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Sunday, 24 December 2023

चारागाह विकास समितियों की भूमिका की दी जानकारी

बकानी


पंचायत समिति में राजस्थान सरकार के बायोफ्यूल प्राधिकरण (बंजर भूमि बोर्ड), फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी व आईटीसी (मिशन सुनहरा कल) के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय इवेंट एंड लर्निंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिरिक्त विकास अधिकारी नरवर सिंह के उद्बोधन के साथ हुआ। उन्होंने त्रिस्तरीय बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समितियां की भूमिका एवं चारागाह समिति जो राजस्व गांव पर बनी की भूमिका के बारे में बताया।

एफईएस रीजनल कोऑर्डिनेटर कोटा कैलाश शर्मा ने संयुक्त क्षमता वर्धन कार्यक्रम और पीएलपीसी के बारे में जानकारी दी। जिला प्रशिक्षण समन्वयक झालावाड़ अनिल जैन ने भी उपयोगी जानकारी दी। कार्यक्रम में सरपंच, सचिव, चारागाह विकास समिति के अध्यक्षों सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। इस कार्यक्रम के अंत में हिम्मतराम कुम्हार जिला प्रशिक्षण समन्वयक एफईएस ने उपस्थित सदस्यों से अगले माह होने वाले शामलात उत्सव की रणनीति पर चर्चा कर जिम्मेदारियां सौंपी।


https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jhalawar/bakani/news/information-given-about-the-role-of-pasture-development-committees-132330173.html

Friday, 29 July 2022

आमजन की भागीदारी से चारागाह विकास को मिलेगी प्रगति : विकास अधिकारी




शामलात पुनस्र्थापना संरक्षण चारागाह विकास कार्यक्रम कार्यशाला


बाड़मेर। 

पंचायत समिति सभागार शिव में आईटीसी मिशन सुनहरा कल, राजस्थान सरकार और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी द्वारा चारागाह विकास के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। धनदान देथा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विकास अधिकारी ने चारागाह विकास करने के बारे में बताते हुए कहा की आम जन की भागीदारी से चारागाह विकास को प्रगति मिलेगी। सरकार द्वारा चारागाह के कार्य किए जा रहे हंै। इसमें समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उपखंड अधिकारी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इससे चारागाह विकास के माध्यम से जीव जगत का विकास कर सकते हैं।

चारागाह विकास समिति गठन होगा 


जिला प्रशिक्षक दिनेश कुमार ने प्रशिक्षण देते हुए कहा कि शामलाती भूमि के अधिकार, कानून नियमों एवं विकास करने के बारे में गांव स्तर पर राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के नियम 170 (1) के तहत प्रत्येक राजस्व ग्राम में चारागाह विकास समिति गठन किया जाना है। चारागाह विकास मनरेगा के अंतर्गत किए जाने के बारे में बताया गया। इस कार्यशाला के बाद में ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम विकास अधिकारी, कनिष्ठ तकनीकी सहायक, एवं सरपंच द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। तहसीलदार ने कहा कि अतिक्रमण आम समस्या है जिसे समाधान हेतु सहयोग कर चारागाह अतिक्रमण मुक्त कराने के बारे में बताया गया। सरपंचों को बंजर भूमि एवं चारागाह कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने संबंधी बात कही। प्रशिक्षण के दौरान क्षमतावर्धन कार्यक्रम के अंतर्गत संभागियों को ग्राम पंचायत स्तर पर कमेटियों के सदस्यों को प्रशिक्षित करने हेतु प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान एफईएस जिला समन्वयक हाकम सिंह राठौड़ ने शामलात भूमि के महत्व, उपयोग, शामलात संसाधनों की सुरक्षा , प्रबंधन की विस्तार से जानकारी प्रदान की।

वृक्षारोपण कार्यक्रम चलाएंगे
उन्होंने बताया कि गांव स्तर पर वार्ड पंच की अध्यक्षता में चारागाह विकास समिति का गठन किया जाना है, जिसके माध्यम से चारागाह विकास कार्य कराए जा सकते हैं। चारागाह का विकास के अंतर्गत खाई खुदाई, वृक्षारोपण, नाडी एवं टांका निर्माण, घास-चारा लगाने का कार्य कराया जा सकता है। मोबाइल एप्लीकेशन के बारे बताते हुए कहा कि हम समय-समय पर ऑनलाइन जुडकर के इस कार्यक्रम को सफल बना सकते हैं। एक दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान ग्राम विकास अधिकारी, सरपंच, सहायक विकास अधिकारी, कनिष्ठ तकनीकी सहायक, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, सहायक अधिकारी आदि उपस्थित रहे।

https://dainikjaltedeep.com/pasture-development-will-get-progress-with-public-participation-development-officer/

Thursday, 17 March 2022

बंजर भूमि व चारागाह विकास के लिए जिला स्तर पर प्रशिक्षको का प्रशिक्षण सम्पन्न

 


जैसलमेर, जिला परिषद सभागार जैसलमेर में शामलात की पुनर्स्थापना के लिए जिला परिषद् जैसलमेर, आईटीसी मिशन सुनहरा कल, राजस्थान सरकार और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्यूरिटी (एफईएस) के संयुक्त तत्वाधान में संयुक्त क्षमतावर्धन के लिए पंचायत समिति जैसलमेर के सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों को सम्बोधित करते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद डॉ. टी.शुभमंगला ने कहा कि जैसलमेर में बंजर भूमि पर चारा विकास की विपुल सम्भावनाएं है एवं इस क्षेत्र में हमें कार्य करने की महŸाी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह जिला पशु बाहुल्य जिला है एवं पशुपालको के पशुधन को चारा उपलब्ध कराने के लिए चारागाह विकास बहुत ही जरूरी है। उन्होंने सम्भागियों को कहा कि वे इस क्षेत्र में विषय विशेषज्ञो द्वारा जो प्रशिक्षण दिया जा रहा है, उसको गहनता से समझकर हमें धरातल पर इसकी सार्थकता को साबित करना है।

पंचायत समिति सम प्रधान तनसिंह सोढ़ा ने कहा कि इस मरूस्थली जिले के लिए चारागाह विकास की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने वन विभाग के माध्यम से अधिक से अधिक वृक्षारोपण कराने के साथ ही उनके माध्यम से भी चारागाह विकास के कार्य कराने की आवश्यकता जताई। उन्होंने जिला परिषद द्वारा किए गए इस नए पहल की तारीफ की एवं कहा कि यह कदम पशुपालकों के लिए आने वाले समय में वरदान साबित होगा।

प्रशिक्षण के दौरान एफ ई एस से दिनेश कुमार ने बताया कि राजस्व ग्राम में चारागाह विकास समिति का गठन राजस्थान पंचायती राज एक्ट 1996 के धारा 170 (1) के तहत किया जाना है। राज्य सरकार के आदेश 2017 के पालना मे बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समिति का गठन जिला, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत स्तर पर किया गया है। उन्होंने कमेटियों द्वारा किए जाने वाले कार्यों की विस्तार से जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षण में संविधान में शामलात संसाधनों के लिए विभिन्न प्रावधानों व सुप्रीम कोर्ट फैसले पर चर्चा व राजस्थान पंचायती राज कानून द्वारा शामलात संरक्षण सम्बंधित पंचायतो को दी गई शक्तियों के बारे मे बताया गया।

प्रशिक्षण में त्रि-स्तरीय बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समितियों की भूमिका, उत्तरदायित्वों पर समझ ग्राम स्तर पर चारागाह विकास समिति के गठन की प्रक्रिया, समितियों के बीच पूरक सहसम्बन्ध एवं समन्वयन पर समझ विकसित पर चर्चा की गई। शामलात (चारागाह) विकास सम्बंधित राजस्व रिकॉर्ड पर चर्चा की गई ताकि सभी की समझ बन सके व आगे के स्तर को सरल तरीके से प्रशिक्षण दे सके। उन्होंने बताया कि इसके बाद ब्लॉक स्तर पर बंजर भूमि एवं चरागाह विकास समिति का एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा। ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण के लिए कैलेंडर जारी किया जायेगा। इस प्रकार से अंतिम रूप राजस्व गाँव में चारागाह समिति का गठन किया जाना हैं। जिसके माध्यम से स्थानीय लोगो द्वारा चारागाह विकास समिति विस्तार किया जाना हैं।

कार्यक्रम में चरागाह विकास के लिए मनरेगा योजना में विकास किया जाना हैं। शामलात संसाधनों के संरक्षण के लिए चारागाह एवं गोचर जमीन के प्रति स्थानीय लोगो का लगाव होना जरुरी हैं यदि वे लोग जागरूक हो गए तो चारागाह का अच्छा विकास किया जा सकता हैं। ग्रामीण समुदाय का जीवन प्राकृतिक संसाधनों पर जुड़ा हुआ हैं।

इस अवसर डा.सतीश शर्मा ने पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में विस्तार से बताया गया। चारागाह विकास में पौधारोपण सही जाति, सही स्थान, सही समय के बारे में बताया गया। स्थानीय पनपने  वाली घासो के बारे में बताया गया। मोबाइल एप्लीकेशन के बारे में जानकारी दी। जिसके द्वारा चारागाह नापने एवं नरेगा कार्य योजना बनाने में सहयोग मिल सकता हैं। सभी ने इस एप्प की सराहना की ओर कहा कि इस से काम की कार्य-गति में सुधार आयेगा।

इस प्रशिक्षण में वाटरशेड के अधीक्षण अभियंता उदाराम राव, विकास अधिकारी मोहनगढ़ सी एस कामठे, सांकड़ा गौतम चौधरी, सम रामनिवास बाबल, फतेहगढ़ हिमांशु चौधरी, सहायक विकास अधिकारी, कनिष्ठ तकनीकी सहायक, सहायक अभियंता के खण्ड स्तर के स्टॉफ एवं प्रतिनिष्ठ स्वयंसेवी संस्थान, एफ ई एस से दिनेश कुमार, हाकम सिंह राठौड़, मघाराम उपस्थित रहे।

https://www.pressnote.in/Jaislmer_news_457225.html

Wednesday, 16 March 2022

पुनर्स्थापना:सेवण घास के उत्पादन के लिए चारागाह विकास को बढ़ावा देंगे : डॉ. शुभमंगला

 जैसलमेर

बंजर भूमि व चारागाह विकास के लिए जिला स्तर पर प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण संपन्न

जिला परिषद सभागार जैसलमेर में शामलात की पुनर्स्थापना के लिए जिला परिषद जैसलमेर, आईटीसी मिशन सुनहरा कल, राजस्थान सरकार और फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्यूरिटी के संयुक्त तत्वावधान में संयुक्त क्षमतावर्धन के लिए पंचायत समिति जैसलमेर के सभागार में एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद डॉ. टी. शुभमंगला ने कहा कि जैसलमेर में बंजर भूमि पर चारा विकास की विपुल संभावनाएं है एवं इस क्षेत्र में हमें कार्य करने की महत्ती आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि यह जिला पशु बाहुल्य जिला है एवं पशुपालकों के पशुधन को चारा उपलब्ध कराने के लिए चारागाह विकास बहुत ही जरुरी है। उन्होंने संभागियों को कहा कि वे इस क्षेत्र में विषय विशेषज्ञों द्वारा जो प्रशिक्षण दिया जा रहा है, उसको गहनता से समझकर हमें धरातल पर इसकी सार्थकता को साबित करना है।

पंचायत समिति सम प्रधान तनसिंह सोढ़ा ने कहा कि इस मरुस्थली जिले के लिए चारागाह विकास की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने वन विभाग के माध्यम से अधिक से अधिक पौधरोपण कराने के साथ ही उनके माध्यम से भी चारागाह विकास के कार्य कराने की आवश्यकता जताई।

उन्होंने जिला परिषद द्वारा किए गए इस नए पहल की तारीफ की एवं कहा कि यह कदम पशुपालकों के लिए आने वाले समय में वरदान साबित होगा। प्रशिक्षण के दौरान एफईएस से दिनेश कुमार ने बताया कि राज्य सरकार के आदेश 2017 के पालना में बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समिति का गठन जिला, पंचायत समिति, ग्राम पंचायत स्तर पर किया गया है। उन्होंने कमेटियों द्वारा किए जाने वाले कार्यों की विस्तार से जानकारी प्रदान की। इस दौरान शामलात चारागाह विकास संबंधित राजस्व रिकॉर्ड पर चर्चा की गई ताकि सभी की समझ बन सके व आगे के स्तर को सरल तरीके से प्रशिक्षण दे सके।

इस अवसर डाॅ. सतीश शर्मा ने पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में विस्तार से बताया गया। चारागाह विकास में पौधारोपण सही जाति, सही स्थान व सही समय के बारे में बताया गया। स्थानीय पनपने वाली घासों के बारे में बताया गया। मोबाइल एप्लीकेशन के बारे में जानकारी दी। जिसके द्वारा चारागाह नापने एवं नरेगा कार्य योजना बनाने में सहयोग मिल सकता हैं।

सभी ने इस एप्प की सराहना की ओर कहा कि इस से काम की कार्य गति में सुधार आएगा। इस प्रशिक्षण में वाटरशेड के अधीक्षण अभियंता उदाराम राव, विकास अधिकारी मोहनगढ़ सीएस कामठे, सांकड़ा गौतम चौधरी, सम रामनिवास बाबल, फतेहगढ़ हिमांशु चौधरी, सहायक विकास अधिकारी, कनिष्ठ तकनीकी सहायक, सहायक अभियंता के खण्ड स्तर के स्टाफ एवं प्रतिनिष्ठ स्वयंसेवी संस्थान, एफईएस से दिनेश कुमार, हाकमसिंह राठौड़ व मघाराम उपस्थित रहे।


https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/barmer/jaisalmer/news/will-promote-pasture-development-for-production-of-savanna-grass-dr-shubmangala-129517168.html

Saturday, 19 February 2022

36 women mates participated in the training

One-day training of women mates was conducted by the Foundation for Ecological Security Institute at Rajiv Gandhi Seva Kendra in Balesar, Patrika town. 36 women mates from 5-gram panchayat participated in this. In the training camp organized at Rajiv Gandhi Seva Kendra 36 women mates from Balesar, Jalandharnagar, Jaitsar, Inda & Jodha gram panchayat participated. In the camp Kishore Singh, the Foundation for Ecological Security Institute representative gave the women mates information about their role and function. At the same time, junior technical assistant Rohit Sharma, Village Development Officer Ravindra Kumar Gehlot, Hitesh Joshi Devaram Bose explain the technical process of filling online presence, measuring the filling of muster roll on this occasion sarpanch Revatram Sankhla, Jalandhar Nagar sarpanch Soni Dev and others were present along with mates.












Friday, 4 February 2022

FES trainers successful in the assessment for watershed community mobilizer

Pali (Sardar Karmpal Singh Saswali)

The Agriculture Skill Council of India and NSDC has assessed the block-level trainers by assessing them under Recognition of Prior Learning and provided certification on the subject. Recently, on 23rd July, 24 trainers of Foundation for Ecological Security participated in the assessment in Bangar Dharamshala Pali in which all of them passed with good results & this assessment was done in collaboration with the Agriculture Skill Council of India and NSDC and all the participants were given certificates. Senior Program Manager, Arvind Agarwal of FES said that the Agriculture Skill Council of India & NSDC completed the assessment in 3 phases - first, the online written exam of the participants was taken through tablet, followed by an oral examination & field practical in the third phase. In the assessment the trainers of all the blocks of the Pali district Raju Ram, Vikram Sargara, Sunil Khushwal & others including District Coordinator Ganpat Lal Prajapati participated & were certified.