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Friday, 17 July 2026

चारागाह भूमि पर फिर अतिक्रमण, ग्रामीणों ने बीडीओ को सौंपा ज्ञापन

किशनगंज 16/07/26

किशनगंज | ब्लॉक क्षेत्र की घट्टी ग्राम पंचायत के रामनगर पीपल्दा गांव में चारागाह भूमि पर फिर से अतिक्रमण होने का मामला सामने आया है। भंवरगढ़ निवासी एक व्यक्ति ने पहले हटाए गए अतिक्रमण वाली चारागाह पर दोबारा अतिक्रमण कर लिया। जिसके विरोध में बुधवार को ग्रामीण पंचायत समिति कार्यालय पहुंचे और बीडीओ के नाम अतिरिक्त विकास अधिकारी नवलकिशोर मीणा को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में बताया कि प्रशासन ने 15 मई 2024 को करीब 250 बीघा चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाया था। इसके बाद फिर अतिक्रमण कर लिया गया।

प्रशासन ने 21 अप्रैल 2025 को दोबारा अतिक्रमण हटाया। इसके बाद ग्राम पंचायत घट्टी ने वर्ष चारागाह भूमि की नीलामी की। इसके बावजूद अतिक्रमियों ने अब तक पत्थर नहीं हटाए। भंवरगढ़ निवासी एक व्यक्ति ने चारागाह भूमि पर अतिक्रमण कर फसल की बुआई कर दी। ग्रामीणों के अनुसार इसी चारागाह भूमि पर उन्होंने पौधारोपण किया था। अतिक्रमी ने सभी पौधे नष्ट कर दिए। ग्रामीणों ने मांग की कि चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाया जाए। नीलामी की कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया जाएगा।

https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/news/encroachment-on-pasture-land-again-villagers-submitted-memorandum-to-bdo-dbp-138452846.html

Tuesday, 7 July 2026

गांव की चारागाह भूमि पर निर्माणाधीन मकान हटाने की मांग

 चित्तौड़गढ़। 

ग्रामवासी खेडा अहीरान ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर गांव की चारागाह भूमि पर निर्माणाधीन मकान हटाने की मांग की गई। ज्ञापन में बताया कि भंवरलाल अहीर द्वारा चारागाह भूमि पर पक्का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जो की गांव के समक्ष व गुमानखेड़ी जाने का आम रास्ता है, जिसकी मंत्री ने डामरीकरण रास्ता की घोषणा कर रखी है एवं समस्त समाज का होलीका दहन भी यहा होता है, वही श्मशान का रास्ता भी यही एवं एलीराम द्वारा आम रास्ता पर दीवार बना कर अतिक्रमण कर दिया है, जिस पर गांव में भारी वाहन एवं अग्निश्मन वाहन गांव में नहीं आ सकते है। इस सम्बन्ध में पूर्व में भी प्रशासन को अवगत कराया गया है जिस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। 

अतिक्रमण जल्द से जल्द हटा कर समस्त ग्रामवासियो को राहत प्रदान कराने की मांग की गई। ज्ञापन के दौरान भेरुलाल, किशनलाल, रामलाल, दयाराम, देवीलाल, भेरुलाल, घासीलाल, उंकार लाल, मोहनलाल, वरदीचंद, प्रेमचंद, रामेश्वर लाल, नारायणलाल, गोवर्धन लाल, परसराम, किशनलाल, शंकर लाल, मिट्ठू लाल, शंकरलाल भेरुलाल, कालुलाल, विष्णु, मनीष अहीर, शंकर लाल आदि ग्राम वासियान मौजूद थे।

https://bhilwarahalchal.com/amp/rajasthan/chittaurgarh/--700144

Sunday, 5 July 2026

Jaisalmer: सेवण घास चारागाह में भीषण आग, बारिश बनी राहत, बड़ा नुकसान टला

लाठी के मरुस्थलीय क्षेत्र में सेवण घास से विकसित चारागाह शनिवार देर रात अचानक भीषण आग की चपेट में आ गया। हाइटेंशन लाइन में स्पार्किंग से निकली चिंगारी और तेज हवाओं के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया। करीब 7–8 बीघा क्षेत्र में फैली आग से वनस्पति व पौधों को भारी नुकसान हुआ, ग्रामीणों और पुलिस ने आग बुझाने के प्रयास किए।

जैसलमेर | Deepak Vyas | Jul 05, 2026



लाठी ( जैसलमेर ). लाठी कस्बे में मरुस्थलीय वानस्पतिक संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के उद्देश्य से ग्राम पंचायत की ओर से विकसित सेवण घास चारागाह शनिवार देर रात भीषण आग की चपेट में आ गया। रात करीब नौ बजे अचानक लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार चारागाह के ऊपर से गुजर रही हाइटेंशन विद्युत लाइन में हुई स्पार्किंग से निकली चिंगारी सूखी सेवण घास पर गिर गई। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैलती चली गई और देखते ही देखते करीब सात से आठ बीघा क्षेत्र इसकी चपेट में आ गया।

आग की लपटों ने चारागाह में उगी सेवण घास, वानस्पतिक झाड़ियों तथा अनेक पौधों को अपनी चपेट में लेकर भारी नुकसान पहुंचाया। आग की ऊंची लपटें और धुएं का गुबार दिखाई देने पर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। ग्राम पंचायत लाठी के प्रशासक महेंद्र चावला, निवर्तमान उपसरपंच भारस खां, वार्ड पंच मजीद खां, रामसिंह सिसोदिया, खेतनाथ, जसनाथ, खेताराम भील, ललित कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उपलब्ध संसाधनों से आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया। ग्रामीणों ने टहनियों, मिट्टी और अन्य साधनों की मदद से आग को फैलने से रोकने की कोशिश की, लेकिन तेज हवा के कारण आग लगातार विकराल होती चली गई। कुछ ही देर में चारागाह का बड़ा हिस्सा आग की चपेट में आ गया। घटना की सूचना मिलते ही लाठी थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। थानाधिकारी ईशराराम परिहार, कांस्टेबल भींयाराम चौधरी, कैलाश चौधरी, नेनाराम, सुरेंद्र साऊ तथा अन्य पुलिसकर्मियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर आग पर नियंत्रण पाने के प्रयास किए। साथ ही अग्निशमन वाहन को भी तत्काल सूचना दी गई, लेकिन दमकल के पहुंचने से पहले ही मौसम ने अचानक करवट ले ली।

... और टल गया बड़ा हादसा

आग लगातार फैल रही थी और उसके आसपास के क्षेत्र तक पहुंचने की आशंका बढ़ती जा रही थी। इस दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश ने कुछ ही देर में आग की तीव्रता कम कर दी और धीरे-धीरे आग पूरी तरह बुझ गई। यदि समय पर बारिश नहीं होती तो आग चारागाह के साथ आसपास के क्षेत्र में भी फैल सकती थी, जिससे नुकसान कई गुना बढ़ जाता। बारिश के कारण बड़ा हादसा टल गया और ग्रामीणों के साथ पुलिस प्रशासन ने भी राहत की सांस ली।

पर्यावरण और जैव विविधता को भारी क्षति

आग से सेवण घास चारागाह को व्यापक नुकसान पहुंचा है। सेवण घास मरुस्थलीय क्षेत्र की महत्वपूर्ण वनस्पति मानी जाती है और पशुओं के लिए पौष्टिक चारे का प्रमुख स्रोत भी है। इसके अलावा यह मरुस्थलीय पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आग की वजह से बड़ी मात्रा में सेवण घास, प्राकृतिक झाड़ियां और नव विकसित पौधे जलकर नष्ट हो गए। इससे चारागाह की जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी गहरा झटका लगा है।

स्थायी अग्निशमन केंद्र की उठी मांग

घटना के बाद ग्राम पंचायत लाठी के प्रशासक महेंद्र चावला ने क्षेत्र में दमकल सुविधा की कमी पर चिंता जताई। उनका कहना है कि लाठी क्षेत्र पहले भी कई बार आग लगने की घटनाओं का सामना कर चुका है, लेकिन हर बार अग्निशमन वाहन के समय पर नहीं पहुंचने से नुकसान बढ़ने का खतरा बना रहता है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मांग की कि लाठी क्षेत्र में स्थायी अग्निशमन केंद्र स्थापित किया जाए, ताकि भविष्य में आग जैसी घटनाओं पर तत्काल नियंत्रण पाया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर दमकल सुविधा उपलब्ध होने से पर्यावरण, वनस्पतियों और जन-धन की सुरक्षा बेहतर ढंग से सुनिश्चित की जा सकेगी।


Tuesday, 20 August 2024

जिला कलक्टर ने राजस्व अधिकारियों की ली बैठक, न्यून प्रगति वाले इंडिकेटर्स पर फोकस करने के निर्देश

डूंगरपुर। जिला कलक्टर अंकित कुमार सिंह शुक्रवार को ईडीपी सभागार में राजस्व अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में विभिन्न एजेंडा बिंदुओं पर प्रगति की समीक्षा करते हुए न्यून प्रगति वाले इंडिकेटर्स पर फोकस करने के निर्देश दिए। उन्होंने उपखंड वार भूमि रूपांतरण, आवंटन, आपत्तियां, निस्तारण के बारें में जानकारी लेते हुए लंबित प्रकरणों के निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने तहसील स्तर पर महीने में दो बार समीक्षा बैठकों का आयोजन करने तथा जिन क्षेत्रों में कम प्रगति है उन पर विशेष प्रभावी मॉनिटरिंग करते हुए कार्य करने के निर्देश दिए।

उन्होंने पीएम किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत जिन ब्लॉक में लंबित प्रकरण है, उनमें शिविर लगाकर अभियान चलाते हुए निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने एनएफएसए योजना अंतर्गत पंजीयन में कुछ श्रेणियों में प्रोसेसिंग पोर्टल प्रारंभ होने तथा पूर्व में प्राप्त आवेदनों का पहले निस्तारण करने के निर्देशानुसार श्रेणी वार आवेदनों को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए।

बैठक में मोबाइल टावर प्रगति, भूमि आवंटन निलंबित प्रकरण, संपर्क पोर्टल पर लंबित प्रकरण, नामांतरण प्रकरण, गैर खातेदारी से खातेदारी के प्रकरण, राजस्व प्रकरणों का निस्तारण, भूमि संपरिवर्तन एवं भूमि आवंटन के प्रकरण, चारागाह एवं सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण के प्रकरण, राजस्थान काश्तकार अधिनियम के तहत प्रकरण, लाइट्स पोर्टल पर लंबित प्रकरण, शस्त्र लाइसेंस नवीनीकरण की स्थिति, आंतरिक लेखा जांच दल के निरीक्षण प्रतिवेदन, सीमा ज्ञान, पीएम किसान सम्मान निधि योजना, खाद्य सुरक्षा संबंधी विभिन्न बिंदुओं पर उपखंड वार समीक्षा की तथा लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करते हुए अगली बैठक से पूर्व रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर कुलराज मीणा, समस्त उपखंड अधिकारी, तहसीलदार एवं राजस्व अधिकारी -कर्मचारी मौजूद रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.m.khaskhabar.com//news.php/news-district-collector-held-a-meeting-of-revenue-officers-instructed-to-focus-on-indicators-with-low-progress-news-hindi-1-664153-KKN.html?short_url=news-district-collector-held-a-meeting-of-revenue-officers-instructed-to-focus-on-indicators-with-low-progress-news-hindi-1-664153-KKN

Monday, 24 June 2024

बेशकीमती सरकारी जमीन अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग, ग्रामीणों ने सौंपा जिला कलक्टर को ज्ञापन

केकड़ी, 24 जून (आदित्य न्यूज नेटवर्क): केकड़ी जिलान्तर्गत भिनाय थाना क्षेत्र के नागोला कस्बे में बस स्टेण्ड पर हो रखे अवैध अतिक्रमण को हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों के प्रतिनिधिमण्डल ने केकड़ी जिला कलक्टर श्वेता चौहान एवं पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार बंसल को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में बताया कि कतिपय अतिक्रमियों ने बस स्टैण्ड स्थित बेशकीमती आबादी भूमि पर अतिक्रमण कर दुकान का निर्माण करवा लिया है। इसी के साथ पुराने अध्यापक आवास पर भी कब्जा कर लिया है। इस संबंध में पूर्व में ग्राम पंचायत द्वारा 5 बार नोटिस व एक बार स्थगन आदेश तथा एक बार जुर्माने का नोटिस दिया जा चुका है। इसके बावजूद अतिक्रमियों ने अवैध रूप से दुकान का निर्माण कर लिया है। अवैध रूप से निर्मित उक्त दुकान को तत्काल प्रभाव से ध्वस्त कटाकर भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जाए तथा उक्त भूमि ग्राम पंचायत के सुपुर्द की जाए।

चारागाह का अतिक्रमण हटाने की लगाई गुहार इसी के साथ नागोला भिनाय टोड पर चारागाह भूमि पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर रखी गई केबिन हटाने एवं तारबंदी कर किए गए कब्जे को हटाने की मांग भी ग्रामीणों द्वारा की गई है। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि उक्त अतिक्रमण राजकीय उच्च माध्यमिक शिष्यालय नागोला के सामने चारागाह भूमि पर किया गया है। यहां रेस्टोरेंट व धूम्रपान संबंधी चीजों का व्यापार धड़ल्ले से किया जा रहा है। जिससे मासूम बच्चों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ज्ञापन देने से पहले ग्रामीण रेली के रूप में नारेबाजी करते हुए जिला कलक्टर कार्यालय पहुंचे।

मुख्यमंत्री समेत तमाम अधिकारियों को भेजी ज्ञापन की प्रति ग्रामीणों ने ज्ञापन की प्रति मुख्यमंत्री राजस्थान, उपखण्ड अधिकाटी भिनाय, तहसीलदार भिनाय एवं थानाधिकारी भिजाय को भी प्रेषित की है। इस मौके पर किशन गौपाल, सूरत राम, हनुमान, गणेश, गोपाल माली, महावीर खटीक, घीसा लाल, दुर्गालाल, रज्जाक मंसूरी, सुलतान ममूरी, जीवन खाटोल, द्वारका खाटील, हेमराज, श्योराज, मंजू खटीक, सुमन खटीक, गीता खाटोल, रसाली खारोल, शायरी देवी, संपति देवी, हरिराम, नंदकिशोर, बजरंग एवं कई ग्रामीण मौजूद रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - 
https://adityanewsnetwork.com/demand-to-free-valuable-government-land-from-encroachment-villagers-submit-memorandum-to-district-collector/


Monday, 1 January 2024

विलायती बबूलों को कम लागत में बेचने का विरोध: घोसुंडी पंचायत सरपंच और प्रशासन के खिलाफ SDM के पास पहुंचे लोग

आमेट उपखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत घोसुंडी के किशनपूरियां में चारागाह भूमि से मशीनें लगाकर विलायती बबूल काटने का ग्रामीणों ने विरोध किया। इसी कड़ी में आज उपखंड अधिकारी रक्षा पारीक को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बताया की चरागाह भूमि से अंग्रेजी बबूल बिना टेंडर के ही निकाल लिए गए। जिसका ग्रामीणों ने विरोध करते हुए ठेकेदार दिनेश माली निवासी गौरेला कुंआ से पूछा तो ठेकेदार ने पंचायत से 5 हजार रुपए में खरीदना बताया।

जिस पर ग्रामवासियों ने पंचायत प्रशासन पर बिना टेंडर लाखों रुपए के बबूल मात्र 5 हजार रुपए में बेचने पर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। जब ग्राम पंचायत सचिव रामसिंह से पूछा गया तो सचिव ने बताया कि पंचायत से किसी भी तरह का कोई भी टेंडर नहीं हुआ है। जब पंचायत की तरफ से लगातार सही जवाब नहीं मिल पा रहा है तो ग्रामवासियों ने सरपंच बहादुर सिंह और पंचायत प्रशासन के खिलाफ ग्रामवासियों ने आज उपखंड अधिकारी को निष्पक्ष जांच के लिए ज्ञापन सौंपा।

इस दौरान फतेहसिंह, बालूराम, नारायण गायरी, नरपतसिंह, कमलेश, रूपलाल, इंद्रसिंह, किशनलाल, मनोज, अम्बालाल, जीतुलाल, हनुमानदास, नारायणलाल, उदयसिंह, सुखदेव जाट सहित ग्रामवासी उपस्थित रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/rajsamand/amet/news/opposition-to-selling-exotic-acacias-at-low-cost-132377300.html

Sunday, 24 December 2023

चरागाह से अतिक्रमण हटाने के लिए ग्रामीण पंचायत को उपलब्ध करवाएंगे संसाधन

 रानोली

ग्राम पंचायत कठमाणा के अरनिया कांकड़ गांव के 400 बीघा जमीन पर अतिक्रमण हटाने के लिए हाईकोर्ट ने आदेश जारी किए हैं। जिसके तहत राजस्व विभाग सीमाज्ञान कर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही करेगा। मगर ग्राम पंचायत के पास अतिक्रमण हटाने के लिए संसाधन नहीं हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने धनराशि एकत्र कर पंचायत को संसाधन उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया है। ताकि चरागाह से अतिक्रमण हटाया जा सके। संसाधनों की उपलब्धता के लिए करीब 40 हजार रुपए का खर्च का अनुमान है। ग्रामीण उक्त राशि एकत्र भी कर चुके हैं।

ग्राम के भरत मीणा, जीतराम जाट, गंगा गुर्जर, नोरत जाट, पप्पू, राजेश मीणा आदि ने बताया की अरनिया कांकड़ में करीब 400 बीघा जमीन पर कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर फसलों की बुवाई कर रखी है। अतिक्रमण हटाने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए कार्ट ने राजस्व विभाग को चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश दिए हैं। इस संबंध में पीपलू उपखंड अधिकारी वर्षा शर्मा का कहना है कि विधानसभा चुनाव में व्यस्त होने से अतिक्रमण हटाने में देरी हुई है। जल्दी ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी।


https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/sikar/ranoli/news/will-provide-resources-to-rural-panchayat-to-remove-encroachment-from-pastureland-132328913.html

Friday, 15 December 2023

आसींद में अतिक्रमण हटाने की मांग:चारागाह भूमि का सीमांकन कराने के लिए एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, प्रदर्शन की दी चेतावनी

आसीन्द



आसींद उपखंड क्षेत्र की करदालिया ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने उपखंड कार्यालय आसींद पर एकत्रित होकर सरपंच प्रतिनिधि ईश्वरलाल गुर्जर के साथ एसडीएम संजीव कुमार को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में बताया कि करजालिया ग्राम पंचायत के अंतर्गत राजस्व गांव कोरनास की चरागाह भूमि पर पड़ोस के गांव के लोगों के द्वारा अतिक्रमण किया जा रहा है। जिससे हमारे मवेशियों के चरने के लिए कोई जगह नहीं बच पाई है, मवेशियों द्वारा लोगों की फसलों को नष्ट किया जा रहा है। जिससे आए दिन गांव में लड़ाई झगड़ों का कारण बन रहा है।

गांव वालों ने मांग की है कि कोरनास की चरागाह भूमि का सीमाज्ञान करवा कर उक्त अतिकर्मियों से चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया जाए। वहीं ग्रामीणों ने सात दिवस का अल्टीमेटम देते हुए बताया कि यदि सात दिवस के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया जाता है, तो जिला कलेक्टर के समक्ष पहुंचकर ज्ञापन दिया जाएगा और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

साथ ही बताया कि गांव फुटिया चौराहे के किनारे चार-पांच लोगों के द्वारा गांव की आबादी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर तारबंदी करवा दी है। वहीं तुलछा का खेड़ा के समस्त भील समाज की भूमि पर भी कुछ लोगों के द्वारा अवैध रूप से पत्थर डाल रखे हैं। जिससे लोगों में रोष व्याप्त है। कई बार ग्राम पंचायत के द्वारा अतिक्रमियों को समझाने पर भी उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। इस दौरान ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि दोनों जगह पर तुरंत प्रभाव से अतिक्रमण हटाया जाए।


https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/bhilwara/asind/news/demand-to-remove-encroachment-in-asind-132291704.html

Thursday, 14 December 2023

सरकारी भवन, चरागाह से अतिक्रमण हटाने की मांग

बारां

बारां| फतेहपुर के ग्रामीणों ने गुरुवार को कलेक्टर को ज्ञापन देकर चरागाह और सरकारी भवनों को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की। 

ज्ञापन में धनराज सोन, राधाकिशन, रमेशचंद्र लोकेश, राधेश्याम, धर्मेंद्र आदि ने बताया कि फतेहपुर में सैकड़ों बीघा चरागाह, पटवार घर, मवेशी अस्पताल, स्कूल आदि सरकारी भवनों पर कब्जा है। चरागाह पर अतिक्रमियों के काबिज होने से मवेशी भटक रहे हैं।


https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/baran/news/demand-to-remove-encroachment-from-government-building-and-pastureland-132287310.html

Tuesday, 21 February 2023

चरागाह भूमि से मिट्टी खुदवा रहा ठेकेदार, क्षेत्र के लोगों ने की प्रभावी कार्रवाई की मांग

 Published: February 21, 2023

कवाई. 

निकटवर्ती मोठपुर ग्राम पंचायत की चारागाह भूमि पर एक सड़क के ठेकेदार की ओर से दिन-रात जेसीबी से अवैध खनन कर लाखों के राजस्व का चूना लगा दिया है। यह ठेकेदार बालू खाळ से मोठपुर तक निर्माणाधीन सीसी सड़क का निर्माण कर रहा है। सड़क पर बिछाने के लिए ठेकेदार बिना अनुमति अवैध खनन कर मिट्टी खोद ली है। जिससे वहां तालाब बन गया है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने ठेकेदार के खिलाफ एक पखवाड़े पूर्व उपखंड अधिकारी सहित तहसीलदार को ज्ञापन देकर उचित कार्रवाई की मांग की है। ठेकेदार की ओर से खुदवाई गई जमीन के निकट ही मनरेगा का कार्य भी चल रहा है। शिकायत के बाद कुछ दिन तो खनन बंद रखा, लेकिन मंगलवार को फिर से ठेकेदार की जेसीबी वहां खनन कर डंपर भरती नजर आई। जिस पर ग्रामीणों ने आपत्ति जताकर संबंधित अधिकारियों को सूचना दी और खनन का कार्य रुकवाया। पंचायत समिति सदस्य वीरभान बंजारा मोठपुर निवासी चिंटू शर्मा सहित करीब दर्जन भर लोगों ने करीब 15- 20 दिन पहले अटरू पहुंचकर उपखंड अधिकारी व तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने व सरकार के राजस्व में हुए नुकसान की पूर्ति करने को लेकर ज्ञापन सौंपा था। अटरू तहसीलदार योगेंद्र यादव ने बताया कि मंगलवार को ग्रामीणों की शिकायत पर मोड पर पुलिस को सूचना कर अवैध खनन रुकवाया था और वहां से जेसीबी और डंपर को भगा दिया था। अब जल्द ही ठेकेदार के खिलाफ मिट्टी चोरी का मुकदमा मोडपुर थाने में दर्ज करवाया जाएगा।


By Ghanshyam Dadhich

https://www.patrika.com/baran-news/contractor-excavating-soil-from-pasture-land-people-of-the-area-deman-8058776/


Wednesday, 15 February 2023

फर्जी पट्‌टे जारी कर बेचे प्लॉट:भूडोल के ग्रामीणों ने जताया रोष, ग्राम पंचायत पर आरोप, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

अजमेर के ग्राम पंचायत भूडोल में फर्जी पट्‌टे के जरिए प्लॉट बेचने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने कलेक्टर को शिकायत की है। ग्राम पंचायत भूडोल की ओर से फर्जी दस्तावेज तैयार कर पद का दुरुपयोग करने, सरकारी रिकॉर्ड का खुर्द बुर्द करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया।

ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने बताया- ग्राम पंचायत में आम रास्ते की भूमि खसरा नंबर 694 है। रास्ते को आबादी भूमि में दर्ज करवा कर चहेतों को पट्टे जारी करवा दिए गए हैं, जबकि उक्त आराजी चारागाह भूमि में रास्ता, कुआं व खातेदारी भूमि पर आने जाने का रास्ता था। जो गांव की आबादी भूमि से भी 5 किलोमीटर दूर है। इसके बावजूद गांव के पास आवासीय गरीब आबादी में बने मकानों की भूमि को आबादी में दर्ज नहीं कर कुछ परिवार को नाजायज फायदा पहुंचाने की नीयत से आम रास्ते की भूमि के बिना अधिकार के बिना प्रस्ताव के बिना आदेशों के पट्टी जारी कर दिए गए। इससे आने जाने वालों का रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया है। इससे ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से कार्रवाई की मांग की।


(इनपुट-श्रवण नाथ भुडोल)

https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/ajmer/news/villagers-of-bhudol-expressed-anger-submitted-memorandum-to-collector-130928453.html

Friday, 30 December 2022

चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग: ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, गांव के ही लोगों पर कब्जा करने का लगाया आरोप

 

चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग

हिंडौन सिटी की एकोरासी के ग्रामीणों ने चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने आज एसडीएम कार्यालय पहुंचकर एसडीएम सुरेश कुमार हरसोलिया को ज्ञापन दिया। इससे पहले ग्रामीण मामले की शिकायत कलेक्टर से भी कर चुके है। प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीण काफी नाराज है।

गांव के ही लोगों पर कब्जा करने का आरोप

एकोरासी गांव के ललित सोलंकी, बंशीलाल सोलंकी और अनूप ने बताया कि गांव की चारागाह भूमि पशुपालकों के लिए बहुउपयोगी है। बारिश के दिनों में यहां जलभराव और घास उगने से पशु चारे की उपलब्धता होती है। जिससे गरीब पशुपालकों को पशु चारे की खरीद बचत होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के ही कुछ लोगों ने सरकार द्वारा गांव में घोषित किए गए चारागाह भूमि पर अनाधिकृत कब्जा कर रखा है। चरागाह भूमि से हरे पेड़ो की भी कटाई की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि कब्जा करने वालों ने चारागाह भूमि पर बड़ा गड्ढा खोद रखा है। जिसमें पिछले साल 3 बच्चों की डूबने से मौत हो चुकी है। ज्ञापन देने के दौरान रत्तीराम, अनूप, मुंशी, राकेश, सुनील सोलंकी, विकास समेत अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/karauli/hindaun/news/villagers-submitted-memorandum-to-sdm-accused-of-capturing-the-people-of-the-village-itself-130740958.html

Thursday, 22 December 2022

Jaisalmer villagers march 225 kilometres to get sacred groves listed as ‘oran land’

More than 100 orans documented by a non-profit still listed as wastelands

By Shuchita Jha

Published: Monday 19 December 2022

Animal husbandry has been the main source of income and medium of employment for most of the villagers in these oran areas for centuries, said the letter submitted by the villagers. Photo: iStock

Residents from around 40 villages of Jaisalmer, Rajasthan have walked 225 kilometres to protect community-conserved sacred spaces known as ‘orans’. Currently, the biodiversity hotspots are classified as wastelands.

The villagers walked to the district headquarters of Jaisalmer to submit a letter to the collector December 19, 2022. They asked them to recategorise the area as ‘oran land’. The current categorisation is causing a loss of biodiversity and is affecting the livelihood of the locals in the area, as huge chunks of land are being allotted for setting up solar plants. 

The orans are among the last natural habitats of the great Indian bustard. The open stretch of land, which receives long hours of sunlight and brisk winds, has become a hub of green energy with windmills and solar photovoltaic dotting it. 

“The orans are listed as ‘wastelands’ in the revenue records. The Degrai Oran is around 10,000 hectares (60,000 bighas), but only 4,000 hectares are recognised as oran, which are listed as common land. The rest is categorised as wasteland,” said Sumer Singh Bhati of Sanwata village in the Jaisalmer district.

The government is allotting these lands for solar projects to make them ‘useful’, according to Bhati. “There are other orans like Mokla, Salkha, Kemde, which also spread across several hectares but are listed as wastelands,” he added.

Rajasthan-based non-profit Ecology, Rural Development & Sustainability (ERDS) Foundation documented 100 orans and identified 30 more with the help from the Jaisalmer Chapter of the Indian National Trust for Art and Cultural Heritage (INTACH) last year, said Sumit Dookia, assistant professor at Delhi’s Indraprastha University and member of ERDS.

“All legal documents were procured from revenue records of Rajasthan and corroborated with locals to identify the land on sites. We observed that the orans have not been properly recorded, which is why these ‘oran lands’ or village common lands are given to the development projects,” said Dookia. 

The foundation is working with locals, who have realised this injustice and are now raising their voices, he added. 

A group of 20 people, including Bhati from Sanwata, Bhopal Singh Bhati from Jhaloda, Sujan Singh Bhati from Salkha, Kundan Singh Bhati from Mokla, Chatar Singh from Jam and Durg Singh Bhati from Satyaya have been walking from December 11.

The group began from Degrai Mata Mandir of the Rasla village, getting residents of different villages to sign the letter. Several people also joined them as they progressed.

“We have been preserving these grasslands covered with native biodiversity like ber, khejdi, kair, etc since generations. We have conserved these as we are barred from cutting and felling trees here. We have spiritual and religious connections to the orans,” the letter said. 

These orans are hotspots of biodiversity with trees and flowers like rohida, bordi, kumbhat, and desi babool in large numbers, the letter added.

There are different varieties of grasses like sevan and murath as well, making these grasslands home to more than 250 species of birds and animals, including the great Indian bustard, McQueen bustard, chinkara, Indian desert cat, desert fox, etc, it said.

The villagers have raised this issue of conservation and correcting the land records to accommodate the orans, Bhati told Down To Earth. If corrected, local people can take their cattle to graze and depend on them for livelihood, but so far, no action has been taken.  

“The Supreme Court in 2018 had ordered the orans be recorded as ‘deemed forests’ in the revenue records in the TN Godavarman vs. Union of India case, but not even one oran has been recorded as a deemed forest so far,” said Dookia. 

“We have given several memorandums to the district administration in the past as well, but our requests seem to fall on deaf ears. But will continue fighting for our orans,” added Bhopal.

Most people in the Jaisalmer district are indirectly dependent on animal husbandry for employment, the letter said. Almost all the ancient orans of the district are located in the middle of livestock-dominated villages, where agriculture is prohibited due to ancient social and religious beliefs. 

“Due to this, animal husbandry has been the main source of income and medium of employment for most of the villagers in these oran areas for centuries. And their pastures are located in these oran areas,” read the letter. 

“In these, the herdsmen of the area have been grazing cows, sheep and goats for centuries, but for the last few years, there has been a crisis on the pastures due to allotment of these ancient traditional pastures to various energy companies,” it added. 

The government has allotted vast chunks of lands under the orans to energy companies and it is creating pressure on the remaining grazing lands, the letter further stated. Many types of grass have started disappearing and the area’s natural biodiversity is being affected. 

https://www.downtoearth.org.in/news/wildlife-biodiversity/jaisalmer-villagers-march-225-kilometres-to-get-sacred-groves-listed-as-oran-land--86653


Friday, 7 October 2022

खनन के विरोध में चारागाह बचाओ संघर्ष समिति का धरना, सांसद सुमेधानंद सरस्वती रहे मौजूद

ग्रामीणों ने कहा कि खनन के पास आबादी बसी हुई है साथ ही मांग की की जल्द से जल्द चारागाह भूमि पर अवैध तरीके से दिए गए पट्टों को निरस्त करवाया जाए और जल्द से जल्द चारागाह भूमि को खनन मुक्त कराएं

Written By- Ashok Singh Shekhawat

Last Updated: Oct 06, 2022


Neemkathan News : राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना इलाके के टोडा में नीमकाथाना सड़क मार्ग पर स्थित चारागाह भूमि पर खनन के विरोध में चरागाह बचाओ संघर्ष समिति का धरना लगातार जारी है. धरने स्थल पर सीकर सांसद सुमेधानंद सरस्वती भी पहुंचे और ग्रामीणों से पूरे मामले की जानकारी ली और समस्या के समाधान का आश्वासन दिया.

ग्रामीणों ने कहा कि खनन के पास आबादी बसी हुई है साथ ही मांग की की जल्द से जल्द चारागाह भूमि पर अवैध तरीके से दिए गए पट्टों को निरस्त करवाया जाए और जल्द से जल्द चारागाह भूमि को खनन मुक्त कराएं और बताया कि यहा से बिना रवना के मिट्टी पत्थरों के डंपर चरागाह भूमि से बिना रवाना के निकल रहे हैं.

हो रहे इस खनन के चारों ओर चारागाह भूमि है और जहां पर खनन हो रहा है,  भूमि भी राजस्व रिकॉर्ड में आज भी चारागाह भूमि दर्ज है, साथ ही प्रशासन से ग्रामीणों ने मांग की है कि इस चारागाह भूमि की सही से जांच कर चारागाह भूमि से निकल रहे खनन कर्ताओं के डंपरों को जल्द से जल्द रोका जाए.

इस मौके पर सीकर सांसद सुमेधानंद सरस्वती ने कहा कि सीकर जिला कलेक्टर से बात कर कार्यवाही करवाने का आश्वासन दिया. इस मौके पर पूर्व पाटन प्रधान संतोष गुर्जर ,पाटन प्रधान सुवालाल सैनी ,पूरण सिंह ,जयमल गुर्जर ,रोहतास वर्मा, सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे.

https://zeenews.india.com/hindi/india/rajasthan/sikar/protest-against-mining-save-pasture-struggle-committee-mp-sumedhanand-saraswati-was-present-neemkathan/1382657

Friday, 30 September 2022

ओरण के प्रति जागृता को लेकर 60 किलोमीटर पैदल ओरण परिक्रमा संपन्न

 


सोलर प्लांट भूमि आवंटन को लेकर ग्रामीणों ने प्रतिबंध लगाने के लिए दिया ज्ञापन

सोलर प्लांट भूमि आवंटन को लेकर ग्रामीणों ने प्रतिबंध लगाने के लिए दिया ज्ञापन

जैसलमेर

Published: September 30, 2022 

जैसलमेर. ओरण गोचर संघर्ष समिति की ओर से जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बताया कि पर्यावरण वन्य जीव, ओरण, जलस्रोत, राज्य वृक्ष खेजड़ी, सडक़ों कसे उजाड़वा जा सकता है। यहां सेऊवा, बडा, तेजपाला, नगा, हाड़ा सोलर प्लाट के लिए 40 बीघा आवंटन करने के प्रस्तावित की जा रही है जो 3000 मेगावाट प्लाट किया जा रहा लोक देवता वीर पनराजजी, सिद्ध राव जुंझार मायथि, ओरण 700 साल से संरक्षण में है, दर्ज नहीं की गई। जो पंचायत से ओरण प्रस्तावित है। यहां पशुपालकों, चारागाह भूमि भूमि आवंटन की जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की कि प्रशासन संज्ञान लेवे और आमजन जनहित में ध्यान रखते कार्यवाही की जाए। ज्ञापन में ग्राम पंचायत राघवा सरपंच नरेंद्रसिंह, पर्यावरण प्रेमी लीलूसिंह बड़ा, तगसिंह, फकीर सिंह सेऊवा, सामाजिक कार्यकर्ता नरपतसिंह बडा, गोरधनसिंह, दीपसिंह, विक्रमसिंह, हीरसिंह, भीमसिंह, जितेंद्रसिंह, मूलसिंह, हरीराम, सेऊवा आदि उपस्थित थे।

सोलर प्लांट भूमि आवंटन को लेकर ग्रामीणों ने प्रतिबंध लगाने के लिए दिया ज्ञापन

60 किलोमीटर लंबी पैदल परिक्रमा का समापन

जैसलमेर. जिले की फतेहगढ़ तहसील के रासला- सांवता गांवों के बीच मौजूद मुख्य शक्तिपीठ श्रीदेगराय मंदिर की 600 वर्षो से ज्यादा प्राचीन ओरण की 60 किमी लम्बी पैदल परिक्रमा का शुक्रवार दोपहर को मन्दिर प्रांगण पहुंचने पर समापन हुआ। परिक्रमा में क्षेत्र के अनेक गांवों व राजस्थान के अन्य जिलों से आए पर्यावरण प्रेमियों व देवी भक्तों ने भी हिस्सा लिया। क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षक व पशुपालक सुमेरसिंह भाटी ने बताया कि दो वर्ष पहले प्रारम्भ हुई परिक्रमा से आसपास के ग्रामीणों को ओरण के महत्व व उसके संरक्षण के महत्व के साथ भारतीय संस्कृति में पर्यावरण के दैवीय रूप से सबको जागरूक करना है। मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष ठाकुर कल्याणसिंह भाटी मूलाणा की इच्छा थी कि एक बार परिक्रमा प्रारम्भ होने पर प्रति वर्ष होती रहे, अत: नवरात्रि में इसका आयोजन करा गया, जिसमें शुक्रवार को परिक्रमा मार्ग में स्थित उनके घर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। विदित है कि गत बीस वर्षो से अधिक समय से मन्दिर ट्रस्ट अध्यक्ष रहते आपने देगराय ओरण का कुछ भाग वर्ष 2004 में ओरण रूप से दर्ज करवाने में सफलता प्राप्त करी थी, शेष बचे हिस्से को दर्ज करवने के लिए भी आप लम्बे समय से प्रयासरत थे। परिक्रमा में विभिन्न पर्यावरण, पशुपालन, चारागाह विकास व जैविक खेती से जुड़े अनुभवी वैज्ञानिकों व कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं को ओरणों के महत्व और उनसे लाभ के बारे में जानकारी दी। ओरणों के चारों तरफ मौजूद ढाणियों के किसानों व पशुपालकों ने भी परिक्रमा में जल व नाश्ते की सम्पूर्ण व्यवस्था रख श्रद्धालुओं व पर्यावरण प्रेमियों की यात्रा को सुखद बनाया। दो दिन की परिक्रमा में पर्यावरण प्रेमियों ने ओरण क्षेत्र में 100 से ज्यादा पक्षी प्रजातियों को देखा गया और उनका रिकॉर्ड भी तैयार करा गया।


https://www.patrika.com/jaisalmer-news/villagers-gave-memorandum-to-ban-solar-plant-land-allocation-7797923/