Sunday, 28 September 2025

हाईकोर्ट- क्षेत्राधिकार वाली चारागाह भूमि का उपयोग कर सकता है जेडीए

  • सेज स्थापित करने के लिए चारागाह जमीन आवंटन को दी थी PIL में चुनौती

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जेडीए एक्ट की धारा 2(8) के तहत जयपुर क्षेत्राधिकार में आने वाली भूमि शहरी भूमि की श्रेणी में आती है, इसलिए धारा 54 के तहत जेडीए ऐसी भूमि को सेज सहित अपनी किसी भी अन्य स्कीम के लिए आवंटित कर सकता है। जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश रामकरण व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका को खारिज कर दी।

मामले में अदालत ने कहा कि संबंधित भूमि का सार्वजनिक उपयोग किया जा रहा है और प्रार्थियों ने प्रभावितों को याचिका में पक्षकार नहीं बनाया है। यह भूमि साल 2008 में अधिग्रहित की गई थी, जबकि याचिका 7 साल की देरी से साल 2015 में दायर की गई है।

याचिका में कहा गया कि पूर्व में स्थानीय सरपंच ने जनहित याचिका दायर की थी। दूसरी भूमि उपलब्ध कराए बिना जेडीए ने गोचर भूमि को अवाप्त कर लिया है। हाई कोर्ट ने यह याचिका निस्तारित करते हुए विभाग को प्रार्थी का अभ्यावेदन तय करने के लिए कहा था, लेकिन प्रमुख राजस्व सचिव ने अभ्यावेदन खारिज कर दिया। जिस पर उन्होंने याचिका में कहा कि वे स्थानीय ग्रामीण हैं। जेडीए ने भूमि अधिग्रहित करते समय चारागाह के लिए दूसरी समान भूमि नहीं दी है और धारा 54 के आधार पर अभ्यावेदन खारिज किया है। ऐसे में अधिग्रहण को खारिज किया जाए।

इसके जवाब में जेडीए के अधिवक्ता अमित कुड़ी ने कहा कि जेडीए एक्ट की धारा 2(8) के तहत जयपुर के क्षेत्राधिकार में आने वाली भूमि शहरी भूमि की श्रेणी में आती है, धारा 54 के तहत सार्वजनिक उद्देश्य के लिए इस भूमि का उपयोग करने के लिए जेडीए स्वतंत्र है। भूमि अवाप्त कर रीको को दी गई और बाद में इसे महिंद्रा वर्ल्ड सिटी को आवंटित किया गया। मौजूदा समय में यहां कई शैक्षणिक संस्थान और इंडस्ट्री संचालित हो रहे हैं, इसलिए जनहित याचिका को खारिज किया जाए। खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर और जेडीए से सहमत होते हुए पीआईएल को खारिज कर दिया।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaipur/news/high-court-jda-can-use-pasture-land-under-its-jurisdiction-136033719.html

Saturday, 27 September 2025

गोचर भूमि के लिए आंदोलन होगा तेज, धार्मिक आयोजनों के साथ सोमवार से 'भिक्षा अभियान' शुरू

गोचर भूमि को मास्टर प्लान में शामिल करने के विरोध में गोचर संरक्षण समिति 'भिक्षा अभियान' और धार्मिक आयोजनों के साथ आंदोलन तेज करेगी.


गोचर संरक्षण समिति के संयोजक शिव गहलोत (ETV Bharat Bikaner)

बीकानेर: बीकानेर विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा जिले के 188 गांवों की गोचर भूमि को मास्टर प्लान 2043 में दूसरे प्रयोजनों के लिए शामिल करने के विरोध में चल रहा आंदोलन सोमवार से और तेज होगा. प्रशासन की ओर से सुनवाई न होने से नाराज गोचर संरक्षण समिति ने आंदोलन को व्यापक बनाने का फैसला किया है. तुलसी कुटीर में हुई बैठक में समिति के पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई कि 50 हजार से अधिक आपत्तियां देने के बाद भी जिला प्रशासन और बीकानेर विकास प्राधिकरण ने कोई सुनवाई नहीं की है.

गोचर संरक्षण समिति के संयोजक शिव गहलोत ने बताया कि सोमवार से पूरे बीकानेर में 'भिक्षा अभियान' शुरू किया जाएगा. इस अभियान की शुरुआत शहर के लक्ष्मीनाथ मंदिर से होगी, जिसके तहत हर घर, मोहल्ले और गांव में जाकर लोगों से गोचर संरक्षण के लिए भिक्षा के रूप में सहयोग मांगा जाएगा. गहलोत ने कहा कि प्रशासन इसे केवल बीकानेर का आंदोलन समझने की भूल कर रहा है, जबकि अब यह देश का आंदोलन बनेगा. उन्होंने बताया कि जल्द ही देश भर के प्रमुख संतों और महामंडलेश्वरों के साथ बीकानेर कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा.

गोचर को लेकर जन आंदोलन: गहलोत ने कहा कि कोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी ने गोचर की भूमि पर आपत्ति दर्ज कराई है, और समिति चाहती है कि जिले के अन्य सभी जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर उनका समर्थन करें. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि जन-आंदोलन है, जिसके आगे प्रशासन को झुकना ही होगा. आंदोलन को धार्मिक चेतना से जोड़ने के लिए सोमवार से सामूहिक सुंदरकांड और सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन भी शुरू होगा, जिसमें प्रशासन और बीडीए के अधिकारियों की सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना की जाएगी.

अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग: शिव गहलोत ने बताया कि गोचर की भूमि पट्टेशुदा भूमि है, जिसे दानदाताओं ने खरीदकर गौ माता के लिए सुरक्षित किया था. ऐसे में जिन अधिकारियों ने इस भूमि को मास्टर प्लान में दूसरे उपयोग के लिए शामिल किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें बीकानेर से हटाने की भी मांग की. उन्होंने कहा कि गाय हमारा जीवन का आधार है और यह हमारी संस्कृति से जुड़ा हुआ मुद्दा है. एक सप्ताह पहले बीकानेर जिला कलेक्टर पर हजारों गौ-प्रेमियों ने विरोध प्रदर्शन कर सरकार को संकेत दिया था, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया. इसलिए हमने आंदोलन को और आगे ले जाने का निर्णय लिया है.

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.etvbharat.com/hi/!state/gochar-sanrakshan-samiti-launch-a-begging-campaign-in-support-of-gochar-bhumi-campaign-in-bikaner-rajasthan-news-rjs25092705178

Thursday, 25 September 2025

79 दिन बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण, धरना जारी

अंता| ग्राम विकास सेवा समिति तामखेड़ा की ओर से चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर तहसील कार्यालय के सामने जारी अनिश्चितकालीन धरने को 79 दिन हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस के अधिकांश नेता इस मुद्दे से दूरी बनाए हुए हैं। हालांकि कुछ जनप्रतिनिधियों ने धरने को समर्थन दिया है। इनमें कांग्रेस के पूर्व सरपंच देवीशंकर मालव, चौथमल छंदक, भंवरलाल सुमन, आदि शामिल हैं। वहीं भाजपा से सहकारी समिति अध्यक्ष भवानीशंकर कुमावत, वार्ड पार्षद हरि गुर्जर और ओमप्रकाश चौरसिया भी धरना स्थल पहुंचकर समर्थन जता चुके हैं।

बुधवार को धरना स्थल पर समिति अध्यक्ष भैरुलाल सुमन, संरक्षक मदनलाल मीणा राणा, कोषाध्यक्ष छीतरलाल सुमन, कालूलाल सुमन, हेमराज गौड़, बाबूलाल सुमन, राजेंद्र नागर, कपिल शर्मा और गोबरीलाल राठी सहित आम आदमी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष ओम गोचर की मौजूदगी में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 26 सितंबर को दोपहर 1 बजे धरना स्थल पर महत्त्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/baran/anta/news/encroachment-not-removed-even-after-79-days-protest-continues-136004620.html

 

चरागाह भूमि में से अतिक्रमण हटवाने के लिए कलेक्टर को ज्ञापन दिया

सवाई माधोपुर | भूमाफिया द्वारा पुसोदा गांव में चरागाह भूमि में बने आम रास्ते को बंद कर अवैध रूप से अतिक्रमण करने के मामले में स्थानीय ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर 72 बीघा चरागाह भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटवाकर संबंधित अतिक्रमी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में पुसोदा निवासी भोलाराम जाट व जुगराज ने बताया कि पुसोदा गांव से खेतों तक जाने के लिए 72 बीघा चरागाह भूमि में से 60 फीट चौड़ा रास्ता बना हुआ है। गांव के किसान अपने खेतों पर आने -जाने के लिए इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। लेकिन एक व्यक्ति ने चरागाह भूमि पर कब्जा कर अतिक्रमण कर लिया है। इससे उनका आवागमन बंद हो गया है। उन्होंने बताया कि इस समय रबी की फसल बुआई का समय है। ऐसे में रास्ता बंद होने से उनके खेत बुआई के अभाव में खाली पड़े हुए है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/sawai-madhopur/news/a-memorandum-was-submitted-to-the-collector-to-remove-encroachment-from-the-grazing-land-136004840.html


Wednesday, 24 September 2025

अकलेरा में चारागाह भूमि पर चला पीला पंजा:30 सालों से कब्जा था, गांव खुरी में 10 बीघा जमीन अतिक्रमण मुक्त

 

झालावाड़ के अकलेरा में मनोहर थाना उपखंड के गांव खुरी में चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाया गया। आम रास्ते पर 30 साल से कब्जा था। इस दौरान 10 बीघा जमीन अतिक्रमण मुक्त कराई गई।

तहसीलदार माधोलाल बैरवा और हल्का पटवारी प्रकाशचंद ने ग्रामीणों को समझाया। इसके बाद ग्रामीणों ने स्वयं जेसीबी मशीन से अतिक्रमण हटाने में सहयोग किया।

अतिक्रमण हटाने में रामस्वरूप ,तेजमल,फूलचंद ,कन्हीराम , गंगाराम और दानमल ने सक्रिय भूमिका निभाई।

ग्रामीणों ने अन्य अतिक्रमणकारियों से भी आगे आकर जमीन खाली करने की अपील की है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/akrela/news/yellow-paw-moves-on-pasture-land-in-aklera-136003193.html

Sunday, 21 September 2025

अंता में थामखेड़ा ग्रामीणों का धरना 77वें दिन भी जारी:चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग, नहीं मानने पर धरना जारी रखने की चेतावनी दी

 

अंता तहसील कार्यालय पर ग्राम विकास सेवा समिति थामखेड़ा के नेतृत्व में चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर धरना रविवार को भी जारी रहा। ये धरना अब तक 77 दिनों से लगातार चल रहा है।

धरने में समिति के अध्यक्ष भेरूलाल सुमन मौजूद रहे। उनके साथ कालूलाल सुमन, छीतर लाल सुमन, हेमराज गौड़, बाबूलाल, महेंद्र कुमार सुमन, कपिल शर्मा और हरिओम सुमन भी शामिल हुए। पंडित महेश्वर गौतम, अशोक कुमार, राजेंद्र नागर और लीलाधर मालव ने भी हिस्सा लिया।

समिति के संरक्षक मदन लाल मीणा और राणा के अलावा आम आदमी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष ओम गोचर भी अंता में उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांग नहीं मानी गई तो ये धरना जारी रहेगा।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/baran/anta/news/the-protest-of-thamkheda-villagers-in-anta-continues-for-the-77th-day-135976932.html

Friday, 19 September 2025

सुलिया में चारागाह भूमि की सही पैमाइश की मांग:ग्रामीणों ने उपखण्ड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन, अतिक्रमण हटाने की अपील

भवानीमंडी के सुलिया गांव में ग्रामीणों ने गोचर भूमि की सही तरीके से पैमाइश करवाने और उस पर हुए अतिक्रमण को हटाने की मांग की है। इसे लेकर के ग्रामीणों ने उपखण्ड अधिकारी श्रद्धा गोमे को ज्ञापन सौंपा है।

ग्रामीणों ने बताया कि सुलिया में चारागाह जमीन पर कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। इसे प्रशासन की देखरेख में मुक्त करवाया जाना चाहिए। उन्होंने ये भी बताया कि कुछ दिन पहले भी जिला कलेक्टर और उपखण्ड अधिकारी को इस संबंध में ज्ञापन दिया गया था।

उस ज्ञापन पर उपखण्ड अधिकारी ने तहसीलदार को पटवारी से मौका मुआयना करवाने का आदेश दिया था। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि पटवारी द्वारा सही तरीके से पैमाइश नहीं की गई।

ग्रामीणों ने बताया कि चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाने के लिए कई दिनों से सरपंच से जेसीबी मशीन की मांग की जा रही थी, लेकिन सरपंच ने अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन की देखरेख में अतिक्रमण हटाया जाए और मौके पर प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहें ताकि किसी भी संभावित विवाद से बचा जा सके। ज्ञापन सौंपते समय कई ग्रामीण मौजूद थे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/bhawani-mandi/news/demand-for-accurate-measurement-of-pasture-land-in-sullia-135960278.html

Tuesday, 16 September 2025

Jhunjhunu News: केड पंचायत की 144 हेक्टेयर चारागाह भूमि होगी अतिक्रमण मुक्त

अतिक्रमियों को 7 दिन की मोहलत, नहीं हटाया तो बुलडोजर चलेगा

गुढ़ागौड़जी/झुंझुनूं, झुंझुनूं जिले की केड ग्राम पंचायत की 144 हेक्टेयर चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रशासन ने एक्शन मोड अपनाया है।

हाईकोर्ट और सरकार के आदेश पर कार्रवाई

यह कार्रवाई राजस्थान उच्च न्यायालय, मुख्यमंत्री और ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री के निर्देश पर की जा रही है। पंचायत के अंतर्गत राजस्व ग्राम केड में 17.18 हेक्टेयर, नंगली निर्बाण में 21.38 हेक्टेयर, खटकड़ में 92.45 हेक्टेयर और कीरपुरा में 2.44 हेक्टेयर भूमि को चिह्नित कर अतिक्रमण हटाने का नोटिस दिया गया है।

अतिक्रमियों को मिली मोहलत

15 सितम्बर को जिला कलेक्टर की रात्रि चौपाल में अतिक्रमियों ने समय की मांग की थी। इसके बाद प्रशासन ने कब्जा हटाने के लिए 7 दिन की मोहलत दी है। तय समय में कब्जा नहीं हटाया गया तो प्रशासन पुलिस जाब्ते के साथ बुलडोजर चलाकर कार्रवाई करेगा और खर्चा भी अतिक्रमियों से वसूलेगा।

जनहित याचिका से शुरू हुई पहल    

यह मामला समाजसेवी सुभाष कश्यप की पहल पर शुरू हुआ। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका संख्या 10819/2018 दाखिल की थी। इसके बाद सार्वजनिक भूमि संरक्षण प्रकोष्ठ में वाद दर्ज कर कार्यवाही को आगे बढ़ाया गया।

सरकार के स्तर पर गंभीरता

पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने 22 जुलाई 2025 को सभी पंचायतों को चारागाह समितियों को क्रियाशील करने और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। वहीं समाजसेवी कश्यप ने मंत्री और मुख्यमंत्री से मिलकर इस भूमि को गौ अभ्यारण घोषित करने की मांग भी रखी थी।

लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई

अभियान में लापरवाही बरतने वाले ग्राम विकास अधिकारी व संबंधित कर्मियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

अतिक्रमण का हाल

चारागाह भूमि पर पक्के मकान, दुकानें, नलकूप और अवैध खेती तक हो रही है। आरोप है कि इलाके में मवेशियों की चोरी में भी कुछ अतिक्रमियों का हाथ हो सकता है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://shekhawatilive.com/jhunjhunu/khed-gram-panchayat-jhunjhunu-grazing-land-encroachment/cid18057821.htm

Monday, 15 September 2025

विधायक अशोक कोठारी की मांग : राजस्थान में चारागाह विकास के लिए ग्राम सभाओं में प्रस्ताव लाने का आग्रह

भीलवाड़ा। भीलवाड़ा के विधायक अशोक कोठारी ने प्रदेश में चारागाह और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के विकास को लेकर सरकार को लिखे पत्र में महत्वपूर्ण मांग कर आगामी 2 अक्टूबर को होने वाली ग्राम सभाओं में 2026-27 की वार्षिक कार्य-योजना में प्रस्ताव शामिल करने के लिए आदेश जारी करने का आग्रह किया है। विधायक कोठारी ने राज्य के मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, पंचायतीराज मंत्री व प्रमुख शासन सचिव को पत्र के माध्यम से बताया कि राजस्थान में कुल 3.42 करोड़ हेक्टेयर भूमि है, जिसमें से केवल 4.86 प्रतिशत (16.38 लाख हेक्टेयर) ही चारागाह के रूप में उपलब्ध है। उन्होंने जोर दिया कि ये चारागाह सिर्फ पशुधन के लिए ही नहीं, बल्कि गांवों के पारिस्थितिक संतुलन और जल संचयन क्षमता को बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। कोठारी ने इस बात पर चिंता जताई गई है कि चारागाहों के विकास के अभाव में विलायती बबूल का तेजी से फैलाव हुआ है, जिससे ये जमीनें बंजर हो रही हैं। यह बबूल न सिर्फ देशी घास को उगने से रोकता है, बल्कि भूमि की उर्वरकता को भी कम करता है। उन्होंने विलायती बबूल को हटाकर सेवण, धामण और रोहिड़ा जैसी देशी प्रजातियों के पौधे लगाने का सुझाव दिया है। विधायक कोठारी ने ग्रामीण विकास विभाग से 2 अक्टूबर की ग्राम सभा के लिए हर ग्राम एक चारागाह योजना के तहत वर्ष 2026-27 में प्रत्येक गांव में महात्मा गांधी नरेगा और जलग्रहण योजना के माध्यम से कम से कम 15 हेक्टेयर चारागाह भूमि विकसित करने के लिए बजट स्वीकृत किया जाए। गांवों को जल और चारे के लिए आत्मनिर्भर बनाने के लिए इन साझा संसाधनों पर सामुदायिक अधिकारों को मजबूत किया जाए। राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के तहत, वार्ड पंच की अध्यक्षता में हर गांव में एक चारागाह विकास समिति का गठन किया जाए।राजस्व अधिकारियों की मदद से सभी शामलात भूमियों (जैसे चारागाह, ओरण, तालाब आदि) का सीमांकन (सीमाज्ञान) करके उन्हें पंचायत के रजिस्टर में दर्ज किया जाए। जिन गांवों में चराई योग्य भूमि नहीं है, वहां बिलानाम (सरकारी) भूमि को चारागाह के रूप में चिन्हित कर विकसित किया जाए। उन्होंने पत्र में बताया कि आजीविका विकास के लिए राजीविका के स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को सुनिश्चित किया जाए ताकि वे स्थानीय घास और बीजों को इकट्ठा कर सकें। ग्राम पंचायतों में विलायती बबूल को हटाने का प्रस्ताव लिया जाए और इससे कोयला बनाकर पंचायतों के लिए आय के साधन पैदा किए जाएं। पंचायतें अपने गांवों के लिए जल बजट तैयार करने का प्रस्ताव लें।

विधायक कोठारी का कहना है कि प्रधानमंत्री के विकसित गांव के सपने को साकार करने के लिए चारागाहों का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन मांगों पर ध्यान देकर नरेगा के माध्यम से प्रदेश के चारागाहों का विकास किया जा सकेगा।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.khaskhabar.com/local/rajasthan/bhilwara-news/news-mla-ashok-kotharis-demand-request-to-bring-proposal-in-gram-sabhas-for-pasture-development-in-rajasthan-news-hindi-1-753054-KKN.html

सांचौर के हरियाली गांव में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण:ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, नाड़ियों और चारागाह पर कब्जे की शिकायत


सांचौर की हरियाली ग्राम पंचायत के निवासियों ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर रोष जताया है। सोमवार को ग्रामीणों ने सांचौर एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

ग्रामीणों ने बताया-हरियाली गांव के सरकारी खाता संख्या 1 में दर्ज भूमि पर लोग अवैध रूप से मकान, दुकान और खेत बना रहे हैं। इस जमीन में गोचर, आगोर, आबादी, रास्ता, पायतान और मंदिर की भूमि शामिल है।

स्थानीय जल स्रोतों पर भी अतिक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। इनमें सगड़ेतर, मडेतर, बुडलाई, मयारिया, पाचकेरा, ढाकणी नाड़ी और खडियाला तालाब शामिल हैं। अतिक्रमण के कारण रास्ते संकरे हो गए हैं। इससे आम लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। मवेशियों के लिए चारागाह भी कम होते जा रहे हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित खसरा नंबरों की पैमाइश की मांग की है। उन्होंने पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की भी मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी संपत्ति को नुकसान होगा और सामाजिक टकराव की स्थिति बन सकती है।

ज्ञापन देने वालों में गोरधन राम खिलेरी, वरधाराम मेघवाल, गणेशाराम देवासी, विरमा राम कलबी, भगवानाराम जाणी, नेनाराम विश्नोई समेत कई ग्रामीण शामिल थे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jalore/sanchore/news/encroachment-on-government-land-in-hariyali-village-of-sanchore-135927949.html

Rajasthan: 80 बीघा भूमि पर चला बुलडोजर, करोड़ों की जमीन को कराया अतिक्रमण मुक्त; भारी पुलिस बल तैनात

 Rajathan News: झालावाड़ के मनोहरथाना के समरोल गांव में चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाया जा रहा है. इस कार्रवाई के तहत अब तक 80 बीघा भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई जा चुकी है.

अवैध मकानों को तोड़ता हुआ बुलडोजर

Buldozer Action Jhalawar: झालावाड़ जिले के मनोहरथाना क्षेत्र के ग्राम समरोल में लंबे समय से चरागाह भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को हटाने की मांग आखिरकार रंग लाई है. ग्रामीणों के विरोध और लगातार आंदोलनों के बाद प्रशासन ने रविवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई. 

जेसीबी से कई पक्के और कच्चे निर्माण मकानों को गया तोड़ा
इस दौरान तहसीलदार माधव लाल मीणा के नेतृत्व में प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने गांव में पहुंचकर चरागाह भूमि से अवैध कब्जे हटवाए गए. जेसीबी से कई पक्के और कच्चे निर्माण  मकानों को तोड़ा गया. कार्रवाई के दौरान पुलिस बल की मौजूदगी से माहौल पूरी तरह नियंत्रित रहा. ग्रामीण भी बड़ी संख्या में मौके पर मौजूद रहे और प्रशासन की इस कार्रवाई पर संतोष जताया.

 चरागाह भूमि से कब्जे हटाने को लेकर किया था हाईवे जाम
गौरतलब है कि ग्रामीणों ने कुछ दिन पहले ही चरागाह भूमि से कब्जे हटाने की मांग को लेकर हाईवे जाम किया था और सड़क पर टायर जलाकर विरोध दर्ज कराया था. उस समय जिला प्रशासन को आश्वासन देना पड़ा था कि अवैध कब्जों को जल्द हटाया जाएगा. उसी क्रम में रविवार को यह बड़ी कार्रवाई की गई.

80 बीघा जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार अब तक लगभग 80 बीघा जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है. यह काम अभी जारी है और शेष भूमि से भी अतिक्रमण हटाया जाएगा. अधिकारियों ने साफ कहा है कि चरागाह भूमि पर किसी भी प्रकार का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भूमि को पूरी तरह उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाएगा.

पशुओं को मिलेगी चारे की समस्या से राहत
ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि उनके मवेशियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके मुक्त होने से पशुओं को चारे की समस्या से राहत मिलेगी. वे इस कार्रवाई को अपनी जीत मान रहे हैं, लेकिन साथ ही प्रशासन से यह भी अपेक्षा कर रहे हैं कि भविष्य में दोबारा ऐसे कब्जे न होने पाएं.

मूल ऑनलाइन लेख - https://rajasthan.ndtv.in/rajasthan-news/jhalawar-bulldozer-action-80-bigha-land-freed-encroachment-heavy-police-force-deployed-9279184

Sunday, 14 September 2025

वन संपदा एवं जैव विविधता पर्यावरण को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र

विपदा की आहट पूर्व बैद ने सक्षम स्तर पर लिखे पत्र में जानकारी देकर करवाया अवगत

बीकानेर से डॉ राम दयाल भाटी

छोटी काशी के नाम से विख्यात बीकानेर की जैव विविधता एवं पर्यावरण पर संकट साफ दिखाई दे रहा है भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड मत्स्य पालन पशु पालन डेयरी मंत्रालय भारत सरकार के मानद प्रतिनिधि श्रेयांस बैद ने सुप्रीम कोर्ट के माननीय मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में बताया कि हम सभी ने कोरोना काल में ऑक्सीजन के लिए लोगों को मरते हुए देखा है उसी ऑक्सीजन के टैंक कहे जाने वाले सरेह नथानिया की करीब 27 हजार बीघा गोचर उजड़ने की और गतिमान है ।

शहरीकरण का अमलीजामा पहनाने के लिए गोचर को उजाड़ने से वन संपदा एवं जैव विविधता खत्म हो जाएगी राजाओं के समय में गोचर भूमि में एक तृण उठाना भी पाप समझा जाता था गायों के महत्वपूर्ण स्थान की सृजनात्मकता पर आए ऐसे खतरे से सोचते हुए भी बहुत दुख हो रहा है ।

भगवान श्री कृष्ण से लेकर आगामी समय तक में गौ के लिए गोचर छोड़ी जाती रही है जिसे उजड़ना आने वाले समय में बहुत बड़ी विपदा का संकेत है जिसे स्वयंभू समझ रहे उच्चअधिकारी भी समझ नहीं रहें जिसका दंश आने वाले समय में स्थानीय निवासियों को भुगतना पड़ेगा।

प्रदेश के समस्त गौचर,पायतन,ओरण, गे वा, चारागाह तक राजस्व विभाग में दर्ज है ।

महाराजा गंगासिंह यूनिवर्सिटी पर्यावरण विभाग विभागाध्यक्ष प्रो.अनिल कुमार ने बताया कि गोचर केवल लम्बे चौड़े क्षेत्र में फैला भूभाग ही नहीं, यह इंसान से लेकर जीव-जंतुओं, कीट पतंगों, सरीसृपों और पक्षियों की जीवन रेखा है।

एक तरफ सोलर प्लांटों के लिए लाखों पेड़ों को काटा जा रहा है जीव जंतुओं के आवास उजड़े रहे हैं। ऐसे में गोचर यहां की जैव विविधता के प्रमुख अवसान के रूप में विशेष है।

यहां थार की दुर्लभ जैव विविधता का संरक्षण हो रहा है। कई दुलर्भ प्रजातियों की वनस्पति, जीव-जंतु और पक्षी यहां संरक्षित हो रहे है। यह हमारे लिए प्रकृति और पूर्वर्जों का सैकड़ों वर्षों पूर्व दूरदृष्टी के साथ छोड़ा गया वह खजाना है जो अनमोल है।

जैव विविधता की सुरक्षा: वन और वन आवरण को सुरक्षित रखने से जैव विविधता का संरक्षण होता है, जो जलवायु परिवर्तन से लड़ने और सतत विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने गोचर/ओरण भूमि के अवैध अतिक्रमण को हटाने और उनके संरक्षण के लिए विभिन्न आदेश जारी किए हैं।

 माननीय न्यायालय ने कहा है कि गोचर भूमि का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही होना चाहिए और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। राजस्थान सरकार को ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई करने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश भी दिए गए थे ।

बीकानेर शहर के चारों तरफ रियासतकाल से गोचर की जमीन है पहले यह 45 हजार बीघा के करीब थी चार साल पहले गोचर की भूमि अतिक्रमण की भेंट चढ़ने से बचाने के लिए सभी एकजुट हुए थे जो वर्तमान में करीब 27000 बीघा है जनसहयोग से गोचर की चारदीवारी कराई गई यह 40 किलोमीटर लम्बी दीवार देश में जनसहयोग से निर्मित सबसे लम्बी दीवार है।

गौचर की जमीन नष्ट होने से वन्य जीवों एवं गाय जो हमारी सांस्कृतिक विरासत है एवं आजीविका का मूल स्रोत है उनके चरण के स्थान पर मंडरा रहे खतरे से उनका जीवन यापन खतरे में पड़ जाएगा ।

गोचर को बचाने को लेकर पत्र प्रेषित किया है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://bastitimes24.in/2025/09/14/a-letter-was-written-to-the-chief-justice-of-the-supreme-court-to-save-forest-wealth-and-biodiversity-environment/


Saturday, 13 September 2025

तामखेड़ा में चारागाह भूमि से हटाया अतिक्रमण

अंता | क्षेत्र के तामखेड़ा गांव में चारागाह भूमि पर अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर तहसील कार्यालय के बाहर चल रहे धरने पर प्रशासन सख्त हुआ। गुरुवार को तहसील प्रशासन ने चारागाह भूमि पर हो रहे अतिक्रमण पर जेसीबी चला कर कार्रवाई की। यह कार्रवाई गुरुवार दोपहर बाद की गई। इस दौरान जेसीबी मशीनों की सहायता से चारागाह भूमि पर बनाए गए बड़े-बड़े बाड़ों ध्वस्त किया गया। तहसीलदार मंजूर अली दीवान ने बताया कि तामखेड़ा गांव में चारागाह भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई हुई। इस दौरान तहसील कार्यालय की टीम के साथ ही पुलिस प्रशासन भी मौजूद रहा। इस दौरान 15 से 20 बाड़ों पर कार्रवाई की गई। साथ ही चरागाह भूमि पर बोई गई फसल को भी नष्ट किया गया। दोपहर बाद 2 बजे से शुरू कार्रवाई शाम 6 बजे तक चली। पक्के निर्माण पर भी नियमानुसार जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। तहसील क्षेत्र की जितनी भी चारागाह भूमि तामखेड़ा में आ रही थी उसको अतिक्रमण मुक्त किया गया। 

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/baran/anta/news/encroachment-removed-from-pasture-land-in-tamkheda-135896282.html

चरागाह भूमि से तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए

भिनाय| छछूंदरा में गुरुवार शाम उपखण्ड अधिकारी जीतू कुलहरी ने रात्रि चौपाल आयोजित कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनी।

इस दौरान ग्रामीण जगवीर सिंह, हगामा कुम्हार, शिवराज भड़ाना सहित कई ग्रामीणों ने चरागाह भूमि व सिवायचक भूमि पर ग्रामीणों द्वारा अतिक्रमण कर चरागाह की मेड़बंदी हटाकर खेत बनाने की शिकायत करते हुए तत्काल अतिक्रमण हटवाने की मांग की।

राधाकिशन गुर्जर ने फसल खराबे का मुआवजा दिलाने, सौदान पुत्र हजारी गुर्जर ने रहन नामा अंकित करने, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सेदरिया के प्रधानाचार्य ने विद्यालय के खेल मैदान परिसर के चारदीवारी का निर्माण करने, मुकेश जांगिड़ ने छछूंदरा में शिवमन्दिर के पास लगे ट्रांसफार्मर को हटाने, गोपाल व कालू गुर्जर ने भूरी मंगरी मोहल्ले में बीसलपुर की पाइप लाइन बिछाने, सरगांव के ग्रामीणों ने भिनाय लिंक रोड़ से सरगांव सड़क बनवाने, हंगामा कुम्हार ने पशु चिकित्सा उप केंद्र की बिल्डिंग बनाने व पशुधन सहायक लगाने, धनराज खाती ने शिवनगर से सालिया भाटा ग्रेवल सड़क तक मय पुलिया के ग्रेवल सड़क बनवाने की मांग की।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/ajmer/bhinay/news/encroachment-from-pasture-land-should-be-removed-immediately-135904519.html



Friday, 12 September 2025

चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटवाने पर अड़े ग्रामीण, 3 घंटे प्रदर्शन

तहसील क्षेत्र में अधिकतर गांवों में चारागाह भूमि पर वर्षों से अतिक्रमण हो रहा है। जिससे गोवंश चराने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीण चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग करते आ रहे हैं। लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इससे खफा समरोल के ग्रामीण गुरुवार को एकत्र होकर मनोहरथाना- समरोल मार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना था कि वह प्रशासन से चारागाह भूमि पर अतिक्रमण मुक्त करने की कई बार मांग कर चुके हैं। लेकिन प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया। गुरुवार सुबह 7 बजे गांव के पास सड़क पर जाम लगा दिया। जावर थानाप्रभारी के साथ तहसीलदार माधोलाल मौके पहुंचे। ग्रामीणों को समझाया लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे। करीब 3 घंटे प्रदर्शन चला।

मनोहरथाना एसडीएम भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि अगले सप्ताह में 15-16 तारीख को चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटा दिया जाएगा। आश्वासन पर ग्रामीण मान गए। 10 बजे करीब प्रदर्शन खत्म कर जाम हटा लिया। ग्रामीणों ने बताया कि करीब 60 बीघा चारागाह भूमि पर अतिक्रमण है। तहसील क्षेत्र में 303 हैक्टेयर चारागाह भूमि पर कब्जा मनोहरथाना तहसील क्षेत्र में कुल 195 राजस्व गांव है। कुल 7120 हैक्टेयर चारागाह भूमि है। इन गांव में 303.24 हैक्टेयर चारागाह भूमि पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। इससे पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई लोग वर्षों से भूमि पर काबिज हैं। तहसीलदार माधोलाल ने बताया कि लोग चारागाह भूमि पर काबिज हैं प्रतिवर्ष इनकी बेदखली के लिए राजस्व धारा 91 की कार्रवाई की जाती है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/manoharthana/news/villagers-adamant-on-removing-encroachment-from-pasture-land-protest-for-3-hours-135896836.html

अंता में चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाया:थामखेड़ा में 20 अवैध बाड़े तोड़े, फसलों को हटाया

बारां के अंता के थामखेड़ा गांव में चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। तहसील प्रशासन ने पुलिस बल के साथ कार्रवाई की। दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक चली इस कार्रवाई में जेसीबी मशीनों की मदद से करीब 15 से 20 अवैध बाड़ों को हटाया गया।

कार्रवाई के दौरान मौके पर लोगों की भीड़ मौजूद रही ।

अंता तहसीलदार मंजूर अली ने बताया कि चारागाह भूमि पर अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर तहसील कार्यालय के बाहर धरना चल रहा था। इसी के मद्देनजर प्रशासन ने कार्रवाई की। अतिक्रमणकारियों ने चारागाह भूमि पर खेती कर फसल भी उगा रखी थी, जिसे भी नष्ट कर दिया गया।

तहसीलदार ने कहा कि थामखेड़ा में जितनी भी चारागाह भूमि थी, उसे अतिक्रमण मुक्त कर दिया गया है। पक्के निर्माणों पर भी जल्द ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के दौरान तहसील कार्यालय की टीम के साथ पुलिस बल भी मौजूद रहा।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/baran/anta/news/encroachment-removed-from-pasture-land-in-anta-135900838.html


Thursday, 11 September 2025

समरोल में चरागाह भूमि पर अतिक्रमण का विरोध:हरनवादा-मनोहर थाना मार्ग पर लगाया जाम, प्रशासन से अवैध कब्जा हटाने की मांग

जावर थाना क्षेत्र के ग्राम समरोल में ग्रामीणों ने चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर हरनवादा से मनोहर थाना जाने वाले मार्ग को जाम कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक भूमाफियाओं द्वारा किया गया अतिक्रमण नहीं हटेगा, तब तक जाम जारी रहेगा।

ग्रामीणों ने बताया कि इस मुद्दे पर 1 सितंबर को प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने से नाराज होकर उन्होंने यह कदम उठाया है। जाम की सूचना मिलते ही जावर थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि चरागाह भूमि गांव के मवेशियों के लिए बेहद जरूरी है। अतिक्रमण के कारण मवेशियों के चरने की जगह प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि अवैध कब्जे तुरंत हटाए जाएं और चरागाह भूमि को मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।

जाम के कारण इस मार्ग पर यातायात व्यवस्था बाधित हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वे तब तक प्रदर्शन जारी रखेंगे, जब तक प्रशासन उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं करता।

मूल ऑनलाइन लेख - 

कपासन के रूपाखेड़ी में अतिक्रमण से ग्रामीण परेशान:तहसीलदार से मिले, बोले- कार्रवाई नहीं हुई तो करेंगे भूख हड़ताल


कपासन क्षेत्र में रूपाखेड़ी के ग्रामीण चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर तहसीलदार के पास पहुंचे। ग्रामीणों ने तहसीलदार मोहम्मद नासिर बेग मिर्जा को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।

ज्ञापन में बताया गया कि रूपाखेड़ी पटवार हल्का के बेरूनी क्षेत्र में स्थित चारागाह भूमि खाता संख्या 305 में 63.56 हेक्टेयर जमीन है। यह भूमि सरकार द्वारा आवारा पशुओं और बेसहारा गायों के चरने के लिए आवंटित की गई है। कुछ लोगों ने इस जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। इससे पशुओं के चरने की जगह नहीं बची है।

तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते ग्रामीण

ऐसे में आवारा पशु किसानों की निजी भूमि में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन आपके द्वार कैंप में इस मुद्दे को उठाया। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बता दें, 17 अगस्त को ग्रामीणों ने पंचायत भवन पर धरना दिया था। तब तहसीलदार ने 15 दिन में अतिक्रमण हटाने का आश्वासन दिया था। लेकिन वादा पूरा नहीं हुआ। अब ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर 15 दिन में अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो वे धरना देंगे और भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन करेंगे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/chittorgarh/kapasan/news/villagers-are-troubled-by-encroachment-in-rupakhedi-of-kapasan-135893732.html?media=1


Tuesday, 9 September 2025

देवगढ़ में चारागाह जमीन पर अवैध कब्जे का मामला:सरपंच और पटवारी पर मिलीभगत का आरोप, ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन


भवानीमंडी के ग्राम पंचायत आवर के देवगढ़ में चारागाह भूमि पर अवैध अतिक्रमण का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में एसडीएम श्रद्धा गोमे को ज्ञापन सौंपा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत आवर के सरपंच विमल जैन और भू-अभिलेख निरीक्षक और पटवारी की मिलीभगत से यह अतिक्रमण किया गया है। आरोपियों ने चारागाह भूमि पर तार बाउंड्री लगाकर कब्जा कर लिया है।

इससे पहले ग्रामीणों ने दो बार पचपहाड़ तहसीलदार को भी ज्ञापन सौंपा था। प्रशासन ने कार्रवाई की, लेकिन रसूखदार लोगों के अतिक्रमण को नहीं हटाया। इसके बजाय एससी वर्ग के गरीब लोगों के छोटे-छोटे अतिक्रमण हटा दिए गए। चारागाह भूमि पर बड़े अतिक्रमण अभी भी मौजूद हैं।

ग्रामीणों ने एसडीएम से नामजद लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने की मांग की है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/bhawani-mandi/news/case-of-illegal-occupation-of-pasture-land-in-devgarh-135877345.html

लालसोट में चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाया:50 बीघा जमीन पर अवैध रूप से बोई फसल नष्ट की

लालसोट क्षेत्र में राहुवास तहसील के निचुनिया गांव में राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर बड़ी कार्रवाई की गई। प्रशासन ने पुलिस की मौजूदगी में चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाया।

अतिक्रमणकारियों ने करीब 50 बीघा भूमि पर गवार, बाजरा, मूंगफली और तिल की फसल बो रखी थी। प्रशासन ने ट्रैक्टरों से इन फसलों को नष्ट कर भूमि को खाली करवाया। अतिक्रमणकारियों को भविष्य में सरकारी भूमि पर कब्जा न करने की चेतावनी दी गई।

तहसीलदार महेश चंद शर्मा के अनुसार, यह कार्रवाई भू राजस्व अधिनियम की धारा 91 के तहत की गई। मामले में पहले नायब तहसीलदार रामगढ पचवारा ने 30 अगस्त 2017 को और अतिरिक्त जिला कलेक्टर दौसा ने 27 नवंबर 2017 को निर्णय दिया था। अतिक्रमणकारियों ने इसके खिलाफ संभागीय आयुक्त जयपुर में अपील की थी।

न्यायालय ने 8 अक्टूबर 2024 को अपील खारिज कर दी। इसके बाद ग्राम निचूनियां की भूमि खसरा नंबर 199/18 किस्म चारागाह और खसरा नंबर 191/17 सिवायचक भूमि से अतिक्रमणकारियों को बेदखल करने का आदेश दिया गया। इसके अलावा खसरा नंबर 16, 19, 178/6, चारागाह और गैर मुमकिन नाला पर भी अतिक्रमण पाया गया।

कार्रवाई के दौरान गिरदावर हरिनारायण, पटवारी मुरारी, कमलेश, किरण सहित राजस्व कर्मी और पुलिस बल मौजूद रहे। यह कार्रवाई सोमवार की देर शाम तक चली।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/dausa/lalsot/news/encroachment-removed-from-pasture-land-in-lalsot-135875731.html

 

Monday, 8 September 2025

ब्लॉक में 3635 हैक्टेयर गोचर भूमि, कब्जा कर की जा रही खेती, घटना के बाद प्रशासन करता है कार्रवाई

 शिकायतों के बाद भी नहीं दिया जाता ध्यान, हर जगह बनाई जा सकती हैं गोशाला, चारागाह

देवल पंचायत अंतर्गत गोचर जमीन

बीना. गांवों में पहले गोवंश को घास उपलब्ध कराने गोचर भूमि छोड़ी जाती थी, लेकिन अधिकारियों द्वारा ध्यान ना दिए जाने पर धीरे-धीरे लोगों ने भूमि पर कब्जा कर खेती शुरू कर दी है। विवाद होने पर अधिकारी कार्रवाई करने के लिए पहुंचते हैं। गोचर भूमि खाली ना होने से गोवंश को चरने के लिए जगह नहीं है, जिससे गोवंश सडक़ों पर घूम रहा है।

राजस्व रिकॉर्ड में 3635 हैक्टेयर गोचर भूमि है, जिसमें तहसील के भानगढ़ क्षेत्र में गोचर भूमि सबसे ज्यादा है, जहां अलग-अलग गांव में कुल 1 हजार 875 हैक्टेयर जमीन है। इसके साथ ही मंडीबामोरा क्षेत्र में 868 हैक्टेयर भूमि, बीना क्षेत्र में 891 हेक्टेयर भूमि है। देवल गांव में 400 एकड़ गोचर भूमि है, जिसपर गो-अभ्यारण बनना है और यहां वर्तमान में इस भूमि पर लोग खेती करते हैं। शिकायतों के बाद भी अधिकारी कार्रवाई नहीं करते हैं। ग्राम पंचायत ढिमरौली की सरपंच ने करीब 25 एकड़ भूमि जो अलग-अलग खसरा नंबर की है, उसपर कब्जा होने की शिकायत कई माह पहले की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जमीन पर रबी फसल की बोवनी की गई थी।

नहीं बन पाए चारागाह

करीब पांच वर्ष पूर्व शासन ने हर पंचायत में एक हैक्टेयर जमीन पर चारागाह बनाने के आदेश किए थे, जिसकी लागत सात लाख रुपए थी और यह कार्य मनरेगा से होना था, लेकिन गोचर भूमि ना मिलने पर चारागाहों का निर्माण नहीं हो सका। यदि चारागाह बन जाते, तो पशुपालकों को परेशानी नहीं होती।

सड़कों पर बैठ रहे मवेशी

गोचर भूमि खाली ना होने के कारण आवारा मवेशी सडक़ों पर बैठ रहे हैं, जिससे वाहन चालक और किसान सभी परेशान हैं। यदि गोचर भूमि से अतिक्रमण हट जाए, तो यह समस्या हल हो सकती है।

एसडीएम ने किया निरीक्षण

देवल सरपंच की हत्या के मामले में गोचर जमीन पर कब्जा की बात सामने आने पर एसडीएम विजय डेहरिया ने रविवार को निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि गोचर भूमि पर रबी सीजन में लोग बोवनी करते हैं। खरीफ फसल की बोवनी नहीं हुई है। सोवरन और उसके चाचा का कब्जा बताया गया है। कोटवार को हिदायत दी गई है कि रबी सीजन में कोई भी कब्जा करता है, तो तत्काल सूचना दी जाए, उसपर कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्र में अन्य जगहों पर भी कब्जा हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.patrika.com/sagar-news/there-are-3635-hectares-of-grazing-land-in-the-block-farming-is-being-done-by-occupying-it-administration-takes-action-after-the-incident-19927156


Thursday, 4 September 2025

कोटड़ी में गौशाला की 400 बीघा चारागाह भूमि पर कब्जा:300 गायों के चरने की जगह नहीं, ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

 

झालावाड़ में चारागाह भूमि को अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

झालावाड़ के पिड़ावा में श्री कृष्ण गोशाला कोटड़ी की चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग उठी है। सरपंच हरिराम गोचर के नेतृत्व में ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

ग्राम पंचायत कोटड़ी में कुल 400 बीघा चारागाह भूमि है। इसमें से 350 बीघा पर स्थानीय और आसपास के ग्रामीणों ने अवैध कब्जा कर रखा है। श्री कृष्ण गोशाला में वर्तमान में लगभग 300 गायें हैं। अतिक्रमण के कारण इन गायों के चरने के लिए कोई जगह नहीं बची है।

ग्रामीणों ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी कई बार तहसीलदार और एसडीएम कार्यालय पिड़ावा में ज्ञापन दिए जा चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है। ज्ञापन देने के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/news/occupation-of-400-bigha-pasture-land-of-gaushala-in-kotri-jhalawar-rajasthan-135838032.html

Monday, 1 September 2025

'विवादित' जल निकायों की पहचान विशेषज्ञ करें, केवल राजस्व रिकॉर्ड प्रविष्टियां सत्यापन के लिए पर्याप्त नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने विवादित जल निकायों की पहचान और संरक्षण के लिए तकनीकी विशेषज्ञ मूल्यांकन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि केवल राजस्व अभिलेख प्रविष्टियाँ ही पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि ज़मीनी हकीकत का सत्यापन सक्षम विशेषज्ञ प्राधिकारी द्वारा किया जाना आवश्यक है।

जस्टिस अनूप कुमार ढांड एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहे थे जिसमें याचिकाकर्ता के आवंटित खनन क्षेत्र में जाने के अधिकार को राज्य सरकार ने इस आधार पर खारिज कर दिया था कि संबंधित भूमि चारागाह होने के साथ-साथ एक जल निकाय भी है।

यह देखते हुए कि ये विवादित तथ्य हैं जिनका निर्धारण न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 226 के अधिकार क्षेत्र के तहत नहीं कर सकता, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इन प्रश्नों का पता लगाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा,
"विवादित जल निकायों की पहचान और संरक्षण के लिए तकनीकी विशेषज्ञ मूल्यांकन की आवश्यकता है। केवल राजस्व अभिलेख प्रविष्टियाँ पर्याप्त नहीं हैं और ज़मीनी स्थितियों/वास्तविकताओं का सत्यापन सक्षम विशेषज्ञ प्राधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए।"

याचिकाकर्ता को एक खनन क्षेत्र आवंटित किया गया था और संबंधित भूमि उस क्षेत्र में जाने का एकमात्र रास्ता थी, जिसे निजी प्रतिवादियों ने अनावश्यक अवरोध उत्पन्न करके बंद कर दिया था।

याचिकाकर्ता का तर्क था कि वह पिछले 20 वर्षों से खनन क्षेत्र में जाने के लिए इन भूमियों का उपयोग कर रहा था और संबंधित ग्राम पंचायत ने भी इस संबंध में याचिकाकर्ता के पक्ष में अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया था।

इसके अलावा, यह भी प्रस्तुत किया गया कि ज़िला मजिस्ट्रेट ने भी खनन क्षेत्र में जाने के लिए भूमि का उपयोग करने की उनके पक्ष में सिफ़ारिश की थी। हालांकि, इन सबके बावजूद, राज्य ने याचिकाकर्ता को यह कहते हुए मंज़ूरी देने से इनकार कर दिया कि ऐसी भूमि चरागाह और जल निकाय हैं जिन्हें आवंटित नहीं किया जा सकता या उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

राज्य की ओर से तर्क दिया गया कि संबंधित भूमि चारागाह और "पोखर नारी भूमि" यानी एक जल निकाय है। जब प्रस्ताव ज़िला मजिस्ट्रेट के समक्ष रखा गया था, तो इस तथ्य का कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया था कि यह भूमि एक जलग्रहण क्षेत्र है जिसे किसी को आवंटित नहीं किया जा सकता।

वकील ने आगे दलील दी कि विवादित आदेश में भी ज़िला मजिस्ट्रेट को अधीनस्थ राजस्व अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों पर भरोसा न करने की चेतावनी दी गई थी और कोई भी सिफारिश करने से पहले संबंधित राजस्व रिकॉर्ड देखे जाने थे।

तर्कों को सुनने के बाद, न्यायालय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि संबंधित भूमि का जल निकाय होना या न होना विवादास्पद है, जिस पर दोनों पक्षों द्वारा अलग-अलग तर्क दिए जा रहे हैं।

"याचिकाकर्ता के अनुसार, संबंधित भूमि पर कोई 'पोखर' या 'नारी' नहीं है, जबकि प्रतिवादियों के अनुसार, संबंधित भूमि पहाड़ों से घिरी हुई है और मानसून के मौसम में वर्षा के पानी के कारण उक्त भूमि पर मौसमी नदी बहती है।"

इस पृष्ठभूमि में, यह राय दी गई कि, "इन सभी तथ्यों पर राजस्व, वन और पंचायती राज विभागों के उच्च पदस्थ अधिकारियों वाली एक विशेषज्ञ समिति द्वारा निर्णय लिया जा सकता है, जो पुराने राजस्व अभिलेखों और मामले के व्यावहारिक ज़मीनी पहलुओं की जाँच करेगी... और फिर तदनुसार उचित निर्णय लिया जाएगा..."

अतः, न्यायालय ने राज्य को इस उद्देश्य के लिए एक "विशेषज्ञ समिति" गठित करने का निर्देश दिया।

मूल ऑनलाइन लेख-  https://hindi.livelaw.in/rajasthan-high-court/disputed-water-bodies-experts-revenue-record-entries-verification-rajasthan-high-court-302578