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Sunday, 5 July 2026

Jaisalmer: सेवण घास चारागाह में भीषण आग, बारिश बनी राहत, बड़ा नुकसान टला

लाठी के मरुस्थलीय क्षेत्र में सेवण घास से विकसित चारागाह शनिवार देर रात अचानक भीषण आग की चपेट में आ गया। हाइटेंशन लाइन में स्पार्किंग से निकली चिंगारी और तेज हवाओं के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया। करीब 7–8 बीघा क्षेत्र में फैली आग से वनस्पति व पौधों को भारी नुकसान हुआ, ग्रामीणों और पुलिस ने आग बुझाने के प्रयास किए।

जैसलमेर | Deepak Vyas | Jul 05, 2026



लाठी ( जैसलमेर ). लाठी कस्बे में मरुस्थलीय वानस्पतिक संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के उद्देश्य से ग्राम पंचायत की ओर से विकसित सेवण घास चारागाह शनिवार देर रात भीषण आग की चपेट में आ गया। रात करीब नौ बजे अचानक लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार चारागाह के ऊपर से गुजर रही हाइटेंशन विद्युत लाइन में हुई स्पार्किंग से निकली चिंगारी सूखी सेवण घास पर गिर गई। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैलती चली गई और देखते ही देखते करीब सात से आठ बीघा क्षेत्र इसकी चपेट में आ गया।

आग की लपटों ने चारागाह में उगी सेवण घास, वानस्पतिक झाड़ियों तथा अनेक पौधों को अपनी चपेट में लेकर भारी नुकसान पहुंचाया। आग की ऊंची लपटें और धुएं का गुबार दिखाई देने पर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। ग्राम पंचायत लाठी के प्रशासक महेंद्र चावला, निवर्तमान उपसरपंच भारस खां, वार्ड पंच मजीद खां, रामसिंह सिसोदिया, खेतनाथ, जसनाथ, खेताराम भील, ललित कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उपलब्ध संसाधनों से आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया। ग्रामीणों ने टहनियों, मिट्टी और अन्य साधनों की मदद से आग को फैलने से रोकने की कोशिश की, लेकिन तेज हवा के कारण आग लगातार विकराल होती चली गई। कुछ ही देर में चारागाह का बड़ा हिस्सा आग की चपेट में आ गया। घटना की सूचना मिलते ही लाठी थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। थानाधिकारी ईशराराम परिहार, कांस्टेबल भींयाराम चौधरी, कैलाश चौधरी, नेनाराम, सुरेंद्र साऊ तथा अन्य पुलिसकर्मियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर आग पर नियंत्रण पाने के प्रयास किए। साथ ही अग्निशमन वाहन को भी तत्काल सूचना दी गई, लेकिन दमकल के पहुंचने से पहले ही मौसम ने अचानक करवट ले ली।

... और टल गया बड़ा हादसा

आग लगातार फैल रही थी और उसके आसपास के क्षेत्र तक पहुंचने की आशंका बढ़ती जा रही थी। इस दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश ने कुछ ही देर में आग की तीव्रता कम कर दी और धीरे-धीरे आग पूरी तरह बुझ गई। यदि समय पर बारिश नहीं होती तो आग चारागाह के साथ आसपास के क्षेत्र में भी फैल सकती थी, जिससे नुकसान कई गुना बढ़ जाता। बारिश के कारण बड़ा हादसा टल गया और ग्रामीणों के साथ पुलिस प्रशासन ने भी राहत की सांस ली।

पर्यावरण और जैव विविधता को भारी क्षति

आग से सेवण घास चारागाह को व्यापक नुकसान पहुंचा है। सेवण घास मरुस्थलीय क्षेत्र की महत्वपूर्ण वनस्पति मानी जाती है और पशुओं के लिए पौष्टिक चारे का प्रमुख स्रोत भी है। इसके अलावा यह मरुस्थलीय पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आग की वजह से बड़ी मात्रा में सेवण घास, प्राकृतिक झाड़ियां और नव विकसित पौधे जलकर नष्ट हो गए। इससे चारागाह की जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी गहरा झटका लगा है।

स्थायी अग्निशमन केंद्र की उठी मांग

घटना के बाद ग्राम पंचायत लाठी के प्रशासक महेंद्र चावला ने क्षेत्र में दमकल सुविधा की कमी पर चिंता जताई। उनका कहना है कि लाठी क्षेत्र पहले भी कई बार आग लगने की घटनाओं का सामना कर चुका है, लेकिन हर बार अग्निशमन वाहन के समय पर नहीं पहुंचने से नुकसान बढ़ने का खतरा बना रहता है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मांग की कि लाठी क्षेत्र में स्थायी अग्निशमन केंद्र स्थापित किया जाए, ताकि भविष्य में आग जैसी घटनाओं पर तत्काल नियंत्रण पाया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर दमकल सुविधा उपलब्ध होने से पर्यावरण, वनस्पतियों और जन-धन की सुरक्षा बेहतर ढंग से सुनिश्चित की जा सकेगी।


Friday, 10 October 2025

जैसलमेर में 70 हजार बीघा जमीन को बचाने के लिए कवायद शुरू, प्रशासन ने उठाया ये कदम

 Jailsamer News: जिला प्रशासन ने उपखण्ड अधिकारियों की निगरानी में जल संसाधन विभाग के अभियंता, पटवारी और भू-अभिलेख निरीक्षकों की संयुक्त टीमें गठित की हैं.

Jaisalmer Administration Action: जैसलमेर में लम्बे वक्त से चल रही ओरण, गोचर और परम्परागत जल स्त्रोतों को संरक्षित करने के लिए जिला प्रशासन ने कदम उठाया है. ओरण, आगोर, तालाब, नाड़ी, नदी-नाला जैसी पारंपरिक जल संपदाओं को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है. जिला प्रशासन ने उपखण्ड अधिकारियों की निगरानी में जल संसाधन विभाग के अभियंता, पटवारी और भू-अभिलेख निरीक्षकों की संयुक्त टीमें गठित की हैं. ये टीमें ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर सीमांकन, सर्वेक्षण और अभिलेख प्रविष्टि का कार्य कर रही हैं, ताकि इन धरोहरों को भविष्य में अतिक्रमण या अवैध उपयोग से बचाया जा सके.

47 गांवों के जलस्त्रोत के लिए अनुशंसा भेजी
अब तक 47 गांवों के पारंपरिक जल स्रोतों और उनके कैचमेंट एरिया की लगभग 70 हजार बीघा भूमि के प्रस्ताव जिला कलक्टर की अनुशंसा सहित राज्य सरकार को राजस्व रिकॉर्ड में इंद्राज के लिए भेजे जा चुके हैं. इनमें तहसील जैसलमेर के सुल्तानपुरा, चूंधी, अमरसागर, कुलधर, रामकुण्डा, मूलसागर, बडाबाग, पिथला, लिदरवा, हमीरा सहित दर्जनों गांव शामिल हैं.

भूमि को स्थायी रूप से सुरक्षित करने की कवायद
जल संरचनाओं की स्थायी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी. उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और राजस्व अमले की विशेष टीमें फील्ड में जाकर सीमांकन कार्य को प्राथमिकता से पूरा कर रही हैं. इस अभियान में स्थानीय ग्रामीणों और बुजुर्गों की सहभागिता को भी महत्वपूर्ण माना गया है. राजस्व टीमें परंपरागत ज्ञान और स्थानीय जानकारी के आधार पर सही स्थलों की पहचान कर रही हैं, जिससे जल स्रोतों और चारागाह जैसी भूमि को स्थायी रूप से सुरक्षित किया जा सके.

जैसलमेर विधायक छोटू सिंह भाटी ने कहा कि औरण, गोचर, नदी नाले, तालाब आदि प्राकृतिक धरोहरो का संरक्षण मेरी प्राथमिकता है. यह जैसलमेर के लिए एक ऐतिहासिक कदम है. 

मूल ऑनलाइन लेख - https://rajasthan.ndtv.in/rajasthan-news/jaisalmer-efforts-underway-to-save-70-000-bighas-of-land-action-taken-against-encroachment-9430565
 



Thursday, 9 October 2025

जैसलमेर: परंपरागत जल स्रोतों का संरक्षण और भूमि रिकार्ड में इंद्राज

जैसलमेर. जिला प्रशासन ने परंपरागत जल स्रोतों जैसे ओरण, आगोर, तालाब, नदी-नाला और नाड़ी की भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की कवायद की जा रही है।

जैसलमेर. जिला प्रशासन ने परंपरागत जल स्रोतों जैसे ओरण, आगोर, तालाब, नदी-नाला और नाड़ी की भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की कवायद की जा रही है। इस कार्य में उपखंड अधिकारियों की निगरानी में जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता, पटवारी और भू-अभिलेख निरीक्षक की संयुक्त टीमें सर्वेक्षण कर रही हैं। सर्वेक्षण के दौरान तहसील जैसलमेर के ग्राम सुल्तानपुरा, चूंधी, गणेशदास की ढाणी, अमरनगर, अमरसागर, माणपिया, कुलधर, मुंदरड़ी, रामकुण्डा, जीयाई, किशनघाट, मूलसागर, बडाबाग, धउवा, भोजासर, विजयनगर, गोरेरा, डलासर, पडिहारी, पिथला, लिदरवा, छत्रैल, रूपसी, मोकलाल, लीला पारेवर, जायण, जैसलमेर यूआइटी क्षेत्र, नगरपरिषद क्षेत्र, डाबला, जोधा, धनुवा, खींवसर, सेलल, मोती किलों की ढाणी, कंडियाला, बरमसर, हांसुआ, जोगा, पिपरला, पोलजी की डेयरी, हसन का गांव, भींया, भू, दरबारी का गांव, सडिया, सोरों की ढाणी और हमीरा क्षेत्र की लगभग सत्तर हजार बीघा भूमि शामिल है। जिला प्रशासन ने इन परंपरागत जल स्रोतों और चारागाह जैसी प्राकृतिक संपदाओं को विधिवत राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर भविष्य में अतिक्रमण और अवैध उपयोग से बचाने की ठोस कार्रवाई की है। जिला कलक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित निरीक्षण करें, अतिक्रमण हटाएं और भूमि को मूल स्वरूप में पुनः स्थापित करें।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.patrika.com/jaisalmer-news/jaisalmer-conservation-of-traditional-water-sources-and-inclusion-in-land-records-20012476


Tuesday, 25 March 2025

चारागाह व ओरण भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग

जैसलमेर।  ग्राम पंचायत देवीकोट के ग्रामीणों ने संभागीय आयुक्त के नाम एडीएम को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में बताया कि ग्राम पंचायत देवीकोट में कुछ भू माफियाओं द्वारा ग्राम की आबादी भूमि, सरकारी भूमि, चारागाह भूमि व ओरण भूमि पर अवैध रुप से अतिक्रमण कर अवैध रुप से प्लाट आवंटित कर पट्‌टे जारी किए जा रहे है। ज्ञापन में बताया कि ग्राम की आबादी से कई गुणा अधिक अवैध रुप से आबादी भूमि का आवंटन कर दिया गया है।

जिसकी उच्च स्तरीय कमेटी से जांच करवाई जाएं। ज्ञापन में बताया कि इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी व तहसील प्रशासन को कई बार अवगत करवाया जा चुका है। लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ज्ञापन में बताया कि कार्रवाई के अभाव में देवीकोट में भू माफियाओं के हौंसले बुलंद है। ज्ञापन में देवीकोट में हो रहे अवैध अतिक्रमण को हटाकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन देते समय प्रवीणसिंह, सवाईराम, पदमसिंह, महेंद्रसिंह, नरेश कुमार, प्रागाराम, महेंद्र कुमार, महिपालसिंह, शाहरुख खान, स्वरुपाराम, भवानी कुमार, सुजानाराम, सवाई गिरी, चंद्रप्रकाश, जगदीश, दिलीप शेरा, आसूराम सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। 

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaisalmer/news/demand-to-remove-encroachment-from-pasture-and-forest-land-134702463.html


Friday, 25 October 2024

पंचायत समिति सभागार जैसलमेर में शामलात की पुन

जैसलमेर । पंचायत समिति सभागार जैसलमेर में शामलात की पुनःस्थापना के लिए जिला परिषद जैसलमेर, आईटीसी मिशन सुनहरा कल, बंजर भूमि एवं  चारागाह बोर्ड फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के सयुक्त तत्वाधान में सयुक्त क्षमतावर्धन के लिए पंचायत समिति जैसलमेर के सभागार में शुक्रवार को एक दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया । 

इस दौरान नरेगा के वार्षिक कार्य योजना 2025 -26 की योजना बनाने के लिया महात्मा गाँधी नरेगा योजना के तहत ग्राम सभा में  चारागाह भूमि पर प्रस्ताव लेने पर चर्चा करने  के लिए  सहायक अभियंता चंपालाल ने कहा कि जैसलमेर में बंजर भूमि पर चारागाह  विकास की विपुल संभावनाएं है। इसलिये इस दिशा में इनको कार्य करने की बहुत ही आवश्यकताएं है। महात्मा गांधी नरेगा योजना अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत से चारागाह विकास के कार्य वर्ष 2025- 26 से प्लान जुडाकर आवे। जिसमें हम सबकी भूमिका महत्वपूर्ण है। जैसलमेर जिला पशु बाहुल्य क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि वे क्षेत्र में  एफ ई एस के विषय विशेषज्ञ द्वारा जो प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उसको गहनता से समझ कर हमें धरातल पर इसकी सार्थकता को साबित करना है।

प्रशिक्षण के अवसर पर एफ ई एस से क्षेत्रीय  समन्वयक संतोष कुमारी ने त्रिस्तरीय  बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समिति पर चर्चा करते हुए नियमित  बैठके करने की जरूरत है। इसमें जिले स्तर पर हर तीन महीने मंथन होना चाहिए । उन्होंने प्रशासन को नियमित जुड़कर कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने नरेगा से भू वन ऐप ओर नरेगा की तकनीकी कार्य पर प्रशिक्षण दिया गया।  मघाराम कड़ेला ने पिछले तीन वर्ष से शामलात पर क्षमतावर्धन कार्यक्रम  सयुक्त प्रयास का ब्यौरा बताया गया। जिसमें सरकार और जन समुदाय के प्रयास को भी बताया गया। जिसमें पंचायतीराज 1996 के नियम 170 (1) के तहत चारागाह विकास समितियों को सुदृढिकरण की ज़रूरत पर प्रकाश डाला गया।

इस मौके पर एफ ई एस से फूली देवी ने जैसलमेर के जीव जंतु, घास मैदान, चारागाह, परिस्थिकरण का कैसे मजबूती मिले उस पर चारागाह विकास क्यों जरूरी है। हमे इनको आगे कैसे ले जाना होगा। जिसमें बीज संग्रहण विधियों, चारागाह विकास के तकनीकी विधियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। साथ ही इतिहासकार पार्थ जगानी ने पारंपरिक जैसलमेर के घास मैदानों को बताते हुए सेवन ,धामण, मुरट, स्थानीय घास का विस्तार से बताया गया। उन्होंने कहा कि जैसलमेर एक  मरुस्थल न होकर घास मैदान है। इसमें पंचायत समिति से सहायक विकास अधिकारी, तकनीकी सहायक, वन विभाग, पशुपालन विभाग, कृषि विभाग, स्वयं सेवी संस्थाएं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.pressnote.in/Jaislmer_news_504591.html

Thursday, 21 September 2023

भणियाणा ब्लॉक से चारागाह विकास समिति के सदस्यों ने जानकारी ली

आईटीसी सुनहरा कल, बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड, जिला परिषद, फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के तत्वावधान में बुधवार को भणियाणा ब्लॉक की ग्राम पंचायत तेलीवाड़ा, सरदारसिंह की ढाणी, फलसूंड के चारागाह विकास समिति के सदस्यों ने सेवन विकास कार्य खेतोलाई, लाठी, चांधन का भ्रमण कर जानकारी ली। सेवन घास ग्रामोदय सामाजिक संस्था द्वारा 550 बीघा में सेवन घास एवं पौधारोपण का आयोजन किया गया।

संस्था के शैतानसिंह बारहठ ने बताया कि ग्राम पंचायत की सहमति से चारागाह प्लांट विकसित किया जा रहा है। जिसमें लुप्त हो रही सेवन घास को विकसित किया जा रहा है। यह प्लॉट पूरी तरह सुरक्षित है। जिसकी सुरक्षा सभी लोग मिलजुल कर करते हैं। उन्होंने चारागाह के सामरिक व आर्थिक महत्व के बारे में चर्चा की। उन्होंने बताया कि चारागाह में विविध प्रकार के जीव जंतु एवं पशु पक्षी पाए जाते हैं। यहां की अनेक प्रकार की जड़ी बूटियों को भी चारागाह विकसित करने से वह विकसित हो रही है।

जिससे रोजगार में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सहयोग मिलता है। चारागाह विकास समिति के द्वारा चारागाह विकास के बारे में चर्चा की गई। लाठी में सेवन चारागाह में रामावतार शर्मा के साथ चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि जिले में कई जगहों पर ओरण राजस्व रिकॉर्ड दर्ज नहीं है। उनका सर्वे करके दस्तावेजीकरण काम किया जा रहा है।

लाठी में चारागाह विकास समिति सदस्य जमालदीन ने कहा कि इस चारागाह में विदेशी बबूल नहीं है। चारागाह में 4 हजार पौधों के रोपण का काम भी किया जा रहा है। इस अवसर पर चारागाह विकास समिति के अध्यक्ष, सदस्य, ग्रामोदय सामाजिक संस्था से शैतानसिंह, कृपावीश से रामावतार शर्मा, मघाराम कड़ेला, जिला प्रशिक्षण समन्वयक अशोक कुमार एवं अनवर अली, पूर्व सरपंच भूर्जगढ़ अनिता एवं तेलीवाड़ा के वार्ड पंचों के साथ खींवराज पन्नू उपस्थित थे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaisalmer/pokhran/news/members-of-the-pasture-development-committee-from-bhaniyana-block-took-information-131871546.html

Friday, 3 February 2023

सौंपा ज्ञापन: सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

फतेहगढ़ तहसील के सादक की ढाणी के ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन दिया है। ज्ञापन में बताया कि छोड़ तहसील फतेहगढ़ में चक संख्या 358, 467, 469, 470, 476, 477 की जमीन पर सार्वजनिक आम रास्ता, चारागाह भूमि एवं कब्रिस्तान भूमि आरक्षित है। जिस पर कुछ लोग फर्जी समरी सेटलमेंट की भूमि बताकर अतिक्रमण करना चाहते है। ज्ञापन में बताया कि जबकि इस भूमि पर किसी भी व्यक्ति को समरी सेटलमेंट जारी नहीं किया गया है। ज्ञापन में अतिक्रमण कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की गई। सरपंच शांति देवी, हनीफ खां, लीले खां, हबीब, सदीक सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaisalmer/news/memorandum-submitted-to-collector-against-encroachment-on-public-land-130879421.html

Thursday, 22 December 2022

Jaisalmer villagers march 225 kilometres to get sacred groves listed as ‘oran land’

More than 100 orans documented by a non-profit still listed as wastelands

By Shuchita Jha

Published: Monday 19 December 2022

Animal husbandry has been the main source of income and medium of employment for most of the villagers in these oran areas for centuries, said the letter submitted by the villagers. Photo: iStock

Residents from around 40 villages of Jaisalmer, Rajasthan have walked 225 kilometres to protect community-conserved sacred spaces known as ‘orans’. Currently, the biodiversity hotspots are classified as wastelands.

The villagers walked to the district headquarters of Jaisalmer to submit a letter to the collector December 19, 2022. They asked them to recategorise the area as ‘oran land’. The current categorisation is causing a loss of biodiversity and is affecting the livelihood of the locals in the area, as huge chunks of land are being allotted for setting up solar plants. 

The orans are among the last natural habitats of the great Indian bustard. The open stretch of land, which receives long hours of sunlight and brisk winds, has become a hub of green energy with windmills and solar photovoltaic dotting it. 

“The orans are listed as ‘wastelands’ in the revenue records. The Degrai Oran is around 10,000 hectares (60,000 bighas), but only 4,000 hectares are recognised as oran, which are listed as common land. The rest is categorised as wasteland,” said Sumer Singh Bhati of Sanwata village in the Jaisalmer district.

The government is allotting these lands for solar projects to make them ‘useful’, according to Bhati. “There are other orans like Mokla, Salkha, Kemde, which also spread across several hectares but are listed as wastelands,” he added.

Rajasthan-based non-profit Ecology, Rural Development & Sustainability (ERDS) Foundation documented 100 orans and identified 30 more with the help from the Jaisalmer Chapter of the Indian National Trust for Art and Cultural Heritage (INTACH) last year, said Sumit Dookia, assistant professor at Delhi’s Indraprastha University and member of ERDS.

“All legal documents were procured from revenue records of Rajasthan and corroborated with locals to identify the land on sites. We observed that the orans have not been properly recorded, which is why these ‘oran lands’ or village common lands are given to the development projects,” said Dookia. 

The foundation is working with locals, who have realised this injustice and are now raising their voices, he added. 

A group of 20 people, including Bhati from Sanwata, Bhopal Singh Bhati from Jhaloda, Sujan Singh Bhati from Salkha, Kundan Singh Bhati from Mokla, Chatar Singh from Jam and Durg Singh Bhati from Satyaya have been walking from December 11.

The group began from Degrai Mata Mandir of the Rasla village, getting residents of different villages to sign the letter. Several people also joined them as they progressed.

“We have been preserving these grasslands covered with native biodiversity like ber, khejdi, kair, etc since generations. We have conserved these as we are barred from cutting and felling trees here. We have spiritual and religious connections to the orans,” the letter said. 

These orans are hotspots of biodiversity with trees and flowers like rohida, bordi, kumbhat, and desi babool in large numbers, the letter added.

There are different varieties of grasses like sevan and murath as well, making these grasslands home to more than 250 species of birds and animals, including the great Indian bustard, McQueen bustard, chinkara, Indian desert cat, desert fox, etc, it said.

The villagers have raised this issue of conservation and correcting the land records to accommodate the orans, Bhati told Down To Earth. If corrected, local people can take their cattle to graze and depend on them for livelihood, but so far, no action has been taken.  

“The Supreme Court in 2018 had ordered the orans be recorded as ‘deemed forests’ in the revenue records in the TN Godavarman vs. Union of India case, but not even one oran has been recorded as a deemed forest so far,” said Dookia. 

“We have given several memorandums to the district administration in the past as well, but our requests seem to fall on deaf ears. But will continue fighting for our orans,” added Bhopal.

Most people in the Jaisalmer district are indirectly dependent on animal husbandry for employment, the letter said. Almost all the ancient orans of the district are located in the middle of livestock-dominated villages, where agriculture is prohibited due to ancient social and religious beliefs. 

“Due to this, animal husbandry has been the main source of income and medium of employment for most of the villagers in these oran areas for centuries. And their pastures are located in these oran areas,” read the letter. 

“In these, the herdsmen of the area have been grazing cows, sheep and goats for centuries, but for the last few years, there has been a crisis on the pastures due to allotment of these ancient traditional pastures to various energy companies,” it added. 

The government has allotted vast chunks of lands under the orans to energy companies and it is creating pressure on the remaining grazing lands, the letter further stated. Many types of grass have started disappearing and the area’s natural biodiversity is being affected. 

https://www.downtoearth.org.in/news/wildlife-biodiversity/jaisalmer-villagers-march-225-kilometres-to-get-sacred-groves-listed-as-oran-land--86653


Monday, 24 October 2022

गोचर भूमि पर हुए अतिक्रमण से चारे का संकट:चारागाह जमीन पर निर्माण सामग्री डालकर लोग कर रहे अतिक्रमण

जैसलमेर

कस्बे में रेलवे स्टेशन के पास स्थित गोचर व आबादी भूमि व ग्राम पंचायत भादरिया के लोहटा गांव के पास स्थित खसरा संख्या 34 में गोचर भूमि पर कुछ लोगों की ओर से अवैध रूप से कब्जा कर दिया गया है। जिससे मवेशी के लिए चारे की समस्या उत्पन्न हो रही है। गांव के रेलवे स्टेशन के पास स्थित गोचर व आबादी भूमि तथा ग्राम पंचायत भादरिया के लोहटा गांव के पास खसरा संख्या 34 में चरागाह व आबादी भूमि पर अतिक्रमण हुआ है। 

यहां अतिक्रमण करने वाले लोगों के खिलाफ राजनीति दबाव के चलते कोई कार्रवाई नहीं होने से हौसले बुलंद हो रहे हैं। लाठी रेलवे स्टेशन के पास लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों की शिकायत पर ग्राम पंचायत लाठी की ओर से रेलवे स्टेशन के पास अतिक्रमणों को 7 सितंबर को चिह्नित कर अतिक्रमियों को नोटिस जारी किए गए थे तथा 3 दिन में स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे। 

लेकिन अंतिम नोटिस के 26 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक अतिक्रमणों को हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की गई है, न ही लोगों ने स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाए हैं। ऐसे में अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। साथ ही अतिक्रमणकारियों कि ओर से लगातार अतिक्रमण में बढ़ोतरी की जा रही है। ऐसे में स्थानीय रहवासियों में भारी रोष पर आक्रोश व्याप्त है। लाठी कस्बा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता व पूर्व ग्राम सेवा समिति के अध्यक्ष अलू खां मंगलिया ने बताया कि लाठी कस्बे में रेलवे स्टेशन के पास स्थित गोचर व आबादी भूमि व ग्राम पंचायत भादरिया के लोहटा गांव के पास स्थित खसरा संख्या 34 में गोचर भूमि पर लोगों द्वारा की गई। 

अतिक्रमण को हटाने को लेकर स्थानीय ग्रामीणों की ओर से कलेक्टर, पोकरण उपखंड अधिकारी, ग्राम पंचायत लाठी सहित विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों को मौखिक व लिखित रूप से अवगत कराने के बाद भी राजनीतिक दबाव के चलते अभी तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे में अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं तथा जगह-जगह उनकी ओर से अतिक्रमण किया जा रहा है। 

https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaisalmer/news/people-are-encroaching-by-putting-construction-material-on-pasture-land-130469268.html

Saturday, 22 October 2022

गोचर भूमि पर हुए अतिक्रमण से चारे का संकट: चारागाह जमीन पर निर्माण सामग्री डालकर लोग कर रहे अतिक्रमण

कस्बे में रेलवे स्टेशन के पास स्थित गोचर व आबादी भूमि व ग्राम पंचायत भादरिया के लोहटा गांव के पास स्थित खसरा संख्या 34 में गोचर भूमि पर कुछ लोगों की ओर से अवैध रूप से कब्जा कर दिया गया है। जिससे मवेशी के लिए चारे की समस्या उत्पन्न हो रही है। गांव के रेलवे स्टेशन के पास स्थित गोचर व आबादी भूमि तथा ग्राम पंचायत भादरिया के लोहटा गांव के पास खसरा संख्या 34 में चरागाह व आबादी भूमि पर अतिक्रमण हुआ है। यहां अतिक्रमण करने वाले लोगों के खिलाफ राजनीति दबाव के चलते कोई कार्रवाई नहीं होने से हौसले बुलंद हो रहे हैं।

लाठी रेलवे स्टेशन के पास लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों की शिकायत पर ग्राम पंचायत लाठी की ओर से रेलवे स्टेशन के पास अतिक्रमणों को 7 सितंबर को चिह्नित कर अतिक्रमियों को नोटिस जारी किए गए थे तथा 3 दिन में स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन अंतिम नोटिस के 26 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक अतिक्रमणों को हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की गई है, न ही लोगों ने स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाए हैं। ऐसे में अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। साथ ही अतिक्रमणकारियों कि ओर से लगातार अतिक्रमण में बढ़ोतरी की जा रही है। ऐसे में स्थानीय रहवासियों में भारी रोष पर आक्रोश व्याप्त है।

लाठी कस्बा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता व पूर्व ग्राम सेवा समिति के अध्यक्ष अलू खां मंगलिया ने बताया कि लाठी कस्बे में रेलवे स्टेशन के पास स्थित गोचर व आबादी भूमि व ग्राम पंचायत भादरिया के लोहटा गांव के पास स्थित खसरा संख्या 34 में गोचर भूमि पर लोगों द्वारा की गई। अतिक्रमण को हटाने को लेकर स्थानीय ग्रामीणों की ओर से कलेक्टर, पोकरण उपखंड अधिकारी, ग्राम पंचायत लाठी सहित विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों को मौखिक व लिखित रूप से अवगत कराने के बाद भी राजनीतिक दबाव के चलते अभी तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे में अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं तथा जगह-जगह उनकी ओर से अतिक्रमण किया जा रहा है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaisalmer/news/people-are-encroaching-by-putting-construction-material-on-pasture-land-130469268.html

Friday, 30 September 2022

ओरण के प्रति जागृता को लेकर 60 किलोमीटर पैदल ओरण परिक्रमा संपन्न

 


सोलर प्लांट भूमि आवंटन को लेकर ग्रामीणों ने प्रतिबंध लगाने के लिए दिया ज्ञापन

सोलर प्लांट भूमि आवंटन को लेकर ग्रामीणों ने प्रतिबंध लगाने के लिए दिया ज्ञापन

जैसलमेर

Published: September 30, 2022 

जैसलमेर. ओरण गोचर संघर्ष समिति की ओर से जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बताया कि पर्यावरण वन्य जीव, ओरण, जलस्रोत, राज्य वृक्ष खेजड़ी, सडक़ों कसे उजाड़वा जा सकता है। यहां सेऊवा, बडा, तेजपाला, नगा, हाड़ा सोलर प्लाट के लिए 40 बीघा आवंटन करने के प्रस्तावित की जा रही है जो 3000 मेगावाट प्लाट किया जा रहा लोक देवता वीर पनराजजी, सिद्ध राव जुंझार मायथि, ओरण 700 साल से संरक्षण में है, दर्ज नहीं की गई। जो पंचायत से ओरण प्रस्तावित है। यहां पशुपालकों, चारागाह भूमि भूमि आवंटन की जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की कि प्रशासन संज्ञान लेवे और आमजन जनहित में ध्यान रखते कार्यवाही की जाए। ज्ञापन में ग्राम पंचायत राघवा सरपंच नरेंद्रसिंह, पर्यावरण प्रेमी लीलूसिंह बड़ा, तगसिंह, फकीर सिंह सेऊवा, सामाजिक कार्यकर्ता नरपतसिंह बडा, गोरधनसिंह, दीपसिंह, विक्रमसिंह, हीरसिंह, भीमसिंह, जितेंद्रसिंह, मूलसिंह, हरीराम, सेऊवा आदि उपस्थित थे।

सोलर प्लांट भूमि आवंटन को लेकर ग्रामीणों ने प्रतिबंध लगाने के लिए दिया ज्ञापन

60 किलोमीटर लंबी पैदल परिक्रमा का समापन

जैसलमेर. जिले की फतेहगढ़ तहसील के रासला- सांवता गांवों के बीच मौजूद मुख्य शक्तिपीठ श्रीदेगराय मंदिर की 600 वर्षो से ज्यादा प्राचीन ओरण की 60 किमी लम्बी पैदल परिक्रमा का शुक्रवार दोपहर को मन्दिर प्रांगण पहुंचने पर समापन हुआ। परिक्रमा में क्षेत्र के अनेक गांवों व राजस्थान के अन्य जिलों से आए पर्यावरण प्रेमियों व देवी भक्तों ने भी हिस्सा लिया। क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षक व पशुपालक सुमेरसिंह भाटी ने बताया कि दो वर्ष पहले प्रारम्भ हुई परिक्रमा से आसपास के ग्रामीणों को ओरण के महत्व व उसके संरक्षण के महत्व के साथ भारतीय संस्कृति में पर्यावरण के दैवीय रूप से सबको जागरूक करना है। मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष ठाकुर कल्याणसिंह भाटी मूलाणा की इच्छा थी कि एक बार परिक्रमा प्रारम्भ होने पर प्रति वर्ष होती रहे, अत: नवरात्रि में इसका आयोजन करा गया, जिसमें शुक्रवार को परिक्रमा मार्ग में स्थित उनके घर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। विदित है कि गत बीस वर्षो से अधिक समय से मन्दिर ट्रस्ट अध्यक्ष रहते आपने देगराय ओरण का कुछ भाग वर्ष 2004 में ओरण रूप से दर्ज करवाने में सफलता प्राप्त करी थी, शेष बचे हिस्से को दर्ज करवने के लिए भी आप लम्बे समय से प्रयासरत थे। परिक्रमा में विभिन्न पर्यावरण, पशुपालन, चारागाह विकास व जैविक खेती से जुड़े अनुभवी वैज्ञानिकों व कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं को ओरणों के महत्व और उनसे लाभ के बारे में जानकारी दी। ओरणों के चारों तरफ मौजूद ढाणियों के किसानों व पशुपालकों ने भी परिक्रमा में जल व नाश्ते की सम्पूर्ण व्यवस्था रख श्रद्धालुओं व पर्यावरण प्रेमियों की यात्रा को सुखद बनाया। दो दिन की परिक्रमा में पर्यावरण प्रेमियों ने ओरण क्षेत्र में 100 से ज्यादा पक्षी प्रजातियों को देखा गया और उनका रिकॉर्ड भी तैयार करा गया।


https://www.patrika.com/jaisalmer-news/villagers-gave-memorandum-to-ban-solar-plant-land-allocation-7797923/

Thursday, 22 September 2022

गोचर व आबादी पर किया अतिक्रमण

जैसलमेर

September 20, 2022

लाठी. गांव में रेलवे स्टेशन के पास स्थित गोचर व आबादी भूमि व ग्राम पंचायत भादरिया के लोहटा गांव के पास स्थित खसरा संख्या 34 में गोचर भूमि पर कुछ लोगों की ओर से अवैध रूप से कब्जा कर दिया गया है। जिससे मवेशी केे लिए चारे की समस्या उत्पन्न हो रही है। गांव के रेलवे स्टेशन के पास स्थित गोचर व आबादी भूमि तथा ग्राम पंचायत भादरिया के लोहटा गांव के पास खसरा संख्या 34 में चारागाह व आबादी भूमि पर अतिक्रमण हुआ है। 
यहां अतिक्रमण करने वाले लोगों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होने से हौैसले बुलंद हो रहे है। यहां उनकी ओर से चारदीवारी निर्माण, कांटेदार बाड़ व आवास बना लिए गए है। चारागाह भूमि पर अतिक्रमण होने से मवेशी के लिए चारे की समस्या हो रही है। इस संबंध में ग्रामीणों की शिकायत पर गांव के रेलवे स्टेशन के पास अतिक्रमणों को 7 सितंबर को चिन्हित कर अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए गए थे तथा 3 दिन में स्वैच्छा से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे। अंतिम नोटिस के 13 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक अतिक्रमणों को हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की गई है, न ही लोगों ने स्वैच्छा से अतिक्रमण हटाए है। जिससे सरकार की लाखों रुपए की कीमती भूमि अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है।

हटाए जाएंगे अतिक्रमण
ग्राम पंचायत भादरिया के खसरा संख्या 34 में की गई अतिक्रमण को लेकर भू-राजस्व अधिनियम की धारा 91 के तहत मामला दर्ज कर लिया हैै। जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। लाठी गांव में किए गए अतिक्रमण को लेकर जांच करवाई जा रही है।
- राजेशकुमार विश्रोई, उपखंड अधिकारी, पोकरण
गोचर व आबादी पर किया अतिक्रमण
गोचर व आबादी पर किया अतिक्रमण

https://www.patrika.com/jaisalmer-news/encroachment-on-transit-and-population-7780496/

Tuesday, 20 September 2022

गोचर व आबादी पर किया अतिक्रमण


लाठी। गांव में रेलवे स्टेशन के पास स्थित गोचर व आबादी भूमि व ग्राम पंचायत भादरिया के लोहटा गांव के पास स्थित खसरा संख्या 34 में गोचर भूमि पर कुछ लोगों की ओर से अवैध रूप से कब्जा कर दिया गया है। जिससे मवेशी केे लिए चारे की समस्या उत्पन्न हो रही है। गांव के रेलवे स्टेशन के पास स्थित गोचर व आबादी भूमि तथा ग्राम पंचायत भादरिया के लोहटा गांव के पास खसरा संख्या 34 में चारागाह व आबादी भूमि पर अतिक्रमण हुआ है। यहां अतिक्रमण करने वाले लोगों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होने से हौैसले बुलंद हो रहे है। यहां उनकी ओर से चारदीवारी निर्माण, कांटेदार बाड़ व आवास बना लिए गए है। चारागाह भूमि पर अतिक्रमण होने से मवेशी के लिए चारे की समस्या हो रही है। इस संबंध में ग्रामीणों की शिकायत पर गांव के रेलवे स्टेशन के पास अतिक्रमणों को 7 सितंबर को चिन्हित कर अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए गए थे तथा 3 दिन में स्वैच्छा से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे। अंतिम नोटिस के 13 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक अतिक्रमणों को हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की गई है, न ही लोगों ने स्वैच्छा से अतिक्रमण हटाए है। जिससे सरकार की लाखों रुपए की कीमती भूमि अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है।

हटाए जाएंगे अतिक्रमण

ग्राम पंचायत भादरिया के खसरा संख्या 34 में की गई अतिक्रमण को लेकर भू-राजस्व अधिनियम की धारा 91 के तहत मामला दर्ज कर लिया हैै। जल्द ही कार्रवाई की जाएगी। लाठी गांव में किए गए अतिक्रमण को लेकर जांच करवाई जा रही है।

– राजेशकुमार विश्रोई, उपखंड अधिकारी, पोकरण।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.patrika.com/jaisalmer-news/encroachment-on-transit-and-population-7780496

Friday, 9 September 2022

गोचर व ओरण पर धड़ल्ले से हो रहे कब्जे: अतिक्रमी खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर पत्थर व निर्माण सामग्री डालकर कर रहे अतिक्रमण

ग्राम पंचायत लाठी में रेलवे स्टेशन के पास स्थित गोचर भूमि व ग्राम पंचायत भादरिया के लोहटा गांव के पास स्थित खसरा नंबर 34 में गोचर भूमि पर इन दिनों अतिक्रमियों द्वारा अवैध रूप से कब्जा किया जा रहा है। जिससे मवेशियों को चारा नहीं मिल पा रहा है। मवेशी चारे के लिए सड़कों पर भटक रही है। ऐसे में वाहनों की चपेट में आने से काल का ग्रास बन रहे हैं। स्थानीय प्रशासन कि मिलीभगत के चलते अतिक्रमियों द्वारा रातों-रात गोचर व आबादी भूमि पत्थर पट्टियां डालकर तारबंदी कर अवैध रूप से कब्जा किया जा रहा है। बावजूद इसके दोनों ग्राम पंचायतों की ओर से अतिक्रमण हटाने को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

जानकारी के अनुसार सरकार ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में पशुओं के लिए गोचर भूमि अर्थात चरागाह भूमि आरक्षित कर रखी है। चरागाह‌ व आबादी भूमि की रक्षा व देखभाल करने का जिम्मा ग्राम पंचायत का होता है। दोनों ग्राम पंचायतों द्वारा ध्यान नहीं देने से ग्राम पंचायत लाठी में रेलवे स्टेशन के पास स्थित गोचर व आबादी भूमि तथा ग्राम पंचायत भादरिया अंतर्गत लोहटा गांव के पास स्थित खसरा नंबर 34 में चरागाह व आबादी भूमि पर अतिक्रमण हो गया है। पंचायत प्रशासन व राजस्व विभाग अतिक्रमण करने वालों पर किसी भी प्रकार कि ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। जिसके चलते अतिक्रमियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। अतिक्रमियों ने चरागाह भूमि पर स्वामित्व कर लिया है। यहां तक की चारदीवारी, कांटेदार बाड़ व आवास तक बना लिए हैं। चरागाह भूमि पर अतिक्रमण होने से गांवों व ढाणियों में मवेशियों के लिए चरने की जगह नहीं बची है। जिसके कारण मवेशी भटक रहे हैं।

पिछले कुछ दिनों से ग्राम विकास अधिकारी हड़ताल पर थे। वहीं मंगलवार को ग्राम विकास अधिकारियों की हड़ताल समाप्त हो गई है। जल्द ही ग्राम पंचायत में किए गए अतिक्रमणों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

-सुरेंद्रसिंह चंपावत, ग्राम विकास अधिकारी, लाठी

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaisalmer/news/encroachers-are-encroaching-upon-vacant-government-lands-by-pouring-stones-and-construction-materials-130284462.html

Saturday, 3 September 2022

अतिक्रमण: हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी 33 बीघा गोचर से नहीं हटे अतिक्रमण

ग्राम पंचायत मुख्यालय पर गुरुवार को प्रशासन के द्वारा चार पांच स्थानों पर कच्चे व पट्टियों के बने कच्चे कमरों को तोड़कर अतिक्रमण हटाने के नाम की खानापूर्ति की। लीलसर में अलग-अलग खसरों में 33 बीघा गोचर जमीन हैं। लंबे समय से अतिक्रमियों के कब्जे में है। ग्राम पंचायत मुख्यालय पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने की फिराक में अतिक्रमी लगे हुए है।

अतिक्रमियों ने चारागाह भूमि को हथियाने के लिए कहीं पक्की बाउंड्रीवॉल, कहीं पक्की दुकानें तो कहीं मकान तक बना लिए हैं। पिछले कुछ सालों में ही सैकड़ों बीघा चरागाह भूमि अपने कब्जे में ले ली। ग्राम पंचायत में चारागाह भूमि पर अतिक्रमण को लेकर रिकॉर्ड भी संधारित नहीं किया जा रहा है और ना ही कार्रवाई के लिए प्रशासन की मदद ली जा रही है। यहां तक कि स्वयं जिम्मेदारों के भी गोचर भूमि में अतिक्रमण की शिकायतें लंबित हैं।

गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाने के लिए हाईकोर्ट ने डेढ़ साल पहले तीन माह के अंदर अतिक्रमण मुक्त करने का आदेश जारी किया था। इसके बावजूद भी अतिक्रमियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा और लगातार गोचर भूमि पर अतिक्रमण बढ़ रहे है। शुक्रवार को सिर्फ चार जगह छपर व कच्चे कमरे तोड़कर अतिक्रमण हटाने की खानापूर्ति की।

लीलसर के तीन खसराें में अलग-अलग 33 बीघा जमीन पर अतिक्रमी काबिज है। खसरा नंबर 144 में 15 बीघा, 189 खसरा नंबर में 7 बीघा तथा 252 खसरा नंबर पर 10 बीघा गोचर पर अतिक्रमण कर रखा हैं। इन खसरों से अतिक्रमण हटाने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। गांव के चौराहे से आगे सियागपुरा रोड से चौहटन सड़क के बीच कटाण रास्ते को अतिक्रमियों ने रोककर पक्के निर्माण व कुछ दुकानें भी बना रखी है।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaisalmer/news/encroachment-not-removed-from-33-bigha-transit-even-after-high-court-order-130266908.html

Saturday, 6 August 2022

कोरोना जैसा कहर:बाड़मेर-जैसलमेर में 2 माह में 10 हजार गोवंश की मौत, 80 हजार बीमार, विभाग चेता न सरकार

 जैसलमेर

लेखक: पूनमसिंह राठौड़

दावों की पोल खोलती तस्वीर- ये तस्वीर शिव तहसील के बलाई गांव की है। जहां पर लंपी स्किन से मरी गायों के शवों के लगे ढेर।

भारत-पाक बॉर्डर से सटे बाड़मेर व जैसलमेर में लंपी स्किन डिजीज गोवंश पर कहर बरपा रही है। दो माह में दो जिलों में 10 हजार गोवंश दम तोड़ चुकी है। वहीं करीब अस्सी हजार गोवंश मौत से जूझ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि लंपी स्किन बीमारी के वायरस ने पाक के रास्ते सरहदी गांवों में दस्तक दी। इस वजह से सर्वाधिक गोवंश की मौतें बॉर्डर इलाके के गांवों में हुई है। बाड़मेर में 9.50 लाख व जैसलमेर में 5 लाख गोवंश है। पशुपालन विभाग अब तक दोनों जिलों में दो हजार गायों की मौत का दावा कर रहा है।

भास्कर टीम ने चार दिन में बाड़मेर व जैसलमेर के करीब 50 गांवों में लंकी स्किन से गायों की मौतों को लेकर जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों व सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से आंकड़े जुटाए। इसमें मौतों का आकड़ा दस हजार पार है। रोजाना औसत सौ से डेढ़ सौ गायों की लंकी स्किन से मौत हो रही है। इधर, पशुपालन विभाग की टीमें सर्वे करने के साथ कागजों में इलाज का दावा कर रही है। जबकि हकीकत में 90 फीसदी बीमार पशुओं की जांच नहीं हो पाई है। इस स्थिति में गोवंश के लंपी स्किन से मरने का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। सरकारी इंतजाम धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं। पशुपालक ही अपने स्तर पर गोवंश को बचाने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं।

लापरवाही- विभाग में 50% पद खाली, वाहन न दवाइयां

बाड़मेर व जैसलमेर पशुपालन विभाग में पचास फीसदी कार्मिकों के पद लंबे समय से खाली है। इतना ही नहीं विभाग के पास खुद का एक या दो वाहन ही है। दो माह पहले लंपी स्किन का संक्रमण बढ़ना शुरू हो गया, लेकिन विभाग के पास संसाधन ही उपलब्ध नहीं होने के कारण सर्वे भी पूरा नहीं हो पाया है। बीमारी फैलने के बाद सिरोही, जालोर व दौसा से डॉक्टर व कार्मिकों की टीमें भेजी। सिरोही व जालोर की टीमें तो वापस चली गई। पशुपालन विभाग के कार्मिक फील्ड में सर्वे के लिए दूसरे विभागों या सरपंचों से गाड़ियों का जुगाड़ कर पहुंच रहे हैं।

राहत- भामाशाह और जनप्रतिनिधि बने मददगार

जिले में महामारी का रूप ले चुकी लंपी स्किन डिजीज से गोवंश की अकाल मौतों के बाद भामाशाह व जनप्रतिनिधि मददगार बन रहे हैं। पूर्व मंत्री व बायतु विधायक हरीश चौधरी, गो सेवा आयोग के अध्यक्ष मेवाराम जैन, पचपदरा विधायक मदन प्रजापत ने विधायक कोष से राशि उपलब्ध करवाने के साथ क्षेत्र के भामाशाहों व सरपंचों को मदद के लिए प्रेरित किया है। इतना ही नहीं कई सरपंच व जनप्रतिनिधि अपने स्तर पर सेवाएं उपलब्ध करवा रहे हैं।

इन चार गांवों के हालात से समझिए गोवंश की दास्तां

"पोछीना- दो माह में 500 गायों की मौत, धोरों पर कंकालों के ढेर जैसलमेर के भारत-पाक बॉर्डर पर आबाद पोछीना गांव में लंकी स्किन डिजीज से अब तक पांच सौ गायों की अकाल मौत हो चुकी है। पशु बाहुल्य गांव होने के लिहाज से संक्रमण तेजी के साथ फैल रहा है। विभाग की टीम ने एक बार सर्वे कर इतिश्री कर ली। इसके बाद इलाज नहीं मिलने से गोवंश के मरने का सिलसिला अनवरत जारी है। पशुपालक चैनसिंह सोढ़ा ने बताया कि धोरों पर गायों के कंकाल के ढेर लगे है।"

"सतो- इलाज नहीं, पशुपालक अपने स्तर पर कर वैक्सीनेशन जैसलमेर के सत्तो व वख्तावरसिंह की ढाणी में महामारी गायों पर कहर बरपा रही है। सामाजिक कार्यकर्ता शैतानसिंह रावलोत ने बताया कि वख्तावरसिंह की ढाणी में 80 गायें व बछड़े इस बीमारी से मर चुके हैं। सतो व आस-पास के गांवों में हर दूसरे घर में एक गाय बीमार है। दर्द निवारक टेबलेट व वैक्सीन लगाकर पशुपालक अपने स्तर पर पशुओं का इलाज करवा रहे हैं।"

"केलनोर- हर दूसरे घर में एक गाय की मौत, मृत पशुओं के लगे ढेर चौहटन के केलनोर गांव में लंकी स्किन की बीमारी ने डेढ़ माह पहले ही दस्तक दी थी। अब पूरे गांव में लंपी स्किन बीमारी फैल चुकी है। हर घर में गोवंश बीमारी की चपेट में है। ईश्वरसिंह ने बताया कि गांव से कुछ दूरी पर मृत पशुओं के कंकालों के ढेर लगे हैं। सरकारी स्तर पर पशुओं के इलाज की व्यवस्था नहीं है। इस स्थिति में बीमारी की चपेट में आने के चार या पांच दिन बाद गायों की मौत हो रही है।"

"बलाई- गोवंश की कब्रगाह बने धोरें, 15 दिन में डेढ़ सौ गायें मरी शिव की ग्राम पंचायत बलाई में लंकी स्किन ने करीब बीस दिन पहले ही दस्तक दी थी। मल्लीनाथनगर,बलाई, केशरपुरा समेत चार गांवों में बीमारी कहर बनकर टूट रही है। रिड़मलराम साटिया ने बताया कि रोजाना चार से पांच मृत गायों के शव उठा रहे हैं। उनकी ढाणी के पास करीब डेढ़ सौ से अधिक मृत गायों के कंकाल के ढेर लगे हैं। रात 12 बजे तक ट्रैक्टर के साथ चार-पांच लोग जुटने पर भी शव नहीं उठा पा रहे हैं।"

जैन ने कहा- हर हाल में गोवंश को बचाने के लिए प्रयासरत

"लंपी स्किन से गायों की मौतों के मामले को सरकार गंभीरता से ले रही है। पिछले पंद्रह दिन में कई टीमें पहुंच चुकी है। दवाइयां व अन्य संसाधन भी उपलब्ध करवा रहे हैं। भामाशाहों के सहयोग से दवाइयां व अन्य सुविधाएं जुटा रहे है। गोवंश को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।"

-मेवाराम जैन, अध्यक्ष गौ सेवा आयोग।

https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaisalmer/news/in-barmer-jaisalmer-10-thousand-cows-died-in-2-months-80-thousand-sick-the-government-did-not-warn-the-department-130152008.html?ref=inbound_More_News

Friday, 22 July 2022

कलेक्‍टर को सौंपा ज्ञापन: चारागाह पर हो रहे अवैध कब्जों को हटाने की मांग

ग्राम पंचायत बडोड़ा गांव के राजस्व गांव अभयनगर के ग्रामीणों ने कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर बासनपीर जूनी की सरहद में रियासत कालीन चारागाह भूमि पर किए जा रहे अतिक्रमण को हटाने की मांग की है। ज्ञापन में बताया कि बासनपीर जूनी सरहद पर चारागाह भूमि आसपास के गांव थईयात, रिदवा, भागू का गांव, बडोड़ा गांव, आशायच व जेरात आदि गांवों के पशुओं का आश्रय स्थल है। लेकिन वर्तमान में कुछ लोगों द्वारा अभयनगर बडोड़ा गांव से लगती चारागाह भूमि पर तारबंदी कर अवैध रुप से कब्जा किया गया है।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने नामजद लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर तुरंत कब्जे हटाने की मांग की है। साथ ही कब्जे नहीं हटाने की स्थिति में शांति भंग होने की संभावना जताई। जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ज्ञापन देते समय योगेंद्रसिंह, लालसिंह, घेवरसिंह, सुमेरसिंह, गेनसिंह, कमलसिंह, सवाईसिंह, स्वरुपसिंह, विक्रमसिंह, कंवराजसिंह सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaisalmer/pokhran/news/demand-to-remove-illegal-encroachments-on-pasture-130095382.html