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Wednesday, 15 October 2025

सामुदायिक नेतृत्व का उत्सव - चारागाह विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मान समारोह


झालावाड़। जिला परिषद झालावाड़, बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड जयपुर, आईटीसी मिशन सुनहरा कल तथा फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को जिले में “सामुदायिक नेतृत्व का उत्सव” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक नेतृत्व को प्रोत्साहित करने तथा चारागाह एवं सामुदायिक भूमि विकास में सक्रिय योगदान देने वाले नेताओं को सम्मानित करने के उद्देश्य से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में राजेन्द्र निमेष ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए हुए सभी शामलात लीडरों का स्वागत करते हुए कहा कि “चारागाह और सामुदायिक भूमि विकास केवल पर्यावरणीय सुधार का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका की सुरक्षा का आधार भी है।” उन्होंने चारागाह विकास के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे ग्राम स्तरीय लीडर के योगदान की सराहना की और उन्हें सम्मानित करने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी द्वारा सुझाए गए वृक्षारोपण के “चार स्वर्ण नियम” - सही समय, सही प्रजाति, सही स्थान और सही विधि का पालन करने की अपील की।

ग्राम सभा एवं परिसंपत्ति रजिस्टर पर बल

अपने उद्बोधन में उन्होंने आगामी 2 अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभाओं में सभी ग्राम पंचायतों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि ग्राम की सामुदायिक भूमि एवं चारागाहों को परिसंपत्ति रजिस्टर में दर्ज किया जाए, ताकि इन भूमियों की सुरक्षा और विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी वार्षिक योजनाओं (प्रस्तावों) में चारागाह विकास कार्यों को सम्मिलित किया जाना चाहिए ताकि सतत विकास का मार्ग प्रशस्त हो सके।

इसके पश्चात ब्लॉक स्तर से चयनित शामलात लीडरों को प्रमाण पत्र एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों में ग्राम पंचायतों के सरपंच, चारागाह समिति सदस्य एवं ग्रामीण स्वयंसेवक शामिल थे जिन्होंने अपने क्षेत्र में सामुदायिक संसाधनों के संरक्षण, चारागाह सुधार एवं वृक्षारोपण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किए हैं।

अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। समारोह का समापन सामूहिक संकल्प के साथ हुआ - कि जिले में सामुदायिक नेतृत्व को और सशक्त बनाया जाएगा तथा चारागाह एवं बंजर भूमि विकास के कार्यों को जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी मनोहर थाना कैलाश मीणा, अधिशाषी अभियंता झालरापाटन रमेश तथा प्रशासक खारपा ग्राम पंचायत चंद्रकांत जी उपस्थित रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.khaskhabar.com/local/rajasthan/jhalawar-news/news-celebrating-community-leadership---felicitation-ceremony-for-outstanding-contributions-in-the-field-of-pasture-development-news-hindi-1-760764-KKN.html

Monday, 15 September 2025

विधायक अशोक कोठारी की मांग : राजस्थान में चारागाह विकास के लिए ग्राम सभाओं में प्रस्ताव लाने का आग्रह

भीलवाड़ा। भीलवाड़ा के विधायक अशोक कोठारी ने प्रदेश में चारागाह और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के विकास को लेकर सरकार को लिखे पत्र में महत्वपूर्ण मांग कर आगामी 2 अक्टूबर को होने वाली ग्राम सभाओं में 2026-27 की वार्षिक कार्य-योजना में प्रस्ताव शामिल करने के लिए आदेश जारी करने का आग्रह किया है। विधायक कोठारी ने राज्य के मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, पंचायतीराज मंत्री व प्रमुख शासन सचिव को पत्र के माध्यम से बताया कि राजस्थान में कुल 3.42 करोड़ हेक्टेयर भूमि है, जिसमें से केवल 4.86 प्रतिशत (16.38 लाख हेक्टेयर) ही चारागाह के रूप में उपलब्ध है। उन्होंने जोर दिया कि ये चारागाह सिर्फ पशुधन के लिए ही नहीं, बल्कि गांवों के पारिस्थितिक संतुलन और जल संचयन क्षमता को बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। कोठारी ने इस बात पर चिंता जताई गई है कि चारागाहों के विकास के अभाव में विलायती बबूल का तेजी से फैलाव हुआ है, जिससे ये जमीनें बंजर हो रही हैं। यह बबूल न सिर्फ देशी घास को उगने से रोकता है, बल्कि भूमि की उर्वरकता को भी कम करता है। उन्होंने विलायती बबूल को हटाकर सेवण, धामण और रोहिड़ा जैसी देशी प्रजातियों के पौधे लगाने का सुझाव दिया है। विधायक कोठारी ने ग्रामीण विकास विभाग से 2 अक्टूबर की ग्राम सभा के लिए हर ग्राम एक चारागाह योजना के तहत वर्ष 2026-27 में प्रत्येक गांव में महात्मा गांधी नरेगा और जलग्रहण योजना के माध्यम से कम से कम 15 हेक्टेयर चारागाह भूमि विकसित करने के लिए बजट स्वीकृत किया जाए। गांवों को जल और चारे के लिए आत्मनिर्भर बनाने के लिए इन साझा संसाधनों पर सामुदायिक अधिकारों को मजबूत किया जाए। राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के तहत, वार्ड पंच की अध्यक्षता में हर गांव में एक चारागाह विकास समिति का गठन किया जाए।राजस्व अधिकारियों की मदद से सभी शामलात भूमियों (जैसे चारागाह, ओरण, तालाब आदि) का सीमांकन (सीमाज्ञान) करके उन्हें पंचायत के रजिस्टर में दर्ज किया जाए। जिन गांवों में चराई योग्य भूमि नहीं है, वहां बिलानाम (सरकारी) भूमि को चारागाह के रूप में चिन्हित कर विकसित किया जाए। उन्होंने पत्र में बताया कि आजीविका विकास के लिए राजीविका के स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को सुनिश्चित किया जाए ताकि वे स्थानीय घास और बीजों को इकट्ठा कर सकें। ग्राम पंचायतों में विलायती बबूल को हटाने का प्रस्ताव लिया जाए और इससे कोयला बनाकर पंचायतों के लिए आय के साधन पैदा किए जाएं। पंचायतें अपने गांवों के लिए जल बजट तैयार करने का प्रस्ताव लें।

विधायक कोठारी का कहना है कि प्रधानमंत्री के विकसित गांव के सपने को साकार करने के लिए चारागाहों का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन मांगों पर ध्यान देकर नरेगा के माध्यम से प्रदेश के चारागाहों का विकास किया जा सकेगा।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.khaskhabar.com/local/rajasthan/bhilwara-news/news-mla-ashok-kotharis-demand-request-to-bring-proposal-in-gram-sabhas-for-pasture-development-in-rajasthan-news-hindi-1-753054-KKN.html

Friday, 29 August 2025

मनरेगा के तहत चारागाह का विकास करने के साथ उसमें स्थानीय प्रजातियों के पौधे एवं घास लगाएं: वर्मा

भास्कर न्यूज| जैसलमेर

जैसलमेर पंचायत समिति सभागार में आईटीसी मिशन सुनहरा कल, जिला परिषद और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसमें जिला परिषद सहायक अभियंता मनरेगा चम्पालाल वर्मा ने कहा कि मनरेगा में चारागाह विकसित करें। इसके लिए प्रशिक्षण के दौरान बताई गई जानकारी की धरातल पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करवाएं। उन्होंने कहा कि हम सबकी जैसलमेर के विकास में अहम भूमिका है। मनरेगा के तहत चारागाह का विकास करने के साथ उसमें स्थानीय प्रजातियों के पौधे एवं घास लगाए। मनरेगा में स्वीकृत सभी चारागाह को समय पर तैयार करें। साथ ही कहा कि हर ग्राम पंचायत स्तर पर एक नर्सरी का भी विकास करना है। इस दौरान एफईएस संतोष कुमारी ने कहा कि राजस्व ग्राम में चारागाह विकास समिति का गठन राजस्थान पंचायती राज एक्ट 1996 के धारा 170 (1) के तहत किया जाना है। उन्होंने बताया कि बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समिति का गठन जिला, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत में किया गया है। उन्होंने कमेटी के कार्यों को विस्तार से बताया।

इस अवसर पर मनरेगा के सहायक एवं कनिष्ठ अभियंता, जेटीए, नोडल सहायक विकास अधिकारी, संस्थाओं के प्रतिनिधियों एवं राजीविका के सभी ब्लॉक प्रभारियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। जिला परियोजना समन्वयक राजीविका अशोक गोयल ने जैसलमेर जिले के परिस्थितियों अनुसार चारागाह विकास होना चाहिए। यहां पशु बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण इस पर ध्यान देना जरुरी है। पर्यावरणविद् पार्थ जगाणी ने चारागाह एवं खड़ीन के सह संबंध व स्थानीय घास पर चर्चा की। उन्होंने चारागाह एवं खड़ीन की वर्तमान स्थिति पर चिंता जाहिर की। इसमें भी मनरेगा से कैसे विकसित करें, उस पर मंथन किया गया।

लोकल बीज के महत्व पर डाला प्रकाश एफईएस जिला प्रशिक्षण समन्वयक मघाराम कड़ेला ने सामूहिक क्षमता वर्धन कार्यक्रम के विषय में पूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने पिछले वर्षों में हुई प्रगति को भी सबके साथ साझा किया। जोधपुर से फूली देवी, बीज संग्रहण एवं पौधशाला विकास विषय पर सघन प्रशिक्षण प्रदान किया। अशोक कुमार ने प्रशिक्षण को आगे बढ़ाते हुए बीज को इकट्ठा करने की आवश्यकता, लोकल बीज के महत्व पर प्रकाश डाला। फूली देवी ने नर्सरी विकास की तकनीकी जानकारी को विस्तार से बताया।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaisalmer/news/develop-pastures-under-mnrega-and-plant-local-species-of-plants-and-grass-in-them-verma-135784509.html

Thursday, 21 August 2025

देवखेड़ा में चारागाह विकास का संकल्प:ग्रामीणों ने निकाली रैली, वृक्षारोपण कर गौ और जल संरक्षण का लिया संकल्प

 

शाहपुरा के डाबला कचरा ग्राम पंचायत के देवखेड़ा में चारागाह दर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

शाहपुरा के डाबला कचरा ग्राम पंचायत के देवखेड़ा में चारागाह दर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अपना संस्थान, एफईएस, सरोज देवी फाउंडेशन भीलवाड़ा और गोयल अनुसंधान केंद्र कोटा के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया।

देवखेड़ा के महिला और पुरुषों ने ढोल के साथ गीत गाते हुए गांव में रैली निकाली। चारागाह पहुंचकर उन्होंने परिक्रमा की। सरपंच प्रतिनिधि आसाराम धाकड़ ने बताया कि चारागाह में भूमि, वृक्ष और जल पूजन किया गया। सुविचार अभियान की टोली और ग्राम के प्रमुख व्यक्तियों ने बरगद का पेड़ लगाया।

सुविचार जिला संयोजक गुदड़मल गुर्जर ने परंपरागत स्रोतों की ओर लौटने का आह्वान किया। जिला सहसंयोजक परमेश्वर प्रसाद कुमावत ने भीलवाड़ा में होने वाले सम्मेलन की जानकारी दी। एफईएस के सुरेश पाराशर ने कहा कि सरकार चारागाह विकास के लिए विशेष ध्यान दे रही है।

कार्यक्रम में पर्यावरण प्रेमी दिलीप वैष्णव, रामदेव गुर्जर, भेरूलाल बेरवा, चारागाह समिति की अध्यक्ष नंदू देवी भील सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सरपंच प्रतिनिधि आसाराम धाकड़ ने सभी का आभार व्यक्त किया।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/bhilwara/shahpura/news/resolution-for-pasture-development-in-devkheda-135726587.html

Monday, 11 August 2025

किसान-पशुधन की समृद्धि से होगा देश विकसित: कुमावत:डोहरिया में चरागाह दर्शन कार्यक्रम आयोजित, भूमि, गौ और वृक्ष पूजन किया

 

शाहपुरा में सुविचार अभियान के तहत डोहरिया गांव में चारागाह दर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा में सुविचार अभियान के तहत डोहरिया गांव में चारागाह दर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भूमि पूजन, गौ पूजन और वृक्ष पूजन किया गया।

सुविचार अभियान के जिला सहसंयोजक परमेश्वर प्रसाद कुमावत ने कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। उन्होंने बताया कि गांव का किसान वर्ग पशुधन पर निर्भर है। चारागाह के संरक्षण से ही पशुधन का विकास होगा। पशुधन के विकास से किसान समृद्ध होंगे।

कुमावत ने कहा कि वर्तमान में चारागाह विकास, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और रसायन मुक्त खेती आवश्यक है। भीलवाड़ा जिले को चारागाह के क्षेत्र में मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए सरोज देवी फाउंडेशन, गोयल अनुसंधान केंद्र और एफईएस मिलकर काम कर रहे हैं।

कार्यक्रम में प्रशासक सत्यप्रकाश बैरवा, सेवानिवृत्त आरएएस अधिकारी रामनिवास जाट, सुनिल कुमार लोढ़ा, शिक्षक रामधन बैरवा, शारीरिक शिक्षक बन्नालाल बैरवा समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इनमें सोजीराम जाट, रामेश्वर गुर्जर, गोपाल जाट, ओमप्रकाश सेन, मोडूलाल माली और सुवा भील प्रमुख थे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/bhilwara/shahpura/news/the-country-will-develop-due-to-the-prosperity-of-farmers-and-livestock-kumawat-135653856.html

Friday, 25 July 2025

चरागाह भूमि पर अतिक्रमण नहीं होगा बर्दाश्त, समितियों को किया जाएगा सक्रिय

ग्राम पंचायतों को निर्देश: अतिक्रमण हटाएं, चरागाह विकास को दें गति अब हर पंचायत में बनेगी चरागाह समिति, सर्वे कर अतिक्रमण हटाया जाएगा

 

Encroachment on pasture land will not be tolerated, committees will be activated

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में चरागाह भूमि पर लगातार हो रहे अतिक्रमण को लेकर पंचायती राज विभाग सख्त हो गया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ग्राम पंचायतें चरागाह भूमि पर से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाएं और संबंधित समितियों को सक्रिय करें। भीलवाड़ा जिले में कई ग्राम पंचायते ऐसी है जहां चरागाह पर अतिक्रमण होने के साथ उस क्षेत्र में खनन तक हो रहा है। लेकिन जिला प्रशासन इस मामले में लंबे समय से चुप्पी साधे हुए है। पंचायत राज विभाग के उपायुक्त एवं उपशासन सचिव प्रथम इंद्रजीत सिंह ने आदेश में बताया गया है कि कई ग्राम पंचायतें अभी भी चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रही हैं, जो नियमों के खिलाफ है।

समितियों का गठन अनिवार्य

राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 170 के अनुसार, हर ग्राम पंचायत में चरागाह विकास के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन अनिवार्य है। इस समिति की अध्यक्षता संबंधित वार्ड पंच करेगा, जबकि चार सदस्य ग्राम सभा द्वारा निर्वाचित किए जाएंगे। यह समिति चरागाह भूमि के संरक्षण, विकास और अतिक्रमण रोकने के लिए उत्तरदायी होगी।

अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया स्पष्ट

विभाग ने नियम 165 का हवाला देते हुए पंचायतों को जनवरी और जुलाई में चरागाह, आबादी भूमि व तालाबों पर अतिक्रमण सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद अतिक्रमण हटाने की विधिवत प्रक्रिया अपनाते हुए नोटिस, निषेधाज्ञा, बेदखली और पुलिस सहयोग लेने के निर्देश भी दिए गए हैं।

जिला स्तर पर बनेगी निगरानी समिति

चरागाह विकास योजनाओं की समीक्षा और समन्वयन के लिए जिला प्रमुख की अध्यक्षता में जिला स्तरीय बंजर भूमि एवं चरागाह विकास समिति का गठन किया गया है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी इस समिति के नोडल अधिकारी होंगे।

10 सर्वाधिक अतिक्रमित पंचायतों की सूची मांगी

विभाग ने सभी जिलों से सबसे अधिक चरागाह अतिक्रमण वाली 10 ग्राम पंचायतों की सूची मांगी है। इसमें खसरा संख्या, अतिक्रमित क्षेत्रफल और अन्य विवरण शामिल हों।

शपथ पत्र लेना अनिवार्य

यदि किसी ग्राम पंचायत की ओर से अभी तक समिति गठित नहीं की गई है तो तत्काल गठन कर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही ग्राम विकास अधिकारी से शपथ पत्र लेकर यह भी दर्ज किया जाए कि अतिक्रमण सर्वे किया गया है तथा कार्यवाही प्रारंभ हो चुकी है।

विभाग करेगा निगरानी

पूर्व में 3 जनवरी 2025 को भी इस आशय का निर्देश जारी किया जा चुका है। लेकिन इसकी पालना नहीं हो पाई थी। अब यह आदेश जारी कर सुनिश्चित करने के साथ विभाग को नियमित रूप से कार्यवाही से अवगत कराने के लिए कहा गया है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.patrika.com/bhilwara-news/encroachment-on-pasture-land-will-not-be-tolerated-committees-will-be-activated-19806124

Wednesday, 16 July 2025

राजस्थान: सुविचार अभियान फूलिया कलां क्षेत्र की बैठक संपन्न, 19 गांव में चरागाह विकसित करने की बनी योजना

 

संक्षेप

राजस्थान: सुविचार अभियान (सुरभि  विहार चारागाह रक्षण अभियान) के तहत एसडी फाउंडेशन, अपना संस्थान, एफईएस एवं गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के सामूहिक तत्वाधान में फूलिया कलां

विस्तार

राजस्थान: सुविचार अभियान (सुरभि  विहार चारागाह रक्षण अभियान) के तहत एसडी फाउंडेशन, अपना संस्थान, एफईएस एवं गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के सामूहिक तत्वाधान में फूलिया कलां क्षेत्र के चारागाह को विकसित करने के लिए बैठक ग्राम पंचायत राज्यास के पंचायत भवन में आयोजित हुई। शाहपुरा क्षेत्र के  प्रभारी शिवराज सोनी ने बताया कि बैठक में आठ गांवों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस बैठक में सुविचार अभियान के विभाग सहसंयोजक सूर्य प्रकाश शर्मा ने ग्राम विकास के लिये चारागाह विकास को आधार बताया। उन्होंने कहा कि गांव में चारागाह विकास होगा तो पशुधन समृद्ध होगा। सुविचार अभियान के समन्वयक  महेश नवहाल ने कहा कि चारागाह विकास गांव की संपूर्ण इकोलॉजी को ही बदल सकता है। भीलवाड़ा क्षेत्र में हर पंचायत में चरागाह की भूमि अवस्थित है। इस चरागाह को विकसित करना अपने क्षेत्र में जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण को भी बढ़ावा देगा। 

चरागाह में जैव विविधता समृद्ध करने के लिए विविध प्रकार के स्थानीय प्रजाति के वृक्ष लगाए जाएंगे। इस पर ट्रेंच और एनीकट, चेक डैम आदि का निर्माण जल संरक्षण को भी बढ़ावा देगा और विकसित होने के पश्चात गांव के आसपास की पारिस्थितिकी तंत्र को ही बदला जा सकता है। एफईएस के  सुरेश पाराशर ने कहा कि गांव में निजी जमीन के अलावा शामलाती भूमि का विकास करना गांव की समृद्धि का कारक हो सकता है। बैठक में सुविचार अभियान के जिला संयोजक गुदड़ मल गुर्जर, सहसंयोजक परमेश्वर प्रसाद कुमावत, एफईएस के कुलदीप नागर ने भी विचार रखें। बैठक में देवकिशन जोशी, शिवकुमार सोनी, हेमराज कुमावत, जगदीश प्रजापत, सोनाथ गुर्जर, सालगराम कुमावत, छोटू लाल बेरवा, भंवरलाल कुमावत सहित गांव के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में 19 गांव की सूची बनाई गई जिनमें चारागाह विकास की दिशा में काम करने का लक्ष्य लिया गया। इन गांवों में चारागाह दर्शन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिसे गांव के प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र के चारागाह को देखकर विकास का लक्ष्य ले सकेंगे।

मूल ऑनलाइन लेख -https://ncrsamacharlive.in/latest/rajasthan-suvichar-abhiyan-phuliya-kalan-area-meeting-concluded-plan-made-to-develop-pastures-in-19-villages

Friday, 6 June 2025

वंदे गंगा – जल संरक्षण जन अभियान

111 तुलसी के पौधों का वितरण कर, प्रत्येक व्यक्ति से कि पांच पौधे लगाने की अपील धरती पर जीवन का अस्तित्व जल और हरियाली पर टिका- रामहेत सिंह यादव “हरियालो राजस्थान” अभियान के तहत वृक्षारोपण स्थलों का पत्रकारों ने किया निरीक्षण बंबोरा बावड़ी और नंगली ओझा के चारागाह विकास कार्यों को मिली सराहना

खैरथल-तिजारा, 6 जून। निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर बंबोरा बावड़ी पर वंदे गंगा – जल संरक्षण जन अभियान द्वितीय दिन भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन के माध्यम से आमजन को जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्ति एवं पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए प्रेरित किया गया|

कार्यक्रम की शुरुआत सरोवर जल पूजन से हुई। इसके पश्चात उपस्थित अतिथिगणों ने सरोवर की पाल पर हरियालो राजस्थान अभियान के तहत पौधारोपण किया। तत्पश्चात विभिन्न गणमान्य अतिथियों ने जल, पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण के महत्व पर विचार व्यक्त किए।

पूर्व विधायक रामहेत सिंह यादव ने अपने संबोधन में कहा कि धरती पर जीवन का अस्तित्व जल और हरियाली पर टिका है। जल केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि यह जीवन का आधार है – एक ऐसा तत्व जिसे हमें श्रद्धा और जिम्मेदारी के साथ सहेजना चाहिए। आज, जब हम जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, तो समय आ गया है कि हम सिर्फ चिंता नहीं, बल्कि ठोस कार्य करें, सरकार द्वारा इस दिशा में पर्यावरण को सहेजने हेतु इस अभियान कि शुरुआत की गई। हमें अपने आसपास के जल स्रोतों को बचाने के लिए संगठित होकर प्रयास करने होंगे – तालाब, कुएँ, नदियाँ और वर्षा जल – हर बूंद की रक्षा करनी होगी। भूजल स्तर को फिर से जीवन देना और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह कार्य सरकार का ही नहीं, हम सबका साझा दायित्व है। उन्होंने सभी से अपील कर कहा कि एक संकल्प लें – कम से कम 5 पौधे अवश्य लगाएं। यह छोटा-सा प्रयास, जब हर व्यक्ति द्वारा किया जाएगा, तो वह एक बड़ा परिवर्तन लाएगा। उन्होंने विशेष रूप से हमारी माताओं, बहनों और बेटियों से आह्वान करता हूँ कि वे इस हरित अभियान में अपनी प्रभावशाली भूमिका निभाएं, क्योंकि प्रकृति से उनका जुड़ाव सबसे गहरा होता है। उन्होंने बताया कि 78 करोड़ की परियोजना के माध्यम से किशनगढ़ बास के 32 गांव को रुंध गिदावड़ा से पेयजल आपूर्ति की जाएगी।

जिला कलेक्टर किशोर कुमार ने कहा कि राजस्थान की संस्कृति सदैव जल संरक्षण की रही है। आज की पीढ़ी को पारंपरिक जल स्रोतों की रक्षा कर भविष्य के लिए उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने आज हम पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि जल पृथ्वी पर सीमित मात्रा में है जिसका हमें सदुपयोग कर भूजल स्तर को बढ़ाने हेतु जल संरक्षण के विभिन्न उपाय करने चाहिए।

इस अवसर पर 111 तुलसी पौधे वितरित किए गए और जल संकल्प शपथ दिलवाई गई। कार्यक्रम के दौरान कलश यात्रा एवं जागरूकता रैली को उपस्थित जनप्रतिनिधियों द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

जिले के पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने “हरियालो राजस्थान” अभियान के अंतर्गत किए गए वृक्षारोपण स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बंबोरा बावड़ी और नंगली ओझा की चारागाह भूमि पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए गए प्रभावशाली प्रयासों को देखा और सराहा।

*बंबोरा बावड़ी: परंपरा और संरक्षण का सुंदर संगम*
बंबोरा गांव स्थित ऐतिहासिक बावड़ी, जिसका निर्माण मदनलाल गुप्ता के पूर्वज सुंढाराम द्वारा करवाया गया था, आज भी जल संरक्षण का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनी हुई है। यह बावड़ी न केवल ग्रामीणों के लिए टहलने और शांति से समय बिताने का स्थान है, बल्कि जल-संरक्षण की परंपरा को जीवित रखने का प्रतीक भी है। यहां की हरियाली और प्राकृतिक वातावरण ने पत्रकारों को विशेष रूप से प्रभावित किया।

*नंगली ओझा: चारागाह भूमि पर हरियाली से हरित अर्थव्यवस्था की ओर*
नंगली ओझा गांव में चारागाह विकास कार्य के अंतर्गत लगभग 22 बीघा भूमि पर 2500 पौधे लगाए गए। आधुनिक तकनीक से सुसज्जित यह क्षेत्र अब पर्यावरणीय संवर्धन के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त कर रहा है।

ड्रिप सिंचाई प्रणाली और सोलर ऊर्जा से संचालित चार बोरिंग की मदद से पौधों को नियमित जल आपूर्ति की जा रही है, जिससे अधिकांश पौधे पूरी तरह जीवित हैं और अच्छे से विकसित हो रहे हैं।

पिछले वर्ष इस विकास कार्य से ₹80,000 की आय हुई, जिसे ग्रामीणों ने सरकार के खाते में जमा कराया। भविष्य की योजना के तहत, इस परियोजना से प्रति वर्ष लगभग ₹10 लाख की आय होने की संभावना है, जो ग्रामीणों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि होगी।

यह परियोजनाएं सिर्फ हरियाली बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह ग्रामीण विकास, आजीविका संवर्धन और सामुदायिक भागीदारी की मिसाल बन रही हैं। “हरियालो राजस्थान” जैसे अभियानों के माध्यम से न केवल जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान खोजा जा रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का मार्ग भी प्रशस्त किया जा रहा है।

मूल ऑनलाइन लेख- https://bastitimes24.in/2025/06/06/vande-ganga-water-conservation-public-campaign/


Tuesday, 22 April 2025

वनस्पति बीज बैंक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन— मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग के नवीन भवन का किया लोकार्पण

 

जयपुर, । राज्य के 150 पंचायत क्षेत्रों में वनस्पति बीज बैंकों की स्थापना की जाएगी, जिसके माध्यम से स्थानीय वनस्पति एवं घास की प्रजातियों का संरक्षण, संग्रहण और संवर्धन किया जाएगा। इससे राज्य के चारागाह समृद्ध होंगे और पशुधन पोषण को बल मिलेगा। शिक्षा एवं पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने मंगलवार को कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा में विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर आयोजित वनस्पति बीज बैंक राज्य स्तरीय कार्यशाला में यह जानकारी दी।

दिलावर ने कहा कि राज्य सरकार सतत कृषि, पर्यावरण संतुलन तथा पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक कृषि प्रणाली से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। दिलावर ने प्रकृति अनुकूल जीवनशैली अपनाने तथा जल, जंगल और जमीन के संरक्षण में सहभागी बनने का आह्वान किया।

उन्होंने पृथ्वी के समक्ष उत्पन्न संकट की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि हमनें इसकी मिट्टी, जल और वायु को प्रदूषित कर दिया है। नदियाँ, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी सब धरती के श्रृंगार हैं। यदि हम इन्हें बचाएंगे, तभी धरती का सौंदर्य और संतुलन बना रहेगा। उन्होंने गाय के दूध की महत्ता को रोचक उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए गौ संरक्षण और पालन पर भी बल दिया।

उन्होंने पानी की कमी को दूर करने के लिए तालाब, कुण्ड अतिक्रमण से मुक्त रखने और जीर्णोद्धार करने तथा ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण करने पर जोर दिया। उन्होंने पाॅलिथीन उपयोग न करने की भी अपील की।

मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग के नवीनीकृत भवन का किया लोकार्पण—

मदन दिलावर ने राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा स्थित मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग के नवीनीकृत भवन का लोकार्पण भी किया।

प्रदर्शनी का किया अवलोकन—

कार्यशाला के दौरान बीज बैंक प्रदर्शनी में महिला स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण किसान संगठनों ने अपने-अपने स्तर पर संरक्षित देसी बीजों से जैविक खेती के मॉडल और बीज वितरण प्रणाली का प्रदर्शन किया। दिलावर ने प्रत्येक स्टॉल पर जाकर विस्तार से जानकारी ली, किसानों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि बीज खेती की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। अगर बीज उत्तम होगा तो फसल भी समृद्ध होगी। इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी।

चारागाह विकास के लिए भंवरलाल खटीक का किया सम्मान—

मदन दिलावर ने मांडलगढ़, भीलवाड़ा जिले के वरुधनी गांव के श्री भंवरलाल खटीक द्वारा चारागाह भूमि विकास एवं वनस्पति संरक्षण के लिए अदभुत एवं प्रशंसनीय कार्य करने के लिए सम्मानित किया ।

श्री भंवर लाल ने अपने निजी प्रयासों से पिछले 35 साल के अनवरत एवं अथक परिश्रम से 200 हेक्टेयर क्षेत्र में चारागाह विकसित किया है, जो पर्यावरण और पशुधन संरक्षण के लिए वरदान है।

मार्गदर्शिका पुस्तिका एवं पोस्टर का विमोचन—

मदन दिलावर ने राज्य में बीज बैंक की स्थापना हेतु मार्गदर्शिका पुस्तिका एवं पोस्टर, आपणी माटी पहचानो पुस्तिका एवं खाद, उर्वरक एवं मृदा संरक्षण पुस्तक का विमोचन किया और वनस्पति बीज बैंक की स्थापना के लिए 150 पंचायतों के लिए 97 लाख रुपए का चेक भी जारी किया।

कार्यक्रम में कर्ण नरेन्द्र सिंह कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलपति प्रो. बलराज सिंह ने जलवायु परिवर्तन, भूमि क्षरण और जैव विविधता में हो रही कमी की पृष्ठभूमि में ऐसे कार्यक्रमों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे नई पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण, सतत कृषि तथा प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग हेतु प्रेरित करें। राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन अनुसंधान और विस्तार तंत्र के समन्वय से ही संभव है।

जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के निदेशक मुहम्मद जुनैद ने चारागाह विकास एवं जलग्रहण क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी तथा राज्य सरकार की पहल की सराहना की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 बजट घोषणा के क्रियान्वयन के अंतर्गत प्रदेश में वनस्पति पौधे एवं घास बीज प्रजातियों के संग्रहण, संरक्षण एवं विकास हेतु 150 पंचायतों में वनस्पति बीज बैंकों की स्थापना के तहत वनस्पति बीज बैंक राज्य स्तरीय कार्यशाला ‘विकसित चारागाह-समृद्ध राजस्थान’ थीम पर जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग तथा राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा द्वारा आयोजित की गई है।

डॉ. सुनील दाधीच, विभागाध्यक्ष, मृदा विज्ञान एवं विशेषाधिकारी ने कहा कि यह आयोजन “विकसित चारागाह – समृद्ध राजस्थान” की संकल्पना को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।

डॉ. हरफूल सिंह, निदेशक, राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा ने संस्थान की गतिविधियों, भवन नवीनीकरण तथा वनस्पति बीज बैंक की कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। शांतनु सिन्हा रॉय, राज्य प्रमुख फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी (एफईएस) ने भी उपयोगी सुझाव और विचार प्रस्तुत किए।

आनंद सिंह, अतिरिक्त निदेशक जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर राज्यभर से आए कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी, पंचायती राज प्रतिनिधि, एनजीओ प्रतिनिधि, शोधार्थी, बीज गुणी एवं किसानगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://awazrajasthanki.com/archives/5643

Saturday, 15 February 2025

पर्यावरण संरक्षण पर कार्यशाला, चारागाह विकास पर दिया जोर

 

जालोर | जन चेतना संस्थान व एफईएस के तत्वावधान में जिला परिषद सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें जालोर जिले के आहोर, जालोर, जसवंतपुरा और भीनमाल ब्लॉक में पर्यावरण संरक्षण और चारागाह भूमि के विकास पर चर्चा हुई। संस्थान की निदेशक रिचा यादव ने संस्थान व एफईएस की कार्यप्रणाली की जानकारी दी। अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने गांवों का चयन कर चारागाह विकास और जल संग्रहण पर जोर दिया।

जिला प्रमुख राजेश राणा ने अधिक से अधिक पौधारोपण और चारागाह भूमि के संरक्षण की जरूरत बताई। कार्यशाला में जालोर सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष भंवर सिंह बालावत, बीडीओ भीनमाल राजकुमार, बीडीओ पृथ्वीसिंह, एडीओ जालोर दिनेश कुमार गहलोत, सहायक अभियंता कुलवंत कालमा आदि मौजूद रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jalore/news/workshop-on-environmental-protection-emphasis-on-pasture-development-134477657.html