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Wednesday, 9 July 2025

हरियालो राजस्थान और अरावली विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में किरोड़ी लाल मीणा ने दिए अहम निर्देश


जयपुर। ग्रामीण विकास मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की अध्यक्षता में शासन सचिवालय, जयपुर में मिशन हरियालो राजस्थान, बायोफ्यूल प्राधिकरण, बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड और अरावली (एसोसिएशन फॉर रूरल एडवांसमेंट थ्रू वालंट्री एक्शन एंड लोकल इन्ववोल्वेमेंट) द्वारा संचालित कार्यों की समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में मंत्री द्वारा इनके सुदृढीकरण के निर्देश दिये गये हैं। ग्रामीण विकास मंत्री ने बायोफ्यूल प्राधिकरण विभाग द्वारा जारी राजस्थान जैव ईंधन नियम-2019 में आवश्यक संशोधन कर मिलावटी बायोडीजल (B–100) के विनिर्माताओं एवं खुदरा विक्रेताओं के विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही के प्रावधान का समावेश कर सक्षम स्तर से प्रभावी नियम बनाये जाने के निर्देश दिये।

उन्होंने राज्य में बंजर भूमि को हरा-भरा बनाने व ग्रामीण जनसमुदाय की आय बढ़ाने हेतु बंजर भूमि पर अखाद्य तेलीय पौधे जैसे रतनजोत, करज आदि का अधिक से अधिक पौधारोपण कराने के संबंध में जिलेवार कार्य योजना तैयार करवाकर दीर्घकालीन योजना सम्पूर्ण राज्य के लिये बनाते हुये कार्यवाही करने के निर्देश प्रदान किये है। उन्होंने बायोफ्यूल प्राधिकरण और बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड की शीघ्र बैठक आयोजित कर भविष्य की कार्ययोजना निर्धारित करने पर जोर दिया।

राजस्थान में वृक्षारोपण महाभियान के तहत ‘‘एक पेड़ माँ के नाम’’ की तर्ज पर हरियालो राजस्थान अभियान की शुरूआत गत वर्ष 7 जुलाई से की गई थी, जिसके तहत 7 करोड़ पौधारोपण कर राजस्थान पूरे देश में प्रथम स्थान पर रहा। इस कार्यक्रम का ग्रामीण विकास विभाग, राजस्थान द्वारा विकसित ‘‘हरियालो राजस्थान ऐप ’’के माध्यम से जियो टैगिंग भी किया जा रहा है। इस ऐप में रीयल टाईम के आधार पर पौधारोपण की ऑनलाईन प्रगति दर्ज करने का प्रावधान है।

वर्ष 2025-26 में सम्पूर्ण राज्य में 10 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित है, जिसमें से ग्रामीण विकास विभाग, पंचायतीराज विभाग तथा जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग को संयुक्त रूप से 2 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य आवंटित किया गया है। जिसमें अब तक 1 करोड 9 लाख पौधे 50 से ज्यादा विभागों द्वारा लगाये गए है। इसमें महात्मा गांधी नरेगा, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग सबसे अधिक लगभग 70 लाख पौधारोपण कर सबसे आगे है।

हरियालो राजस्थान के अन्तर्गत सम्पूर्ण राज्य में किये जा रहे पौधारोपण के जिलेवार, विभागवार, प्रजातिवार मॉनिटरिंग हरियालो राजस्थान ऐप के माध्यम से की जा रही है। महात्मा गांधी नरेगा योजना के अन्तर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्थापित की जा रही 12 हजार से अधिक पंचायत पौधशालाओं की जियो टैगिंग व मॉनिटरिंग भी की जा रही है। किरोडीलाल ने वर्तमान में अरावली संस्थान द्वारा किए जा रहे क्षमतावर्धन, प्रशिक्षण एवं अध्ययन कार्यों की सराहना की तथा निर्देशित किया कि अरावली द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी अन्य विभागों को भी अवगत कराई जाने की आवश्यकता है जिससे अन्य विभाग भी उक्त कार्यों हेतु अरावली की सेवायें ले सकें। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव ग्रामीण विकास विभाग श्रेया गुहा, शासन सचिव ग्रामीण विकास पुष्पा सत्यानी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी बायो्फ्यूल प्राधिकरण जुगल किशोर मीणा तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.mahanagartimes.com/post/review-meeting-of-kirori-lal-meena




Sunday, 22 June 2025

Rajasthan: 800 बीघा चरागाह भूमि पर गरजी JCB, कच्चे-पक्के अतिक्रमण ध्वस्त, खड़ी फसलें भी रौंदी

दस्ते ने चरागाह और बांध क्षेत्र के भराव क्षेत्र में बोई गई फसलों को उखाड़ दिया तथा जेसीबी की सहायता से कई कच्चे और पक्के मकान तोड़ कर मलबे में तब्दील कर दिया।

चरागाह भूमि से अतिक्रमण हटाती जेसीबी। फोटो- पत्रिका
राजस्थान में आंतेला में अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत विराटनगर एसडीएम अमिता मान के निर्देशन में तहसीलदार लालाराम यादव, नायब तहसीलदार मेनका चौधरी के सुपरविजन में दस्ते ने कार्रवाई करते हुए ग्राम पंचायत आंतेला क्षेत्र में करीब 800 बीघा चरागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाया।

इस दौरान नीलका बांध की पाल भराव क्षेत्र सहित आसपास की भूमि पर प्रशासन के दस्ते ने चार जेसीबी चलाकर कार्रवाई शुरू कर आंतेला इलाके में करीब 800 बीघा चरागाह भूमि से कच्चे-पक्के अवैध निर्माण ध्वस्त किए और तारबंदी व पिलर हटाकर खड़ी फसलों को रौंद कर अतिक्रमण मुक्त कराया।

वर्षों से अतिक्रमण
यहां चरागाह भूमि पर रसूखदारों और स्थानीय लोगों ने वर्षों से अतिक्रमण कर रखा था। स्थानीय विधायक कुलदीप धनखड़ की पहल पर प्रशासन दस्ते कार्रवाई को अंजाम दिया। दस्ते ने चरागाह और बांध क्षेत्र के भराव क्षेत्र में बोई गई फसलों को उखाड़ दिया तथा जेसीबी की सहायता से कई कच्चे और पक्के मकान तोड़ कर मलबे में तब्दील कर दिया। रसूखदार यहां चरागाह भूमि पर बोरिंग बनाकर कई साल से अतिक्रमण कर फसल बुवाई कर रहे थे।

वहीं स्थानीय सरपंच जयराम नागर पंचायत क्षेत्र की चरागाह और सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रयासरत थे। सरपंच नागर ने विराटनगर पंचायत समिति से लेकर, एसडीएम, जिला कलक्टर और विधायक तक अतिक्रमण हटाने की गुहार लगाई। काफी मशक्त के बाद सरपंच की मेहनत रंग लाई और प्रशासन दस्ते ने करीब 800 बीघा चरागाह और नीलका बांध की पाल से अतिक्रमण हटवाकर ग्राम पंचायत और सिंचाई विभाग को सौंप दिया।
कार्रवाई में ये रहे मौजूद
प्रशासन दस्ते की गठित टीम में गिरदावर राजकपूर, पटवारी नीलम यादव, भाबरू पटवारी नरेश यादव, ढाणी गैसकान पटवारी देशराज, पटवारी आशीष ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को अंजाम देने के लिए लगातार तीन दिन से चरागाह भूमि की नाप जोख में जुटे रहे।

वहीं इस दौरान भाबरू थाना इंचार्ज अंकित सामरिया, हैड कास्टेबल संदीप यादव, हैड कांस्टेबल रामरतन, कांस्टेबल सतपाल सिंह सहित पुलिस जाप्ता तैनात रहा। प्रशासन दस्ते ने गत तीन दिन के दौरान अतिक्रमण को लेकर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया।

इन्होंने किया सहयोग
प्रशासन की कार्रवाई के दौरान पंचायत कनिष्ठ सहायक विष्णु शर्मा, पूर्व सरपंच मालीराम कुमावत, राष्ट्रीय आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद मीणा, भाजपा के जिला संयोजक महेश सैनी, धनश्याम यादव, देवदत्त यादव, हंसराज सैनी, भानुप्रताप सिंह, शिवराम यादव, नरेश मीणा, रिशाल नागर सहित कई लोगों ने सहयोग दिया।

पक्का अतिक्रमण 3 माह में हटाने का अल्टीमेटम
अतिक्रमण हटाने के बाद प्रशासन दस्ते ने कारोली की ढाणी के वाशिंदों को चरागाह से स्वयं के स्तर पर पक्के अवैध निर्माण को आगामी तीन माह में हटाने का समय दिया है। सरपंच जयराम नागर ने बताया कि कारौली के ढाणी के कई परिवार चरागाह भूमि पर कच्चे व पक्के मकान बनाकर रह रहे हैं।

जब कार्रवाई को मौका पहुंचे प्रशासन दस्ते से कारौली के स्थानीय लोगों ने चरागाह भूमि से अमिक्रमण हटाने को लेकर तीन माह की मोहलत देने की गुहार लगाई। जिस पर तहसीलदार और सरपंच सहित प्रशासन दस्ते ने तीन माह में चरागाह भूमि से स्वयं के स्तर पक्का अतिक्रमण हटाने की समय दिया है। दूसरी ओर मुजराला में भी एक परिवार को चरागाह भूमि से अतिक्रण हटाने को लेकर 4 माह का समय दिया है।

अतिक्रमी कूट रहे थे चांदी
इधर, रसूखदार चरागाह भूमि से मोटी चांदी कूट रहे हैं। चरागाह भूमि पर जिन रसूखदारों ने कब्जा कर रखा था। वे दूसरे किसानों को एक बीघा 10 हजार रुपए प्रति साल के हिसाब से किराए के तौर पर कमाई करते थे। जबकि कई जमीनों को बंटाई पर दे रखा था।

आधा दर्जन नलकूप और बिजली कनेक्शन भी
बांध के भराव क्षेत्र की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में करीब आधा दर्जन बोरिंग पर बिजली कनेक्शन लगे हुए सामने आए हैं। दस्ते ने चरागाह भूमि के बोरिंग को ग्राम पंचायत और बांध के भराव क्षेत्र के बोरिंगों को सिंचाई विभाग के सुपुर्द कर दिया है। स्थानीय प्रशासन और विद्युत निगम अधिकारियों और कार्मिकों के घालमेल के खेल में बिना खातेदारी और आवासीय भूमि के चरागाह भूमि में ही विद्युत कनेक्शन कर रखा है।

भैरूजी मंदिर की भूमि से हटाया अतिक्रमण
प्रशासन ने मंदिर कमेटी और पंचायत प्रशासन की मांग पर नीमडी वाले भैरूजी मंदिर के पास करीब 5 बीघा से अधिक चरागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। सरपंच नागर ने बताया कि गत दिनों मंदिर कमेटी सदस्यों ने पंचायत प्रशासन को मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने का आग्रह किया था। जिस पर प्रशासन दस्ते ने कार्रवाई शुरू कर सडक़ मार्ग के पास तारबंदी और पिलर आदि को हटाकर मंदिर की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है।

इनका कहना है
चरागाह और बांध के भराव क्षेत्र की भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा दिया है। कुछ परिवारों को स्वयं के स्तर पर पक्के अवैध निर्माण को हटाने को लेकर तीन व चार माह का अल्टीमेटम दिया गया है। इसके बाद प्रशासन एक तरफा कार्रवाई कर चरागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।
लालाराम यादव, तहसीलदार, विराटनगर

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.patrika.com/jaipur-news/raw-and-permanent-encroachments-were-demolished-from-800-bigha-pasture-land-in-kotaputli-19689137

Friday, 25 April 2025

पीड़ित व उसके परिवार को हाईकोर्ट ने पुलिस सुरक्षा देने के दिए आदेश

 राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर में पीड़ित मनेहर कुमावत ने चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की याचिका लगाई थी

सीकर. राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर में पीड़ित मनेहर कुमावत ने चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाने की याचिका लगाई थी। अतिक्रमियों व उनके सहयोगियों से जान का खतरा होने के चलते राजस्थान हाइकोर्ट, जयपुर की न्यायाधीश शुभा मेहता ने पीड़ित परिवार को आगामी आदेश तक सुरक्षा मुहैया करवाने के आदेश दिए हैं। एडवोकेट प्रवीण शर्मा ने बताया कि न्यायाधीश ने पुलिस अधीक्षक सीकर, खंडेला एसडीएम, खंडेला थाना के थानाधिकारी को तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब करते हुए मनोहर कुमावत व उनके परिवार को जीवन व स्वतंत्रता के लिए सुरक्षा मुहैया करवाने के आदेश पारित किए हैं। हाईकोर्ट न्यायाधीश ने आदेश में यह भी लिखा है कि सीकर एसपी, खंडेला एसडीएम व खंडेला थानाधिकारी रिट याचिका में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। पीड़ित मनोहर कुमावत पर पूर्व में एक बार जानलेवा हमला भी हो चुका है। मनोहर कुमावत पुत्र श्यामलाल कुमाव निवासी भोजपुरा, बरसिंगपुरा खंडेला ने गांव की चारागाह भूमि पर कच्चे -पक्के निर्माण कर अतिक्रमण करने वाले करीब 98 लोगों के खिलाफ रिट याचिका लगाई थी। हाईकोर्ट, जयपुर ने आदेश जारी कर प्रशासन व पुलिस के जरिए 23 मई 2024 को चारागाह भूमि से करीब 30 अस्थायी अतिक्रमण हटवाए गए थे। ऐसे में प्रार्थी मनोहर कुमावत ने स्वयं व अपने परिवार को करीब दो दर्जन अतिक्रमियों व उनके सहयोगी लोगों से जान का खतरा बताया था। पीड़ित परिवार को आरोपी धमकियां भी दे रहे हैं।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.patrika.com/sikar-news/the-high-court-ordered-to-provide-police-protection-to-the-victim-and-his-family-19555582


Tuesday, 22 April 2025

वनस्पति बीज बैंक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन— मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग के नवीन भवन का किया लोकार्पण

 

जयपुर, । राज्य के 150 पंचायत क्षेत्रों में वनस्पति बीज बैंकों की स्थापना की जाएगी, जिसके माध्यम से स्थानीय वनस्पति एवं घास की प्रजातियों का संरक्षण, संग्रहण और संवर्धन किया जाएगा। इससे राज्य के चारागाह समृद्ध होंगे और पशुधन पोषण को बल मिलेगा। शिक्षा एवं पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने मंगलवार को कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा में विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर आयोजित वनस्पति बीज बैंक राज्य स्तरीय कार्यशाला में यह जानकारी दी।

दिलावर ने कहा कि राज्य सरकार सतत कृषि, पर्यावरण संतुलन तथा पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक कृषि प्रणाली से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। दिलावर ने प्रकृति अनुकूल जीवनशैली अपनाने तथा जल, जंगल और जमीन के संरक्षण में सहभागी बनने का आह्वान किया।

उन्होंने पृथ्वी के समक्ष उत्पन्न संकट की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि हमनें इसकी मिट्टी, जल और वायु को प्रदूषित कर दिया है। नदियाँ, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी सब धरती के श्रृंगार हैं। यदि हम इन्हें बचाएंगे, तभी धरती का सौंदर्य और संतुलन बना रहेगा। उन्होंने गाय के दूध की महत्ता को रोचक उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए गौ संरक्षण और पालन पर भी बल दिया।

उन्होंने पानी की कमी को दूर करने के लिए तालाब, कुण्ड अतिक्रमण से मुक्त रखने और जीर्णोद्धार करने तथा ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण करने पर जोर दिया। उन्होंने पाॅलिथीन उपयोग न करने की भी अपील की।

मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग के नवीनीकृत भवन का किया लोकार्पण—

मदन दिलावर ने राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा स्थित मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग के नवीनीकृत भवन का लोकार्पण भी किया।

प्रदर्शनी का किया अवलोकन—

कार्यशाला के दौरान बीज बैंक प्रदर्शनी में महिला स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण किसान संगठनों ने अपने-अपने स्तर पर संरक्षित देसी बीजों से जैविक खेती के मॉडल और बीज वितरण प्रणाली का प्रदर्शन किया। दिलावर ने प्रत्येक स्टॉल पर जाकर विस्तार से जानकारी ली, किसानों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि बीज खेती की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। अगर बीज उत्तम होगा तो फसल भी समृद्ध होगी। इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी।

चारागाह विकास के लिए भंवरलाल खटीक का किया सम्मान—

मदन दिलावर ने मांडलगढ़, भीलवाड़ा जिले के वरुधनी गांव के श्री भंवरलाल खटीक द्वारा चारागाह भूमि विकास एवं वनस्पति संरक्षण के लिए अदभुत एवं प्रशंसनीय कार्य करने के लिए सम्मानित किया ।

श्री भंवर लाल ने अपने निजी प्रयासों से पिछले 35 साल के अनवरत एवं अथक परिश्रम से 200 हेक्टेयर क्षेत्र में चारागाह विकसित किया है, जो पर्यावरण और पशुधन संरक्षण के लिए वरदान है।

मार्गदर्शिका पुस्तिका एवं पोस्टर का विमोचन—

मदन दिलावर ने राज्य में बीज बैंक की स्थापना हेतु मार्गदर्शिका पुस्तिका एवं पोस्टर, आपणी माटी पहचानो पुस्तिका एवं खाद, उर्वरक एवं मृदा संरक्षण पुस्तक का विमोचन किया और वनस्पति बीज बैंक की स्थापना के लिए 150 पंचायतों के लिए 97 लाख रुपए का चेक भी जारी किया।

कार्यक्रम में कर्ण नरेन्द्र सिंह कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलपति प्रो. बलराज सिंह ने जलवायु परिवर्तन, भूमि क्षरण और जैव विविधता में हो रही कमी की पृष्ठभूमि में ऐसे कार्यक्रमों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे नई पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण, सतत कृषि तथा प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग हेतु प्रेरित करें। राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन अनुसंधान और विस्तार तंत्र के समन्वय से ही संभव है।

जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के निदेशक मुहम्मद जुनैद ने चारागाह विकास एवं जलग्रहण क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी तथा राज्य सरकार की पहल की सराहना की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 बजट घोषणा के क्रियान्वयन के अंतर्गत प्रदेश में वनस्पति पौधे एवं घास बीज प्रजातियों के संग्रहण, संरक्षण एवं विकास हेतु 150 पंचायतों में वनस्पति बीज बैंकों की स्थापना के तहत वनस्पति बीज बैंक राज्य स्तरीय कार्यशाला ‘विकसित चारागाह-समृद्ध राजस्थान’ थीम पर जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग तथा राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा द्वारा आयोजित की गई है।

डॉ. सुनील दाधीच, विभागाध्यक्ष, मृदा विज्ञान एवं विशेषाधिकारी ने कहा कि यह आयोजन “विकसित चारागाह – समृद्ध राजस्थान” की संकल्पना को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है।

डॉ. हरफूल सिंह, निदेशक, राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा ने संस्थान की गतिविधियों, भवन नवीनीकरण तथा वनस्पति बीज बैंक की कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। शांतनु सिन्हा रॉय, राज्य प्रमुख फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी (एफईएस) ने भी उपयोगी सुझाव और विचार प्रस्तुत किए।

आनंद सिंह, अतिरिक्त निदेशक जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर राज्यभर से आए कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी, पंचायती राज प्रतिनिधि, एनजीओ प्रतिनिधि, शोधार्थी, बीज गुणी एवं किसानगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://awazrajasthanki.com/archives/5643

चारागाह भूमि विकास के लिए 30 लाख रुपये देने की घोषणा

जयपुर, 22 अप्रैल (हि.स.)। शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि राज्य के 150 पंचायत क्षेत्रों में वनस्पति बीज बैंकों की स्थापना की जाएगी, जिसके माध्यम से स्थानीय वनस्पति एवं घास प्रजातियों का संरक्षण, संग्रहण और संवर्धन किया जाएगा। इससे राज्य के चारागाह समृद्ध होंगे और पशुधन पोषण को बल मिलेगा।

दिलावर राजस्थान मुख्य अतिथि के रूप में कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा, जयपुर में विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर आयोजित वनस्पति बीज बैंक राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। 

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सतत कृषि, पर्यावरण संतुलन तथा पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक कृषि प्रणाली से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। दिलावर ने प्रकृति अनुकूल जीवनशैली अपनाने तथा जल, जंगल और जमीन के संरक्षण में सहभागी बनने का आह्वान किया।

उन्होंने पृथ्वी के समक्ष उत्पन्न संकट की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि हमनें इसकी मिट्टी, जल और वायु को प्रदूषित कर दिया है। नदियाँ, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी सब धरती के श्रृंगार हैं। यदि हम इन्हें बचाएंगे, तभी धरती का सौंदर्य और संतुलन बना रहेगा। उन्होंने गाय के दूध की महत्ता को रोचक उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए गाय संरक्षण और पालन पर भी बल दिया।

उन्होंने पानी की कमी को दूर करने के लिए तालाब, कुण्ड सुरक्षित रखने और ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाने पर जोर दिया। उन्होंने पाॅलिथीन उपयोग न करने की भी अपील की। 

शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा स्थित मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग के नवीनीकृत भवन का लोकार्पण भी किया। 

कार्यशाला के दौरान बीज बैंक प्रदर्शनी में महिला स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण किसान संगठनों ने अपने-अपने स्तर पर संरक्षित देसी बीजों से जैविक खेती के मॉडल और बीज वितरण प्रणाली का प्रदर्शन किया। दिलावर ने प्रत्येक स्टॉल पर जाकर विस्तार से जानकारी ली. किसानों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि बीज किसी भी कृषि भूमि की पहली सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। अगर बीज उत्तम होगा तो फसल भी समृद्ध होगी। इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी।

चारागाह विकास के लिए भंवरलाल खटीक का किया सम्मान

शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने मांडलगढ, भीलवाड़ा जिले के वरुधनी गांव के भंवरलाल खटीक द्वारा चारागाह भूमि विकास एवं वनस्पति संरक्षण के लिए अदभुत एवं प्रशंसनीय कार्य करने के लिए सम्मानित किया ।भंवर लाल खटीक ने पिछले 35 साल के अनवरत एवं अथक परिश्रम से 200 हेक्टेयर क्षेत्र में अपने निजी प्रयासों से चारागाह विकसित किया है, जो पर्यावरण और पशुधन संरक्षण के लिए वरदान है। 

शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कोटा जिले की रामगंज मंड़ी विधानसभा क्षेत्र में चारागाह भूमि के विकास के लिए फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी (एफईएस) को 30 लाख रुपये देने की कार्यशाला के दौरान घोषणा की। 

दिलावर ने राजस्थान में बीज बैंक की स्थापना के लिए मार्गदर्शिका पुस्तिका एवं पोस्टर, आपणी माटी पहचानो पुस्तिका एवं खाद, उर्वरक एवं मृदा संरक्षण पुस्तक का भी कार्यशाला के दौरान विमोचन किया और वनस्पति बीज बैंक की स्थापना के लिए 150 पंचायतों के लिए 97 लाख रुपये का चेक भी जारी किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री कर्ण नरेन्द्र सिंह कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलपति प्रो. बलराज सिंह ने जलवायु परिवर्तन, भूमि क्षरण और जैव विविधता में हो रही कमी की पृष्ठभूमि में ऐसे कार्यक्रमों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान संस्थानों की यह जिम्मेदारी है कि वे नई पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण, सतत कृषि तथा प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग काे प्रेरित करें। राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन अनुसंधान और विस्तार तंत्र के समन्वय से ही संभव है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://livevns.news/state/rajasthan/state-level-workshop-on-vegetable-seed-bankphp/cid16605430.htm

 

Wednesday, 29 January 2025

Rajasthan : खनन क्षेत्र में नए आयाम: ऑक्शन माइंस के संचालन को मिलेगा गति

Highlights

 टी. रविकान्त ने मंगलवार को प्रदेश के एलओआई धारकों से वर्चुअली सीधा संवाद कायम किया। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि जिस तरह से मेजर मिनरल माइंस के ऑक्शन में राजस्थान समूचे देश में अग्रणी प्रदेश बन गया है

जयपुर । प्रमुख शासन सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम  टी.रविकान्त ने कहा है कि मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा राज्य में खनन सेक्टर को अधिक विकसित कर इसके माध्यम से अधिकतम रोजगार संवर्धन के लिए कृत संकल्पित हैं। इसी कारण राज्य सरकार का ऑक्शन मिनरल ब्लॉक्स को जल्द से जल्द ऑपरेशनलाईज कराने पर खास फोकस है और इसके लिए संबंधित एलओआई धारकों से सीधा संवाद कायम कर सहयोग व समन्वय बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा किएलओआई धारकों को विभिन्न स्तरों पर आ रही समस्याओं को इंगित करने की विभागीय पोर्टल पर सुविधा दी जाएगी और उसके निराकरण प्रगति की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।
टी. रविकान्त ने मंगलवार को प्रदेश के एलओआई धारकों से वर्चुअली सीधा संवाद कायम किया। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि जिस तरह से मेजर मिनरल माइंस के ऑक्शन में राजस्थान समूचे देश में अग्रणी प्रदेश बन गया है।
उसी गति से अब ऑक्शन मिनरल ब्लॉक्स को आवश्यक अनुमतियों व स्वीकृतियों में आ रही बाधाओं को दूर कर निर्धारित समय सीमा में ऑपरेशनलाईज करवाया जाए ताकि खनन कार्य आरंभ होने के साथ ही रोजगार व राजस्व में बढ़ोतरी हो सके।
      
रविकान्त ने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ऑक्शन माइंस को ऑपरेशनलाईज करवने के प्रति गंभीर है और इसे इस तथ्य से समझा जा सकता है कि जिला कलक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय खनिज विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं अवैध खनन निगरानी समिति का गठन किया गया है।
जिसमें एसपी, वन, खान विभाग आदि के प्रतिनिधियों के साथ ही पर्यावरण से जुड़े एनजीओ और क्षेत्र के 4 लीज/क्वारी लाइसेंसधारकों को सदस्य बनाया गया है। उन्होंने बताया कि विभाग के माइनिंग व सहायक माइनिंग इंजीनियरों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे ऑक्शन एलओआई धारकों की समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तर पर आवश्यक सहयोग व मार्गदर्शन प्रदान करें।
       
प्रमुख सचिव  रविकान्त ने वर्चुअल बैठक के दौरान एलओआई धारकों द्वारा दिए गए सुझावों और समस्याओं की जिलेवार सूची तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए ताकि राज्य सरकार स्तर से भी समन्वय, आवश्यक सहयोग व निगरानी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर एलओआई द्वारा की जाने वालीे समस्या या सुझाव संबंधित एमई/एएमई को भी डीएमजीओएमएस सिस्टम से उपलब्ध होगा और उस स्तर पर की जाने वाली कार्रवाई पर निदेशक माइंस स्तर व राज्य सरकार स्तर पर नियमित निगरानी की जाएगी।
     
निदेशक, माइंस,  भगवती प्रसाद कलाल ने बताया कि पोस्ट ऑक्शन फेसिलिटेशन सेल के माध्यम से संबंधित विभागों से समन्वय बनाया जा रहा है। अब जिला स्तर पर भी खनन विकास कमेटी बनने से अनुमतियों-स्वीकृतियों के कार्य में गति आयेगी। उन्होंने एलओआई धारकों से समय पर माइनिंग प्लान सबमिट करने, आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने और विभाग से समन्वय बनाने पर जोर दिया गया। सभी एलओआईधारकों के प्रतिनिधियों से वन टू वन संवाद कायम करते हुए विस्तार से जानकारी ली गई और आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया।
       
वर्चुअल चर्चा के दौरान माइनिंग प्लान प्रस्तुत करने, चारागाह भूमि की एनओसी प्राप्त करने, पर्यावरण स्वीकृति, जिला कलक्टर स्तर पर जनसुनवाई सहित विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। संबंधित विभागों से समन्वय बनाकर एलओआई धारकों को स्वीकृतियां व अनुमतियां जारी कराने का संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया।
       
बैठक में पोस्ट ऑक्शन फेसिलिटेशन सेल के प्रभारी  प्रताप मीणा, ओएसडी  कृष्ण शर्मा, एडीएम  एमपी मीणा,  पीआर आमेटा, एसएमई  जय गुरुबख्सानी,  एनएस शक्तावत सहित वरिष्ठ अधिकारियों व एक दर्जन से अधिक एलओआईधारकों ने हिस्सा लिया।
मूल ऑनलाइन लेख - https://thinq360.com/new-dimensions-in-mining-sector-operation-of-auction-mines-will-gain-momentum

Thursday, 16 January 2025

जिला स्तरीय जनसुनवाई का हुआ आयोजन जिला कलक्टर ने की आमजन की परिवेदनाओं की सुनवाई

खैरथल-तिजारा। राज्य सरकार के निर्देशानुसार जन भावना के अनुरूप पारदर्शी एवं संवेदनशील वातावरण में आमजन की परिवेदनाओं,समस्याओं की सुनवाई एवं त्वरित समाधान के लिये जिला स्तरीय जनसुनवाई गुरुवार को जिला कलक्टर किशोर कुमार की अध्यक्षता में जिला सचिवालय खैरथल-तिजारा के वीसी सभागार में आयोजित हुआ। 

माह के तीसरे गुरुवार को आयोजित जिला स्तरीय जनसुनवाई में भूमि पर अतिक्रमण, आधार कार्ड में नाम बदलवाने, भूमि विभाजन, खाद्य सुरक्षा में नाम जुड़वाने, सड़क, यातायात व्यवस्था सुधारने, पट्टा दिलाने बाबत, विभिन्न प्रकरणों की पुलिस जांच कराने तथा पेयजल आपूर्ति करवाने सहित विभिन्न जन समस्याओं से संबंधित कुल 62 प्रकरण प्राप्त हुए जिन पर कार्यवाही करते हुए जिला कलक्टर ने कुछ परिवादों का मौके पर ही निस्तारण कर शेष परिवादों के बारे में संबंधित अधिकारीयों से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर तुरन्त कार्यवाही कर राहत पहुंचाने के निर्देश दिये। इस दौरान उन्होने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुनवाई के साथ - साथ सम्पर्क पोर्टल, मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री कार्यालय सहित विभिन्न स्तरों से प्राप्त होने वाले परिवादों का निर्धारित समय सीमा में निस्तारण किया जाए तथा लंबित प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग कर उनका गुणवत्तापुर्ण निस्तारण करें। 

जिला स्तरीय जनसुनवाई के दौरान किशनगढ़ बास विधायक दीपचंद खैरिया, पूर्व विधायक रामहेत सिंह यादव, नगर परिषद सभापति हरीश रोघा, अतिरिक्त जिला कलेक्टर शिवपाल जाट, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रतन लाल भार्गव, समाज कल्याण अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी शकुंतला, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के एसीपी अजय यादव, विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता रतनलाल, पीएचईडी के अधीक्षण अभियंता धर्मवीर यादव सभी जिला स्तरीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। साथ ही सभी ब्लॉक स्तरीय अधिकरी वीसी के माध्यम से जुड़े रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://jaipurtimes.org/jilaa-striiy-jnsunvaaii-kaa-huaa-aayojn-jilaa-klkttr-ne-kii-aamjn-kii-privednaao-n-kii-sunvaaii


Wednesday, 15 January 2025

चरागाह में अतिक्रमण से रोकने पर जानलेवा हमला, केस दर्ज

जमवारामगढ़ थाने में एक व्यक्ति ने कुछ लोगों के खिलाफ जानलेवा हमला करने, महिलाओं से अभद्रता व निजी भूमि से बेदखल करने की धमकी देने का मामला दर्ज करवाया है। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने बताया कि बिसोरी निवासी बाबूलाल पुत्र रामचंद्र ने दी रिपोर्ट में बताया कि उसकी खातेदारी भूमि के पास ही चरागाह भूमि भी है जिसमे वह मवेशियों के लिए चारे के बीज डालता है, ताकि पशुओं को चारा मिल सके।

लेकिन बिसोरी गांव के ही चौथी देवी पत्नी मोतीराम गुर्जर, रामजीलाल पुत्र मोतीलाल, लोकेश पुत्र मोतीलाल, देवराज व अजय पुत्र रामजीलाल सन्तोष पत्नी रामजीलाल व बनारसी पत्नी लोकेश गुर्जर उक्त गैर मुमकिन चरागाह की भूमि पर कब्जा करना चाहते है। चरागाह भूमि पर 12 जनवरी को रामजीलाल, देवराज उक्त चारागाह भूमि पर मौके पर आकर चारागाह भूमि पर टीन शेड लगाने लगे इस पर परिवादी ने मना किया और तहसीलदार व पुलिस में शिकायत की बात कहीं तो आरोपियों ने धमकी दी और उनके निजी खातेदारी जमीन में बोलेरो से घुसे और हथियार हमला कर दिया। मारपीट में परिवादी बाबूलाल का सिर फट गया और उसकी पत्नी मीना देवी के साथ भी मारपीट व अभद्रता की। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आरोपी चौथी देवी, रामजीलाल, लोकेश व अन्य के ​खिलाफ बीएनएस की धारा 126(2), 189(2), 351(2),352, 74 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी हैं।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaipur/shahpura/news/deadly-attack-on-preventing-encroachment-in-pasture-case-registered-134299693.html

Friday, 27 December 2024

अतिक्रमण हटाने की रिपोर्ट पेश करें, अन्यथा कलक्टर हाजिर हो: हाई कोर्ट ने कहा-आश्चर्य है कि ग्राम पंचायत अतिक्रमियों को संरक्षण दे रही है


हाई कोर्ट ने दौसा जिले की लोटवाड़ा ग्राम पंचायत में चारागाह की जमीन पर अतिक्रमण के मामले में जिला कलक्टर से शपथ पत्र पेश करके अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का ब्यौरा देने के लिए कहा है। वहीं रिपोर्ट पेश नहीं होने पर 10 जनवरी को अदालत में पेश होने के निर्देश दिए है।

मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस उमाशंकर व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश कैलाश चंद की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

ग्राम पंचायत अतिक्रमियों को संरक्षण दे रही

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता प्रेमचद बैरवा ने बताया कि दौसा जिले की ग्राम पंचायत लोटवाड़ा में चारागाह भूमि पर बनी अवैध दुकानों को अतिक्रमण मानते हुए प्रशासन ने 2021 में उन्हें हटाने के आदेश दिए थे। लेकिन अधिकारियों ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया।

अदालत ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि ग्राम पंचायत की ओर से अतिक्रमियों का संरक्षण किया जा रहा है, जबकि यह पंचायत का काम नहीं है।

तीन साल से नहीं हटा अतिक्रमण

उन्होने बताया कि अदालत ने अतिक्रमण हटाने के संबंध में पिछली सुनवाई पर तहसीलदार बैजूपाड़ा से रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन तहसीलदार व एसडीएम ने अभी तक अतिक्रमण हटाने की कोई भी कार्रवाई नहीं की है। अधिकारियों की ओर से अतिक्रमियों को नोटिस जारी कर पुलिस जाप्ता नहीं मिलने का बहाना बनाकर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

चारागाह भूमि पर कई बाहुबलियों द्वारा अवैध अतिक्रमण कर दुकानें निर्मित कर व्यवसाय किया जा रहा है। इन लोगों ने करीब 5 बीघा से अधिक भूमि पर अनाधिकृत कब्जा कर लिया है।

उन्होने कहा कि राजस्थान काश्तकारी अधिनियम के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुसार चारागाह की भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं किया जा सकता है और ना ही चारागाह की भूमि को चारागाह के अलावा किसी अन्य प्रयोजन के लिए काम में लिया जा सकता है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaipur/news/submit-a-report-on-encroachment-removal-otherwise-the-collector-should-appear-134193698.html


Wednesday, 25 December 2024

अतिक्रमण हटाने की रिपोर्ट करें पेश, वरना कलक्टर हाजिर होकर दें जवाब : हाईकोर्ट

कलक्टर को हाजिर होकर इस संबंध में अपना जवाब देने को कहा

अदालत ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि ग्राम पंचायत की ओर से अतिक्रमियों का संरक्षण किया जा रहा है, जबकि यह पंचायत का काम नहीं है।

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने दौसा जिले की लोटवाडा ग्रामपंचायत में चारागाह जमीन पर अतिक्रमण के मामले में जिला कलक्टर को शपथ पत्र पेश कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का ब्यौरा देने को कहा है। अदालत ने 10 जनवरी को कलक्टर को हाजिर होकर इस संबंध में अपना जवाब देने को कहा है। सीजे एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस उमाशंकर व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश कैलाश चन्द की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि साल 2021 में इस भूमि से अतिक्रमियों को बेदखल करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन अधिकारियों ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। वहीं अदालत की ओर से रिपोर्ट मांगने पर 9 दुकानों को सील कर 2 दुकानों के अतिक्रमण को हटाया गया। अदालत ने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि ग्राम पंचायत की ओर से अतिक्रमियों का संरक्षण किया जा रहा है, जबकि यह पंचायत का काम नहीं है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने अदालत को बताया कि गांव की करीब छह बीघा भूमि पर भूमाफियाओं ने अतिक्रमण कर दुकाने बना ली हैं। अदालत ने अतिक्रमण हटाने के संबंध में पिछली सुनवाई पर तहसीलदार बैजूपाड़ा से रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन तहसीलदार व एसडीएम ने अभी तक अतिक्रमण हटाने की कोई भी कार्रवाई नहीं की है। अधिकारियों की ओर से अतिक्रमियों को नोटिस जारी कर पुलिस जाब्ता नहीं मिलने का बहाना बनाकर कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने स्थानीय कलक्टर को शपथ पत्र पेश कर अतिक्रमण हटाने की रिपोर्ट पेश करने क कहा है और ऐसा नहीं करने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर अपना जवाब देने को कहा है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/present-the-report-on-removal-of-encroachment-otherwise-the-collector/article-98882

Tuesday, 24 December 2024

राजस्थान में खनिज की चाह में कहीं खत्म ना हो जाए चरागाह, सरकार को पर्यावरण संतुलन की चिंता नहीं

खान विभाग ने 40 खान चरागाह भूमि पर चिन्हित की है। यह खानें विभिन्न जिलों में स्थित हैं। विभाग ने कहा कि इन खानों की भूमि चरागाह है।


सुनील सिंह सिसोदिया

राजस्थान में चरागाह व वन भूमि पर खानों का आवंटन करने से आने वाले समय में इनका अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। खानों की नीलामी में तेजी लाने के साथ ही चरागाह भूमि और वनभूमि का संतुलन भी बिगड़ रहा है। खान विभाग ने हाल ही 269 खानों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की है। इसमें 91 खानें ऐसी हैं, जो चरागाह भूमि है या फिर जहां वन विकसित किया जा चुका है।

दरअसल चरागाह भूमि पर खानों का आवंटन करने के लिए पिछली सरकारों ने गली निकाली थी, लेकिन राजस्थान काश्तकारी नियम 1955 के नियम 7 में बार-बार बदलाव करने से अब चरागाह भूमि का खनिज वाले क्षेत्रों से पूरी तरह खत्म होने का खतरा बढ़ गया है। जबकि ओरण, देव, वन और उपवनों की भूमि को संरक्षित करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट राज्यों को कड़ी फटकार लगा चुका है।

फिर भी लापरवाही

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही राजस्थान सरकार को ओरण, देव, वन और उपवनों की भूमि को वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत संरक्षित करने का निर्देश दिए और पारिस्थितिकी और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए विशेषज्ञ समिति के गठन के आदेश दिए हैं। समिति हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनाई जाए, जिसमें वन विभाग के अधिकारी व विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे।

खनन माफिया के दबाव से नियमों में छूट

राजस्थान में कुछ साल पहले तक खान विभाग चरागाह और वन भूमि पर खान आवंटन को लेकर सावधानी बरत रहा था, लेकिन राज्य सरकारों की ओर से खान माफिया के दबाव में काश्तकारी नियमों में छूट देकर चरागाह भूमि पर खनन करने का रास्ता साफ कर दिया है।

अब खान विभाग चरागाह भूमि पर खान आवंटन के लिए प्लॉट चिह्नित करने में तेजी से जुटा है। इससे राज्य के पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका बन गई है। राजस्थान का अधिकांश ग्रामीण समुदाय अपनी आजीविका के लिए पशुपालन पर निर्भर है और चरागाह भूमि इन समुदायों के लिए जीवन रेखा का काम करती है। खानें आवंटित होने से की चारे की उपलब्धता भी प्रभावित होगी।

40 खान चरागाह भूमि पर चिन्हित

खान विभाग ने 40 खान चरागाह भूमि पर चिन्हित की है। यह खानें विभिन्न जिलों में स्थित हैं। विभाग ने कहा कि इन खानों की भूमि चरागाह है। अत: राजस्थान काश्तकारी नियम के प्रावधानों के अनुसार उच्चतम बोलीदाता को उक्त प्लॉट में आने वाली चारागाह भूमि के बराबर खातेदारी भूमि राज्य सरकार को समर्पित करनी होगी।

पहले वन विकास अब खनन

राज्य में फिलहाल जिन 269 खानों की नीलामी प्रक्रिया चल रही है। इनमें 51 खान उस भूमि पर चिन्हित की गई हैं, जहां 5 वर्ष के लिए पेड़ लगाने के लिए आवंटित थी और पेड़ लगा दिए गए और अब यहां वन विभाग के नियमों की पालना का हवाला देकर खानें नीलाम की जा रही हैं।

यों तो कई गांवों से खत्म हो जाएंगे चरागार

खान माफिया के दवाब में राज्य सरकार ने खनन के लिए आवंटित की जाने वाली भूमि की एवज में उतनी ही भूमि चरागाह के लिए राज्य सरकार को समर्पित करने के लिए कहा है। यह जमीन खान आवंटन वाली ही ग्राम पंचायत, निकटस्त ग्राम पंचायत या फिर जिले में किसी भी स्थान पर जमीन लेकर सरकार को दी जा सकती है।

इससे खनिज और चरागाह भूमि का संतुलन बिगड़ेगा। बड़ी बात यह है कि यदि खातेदारी भूमि हुई तो उसे चरागाह भूमि गांव में विकसित करना मुश्किल होगा।

राज्य में 6 लाख हैक्टेयर ओरण भूमि

प्रदेश में करीब 6 लाख हैक्टेयर ओरण भूमि है। इसमें से करीब 5 लाख 37 हजार हैक्टेयर ओरण भूमि अकेले पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तान में है। प्रदेश में कुल ओरण 25 हजार हैं, इनमें से 1100 बड़े ओरण हैं।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.patrika.com/jaipur-news/where-there-is-mineral-wealth-there-is-an-increased-risk-of-extinction-of-pastures-in-rajasthan-19258565

Thursday, 12 December 2024

नांगल पुरोहितान में सरपंच पति पर चारागाह और नदी नालों की जमीन पर कब्जा करवाने का आरोप

ग्रामीणों की सूचना पर दौलतपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची, ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से परिवाद सौंपा

भास्कर न्यूज | राजावास

दौलतपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम नांगल पुरोहितान के गौ माता मंदिर के पास नदी नालों में चारागाह व नदी नालों की भूमि पर स्थानीय ग्रामीणों ने स्थानीय सरपंच पति सहित अन्य पर मिलकर कब्जा करने का आरोप लगाया है। दौलतपुरा थाना पुलिस को ग्रामीणों ने लिखित में परिवाद सौंपकर बताया कि नांगल पुरोहितान में खसरा नंबर 679,723,724, 727, 879/ 200,678 जो की चरागाह व नदी नालों की भूमि है।

जिस पर ग्राम पंचायत नांगल पुरोहितान के सरपंच पति जयपाल परसवाव, निर्मल केड़िया पुत्र शिव केडिया, नितिन केडिया पुत्र शिव कुमार केडिया के साथ मिलकर गणपति ग्रह निर्माण सहकारी समिति के फर्जी पट्टे जारी कर मौके पर रोड डालने का कार्य किया जा रहा है। जहां ग्रामीणों ने लिखित में परिवाद सौंपकर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। सड़क डालने के दौरान ग्रामीणों को सूचना मिलने पर काफी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे व विरोध जताया तथा पीसीआर को भी सूचना दी। जहां मौके पर पुलिस भी आई। इस दौरान अतिक्रमण करने आए लोग फरार हो गए। इस दौरान दिनेश ठाकण, सुरेश बिजारणिया, सुरजन लाल, रमेश कुमार, रामेश्वर लाल, प्रकाश, राजू चोपड़ा, राजकुमार चौधरी आदि कई लोग मौजूद रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaipur/news/in-nangal-purohit-sarpanchs-husband-is-accused-of-occupying-pasture-and-river-drain-land-134105718.html


Monday, 9 December 2024

जेडीए की फार्म हाउस योजना को चुनौती देने वाली पीआईएल खारिज, लगाया हर्जाना

जयपुर। राजस्थान हाइकोर्ट ने जेडीए की ओर से जयपुर के रोजडा गांव में विकसित की जा रही फार्म हाउस योजना को चारागाह भूमि पर विकसित करना बताकर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता स्थानीय सरपंच रामजीलाल यादव व अन्य पर पांच हजार रुपए का हर्जाना भी लगाया है। अदालत ने माना की जनहित याचिका तथ्य छिपाकर और सद्भावी भावना से दायर नहीं की गई है।

सीजे एमएम श्रीवास्तव व जस्टिस उमाशंकर व्यास ने यह आदेश रामजीलाल यादव व अन्य की जनहित याचिका पर दिए। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं में गांव का सरपंच भी है और यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि उसे गांव में होने वाले किसी अतिक्रमण की जानकारी नहीं है। वह अतिक्रमण के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं चाहता था, लेकिन जैसे ही जेडीए की ओर से कार्रवाई शुरू करते हुए उसने जनहित याचिका दायर कर दी।

याचिका में कहा गया था कि गांव की करीब 8 हेक्टेयर जमीन पर जेडीए फार्म हाउस स्कीम लेकर आया था। इस जमीन में चारागाह भूमि भी शामिल है। जबकि चारागाह जमीन पर फार्म हाउस स्कीम विकसित नहीं हो सकती। इसके जवाब में जेडीए की ओर से अधिवक्ता अमित कुडी ने कहा कि जनहित याचिका सद्भावी नहीं है और इसमें निजी हित छिपे हुए हैं।

इससे पहले स्थानीय निवासियों ने इस जमीन पर अतिक्रमण हटाकर यहां पर खेल का मैदान व योगा सेंटर बनाए जाने का प्रतिवेदन दिया था, लेकिन जेडीए ने कार्रवाई शुरू की तो उसका विरोध हुआ। यह पीआईएल जेडीए कार्रवाई को रोकने के लिए हुई है। इसलिए इसे खारिज किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने जनहित याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं पर हर्जाना लगाया है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.mahanagartimes.com/post/pil-challenging-jda-farm-house-scheme-dismissed

Sunday, 17 November 2024

बहलोड़ में चारागाह जमीन की तरमीम निरस्त करने की मांग: विधायक ने लिखा मुख्य सचिव को पत्र


उपखंड क्षेत्र जमवारामगढ़ की आंधी तहसील के ग्राम बहलोड़ में एक रसूखदार व्यक्ति को नक्शे में चरागाह भूमि की तरमीम का मामला सामने आने पर क्षेत्रीय विधायक महेंद्रपाल मीणा ने मुख्य सचिव सुधांश पंत को पत्र लिखकर तरमीम को निरस्त करने की मांग की है। ग्राम बहलोड़ के हाल खाता संख्या 383 चरागाह खसरा नंबर 7 कुल रकबा 59.81 हेक्टेयर भूमि स्थित है।

बहलोड पंचायत की चरागाह भूमि में पेड़

उल्लेखनीय है कि पुत्र कल्याण हिस्सा 1/2 नानगराम पुत्र जगनाथ नायक भंवरलाल पुत्र जगनाथ नायक को पूर्व में भूमि आवंटित हुई थी जो गैर खातेदारी में चल रही थी। बाद में इन लोगों को खातेदारी दे दी गई। इनका कभी किसी भूमि पर कब्जा नहीं रहा है। ग्राम वासियों का कहना है कि जहां इनको भूमि आवंटित हुई थी वहां न देकर इन्होंने षड्यंत्र रचकर चरागाह भूमि में अपनी तरमीम करवा ली है। यह जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग के नजदीक है तथा इस भूमि में से सीमेंट सड़क भी निकली हुई है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन से मिलीभगत कर चरागाह में अपनी भूमि की तरमीम करवा लिया, जिससे ग्राम वासियों में आक्रोश है। ग्राम वासियों के प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय विधायक महेंद्र पाल मीना से मिलकर सारी घटना बताई। क्षेत्रीय विधायक महेंद्र पाल मीणा ने मुख्य सचिव राजस्थान सरकार को चरागाह भूमि में की गई तरमीम को निरस्त करने की मांग की है।

न्यायालय में भी मामला विचाराधीन

जानकारी में यह भी आया कि उक्त भूमि से संबंधित अतिरिक्त जिला कलेक्टर जयपुर के न्यायालय में भी मामला विचाराधीन है जिसमें न्यायालय द्वारा मौका व रिकॉर्ड की यथास्थिति के आदेश हैं। ग्राम वासियों का कहना है कि चरागाह भूमि में हजारों सघन बबूल के पेड़ है तथा सरकार के द्वारा ही इसमें पेड़ लगाए गए हैं, जिनकों खातेदार अब चरागाह भूमि में अपना कब्जा करने के लिए इन पेड़ों को काट रहा है जिसकी शिकायत भी तहसीलदार को की जा चुकी है किंतु कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उल्लेखनीय है कि बिना सिवायचक भूमि से क्षतिपूर्ति किए ही चरागाह भूमि में तरमीम कर दी गई, जिनकों की कोई कानूनी अधिकार नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से तहसीलदार पक्षकार होने के बावजूद भी तहसीलदार ने नीचे की कोर्ट में अपना पक्ष न रखकर एक पक्षकार को ही लाभ पहुंचाया गया है, जिस कारण यह विवाद उत्पन्न हुआ है।

जमवारामगढ़ विधायक महेंद्रपाल मीणा ने बताया- बहलोड़ के खसरा नंबर 7 में सघन पेड़ हैं। यह भूमि चरागाह भूमि है। ग्राम पंचायत द्वारा इसमें पेड़ लगाए गए हैं। ग्रामीण एवं पंचायत की शिकायत के बाद मैंने चरागाह भूमि में की गई तरमीम को निरस्त करने के लिए मुख्य सचिव को भी पत्र लिखा है। गैर कानूनी कार्रवाई कोई भी हो निरस्त होनी चाहिए।

इस मामले में उपखंड अधिकारी, जमवारामगढ़ ललित मीणा ने कहा- यदि किसी कास्तकार को भूमि आवंटित हुई है तो उसकी दूसरी जगह चरागाह में तरमीम किया है तो गलत पास फाइल नहीं है ज्यादा है। मेरे जानकारी मैं नहीं है इस पर ज्यादा जानकारी नहीं दे सकता।

पंचायत बहलोड़- सरपंच, सुदामा गुर्जर ने बताया- ग्राम पंचायत की एनओसी के बाद वन विभाग ने नर्सरी लगाई थी, जिसको बाद में ग्राम पंचायत को सुपुर्द भी कर दी गई। ग्राम पंचायत द्वारा 2 2 साल में एक बार लूम पातड़ी की नीलामी की जाती है। यह भूमि चरागाह भूमि है इसकी तरमीम करना गलत है। तरमीम को दुरुस्त को दुरुस्त कराने की कार्यवाही कर रखी है।

मूल ऑनलाइन लेख -https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaipur/news/demand-to-cancel-the-amendment-of-pasture-in-bahlod-133979090.html


Thursday, 14 November 2024

चारागाह भूमि पर भारी वाहनों की पार्किंग पर रोक: मुख्य सचिव सहित 17 लोगों को नोटिस जारी, कोर्ट ने 16 दिसम्बर तक मांगा जवाब

चौमूं की हाड़ौता ग्राम पंचायत की चारागाह भूमि सहित आम रास्ते पर भारी चारा वाहनों की पार्किंग पर हाईकोर्ट ने अंतिम रोक लगाई।

चौमूं की हाड़ौता ग्राम पंचायत की चारागाह भूमि सहित आम रास्ते पर भारी चारा वाहनों की पार्किंग पर हाईकोर्ट ने अंतिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने इस मामले को लेकर मुख्य सचिव, प्रमुख राजस्व सचिव, जिला कलेक्टर, प्रमुख गृह सचिव व जयपुर डीसीपी, जयपुर ट्रैफिक, एसडीएम, तहसीलदार, गोविंद-गढ़ पंचायत समिति विकास अधिकारी, गोविंद-गढ़ प्रधान, हाडौता सरपंच, चौमूं थाना अधिकारी और ठेकेदार लालचंद यादव सहित 17 जनों को नोटिस जारी कर आगामी 16 दिसंबर तक इस पूरे मामले का जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट जस्टिस इंद्रजीत सिंह व आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश रामेश्वर प्रसाद व अन्य की पीआईएल पर दिया है। अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने बताया कि पंचायत सरपंच ने अफसरों से मिलीभगत करके बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए ही हाडौता ग्राम पंचायत और गोविंदगढ़ पंचायत समिति की चारागाह भूमि और आम रास्ते की जमीन पर चारा वाहनों की पार्किंग के लिए ठेके पर दे दी। जबकि काश्तकारी अधिनियम पंचायत राज अधिनियम और भू राजस्व अधिनियम के तहत चारागाह भूमि व सार्वजनिक रास्ते की जमीन का अन्य कार्य के लिए उपयोग नहीं हो सकता हैं।

वर्ष 2017 में इसी जमीन पर एक करोड़ 58 लाख रुपए में भारी चारा वाहनों की पार्किंग का ठेका दिया गया था। हालांकि बाद में स्थानीय एसडीएम ने चारागाह भूमि होने पर इस टेंडर पर रोक लगा दी थी, लेकिन फिर भी इस जमीन पर अपने चहेते ठेकेदार को 31लाख 21 हजार रुपए में पार्किंग का टेंडर दे दिया।

मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दयार की। जहां पर हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अंतिम रोक लगाई गई और आगामी 16 दिसंबर तक इस मामले में जवाब मांगा गया है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaipur/chomu/news/ban-on-parking-of-heavy-vehicles-on-pasture-land-chomu-rajasthan-133952173.html

Tuesday, 12 November 2024

खानाबदोश घुमंतू समाज को जेडीए द्वारा हटाने का विरोध: चारागाह भूमि पर बसाने का लगाया आरोप; जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की

 

खानाबदोश घुमंतू जाति समाज के लोग बुधवार को जयपुर जिला कलेक्ट्रेट ऑफिस पहुंचे। यहां कलेक्टर डॉ. जितेंद्र सोनी को खानाबदोश घुमंतू जाति समाज के लोगों को राइजिंग रास्थान प्रस्तावित कार्यक्रम के चलते जगतपुरा स्थित अक्षय पात्र, सांगानेर, विद्याधर नगर, झोटवाड़ा आदि स्थानों से खानाबदोश लोगों को जबरदस्ती बुलडोजर से उनकी बस्तियों को ध्वस्त कर उन्हें उठाकर कानोता थाना क्षेत्र में स्थित सिरोली गांव की चारागाह भूमि पर लाकर छोड़ने के विरोध में ज्ञापन दिया। प्रतिनिधि मंडल ने इस दौरान कलेक्टर से जांच करवाकर अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

घुमंतू ​​​​​​अर्द्ध-घुमंतू विमुक्त जाति परिषद के अध्यक्ष ​रतननाथ कालबेलिया ने बताया- राइजिंग राजस्थान की चमक को बढ़ाने के लिए गरीब और खानाबदोश घुमंतू जाति समाज के लोगों के जीवन को कष्ट से ढका जा रहा हैं। विगत 7 नवंबर को और उसके बाद लगातार जयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से जगतपुरा स्थित अक्षय पात्र, सांगानेर, विद्याधर नगर, झोटवाड़ा आदि स्थानों से खानाबदोश लोगों को जबरदस्ती बुलडोजर से उनकी बस्तियों को ध्वस्त कर उन्हें उठाकर कानोता थाना क्षेत्र में स्थित सिरोली गांव की चारागाह भूमि पर लाकर छोड़ दिया। जहां हजारों लोग बिना पानी बिजली और मूलभूत सुविधा के नारकीय जीवन जी रहे हैं। इसके विरोध में आज घुमंतू समाज उत्थान के क्षेत्र में कार्य करने वाली विभिन्न संगठनों जिनमें घुमंतू, अर्ध-घुमंतू विमुक्त जाति परिषद, भारत जोड़ो मिशन सोसाइटी, घुमंतू प्रकोष्ठ राजस्थान, घुमक्कड़ बेघर समाज सेवा संस्थान सहि कई अन्य संगठनों के पदाधिकारीयों ने जयपुर जिला कलेक्टर डॉ. जितेंद्र सोनी को इस बाबत ज्ञापन सौंप कर इस मामले में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ जांच करने और चारागाह में छोड़े गए लोगों को तुरंत स्थायी पट्टे और आवास, मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की हैं।

घुमंतू अर्ध-घुमंतू और विमुक्त जाति परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रतन नाथ कालबेलिया ने सरकार पर आरोप लगाया हैं कि जब से बीजेपी सरकार आई हैं तब से घुमंतू समाज की बस्तियां उजाड़ी जा रही हैं और घुमंतू समाज के नागरिकों को जब भी अधिकारियों का मन करता है तब कचरे की तरह उठाकर कहीं भी फेंक देते हैं ,अब यह अन्याय सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया- सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हैं यदि 7 दिन में इन प्रवृत्तियों को रोक कर घुमंतू समाज को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

घुमंतू प्रकोष्ठ महासचिव बिशन लाल बावरी ने कहा कि वास्तव में सबसे पीछे अगर कोई समाज हैं तो वह घुमंतु अर्ध घुमंतु और विमुक्त समाज हैं और अब सरकार को इस समाज पर विशेष ध्यान देना होगा, नहीं तो हम सभी सामाजिक संगठनों को एक साथ लेकर बड़ा आंदोलन करेंगे। भारत जोड़ो मिशन सोसाइटी के दलित उन्मूलन समिति के प्रदेश संयोजक राजेंद्र चंदोलिया ने कहा कि समाज के पढ़े लिखे लोगों को समाज को जगाने के लिए चलाए जा रहे हैं अभियान में शामिल होना चाहिए और समाज के अंदर शिक्षा और कुरीतियों को मिटाने के लिए लोगों को जागृत करना चाहिए ताकि लोग अपने अधिकार को लेना जान सकें।


भारत जोड़ो मिशन सोसाइटी के अध्यक्ष अनीष कुमार ने कहा कि अब समय आ गया है की घुमंतू, अर्ध-घुमंतू, विमुक्त जाति परिषद के क्षेत्र में काम करने वाली अलग-अलग संगठनों को एक मंच पर आना होगा और घुमंतू
समाज के कष्टों की मुक्ति के लिए निस्वार्थ भाव से काम करने के लिए साथ खड़ा होना होगा।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaipur/news/protest-against-removal-of-nomadic-community-by-jda-133953658.html

Thursday, 17 October 2024

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं: चारागाह से दो साल पहले निकाला रास्ता, अब रातोरात बना दी 10 अवैध दुकानें


जिले की रामपुरा डाबड़ी उपतहसील की बेशकीमती चारागाह जमीन पर दो साल पहले प्राइवेट कॉलोनाइजर ने आम रास्ता बना दिया। अब शनिवार व रविवार की छुट्टी का फायदा उठा कर रातोरात 10 अवैध दुकानों का निर्माण करवा दिया। इस जमीन की कीमत 2 करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है। ग्रामीणों ने जेडीए, गिरदावर व पटवारी को शिकायत भी की, लेकिन दो दिन तक रात भर निर्माण चलता रहा। अब यहां कोर्ट स्टे लाने की तैयारी की जा रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि जेडीए जोन 12 के ग्राम रामपुरा के खसरा नं. 820 राजस्व रिकॉर्ड में चारागाह दर्ज है और इस खसरा की जमीन पर उपतहसील बनी हुई है। यहां पर कब्जा करने की नियत से पहले एक कॉलोनाइजर ने अवैध कॉलोनी बसा कर रास्ता निकाल दिया और अब दुकानों के पट्टे दे दिए। आमेर तहसीलदार व जेडीए जोन 12 में शिकायत के बावजूद पिछले एक साल में कब्जा कर निर्माण करने की कई बार कोशिश हो चुकी है।

अतिक्रमणियों के पास सोसायटी का पट्टा

जेडीए की प्रवर्तन अधिकारी निर्मला ने बताया कि दो महीने पहले यहां अवैध निर्माण होने की शिकायत मिली थी। तब काम रुकवा दिया था। सोसायटी का पट्टा बताया जा रहा है। अब छुट्टी की वजह से दुबारा निर्माण हुआ है। एक-दो दिन में तोड़ देंगे। वहीं आमेर तहसीलदार विजयपाल का कहना है कि यह खसरा जेडीए के नाम दर्ज है। ऐसे में कार्रवाई भी जेडीए ही करेगा। पटवारी की रिपोर्ट उपतहसील के जरिए आते ही जेडीए को लिख देंगे।

एक साल पहले भी किया था अवैध निर्माण...सीकर रोड पर रामपुरा डाबड़ी उपतहसील के पास सरकारी चारागाह की बेशकीमती जमीन पर कुछ लोगों ने अक्टूबर 2021 में भी छुट्टी का फायदा उठा कर अतिक्रमण कर 10 दुकानों की नींव भरकर दीवारें बनावा दी थी। स्थानीय लोगों ने आमेर उपखंड अधिकारी और जिला प्रशासन को शिकायत की थी। तत्कालीन एसडीएम प्रियव्रत सिंह चारण के निर्देश पर तत्कालीन उपतहसीलदार सृष्टि जैन व आमेर उपतहसील के नायब तहसीलदार सुभाष सेपट ने अवैध निर्माण तोड़ दिया था। लोगों का कहना है कि यहां पर कुछ भूमाफिया किस्म के लोगों ने करीब दो करोड़ रुपए में यह सरकारी जमीन बेच दी और रातों रात कब्जा कर रहे है। ऐसे में अतिक्रमियों की पहचान कर मुकदमा दर्ज होना चाहिए और यहां सरकारी संपत्ति का बोर्ड लगाया जाना चाहिए।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaipur/news/two-years-ago-the-road-was-removed-from-the-pasture-now-10-illegal-shops-have-been-built-overnight-130692482.html

Friday, 11 October 2024

एरोड्रम की जगह को कंटेनर डिपो के लिए निजी कंपनी को देने का विरोध, ग्रामीण बोले-यहां चरागाह, जल भराव क्षेत्र है



ग्रामीण बोले- मिलकर लड़ेंगे कानूनी लड़ाई

बधाल क्षेत्र के एरोड्रम की 180 बीघा जमीन को एक निजी लॉजिस्टिक्स कंपनी को देने के प्रस्ताव को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया है। बधाल से इटावा मुख्य मार्ग के समीप बिजली निगम ग्रिड स्टेशन के पीछे एरोड्रम की सरकारी जमीन को एक लॉजिस्टिक्स कंपनी को कंटेनर डिपो के लिए लीज पर देने के प्रस्तावित मामले को लेकर ग्रामीण लामबंद हुए है।

इसके लिए बधाल पंचायत में कोरम की आपातकालीन बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से इस भूमि के आवंटन की प्रक्रिया को लेकर असहमति जताई गई। साथ ही और संभागीय आयुक्त और कलक्टर से शिकायत की गई है।

विरोध की ये मुख्य वजह संबंधित जिस भूमि पर कंटेनर डिपो बनना प्रस्तावित है उसकी आधे से अधिक भूमि पर हजारों खेजड़ी पेड़ हैं। इसके अलावा यह स्थान पशुओं के लिए विकसित चारागाह भी है। इस भूमि पर अकाल राहत कार्यों के तहत 3 दशक पूर्व कच्चे बांध का भी निर्माण किया गया था जो आज भी जल भराव क्षेत्र है।

यह एरोड्रम की जगह है, जहां आजादी से पहले हवाई जहाज उतरते थे। सन 2000 में तत्कालीन सांसद टोंक श्यामलाल बंसीवाल (तब यह क्षेत्र टोंक संसदीय क्षेत्र में आता था) ने यहां हवाई अड्डा बनाने के संबंध में प्रयास भी किए थे। जो जयपुर सांगानेर एयरपोर्ट के नजदीक होने से नही बन पाया। ग्रामीणों ने बताया कि खाटूश्याम से 15 किमी दूर बधाल कस्बे में एरोड्रम की चिन्हित जमीन रहेगी तो भविष्य में हवाई अड्डा बनने की संभावना भी रहेगी।

भूमि पर जेजेएम के तहत बोरिंग करवाए गए है, जिनसे पेयजल आपूर्ति होनी है। पूर्व में भी इस क्षेत्र में कुएं बने हैं जो क्षेत्रवासियों की प्यास बुझाते आए हैं।

प्राइवेट फ्रंट टर्मिनल के लिए बधाल और इटावा पंचायत सीमा में 45 हैक्टेयर भूमि देना प्रस्तावित है। अंतर्देशीय कंटेनर डिपो सह निजी माल टर्मिनल की स्थापना के लिए निजी कंपनी की ओर से बधाल क्षेत्र में हवाई अड्डा के लिए भूमि आवंटन की मांग रखी गई है, जिसमे अधिकांश हिस्से में खेजड़ी के हजारों पेड़ व कच्चा बांध भी बना है।

मिलीभगत कर लाभ पहुंचाने का आरोप लगा रहे ग्रामीण

इधर, ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित उच्चाधिकारियों से मिलीभगत कर निजी लॉजिस्टिक्स कंपनी गांव की बेशकीमती और गौरवपूर्ण जमीन पर कब्जा जमा रही है। इसके अलावा एक कंटेनर डिपो के लिए हजारों पेड़ों और ऐतिहासिक भूमि की बलि देना कतई मंजूर नहीं है। इसका ग्रामीण विरोध कर रहे हैं अगर जल्द ही उनकी मांग नहीं मांगी गई तो आंदोलन होगा।

ग्रामीणों ने बताया कि इस भूमि के कंटेनर डिपो के लिए लीज पर निजी कंपनियों के हाथों में देने के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों के साथ आस-पास के गांवों के जनप्रतिनिधि भी समर्थन में आ गए हैं। इसके लिए कानूनी रूप से भी कार्रवाई ग्रामीणों द्वारा मिलकर की जाएगी। बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा। इसके लिए आसपास के 10 ग्राम पंचायतों के सरपंच, पंचायत समिति सदस्यों और वार्ड पंचों ने आवंटन प्रक्रिया के विरोध में संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर को पत्र लिखा है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaipur/chomu/news/opposition-to-give-the-place-of-aerodrome-to-private-company-for-container-depot-villagers-said-here-is-pasture-waterlogged-area-131656164.html

Wednesday, 25 September 2024

चारागाह विकास पर कार्यशाला का आयोजन: राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, जयपुर में सफलता पूर्वक संपन्न

 

जयपुर: राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा जयपुर में आज “चारागाह विकास: विकसित राजस्थान का आधार” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर एवं फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी, राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। इस कार्यशाला का उद्देश्य राजस्थान में चारागाह विकास के लिए प्रभावी नीतियों का निर्माण करना और उनके क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदमों पर विचार-विमर्श करना था।

कार्यशाला के मुख्य अतिथि सांसद सिरोही-जालौर, श्री लुंबा राम चौधरी ने अपने संबोधन में चारागाहों के विकास को राजस्थान की समृद्धि का आधार बताया। उन्होंने कहा, “चारागाहों का सतत विकास हमारे पशुपालन उद्योग, ग्रामीण रोजगार, जैव विविधता संरक्षण और मृदा सुधार के लिए अत्यंत आवश्यक है।” साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया और लगाए गए पौधों के संरक्षण पर जोर दिया। श्री चौधरी ने मनरेगा के तहत गोचर भूमि के संरक्षण और वृक्षारोपण की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।

शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री, श्री मदन दिलावर ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर कार्यशाला में सहभागिता की। उन्होंने अपने संदेश में कहा, “चारागाहों का विकास पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ पंचायती राज व्यवस्था को भी सुदृढ़ करता है। चारागाहों का संरक्षण न केवल पशुधन के लिए बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी आवश्यक है।”

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कुलपति श्री बलराज सिंह ने कहा, “पशुधन का स्वास्थ्य और उनकी उत्पादकता चारागाहों में चरने से बेहतर रहती है। चारागाह विकास के बिना राजस्थान का समग्र विकास संभव नहीं है।” उन्होंने चारागाहों में चराई के सिद्धांतों की पालना की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय चारागाह प्रबंधन और पशुपालन में अनुसंधान और तकनीकी विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है। फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के प्रतिनिधियों ने स्थानीय समुदायों की भागीदारी से चारागाह प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया और चारागाह संरक्षण की दिशा में किए गए अपने कार्यों की जानकारी दी।

कार्यशाला के दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने अपने शोध और अनुभव साझा किए और चारागाह विकास के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। कार्यशाला में किसानों, पशुपालकों, वैज्ञानिकों, और पर्यावरणविदों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। आयोजन सचिव डॉ. सुनील दाधीच ने बताया कि इस कार्यशाला में राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों ने भाग लिया और राज्य के चारागाह सुधार के लिए उपयोगी सुझाव दिए।

कार्यशाला में पदम श्री लक्ष्मण सिंह, शिवकरण जानू, कैलाश सुथार सहित अन्य विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर कृषि अनुसंधान निदेशक डॉ. मोहन लाल जाखड़, रारी निदेशक डॉ. सुनीता गुप्ता, निदेशक शिक्षा डॉ. एन. के. गुप्ता, चारागाह विकास संस्थान झांसी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजीव अग्रवाल, एवं शांतनु सिन्हा रॉय, राज्य प्रमुख, फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी सहित कई गणमान्य अतिथियों ने भी अपनी सहभागिता निभाई। कार्यक्रम के अंत में सह-अधिष्ठाता डॉ. उम्मेद सिंह ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

मूल ऑनलाइन लेख - https://jagrukjanta.net/overall-development-of-rajasthan-is-not-possible-without-pasture-development-balraj-sknau/

Monday, 23 September 2024

जेडीए ने 11 बीघा जमीन अतिक्रमण मुक्त कराई

जयपुर। जेडीए ने रविवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 11 बीघा चारागाह जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया। जेडीए के प्रवर्तन प्रकोष्ठ के अनुसार जोन-12 के क्षेत्राधिकार में सिरसी कुंडा में करीब 6 बीघा में बाजरे की फसल, 2 बीघा में डेरी फार्म, टीन शैड व 4 कमरे छप्पर एवं पक्का निर्माण करके अतिक्रमण कर रखा था। जेडीए प्रवर्तन दस्ते ने जेसीबी मशीन की सहायता से इनको ध्वस्त कर दिया और अतिक्रमण के प्रयास को विफल कर दिया। इसके बाद तकनीकी शाखा द्वारा तारबंदी की गई। जेडीए स्वामित्व के बोर्ड लगा दिए। अब संबंधित से ध्वस्तीकरण की इस कार्रवाई का नियमानुसार खर्चा वसूला जाएगा।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaipur/news/jda-freed-11-bigha-land-from-encroachment-133687758.html