों का समर्थन मिल चुका है. हालांकि, उन्होंने एक राज्य मंत्री और एक विधायक पर मौन साधने का आरोप लगाया. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ये नेता गोचर भूमि बचाने के लिए पहल नहीं करते हैं, तो भविष्य में जनता उनके सरकारी कार्यक्रमों का कड़ा विरोध करेगी.

आसान शब्दों में समझें पूरा मामला?

गोचर भूमि गांवों और कस्बों के पास की वह सार्वजनिक जमीन होती है जो विशेष रूप से गायों और अन्य पशुओं के चरने (चारागाह) के लिए हमेशा के लिए सुरक्षित रखी जाती है. इसे सरकारी रिकॉर्ड में 'चरागाह' या 'चरनोई' कहा जाता है. वहीं, ओरण भूमि गोचर भूमि की तरह ही होती है, लेकिन इससे गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी होती है. यह अक्सर किसी स्थानीय देवता के नाम पर आरक्षित होती है और यहां पेड़ काटना या निर्माण करना सख्त मना होता है. ये दोनों जमीनें गौवंश के जीवन का आधार हैं, गांव की संस्कृति का हिस्सा हैं, और पर्यावरण को संतुलित रखने में मदद करती हैं, इसीलिए इनका अधिग्रहण किए जाने पर इतना बड़ा विरोध होता है.

मूल ऑनलाइन लेख - https://rajasthan.ndtv.in/rajasthan-news/gochar-land-row-saints-threaten-rail-roko-stir-against-bda-acquisition-in-bikaner-9477847

Friday, 17 October 2025

बालौती में चरागाह भूमि से हटाया अतिक्रमण

भास्कर न्यूज| सपोटरा

ग्राम पंचायत बालौती में चारागाह भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को बुधवार को तहसीलदार दिलीप कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में पुलिस दल के साथ अतिक्रमण हटाया गया।

कार्यवाहक एसडीएम व तहसीलदार दिलीप कुमार अग्रवाल ने बताया कि ग्राम पंचायत बालौती की चारागाह भूमि खसरा नं. 617,618,632 और 1178 में कई लोगों ने अतिक्रमण कर फसल बो रखी है। जिसको राजस्व टीम के साथ सीमाज्ञान कराकर पुलिस थाना सपोटरा व कुडगांव के जवानों की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाया गया।

दूसरी ओर सीमाओं पर ग्राम पंचायत के सहयोग से जेसीबी चलाकर दो फिट गहरी नाली खुदवाई गई। इधर,ग्राम विकास अधिकारी को बालौती की अतिक्रमण मुक्त चारागाह भूमि के संरक्षण करने एवं भविष्य में अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए निर्देशित किया है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/karauli/sapotara/news/encroachment-removed-from-pasture-land-in-balauti-136181570.html

Thursday, 16 October 2025

खिलचीपुर में चारागाह भूमि से हरे पेड़ों की कटाई:पशु चारे पर भी संकट, पटवारी बोले- रोक लगाई कार्रवाई करेंगे

 

बालघाट तहसील के खिलचीपुर गांव में चारागाह भूमि से हरे पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है। कार्रवाई से नाराज ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन और राजस्व विभाग के खिलाफ प्रदर्शन कर आक्रोश व्यक्त किया है।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लगभग 200 बीघा चारागाह भूमि है, जिस पर कीकर के वृक्ष हैं। गांव के ही कुछ लोगों ने पेड़ों की कटाई की। सरकारी भूमि में बिना प्रशासन की अनुमति के पेड़ों की कटाई से पशु चारे पर भी संकट पैदा हो गया है।

हरे पेड़ों की कटाई रोकने की मांग

ग्रामीण संतराम, तेज सिंह और रामदयाल ने बताया कि पिछले कई दिनों से लगातार पेड़ों की कटाई हो रही है। इस बारे में प्रशासन को अवगत करवाया गया था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों ने इस संबंध में जिला कलेक्टर को शिकायत भेजकर हरे पेड़ों की कटाई रुकवाने की मांग की है।

गुरुवार को ग्रामीणों को जंगल में पेड़ कटाई की सूचना मिली, जिस पर कई लोग मौके पर पहुंचे और विरोध व्यक्त किया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि चारागाह भूमि पर हो रही पेड़ों की कटाई को तुरंत रुकवाकर आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

पटवारी बोले- पेड़ों की कटाई बंद करवा दी गई

हल्का पटवारी राजेश मीणा ने बताया कि ग्रामीणों के माध्यम से चारागाह भूमि पर पेड़ों की कटाई की जानकारी मिली थी। तहसीलदार के निर्देश पर मौके पर जाकर पेड़ों की कटाई बंद करवा दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/karauli/balghat/news/cutting-of-green-trees-from-pasture-land-in-khilchipur-136188077.html


200 बीघा चारागाह भूमि से हटाया अवैध अतिक्रमण:आसींद के बानास गांव में प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर भूमि मुक्त कराई

आसींद क्षेत्र की रघुनाथपुरा पंचायत के बानास गांव में 200 बीघा चारागाह भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया।

आसींद क्षेत्र की रघुनाथपुरा पंचायत के बानास गांव में बुधवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 200 बीघा चारागाह भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया। ग्रामीणों की लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया।

प्रशासन ने अवैध रूप से किए गए निर्माणों और कब्जों पर बुलडोजर चलाकर भूमि को खाली कराया। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो सरकारी और सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण करते हैं।जानकारी के अनुसार, बानास गांव में चारागाह भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे हो गए थे, जिससे पशुओं के लिए आरक्षित यह भूमि लगातार सिकुड़ रही थी।

200 बीघा भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद प्रशासन ने दोबारा कब्जा न करने की चेतावनी दी।

ग्रामीणों ने इस संबंध में लगातार उच्च अधिकारियों से शिकायतें की थीं। अतिक्रमण हटाने की इस कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन की ओर से पटवारी, गिरदावल और ग्राम विकास अधिकारी सहित अन्य राजस्वकर्मी मौजूद थे, जिन्होंने सीमांकन के अनुसार कब्जों को हटवाया।

लगभग 200 बीघा भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद, प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि भविष्य में इस भूमि पर कोई नया कब्जा न हो। प्रशासन ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए सख्त कदम जारी रहेंगे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/bhilwara/asind/news/200-bigha-pasture-land-in-banas-village-of-asind-136177832.html


Wednesday, 15 October 2025

किशनगंज में चारागाह भूमि होगी अतिक्रमण मुक्त:कृषि मंडी और GSS के आसपास किया सीमा ज्ञान


किशनगंज में अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। नाहरगढ़ में चारागाह भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन ने सीमा ज्ञान की कार्रवाई शुरू कर दी है। कई संगठनों और ग्रामवासियों की मांग पर ग्राम पंचायत ने यह कदम उठाया है।

बता दें ग्राम पंचायत कृषि मंडी और GSS के आसपास की चारागाह भूमि का सीमा ज्ञान करवा रहा है। पटवारी ने तहसीलदार के मौखिक आदेश पर कार्रवाई पूरी कर ग्राम पंचायत को रिपोर्ट सौंप दी है।

सीमा ज्ञान के बाद हटेगा अतिक्रमण

ग्राम विकास अधिकारी जगदीश चंद सहरिया ने बताया कि सीमा ज्ञान के बाद अब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। पुलिस बल के लिए प्रशासन से अनुरोध किया जाएगा।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/baran/kishangarh/news/kishanganjs-pasture-land-will-be-encroachment-free-136178400.html

सामुदायिक नेतृत्व का उत्सव - चारागाह विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मान समारोह


झालावाड़। जिला परिषद झालावाड़, बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड जयपुर, आईटीसी मिशन सुनहरा कल तथा फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को जिले में “सामुदायिक नेतृत्व का उत्सव” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक नेतृत्व को प्रोत्साहित करने तथा चारागाह एवं सामुदायिक भूमि विकास में सक्रिय योगदान देने वाले नेताओं को सम्मानित करने के उद्देश्य से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में राजेन्द्र निमेष ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए हुए सभी शामलात लीडरों का स्वागत करते हुए कहा कि “चारागाह और सामुदायिक भूमि विकास केवल पर्यावरणीय सुधार का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका की सुरक्षा का आधार भी है।” उन्होंने चारागाह विकास के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे ग्राम स्तरीय लीडर के योगदान की सराहना की और उन्हें सम्मानित करने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी द्वारा सुझाए गए वृक्षारोपण के “चार स्वर्ण नियम” - सही समय, सही प्रजाति, सही स्थान और सही विधि का पालन करने की अपील की।

ग्राम सभा एवं परिसंपत्ति रजिस्टर पर बल

अपने उद्बोधन में उन्होंने आगामी 2 अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभाओं में सभी ग्राम पंचायतों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि ग्राम की सामुदायिक भूमि एवं चारागाहों को परिसंपत्ति रजिस्टर में दर्ज किया जाए, ताकि इन भूमियों की सुरक्षा और विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी वार्षिक योजनाओं (प्रस्तावों) में चारागाह विकास कार्यों को सम्मिलित किया जाना चाहिए ताकि सतत विकास का मार्ग प्रशस्त हो सके।

इसके पश्चात ब्लॉक स्तर से चयनित शामलात लीडरों को प्रमाण पत्र एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों में ग्राम पंचायतों के सरपंच, चारागाह समिति सदस्य एवं ग्रामीण स्वयंसेवक शामिल थे जिन्होंने अपने क्षेत्र में सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण, चारागाह सुधार एवं वृक्षारोपण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किए हैं।

अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। समारोह का समापन सामूहिक संकल्प के साथ हुआ - कि जिले में सामुदायिक नेतृत्व को और सशक्त बनाया जाएगा तथा चारागाह एवं बंजर भूमि विकास के कार्यों को जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी मनोहर थाना कैलाश मीणा, अधिशाषी अभियंता झालरापाटन रमेश तथा प्रशासक खारपा ग्राम पंचायत चंद्रकांत जी उपस्थित रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.khaskhabar.com/local/rajasthan/jhalawar-news/news-celebrating-community-leadership---felicitation-ceremony-for-outstanding-contributions-in-the-field-of-pasture-development-news-hindi-1-760764-KKN.html

एसडीएम के बुलडोजर से 382 बीघा चरागाह भूमि अतिक्रमण मुक्त:पिड़ावा उपखण्ड के सिरपोई गांव में चला बुलडोजर

पिड़ावा उपखण्ड के सिरपोई गांव में 382 बीघा चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। उपखण्ड अधिकारी (एसडीएम) दिनेश कुमार मीणा के निर्देश पर राजस्व, ग्राम पंचायत और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने बुलडोजर चलाकर अवैध कब्जों को ध्वस्त किया।

यह कार्रवाई ग्रामीणों द्वारा एसडीएम को दिए गए एक आवेदन के बाद की गई। सिरपोई में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर के दौरान ग्रामीणों ने एसडीएम मीणा को 382 बीघा चारागाह भूमि पर हुए अतिक्रमण की जानकारी दी थी। एसडीएम ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सात दिन के भीतर सीमा ज्ञान करवाकर अतिक्रमण हटाने का आश्वासन दिया था।

एसडीएम दिनेश कुमार मीणा के आदेश पर तहसीलदार अजहर बैग के निर्देशन में यह अभियान चलाया गया। राजस्व विभाग, ग्राम पंचायत विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। टीम ने चारागाह की जमीन पर बने सभी अस्थाई और स्थायी अतिक्रमणों को बुलडोजर की मदद से हटा दिया।

एसडीएम मीणा ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को चारागाह, खेल मैदान, तालाब और अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों की नियमित निगरानी करने और आवश्यकतानुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन की इस सख्ती से ग्रामीणों में यह संदेश गया है कि अब किसी भी प्रकार का अतिक्रमण सहन नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे सरकारी भूमि की सुरक्षा में सहयोग करें और किसी भी अतिक्रमण की सूचना तत्काल दें।

इस कार्रवाई के लिए गठित टीम में कानूनगो नवल किशोर, पटवारी दिनेश कुमार गुर्जर, देवीलाल नागर, प्रियंका सैनी, प्रशासक हेमंत कुमार मेहर, ग्राम विकास अधिकारी सुन्दर लाल जाट और पुलिस हैडकोनिस्टेबल गौतम सहित आधा दर्जन संतरी मौजूद रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/sunel/news/sdms-bulldozer-frees-382-bigha-pasture-land-from-encroachment-136178363.html

प्रशासन ने नगर फोर्ट में चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाया:तहसीलदार बोले-भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं

नगर फोर्ट में प्रशासन ने खसरा नंबर 2396 स्थित चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटा दिया है। यह कार्रवाई ग्राम पंचायत क्षेत्र में की गई।

जानकारी के मुताबिक, राजा मुचकन्देश्वर मंदिर के पीछे स्थित इस सरकारी भूमि पर कुछ दिन पहले एक अज्ञात व्यक्ति ने खंभे और तार जाली लगाकर कब्जा कर लिया था।

मामले का संज्ञान लेते हुए नगर फोर्ट के तहसीलदार रामधन मीना ने तत्काल कार्रवाई की। पुलिस बल की सहायता से अतिक्रमण को हटाया गया। इस दौरान ग्राम पंचायत नगर फोर्ट ने आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए, और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।

तहसीलदार मीना ने बताया कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/tonk/nagarfort/news/the-administration-removed-encroachment-from-pasture-land-in-nagar-fort-136180035.html

Tuesday, 14 October 2025

बांध बारैठा में 68 बीघा चारागाह भूमि पर कब्जा

 भास्कर न्यूज | भरतपुर

बयाना उपखंड की ग्राम पंचायत बंध बरेठा की 68 बीघा चारागाह भूमि पर अवैध कब्जे के विरोध में सोमवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने जिला कलक्टर कमर चौधरी, संभागीय आयुक्त, पीडब्ल्यूडी और वन विभाग के अधिकारियों को अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि संबंधित भूमि वर्षों से गांव के पशुओं के चराने के लिए उपयोग में लाई जा रही है। इसी स्थान पर ग्रामवासी भैरो बाबा की पूजा-अर्चना भी करते हैं, जिससे यह क्षेत्र ग्रामीणों की आस्था का केंद्र बन चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि पास के गांव मडपुरिया के कुछ लोग इस चारागाह भूमि पर अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उनका इस भूमि से कोई संबंध नहीं है।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल प्रभाव से अतिक्रमण रोकने की कार्रवाई करे और चारागाह भूमि को मूल स्वरूप में सुरक्षित रखे। साथ ही चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से हस्तक्षेप कर पशुओं के चरने और धार्मिक गतिविधियों के लिए इस भूमि की सुरक्षा की मांग की।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/bharatpur/news/occupation-of-68-bigha-pasture-land-in-bandh-baraitha-136165832.html

आंधी तहसील में चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटा:भावनी गांव में प्रशासन से चलाया जेसीबी, ग्रामीणों ने की थी शिकायत


आंधी तहसील के ग्राम पंचायत भावनी में चरागाह भूमि पर हुए अतिक्रमण को तहसील प्रशासन ने हटा दिया है। यह कार्रवाई तहसीलदार प्रांजल कंवर के नेतृत्व में की गई।

ग्रामीणों की शिकायत पर हुई कार्रवाई

गांव भावनी के खसरा नंबर 52 पर स्थित चरागाह भूमि पर बार-बार अतिक्रमण की शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों के बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया।

कार्रवाई के दौरान तहसीलदार प्रांजल कंवर के साथ पटवारी नंदकिशोर शर्मा और रंगलाल मीणा सहित अन्य तहसील कर्मी मौके पर मौजूद थे। अतिक्रमण को जेसीबी से हटाया गया।

प्रशासन ने अतिक्रमियों को भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न करने की सख्त हिदायत दी है। इस कार्रवाई के बाद ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन का आभार व्यक्त किया।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaipur/aandhi/news/encroachment-removed-from-pasture-land-in-andhi-tehsil-136169716.html

Monday, 13 October 2025

सिंगोला गांव ने 400 बीघा चरागाह अतिक्रमण मुक्त करवाई, अब इसके जल... जंगल और जमीन से छेड़छाड़ पर जुर्माना तय

  • गांव का निर्णय- पेड़, टहनी या तना काटने पर 11-11 हजार, जलस्त्रोत से पानी चोरी की तो 5100 रुपए का जुर्माना लगेगा

भास्कर न्यूज | चित्तौड़गढ़/गंगरार

पर्यावरण एवं पशुधन संरक्षण के प्रति एक गांव की जागरूकता प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई। जहां ग्रामवासियों ने पहले तो 400 बीघा चरागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाया। फिर जल, जंगल व जमीन की सुरक्षा की शपथ ली। वो भी ऐसी कि इनके साथ किसी भी तरह के खिलवाड़ पर जुर्माना तय कर दिया।

यह उदाहरण गंगरार पंस मेंं ग्राम पंचायत कांटी का सिंगोला गांव का है। गांव की चारागाह विकास समिति ने शामलात भूमि, चारागाह, तालाब, नाडी व जोहड़ आदि की सुरक्षा के लिए जुर्माना राशि तय कर दी। समिति के रामपाल शर्मा के अनुसार ग्राम समुदाय ने मिलकर गत जुलाई में चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया था। अब सभी ने इस भूमि पर स्थित पेड़ों की सुरक्षा व संवर्धन विकास की शपथ ली।

तय हुआ कि पेड़ या पेड़ की टहनी या तना काटने पर 11-11 हजार रुपए व जल स्त्रोत से पानी चोरी करने पर 5100 रुपए जुर्माना लगेगा। यह राशि गांव के ही पशुओं पर ही खर्च होगी। चरागाह भूमि पर घासरोपण भी किया जाएगा ताकि पशुओं को चराने में सहायता मिल सके। जल, जंगल, जमीन व जैव विविधता सुरक्षा और संवर्धन विकास की शपथ सभा में पूर्व सरपंच गजराज सिंह चौहान, बदाम देवी, कैलाश गुर्जर, नगजीराम गुर्जर, भूरसिंह चौहान, सावंतसिंह, नारायण सिंह, लादूलाल गुर्जर, प्रहलाद गुर्जर, श्यामलाल गुर्जर, मांगू भील,रामचंद्र भांबी, रामपाल शर्मा , रतन भोपाजी कालूलाल तेली, मांगू सेवक, घीसा लाल सुथार कालू सिंह, कालूदास वैष्णव सहित सभी जाति समाज के लोग मौजूद रहे। सिंगोला गांव में 2020 में यह समिति बनी।

तब चारागाह भूमि पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा था। ग्रामीणों ने प्रशासन गांवों के संग अभियान 2021-22 में कार्रवाई की अर्जी दी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। लगातार पत्र लिखते रहे। सरकार ने सार्वजनिक भूमि प्रकोष्ठ की स्थापना कर कलेक्टर को अध्यक्ष बनाया तो ग्रामीणों ने फिर अर्जी लगाई। अब कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार ने चिन्हित अतिक्रमियों को नोटिस जारी किए। कुछ लोगों ने तो खुद कब्जे हटा दिए, लेकिन कुछ प्रभावशाली अतिक्रमियों ने उल्टा दबाव बनाने का प्रयास किया। ग्रामीण एकजुट रहे तो आखिरकार प्रशासन मैदान में आया। तीन दिन जेसीबी लगाकर मोतबीरों की मौजूदगी में चले अभियान में पूरी चरागाह जमीन अतिक्रमण मुक्त करवाई गई। अब उसकी पुख्ता सुरक्षा के लिए नियम बनाए। पहले गांव का कोई पशु अतिक्रमण शुदा भूमि पर चला जाता था तो उसे खदेड देते थे। ग्राम पंचायत भी मनरेगा सहित विकास कार्य नहीं कर पा रही थी। श्रमिकों को रोजगार नहीं मिलता था।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/chittorgarh/news/singola-village-freed-400-bighas-of-pastureland-from-encroachment-now-fines-have-been-imposed-on-tampering-with-the-forest-and-land-136158224.html

Sunday, 12 October 2025

गोटन के हरसोलाव चौराहे से अतिक्रमण हटाया:प्रशासन ने दोबारा ठेले नहीं लगाने की दी चेतावनी, ग्रामीणों के ज्ञापन सौंपने के बाद हुई कार्रवाई


गोटन के हरसोलाव चौराहे पर शनिवार को ग्राम पंचायत और पुलिस प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया। लंबे समय से सड़क और नाले के बीच सब्जी विक्रेताओं के अस्थायी ठेले लगे होने के कारण यातायात में बाधा आ रही थी और दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ था।

यह कार्रवाई ग्रामीणों की ओर से गोटन उप तहसील के नायब तहसीलदार के मार्फत अतिक्रमण हटाने के संबंध में ज्ञापन सौंपे जाने के बाद की गई। ज्ञापन में चौराहे पर बढ़ते अतिक्रमण से हो रही समस्याओं का उल्लेख किया गया था। स्थानीय प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर सड़क किनारे लगे सभी ठेले हटवाए। ठेले वालों को भविष्य में सड़क पर दोबारा अतिक्रमण न करने की सख्त चेतावनी भी दी गई।

गोटन ग्राम पंचायत के प्रशासक भंवरलाल जमेरिया ने बताया कि चौराहे की सफाई और सुचारु यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस कार्रवाई से राहगीरों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/nagaur/gotan/news/encroachment-removed-from-harsolav-intersection-in-gotan-136145411.html

कब्जे हटाएंगे, चारागाह के लिए जमीन बचाएंगे

 भास्कर न्यूज | जीजामगांव

ग्राम पंचायत मुरा में 9 अक्टूबर को विशेष ग्रामसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान भूमिहीन परिवारों को आबादी जमीन देने, अतिक्रमणकारियों के घर को 15 अक्टूबर के बाद तोड़ने, भोथली भाटा के जमीन को सुरक्षित कर बागवानी के लिए भूमि आरक्षित करने, चारागाह के लिए भूमि आरक्षित, श्मशान घाट के लिए भूमि आरक्षित, स्कूल के खेत के लिए भूमि आरक्षित करने पर चर्चा हुई। इसके अलावा भविष्य में अन्य शासकीय जमीन में अतिक्रमण न हो सके, शासकीय जमीन को सुरक्षित रखने के लिए चर्चा की गई। बाल विवाह पर प्रतिबंध बाल विवाह के खिलाफ चर्चा, पंचायत की आय-व्यय की जानकारी दी गई।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/dhamtari/jijamgaon/news/remove-encroachments-and-save-land-for-pasture-136150644.html

Friday, 10 October 2025

जैसलमेर में 70 हजार बीघा जमीन को बचाने के लिए कवायद शुरू, प्रशासन ने उठाया ये कदम

 Jailsamer News: जिला प्रशासन ने उपखण्ड अधिकारियों की निगरानी में जल संसाधन विभाग के अभियंता, पटवारी और भू-अभिलेख निरीक्षकों की संयुक्त टीमें गठित की हैं.

Jaisalmer Administration Action: जैसलमेर में लम्बे वक्त से चल रही ओरण, गोचर और परम्परागत जल स्त्रोतों को संरक्षित करने के लिए जिला प्रशासन ने कदम उठाया है. ओरण, आगोर, तालाब, नाड़ी, नदी-नाला जैसी पारंपरिक जल संपदाओं को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है. जिला प्रशासन ने उपखण्ड अधिकारियों की निगरानी में जल संसाधन विभाग के अभियंता, पटवारी और भू-अभिलेख निरीक्षकों की संयुक्त टीमें गठित की हैं. ये टीमें ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर सीमांकन, सर्वेक्षण और अभिलेख प्रविष्टि का कार्य कर रही हैं, ताकि इन धरोहरों को भविष्य में अतिक्रमण या अवैध उपयोग से बचाया जा सके.

47 गांवों के जलस्त्रोत के लिए अनुशंसा भेजी
अब तक 47 गांवों के पारंपरिक जल स्रोतों और उनके कैचमेंट एरिया की लगभग 70 हजार बीघा भूमि के प्रस्ताव जिला कलक्टर की अनुशंसा सहित राज्य सरकार को राजस्व रिकॉर्ड में इंद्राज के लिए भेजे जा चुके हैं. इनमें तहसील जैसलमेर के सुल्तानपुरा, चूंधी, अमरसागर, कुलधर, रामकुण्डा, मूलसागर, बडाबाग, पिथला, लिदरवा, हमीरा सहित दर्जनों गांव शामिल हैं.

भूमि को स्थायी रूप से सुरक्षित करने की कवायद
जल संरचनाओं की स्थायी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी. उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और राजस्व अमले की विशेष टीमें फील्ड में जाकर सीमांकन कार्य को प्राथमिकता से पूरा कर रही हैं. इस अभियान में स्थानीय ग्रामीणों और बुजुर्गों की सहभागिता को भी महत्वपूर्ण माना गया है. राजस्व टीमें परंपरागत ज्ञान और स्थानीय जानकारी के आधार पर सही स्थलों की पहचान कर रही हैं, जिससे जल स्रोतों और चारागाह जैसी भूमि को स्थायी रूप से सुरक्षित किया जा सके.

जैसलमेर विधायक छोटू सिंह भाटी ने कहा कि औरण, गोचर, नदी नाले, तालाब आदि प्राकृतिक धरोहरो का संरक्षण मेरी प्राथमिकता है. यह जैसलमेर के लिए एक ऐतिहासिक कदम है. 

मूल ऑनलाइन लेख - https://rajasthan.ndtv.in/rajasthan-news/jaisalmer-efforts-underway-to-save-70-000-bighas-of-land-action-taken-against-encroachment-9430565
 



दौसा की ग्राम पंचायतों में विकसित होंगे चारागाह:कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए रोल मॉडल बनाने के निर्देश

 

दौसा कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने चारागाह विकास कार्यों का निरीक्षण किया।

दौसा कलेक्टर देवेन्द्र कुमार ने शुक्रवार को लवाण पंचायत समिति क्षेत्र में चरागाह विकास कार्य का निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्देश दिए। ग्राम पंचायत नांगल गोविंद में महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत नवाचार करते हुए 8.58 लाख रुपए की स्वीकृति से किए गए चारागाह विकास कार्य का जायजा लिया। कलेक्टर ने कहा कि यह ग्राम पंचायत वर्तमान परिदृश्य में पौधारोपण कार्य में अग्रणी भूमिका निभा रही है, जो जिले में एक रोल मॉडल की तरह है।

मनरेगा अधिशासी अभियंता सीताराम मीणा ने चरागाह विकास कार्य के संबंध में बताया कि यहां चरागाह की 8 बीघा भूमि में नेपियर घास व 1 बीघा धामण घास, 1200 फलदार पौधे, 2000 मोरिंगा के पौधे, 500 छायादार पौधे इस वर्ष में लगाए गए हैं। ग्राम पंचायत द्वारा चरागाह में पूर्व के वर्षों में भी लगभग 6000 पौधे लगाये जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि चारागाह की गुणवत्ता में सुधार होने से पेड़ों की पत्तियां व छाया पशुओं के लिए उपयोगी होगी। साथ ही, पेड़ों से भूमि की नमी बनी रहेगी, जिससे पशुओं के लिए बेहतर घास तैयार होगी। फलदार पौधों से ग्राम पंचायत की निजी आय बढ़ेगी।

यहां चरागाह विकास के तहत मानसून के दौरान आंवला, जामुन, आम, बैर, अमरूद एवं अन्य छायादार-फलदार पौधे लगाए गए थे। इन पौधों की पुख्ता सुरक्षा, देखभाल एवं अच्छी वृद्धि देखकर कलेक्टर ने ग्राम पंचायत के प्रयास की सराहना की। साथ ही, उन्होंने ऐसे कार्यों का विस्तार करने के निर्देश दिए, ताकि ग्राम पंचायत की निजी आय का स्रोत विकसित हो सके।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/dausa/news/pastures-of-dausas-gram-panchayats-will-be-developed-136139010.html

बामनिया खेड़ी में चारागाह भूमि अतिक्रमण मुक्त:सेवा शिविर के दौरान कलेक्टर के आदेश पर ग्रामीणों ने स्वेच्छा से हटाया कब्जा

 

झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र स्थित ग्राम बामनिया खेड़ी में चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाया गया है। यह कार्रवाई जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ के आदेश और उपखंड अधिकारी पुष्कर मित्तल के निर्देशन में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर के दौरान की गई।

शिविर में मौजूद तहसीलदार माधोलाल बैरवा की समझाइश के बाद, ग्रामीण मूलचंद (पिता माधोलाल) और प्रहलाद (पिता श्यामबिहारी), निवासी बड़बद ने चारागाह भूमि पर किया गया अपना कब्जा हटा लिया।

अतिक्रमण हटाने की इस पहल के लिए तहसीलदार ने दोनों ग्रामीणों का माला पहनाकर स्वागत और सम्मान किया। प्रशासन ने इस कदम को अनुकरणीय बताया है। साथ ही, अन्य ग्रामवासियों से भी सरकारी और चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखने की अपील की गई है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/akrela/news/grazing-land-in-bamniya-khedi-free-from-encroachment-136138251.html

Thursday, 9 October 2025

जैसलमेर: परंपरागत जल स्रोतों का संरक्षण और भूमि रिकार्ड में इंद्राज

जैसलमेर. जिला प्रशासन ने परंपरागत जल स्रोतों जैसे ओरण, आगोर, तालाब, नदी-नाला और नाड़ी की भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की कवायद की जा रही है।

जैसलमेर. जिला प्रशासन ने परंपरागत जल स्रोतों जैसे ओरण, आगोर, तालाब, नदी-नाला और नाड़ी की भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की कवायद की जा रही है। इस कार्य में उपखंड अधिकारियों की निगरानी में जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता, पटवारी और भू-अभिलेख निरीक्षक की संयुक्त टीमें सर्वेक्षण कर रही हैं। सर्वेक्षण के दौरान तहसील जैसलमेर के ग्राम सुल्तानपुरा, चूंधी, गणेशदास की ढाणी, अमरनगर, अमरसागर, माणपिया, कुलधर, मुंदरड़ी, रामकुण्डा, जीयाई, किशनघाट, मूलसागर, बडाबाग, धउवा, भोजासर, विजयनगर, गोरेरा, डलासर, पडिहारी, पिथला, लिदरवा, छत्रैल, रूपसी, मोकलाल, लीला पारेवर, जायण, जैसलमेर यूआइटी क्षेत्र, नगरपरिषद क्षेत्र, डाबला, जोधा, धनुवा, खींवसर, सेलल, मोती किलों की ढाणी, कंडियाला, बरमसर, हांसुआ, जोगा, पिपरला, पोलजी की डेयरी, हसन का गांव, भींया, भू, दरबारी का गांव, सडिया, सोरों की ढाणी और हमीरा क्षेत्र की लगभग सत्तर हजार बीघा भूमि शामिल है। जिला प्रशासन ने इन परंपरागत जल स्रोतों और चारागाह जैसी प्राकृतिक संपदाओं को विधिवत राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर भविष्य में अतिक्रमण और अवैध उपयोग से बचाने की ठोस कार्रवाई की है। जिला कलक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित निरीक्षण करें, अतिक्रमण हटाएं और भूमि को मूल स्वरूप में पुनः स्थापित करें।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.patrika.com/jaisalmer-news/jaisalmer-conservation-of-traditional-water-sources-and-inclusion-in-land-records-20012476


34 अतिक्रमियों को एक-एक माह की सजा

 भास्कर न्यूज | भवानीमंडी                    

चारागाह भूमियों पर अतिक्रमियों को विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान में कार्रवाई कर ग्राम पंचायत कुंडीखेड़ा के धारा-91 के अन्तर्गत नोटिस से तलब किया। मौके पर ही पटवार मंडल कुंडीखेड़ा के 31 तथा पटवार मंडल मांडवी के 3 कुल 34 अतिक्रमियों को जिन्होंने चरागाह की 138.10 बीघा भूमि पर अतिक्रमण कर फसलें काश्त कर रखी थी। उन्हें तहसीलदार अब्दुल हफीज ने एक-एक माह के सिविल कारावास व जुर्माने से दण्डित किया है। तहसीलदार ने बताया कि अगर अतिक्रमियों द्वारा कब्जा नहीं छोड़ा जाता है तो एलआरएक्ट की धारा 91(6) के तहत तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। इस दौरान अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी अर्पित जैन, पटवारी अर्शिल खान मौजूद रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/bhawani-mandi/news/34-trespassers-sentenced-to-one-month-each-136123319.html

Wednesday, 8 October 2025

जिला प्रशासन ने जल-स्रोतों एवं ओरण का शुरू किया सर्वे

जैसलमेर जिले में जल-स्रोतों, ओरण, आगोर, तालाब और नदी-नाला सहित उनके कैचमेंट क्षेत्रों का राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने का कार्य तेजी से जारी है।

जैसलमेर जिले में जल-स्रोतों, ओरण, आगोर, तालाब और नदी-नाला सहित उनके कैचमेंट क्षेत्रों का राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने का कार्य तेजी से जारी है। उपखंड अधिकारियों की निगरानी में सहायक और कनिष्ठ अभियंता जल संसाधन, पटवारी और भू-अभिलेख निरीक्षक संयुक्त रूप से फील्ड सर्वे कर रहे हैं। राजस्व अभिलेखों में परंपरागत जल स्रोतों और चारागाह जैसी प्राकृतिक संपदाओं को विधिवत दर्ज कर सुरक्षित करने की कार्रवाई मिशन मोड में आगे बढ़ाई जा रही है, ताकि भविष्य में अतिक्रमण या अवैध उपयोग की कोई संभावना न रहे।

फील्ड में उपखंड अधिकारियों, तहसीलदारों और राजस्व अमले की विशेष टीमें मौके का निरीक्षण कर सीमांकन और अभिलेखों में प्रविष्टि कर रही हैं। इस पहल से न केवल जल संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की पारंपरिक जल संरचनाओं और जैव विविधता के संरक्षण में भी नई ऊर्जा का संचार होगा।.सर्वे कार्य में लगभग 37 ग्राम पंचायतों के साथ नगरपरिषद और नगर विकास न्यास क्षेत्र के 10 गांवों एवं शहरी क्षेत्रों में भी पारंपरिक जल स्रोतों का निरीक्षण और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने का कार्य अंतिम चरण में है।

जिला प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ओरण, आगोर और अन्य जल-स्रोतों की स्थिति का नियमित निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार अतिक्रमण हटाया जाए और भूमि को मूल स्वरूप में पुनः स्थापित किया जाए। ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए बुजुर्गों के साथ सलाह-मशवरा कर सही भूमि एवं जल स्रोतों के संरक्षण की ठोस कार्रवाई की जा रही है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.patrika.com/jaisalmer-news/the-district-administration-started-the-survey-of-water-sources-and-forests-20009482


कुतकपुर में चरागाह आवंटन रद्द करने की मांग:ग्रामीणों का धरना जारी, बोले- बिना ग्राम सभा की सहमति के जमीन आवंटित की


महवा के ग्राम कुतकपुर में बुधवार को चामुंडा माता मंदिर पर ग्रामीणों का धरना 18वें दिन भी जारी रहा। ग्रामीण चारागाह भूमि के आवंटन का विरोध कर रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि जिला कलेक्टर ने ग्राम सभा की सहमति के बिना चारागाह भूमि को जीएसएस (ग्राम सेवा सहकारी समिति) के लिए आवंटित कर दिया है। उनका कहना है कि इस आवंटन से किसानों और पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

ग्रामीण इस आवंटन को रद्द करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

बुधवार को चारागाह बचाओ संघर्ष समिति के सदस्यों के साथ एडवोकेट भंवर सिंह, शीशराम पटेल, चतरे पटेल, गिलाहड़ी पटेल, रामभान गुर्जर, रणजीत बैंसला, विजय सिंह पटेल, बच्चू सिंह और गोविंद पटेल सहित कई अन्य लोग धरने पर मौजूद रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/dausa/mahwa/news/demand-for-cancellation-of-pasture-allotment-in-kutakpur-136122079.html

रामचंद्रपुरा में चारागाह भूमि पर अतिक्रमण:ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई

फागी उपखण्ड के राजस्व ग्राम रामचंद्रपुरा में चारागाह भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। ग्रामीणों की शिकायत पर उपखण्ड अधिकारी ने एक टीम गठित की, जिसने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण को चिह्नित किया।

यह मामला रामचंद्रपुरा के खसरा नंबर 208/3, 210 और 221/33 से संबंधित है, जहां कुल 231 बीघा चारागाह भूमि पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर रखा है। ग्रामीणों ने 4 अक्टूबर को किशोरपुरा ग्राम पंचायत मुख्यालय पर आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में शिविर प्रभारी फागी तहसीलदार जीवनराम शर्मा को लिखित शिकायत दी थी।

शिकायत मिलने के बाद फागी उपखण्ड अधिकारी राकेश कुमार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक टीम का गठन किया। इस टीम में गिरदावर, पटवारी और राजस्व विभाग के अन्य अधिकारी शामिल थे।

आज गिरदावर वीरमदेव खटीक और पटवारी शोज़ीराम शर्मा मौके पर पहुंचे। गिरदावर खटीक ने बताया कि कुल 231 बीघा चारागाह भूमि में से लगभग 50 बीघा पर अस्थायी अतिक्रमण पाया गया है।

अतिक्रमण को चिह्नित कर लिया गया है और भू-राजस्व अधिनियम की धारा 91 के तहत कार्रवाई की जा रही है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सरकार पशुओं के लिए चारागाह भूमि चिह्नित कर उनके संरक्षण का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर भूमाफिया इन जमीनों पर तारबंदी कर कब्जा कर खेती कर रहे हैं।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaipur/fagi/news/encroachment-on-pasture-land-in-ramchandrapura-136121575.html

Monday, 6 October 2025

ओरण-गोचर संरक्षण की मांग को लेकर स्कूलों में पढ़ाई का किया बहिष्कार

ओरण और गोचर भूमियों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने सहित अन्य मांगों को लेकर टीम ओरण की ओर से किए जा रहे आन्दोलन के तहत सोमवार को जिले के कई गांवों में विद्यार्थियों ने अध्ययन कार्य का एक दिवसीय बहिष्कार किया और ग्रामीणों के साथ मिल कर स्कूल भवनों के बाहर नारेबाजी की।

अध्ययन कार्य का बहिष्कार करते विद्यार्थी। फोटो- पत्रिका

ओरण और गोचर भूमियों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने सहित अन्य मांगों को लेकर टीम ओरण की ओर से किए जा रहे आन्दोलन के तहत सोमवार को जिले के कई गांवों में विद्यार्थियों ने अध्ययन कार्य का एक दिवसीय बहिष्कार किया और ग्रामीणों के साथ मिल कर स्कूल भवनों के बाहर नारेबाजी की। उनकी ओर से संबंधित संस्था प्रधान को ओरण, गोचर, तालाब, आगोर, कुएं, बावड़ी, नाडी, चारागाहों को राजस्व रिकार्ड में दर्ज करवाने का मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। जिला मुख्यालय स्थित एसबीके कॉलेज के बाहर भी छात्रों ने ओरण मामले को लेकर चल रहे आंदोलन का समर्थन किया और नारेबाजी की। जानकारी के अनुसार सोमवार को जिले के पोछीणा, लूणार, मसूरिया, मेहराजोत, खुहड़ी, भाडली, कोहरा, जोगा, नवल सिंह का गांव, नेतसी, जैरात, पारेवर, मोकला, मोहनगढ़, मोढ़ा, पारेवर, सेउवा, राघवा, छोड़, सांखला, उत्तमनगर, सेलता, भोपा, हेमा, मोतीकिला, पारेवर, रायमला, सेतरावा, घंटियाली, सांवता, देग, भोपा गांवों के विद्यालयों में विद्यार्थियों ने पढ़ाई का बहिष्कार किया। वे अपने घरों से स्कूल तो पहुंचे लेकिन पढ़ाई के लिए भीतर नहीं गए। इधर, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक महेश कुमार बिस्सा ने बताया कि कई गांवों में स्कूलों में अध्ययन कार्य का बहिष्कार किए जाने की जानकारी मिली है। इस संबंध में सभी सीबीइइओ से तथ्यात्मक जानकारी मांगी गई है। जिससे पता चल सके कि किस-किस स्कूल में अध्ययन कार्य का बहिष्कार किया गया।

16 को शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

दूसरी ओर कलेक्ट्रेट के सामने मांगों को लेकर ओरण टीम का धरना सोमवार को 22वें दिन भी जारी रहा। टीम ओरण के सुमेरसिंह सांवता ने बताया कि जब तक मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक धरना जारी रहेगा। इस बीच ओरण टीम आगामी 16 अक्टूबर को जिला मुख्यालय पर विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की तैयारी में जुट गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि गत दिनों निकाली गई जनाक्रोश रैली से कहीं अधिक लोग 16 तारीख को होने वाले प्रदर्शन में शामिल होकर शासन और प्रशासन के सामने इस मुद्दे की तीव्रता को प्रदर्शित करेंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर गांवों में जनसम्पर्क भी शुरू कर दिया गया है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.patrika.com/jaisalmer-news/boycotted-school-education-demanding-protection-of-forest-and-pasture-land-20003820


Sunday, 5 October 2025

कुतकपुर में ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे:चरागाह भूमि को बिना सहमति ग्राम सेवा सहकारी समिति को आवंटित करने का विरोध


महवा के कुतकपुर में ग्रामीणों की जमीन बिना सहमति के ग्राम सेवा सहकारी समिति को देने को लेकर विरोध जारी है। ग्रामीण पिछले 12 दिनों से चामुंडा माता मंदिर पर धरने पर बैठे है। ग्रामीणों ने आवंटन रद्द करने की मांग की है।

ग्रामीणों ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा उनकी चारागाह भूमि को जीएसएस (ग्राम सेवा सहकारी समिति) के लिए बिना सहमति के आवंटित कर दी गई है। जिसका सभी लोग विरोध कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग इस आवंटन को रद्द करना है।

अपनी मांग को लेकर ग्रामीण 12 दिनों से चामुंडा माता मंदिर पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। रविवार को 'चारागाह बचाओ संघर्ष समिति' के नेतृत्व में 33 लोग धरने में शामिल हुए। इनमें शीशराम पटेल, चतरे पटेल, गिलाहड़ी पटेल, रामभान गुर्जर, रणजीत बैंसला, विजय सिंह पटेल, बच्चू सिंह और गोविंद पटेल जैसे प्रमुख ग्रामीण शामिल थे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/dausa/mahwa/news/villagers-sit-on-indefinite-strike-in-kutakpur-136097051.html