This blog is aimed at documenting the initiatives undertaken for the conservation of the pastures by communities across Rajasthan as well as efforts by Government of Rajasthan and Civil Society Organisations across the State.
Foundation for Ecological Security works in partnership with the Wasteland and Pasture Land Development Board for conservation of the commons. For views and comments write to rajasthanpastures@gmail.com
आसींद के ग्राम करणगढ़ में बुधवार को प्रशासन ने चारागाह भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की।
पटवार हल्का तिलोली स्थित इस भूमि से जेसीबी की मदद से अतिक्रमण हटाया गया। इस दौरान पुलिस बल तैनात रहा और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
जानकारी के अनुसार, ग्राम करणगढ़ की चारागाह भूमि (खाता संख्या 340, आराजी संख्या 1769, रकबा 13.26) पर कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया था।
ग्रामीणों ने लंबे समय से इस संबंध में शिकायतें और ज्ञापन देकर पंचायत प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था। इसके बाद ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी।
उच्च अधिकारियों के निर्देश पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पक्के निर्माणों को छोड़कर अन्य सभी अतिक्रमण हटा दिए। इसके अतिरिक्त, ग्राम पंचायत के पनघट स्थित बोर को भी अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। कार्रवाई पूरी होने के बाद चारागाह भूमि को साफ कर दिया गया।
इस कार्रवाई के दौरान ग्राम विकास अधिकारी जसविंदर सिंह, गिरदावर भगवत सिंह, पटवारी हरलाल बुगालिया, सहायक सचिव सुरेश चंद्र खटीक सहित अन्य अधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे।
किशनगंज | ब्लॉक क्षेत्र की घट्टी ग्राम पंचायत के रामनगर पीपल्दा गांव में चारागाह भूमि पर फिर से अतिक्रमण होने का मामला सामने आया है। भंवरगढ़ निवासी एक व्यक्ति ने पहले हटाए गए अतिक्रमण वाली चारागाह पर दोबारा अतिक्रमण कर लिया। जिसके विरोध में बुधवार को ग्रामीण पंचायत समिति कार्यालय पहुंचे और बीडीओ के नाम अतिरिक्त विकास अधिकारी नवलकिशोर मीणा को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया कि प्रशासन ने 15 मई 2024 को करीब 250 बीघा चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाया था। इसके बाद फिर अतिक्रमण कर लिया गया।
प्रशासन ने 21 अप्रैल 2025 को दोबारा अतिक्रमण हटाया। इसके बाद ग्राम पंचायत घट्टी ने वर्ष चारागाह भूमि की नीलामी की। इसके बावजूद अतिक्रमियों ने अब तक पत्थर नहीं हटाए। भंवरगढ़ निवासी एक व्यक्ति ने चारागाह भूमि पर अतिक्रमण कर फसल की बुआई कर दी। ग्रामीणों के अनुसार इसी चारागाह भूमि पर उन्होंने पौधारोपण किया था। अतिक्रमी ने सभी पौधे नष्ट कर दिए। ग्रामीणों ने मांग की कि चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाया जाए। नीलामी की कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया जाएगा।
तहसील क्षेत्र के गांव कमालपुरा में गोचर भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत के बाद एसडीएम अमन चौधरी ने बालघाट तहसीलदार को पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिएहैं।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश महामंत्री बबलू राम की शिकायत के आधार पर एसडीएम ने तहसीलदार को गांव में स्थित 389 बीघा गोचर भूमि पर अतिक्रमण के मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के संबंध में निर्देश जारी किए हैं।
गौरतलब है कि गोचर भूमि पर कब्जे की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने से लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
लालसोट क्षेत्र में चारागाह भूमि पर अतिक्रमण के मामले में निर्झरना न्यायालय तहसीलदार ने सख्त कार्रवाई की है। कोर्ट ने 19 आदतन अतिक्रमियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए उन्हें 60 दिन के सिविल कारावास की सजा सुनाई है। यह कार्रवाई ग्राम रामसिंहपुरा, पटवार हल्का नालावास स्थित लगभग 12 हेक्टेयर चरागाह भूमि पर किए गए अतिक्रमण को लेकर की गई है।
कोर्ट के आदेश के बाद भी जमीन खाली नहीं की
न्यायालय के अनुसार, इन अतिक्रमियों को राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 91 के तहत संवत 2081, 2082 और 2083 में बेदखल करने के आदेश दिए गए थे। इसके बावजूद उन्होंने चरागाह भूमि खाली नहीं की। लगातार आदेशों की अवहेलना के कारण यह सख्त कदम उठाया गया है।
19 लोगों के खिलाफ सुनाया फैसला
न्यायालय ने जिन 19 व्यक्तियों के खिलाफ फैसला सुनाया है, उनमें बिहारी, सीताराम पुत्र पांचू महावर; किशनलाल, गिर्राज पुत्र मोहरपाल; कन्हैया पुत्र मेवाराम; दयाराम, सीयाराम पुत्र कजोड; ग्यारसीलाल, रामफुल, भौरीलाल, छोटेलाल पुत्र मंगलाराम; गिर्राज पुत्र नारायण; रामचन्द्र पुत्र नाथू; कजोड, कालु पुत्र दल्ला; शिवराम, रामकरण पुत्र मनफुल; रेवड पुत्र कल्याण; कमल पुत्र नारायण; जगदीश पुत्र कल्याण; गिर्राज पुत्र मूलचंद; रामराज पुत्र मांगीलाल; छीतर पुत्र देवा; रामकरण पुत्र मनफूल; बृजमोहन पुत्र अम्बालाल; प्रताप पुत्र हजारी और हरिनारायण पुत्र रामनाथ शामिल हैं। ये सभी रामसिंहपुरा निवासी हैं।
निर्झरना तहसीलदार सीमा गुणावत ने इस संबंध में कहा कि चरागाह भूमि गोवंश के संरक्षण और चराई के लिए आरक्षित एक सार्वजनिक संपत्ति है। इस पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में भी चरागाह भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी।
राजस्थान में शाहपुरा-केकड़ी मेगा हाईवे पर बिना गाय की 'देव गौशाला' के नाम पर 20 बीघा चारागाह भूमि पर कथित कब्जे के मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। मामला गरमाने के बाद बिजली विभाग ने परिसर का कनेक्शन काट दिया है। इस पर बीजेपी विधायक लालाराम बैरवा ने सफाई देते हुए कहा कि इससे उनका कोई संबंध नहीं है।
शाहपुरा देव गौशाला विवाद (NBT)
भीलवाड़ा: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की शाहपुरा विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक डॉ. लालाराम बैरवा से जुड़ा एक बड़ा मामला इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। शाहपुरा-केकड़ी मेगा हाईवे पर एक गौशाला के नाम पर करीब 20 बीघा चरागाह भूमि को कथित तौर पर कब्जे में लेने के आरोपों के बाद अब इस मामले में एक बड़ा प्रशासनिक एक्शन हुआ है। मामला मीडिया में आने के बाद अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के शाहपुरा कार्यालय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त गौशाला परिसर का बिजली कनेक्शन काट दिया है।
बिना गाय की गौशाला और नियमों की अनदेखी के आरोप
शुरुआती जानकारी के अनुसार, शाहपुरा तहसील के आराजी नंबर 2543 में से 5 हेक्टेयर भूमि पर देव गौशाला सेवा संस्थान के नाम से तारबंदी कर शेड का निर्माण कराया गया था। इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि इस पूरी गौशाला में कथित तौर पर एक भी गाय मौजूद नहीं थी। प्रशासनिक स्तर पर भी इस जमीन को लेकर पेच फंसा हुआ था। भीलवाड़ा जिला कलेक्टर के 25 फरवरी 2026 के आदेश के मुताबिक, गौशाला अधिनियम 1960 के तहत किसी भी भूमि आवंटन के लिए संस्थान का कम से कम 3 वर्ष से संचालित होना अनिवार्य है।
यह शर्त पूरी नहीं होने के कारण राजस्व विभाग ने आवंटन का प्रस्ताव खारिज कर दिया था। इसके बावजूद, नियमों को ताक पर रखकर गत 20 मई 2026 को इस अनाधिकृत परिसर को स्थाई बिजली कनेक्शन दे दिया गया, जो विधायक के पुत्र चिनार के नाम पर था। इस कनेक्शन को जारी करने में रोड़ा बने तत्कालीन अधिशासी अभियंता धर्मेंद्र मित्तल को एपीओ भी कर दिया गया था, जिससे विधायक के रसूख को लेकर सवाल उठने लगे।
रजिस्ट्रेशन में सामने आया था पारिवारिक कनेक्शन
सहकारिता विभाग के 21 अगस्त 2025 के पंजीकरण रिकॉर्ड के अनुसार, इस देव गौशाला सेवा संस्थान की कमान पूरी तरह विधायक के परिवार के हाथों में थी। इसमें स्वयं विधायक डॉ. लालाराम बैरवा सचिव, उनके बेटे चिनार देवातवाल अध्यक्ष, दूसरे बेटे जतिन देवातवाल कोषाध्यक्ष और नजदीकी रिश्तेदार कुंदन देवातवाल सह-सचिव के पद पर दर्ज थे।
बिजली कटने के बाद विधायक बैरवा ने दी सफाई
इस पूरे घटनाक्रम और बिजली कनेक्शन काटे जाने के बाद शाहपुरा विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट से एक विस्तृत पोस्ट साझा कर अपनी सफाई पेश की है। विधायक ने आरोपों को भ्रामक और निराधार बताते हुए कहा-
मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरा देव गौशाला सेवा संस्था, शाहपुरा अथवा उससे संबंधित किसी भी गतिविधि से वर्तमान में कोई संबंध नहीं है। मैंने वर्ष 2025 में ही उक्त संस्था के सचिव पद एवं सदस्यता से स्वेच्छा से त्यागपत्र दे दिया था।
लालाराम बैरवा, विधायक
राजनीतिक और सामाजिक छवि को धूमिल करने का आरोप
विधायक बैरवा ने अपने परिवार का बचाव करते हुए दावा किया कि वर्तमान में उनके परिवार का कोई भी सदस्य या ब्लड रिलेशन वाला व्यक्ति इस संस्था से किसी भी रूप में जुड़ा हुआ नहीं है। उन्होंने विपक्षी या विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग उनके सेवाकाल के पुराने दस्तावेजों का आधार बनाकर उनकी राजनीतिक और सामाजिक छवि को धूमिल करने का असफल प्रयास कर रहे हैं। इससे पहले विधायक ने यह भी स्पष्ट किया था कि वे कोई जमीन हड़पना नहीं चाहते, बल्कि वहां 8 लाख रुपये खर्च कर पशुओं के लिए एक अस्पताल और गोवंश के लिए अच्छी सुविधाएं बनाना चाहते थे और गायों को अस्थाई रूप से दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। फिलहाल, बिजली कटने और विधायक की इस सफाई के बाद क्षेत्र का सियासी पारा चढ़ गया है।
भीलवाड़ा: बीजेपी विधायक लालाराम बैरवा पर 20 बीघा चारागाह जमीन हड़पने का आरोप
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में शाहपुरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक डॉ और लालाराम बैरवा एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करते हुए गौशाला के नाम पर 20 बीघा सरकारी चारागाह भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब यह खुलासा हुआ कि जिस ट्रस्ट के नाम पर जमीन मांगी गई थी, उसमें विधायक के परिवार के सदस्य ही प्रमुख पदों पर काबिज हैं। जिला प्रशासन द्वारा जमीन आवंटन के आवेदन को खारिज किए जाने के बावजूद मौके पर निर्माण कार्य और तारबंदी किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
ट्रस्ट में परिवार का दबदबा और जमीन का विवरण
यह पूरा विवाद शाहपुरा-केकड़ी मार्ग पर स्थित आराजी नंबर 2543 की चारागाह भूमि से जुड़ा है। इस भूमि का कुल रकबा 78 दशमलव 68 हेक्टेयर है। विधायक डॉ. लालाराम बैरवा के पारिवारिक ट्रस्ट 'देव गौशाला सेवा संस्थान' ने इसमें से 5 हेक्टेयर यानी लगभग 20 बीघा जमीन गौशाला के लिए आवंटित करने का प्रस्ताव रखा था। जांच में सामने आया है कि इस संस्थान में विधायक स्वयं सचिव थे। उनके छोटे बेटे चिनार देवतवाल संस्थान के अध्यक्ष हैं, जबकि बड़े बेटे जतिन देवतवाल कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। विधायक के निजी सहायक हुकमचंद कुमावत को उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा दिशांक गर्ग और राहुल बोहरा को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
नियमों की अनदेखी और आवंटन निरस्त
सरकारी जमीन के आवंटन के लिए राजस्थान भू राजस्व नियम 1957 के तहत कड़ी शर्तें निर्धारित हैं। इनमें राजस्थान सोसाइटी पंजीयन अधिनियम 1958 के तहत पंजीकरण, राजस्थान गौशाला अधिनियम 1960 के तहत विधिवत पंजीयन और सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि गौशाला का संचालन पिछले 3 सालों से होना अनिवार्य है। चूंकि देव गौशाला सेवा संस्थान इन शर्तों को पूरा नहीं कर पाया, इसलिए भीलवाड़ा कलेक्टर ने 25 फरवरी 2026 को ही आवंटन की प्रक्रिया को बंद कर दिया था। इसके बावजूद, जमीन पर संस्थान का बोर्ड लगा दिया गया और तारबंदी कर अतिक्रमण कर लिया गया। हैरानी की बात यह है कि 20 मई 2026 को इस विवादित जमीन पर बिजली का कनेक्शन भी ले लिया गया।
मामले का घटनाक्रम और प्रशासनिक फाइल
दस्तावेजों के अनुसार, देव गौशाला सेवा संस्थान को सहकारिता विभाग ने 21 अगस्त 2025 को पंजीकृत किया था। इसके बाद फाइल बहुत तेजी से आगे बढ़ी। 11 सितंबर 2025 को शाहपुरा तहसीलदार ने एसडीओ को प्रस्ताव भेजा। 15 सितंबर 2025 को यह प्रस्ताव कलेक्टर के पास पहुंचा और 8 दिसंबर 2025 को इसे राजस्व विभाग को भेज दिया गया। इस दौरान आमलीकला में आराजी नंबर 485 और 3734/473 की जमीन का भी जिक्र आया था, जिसका रकबा 1 दशमलव 4720 और 6 दशमलव 05 बताया गया था। हालांकि, अंततः नियमों की पूर्ति न होने पर कलेक्टर ने आवंटन से इनकार कर दिया।
विधायक की सफाई और अधिकारियों का पक्ष
इन गंभीर आरोपों पर सफाई देते हुए विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने कहा कि इस मामले से उनका कोई सीधा लेना-देना नहीं है और उन्होंने दावा किया कि उन्होंने 2025 में ही इस संस्थान से इस्तीफा दे दिया था और पुराने दस्तावेजों के आधार पर उनकी राजनीतिक छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है। विधायक ने कहा, "प्रक्रिया चल रही है, मौके पर कुछ तो करना ही पड़ेगा। " दूसरी ओर, शाहपुरा के एसडीओ सुनील मीणा ने कहा कि उन्हें फिलहाल पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी याद नहीं है और वे मौका देखकर ही कुछ कह पाएंगे। इस मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है, क्योंकि सरकारी चारागाह भूमि पर बिना आवंटन के कब्जा और बिजली कनेक्शन मिलना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने धौलपुर जिले के राजाखेड़ा की ग्राम पंचायत बाजना में चारागाह व वन भूमि पर हो रखे अतिक्रमणों के खिलाफ सख्ती दिखाई है. इसके साथ ही अदालत ने संबंधित अफसरों को कहा है कि वे चाहे तो अतिक्रमियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे और उनकी गिरफ्तारी करें, लेकिन अतिक्रमण हटाए जाने चाहिए. वहीं खंडपीठ ने अतिक्रमण हटाकर दो सप्ताह में पालना रिपोर्ट पेश करने को कहा है. एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा व जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश रामनिवास की जनहित याचिका पर दिए.
सुनवाई के दौरान राजाखेड़ा, धौलपुर की उपखंड अधिकारी सुशीला मीणा ने अदालत में उपस्थित होकर माना कि जमीन के बडे हिस्से पर अतिक्रमण किया गया है. इसमें से कुछ अतिक्रमण हटा दिए हैं, लेकिन बाकी अतिक्रमण को भी हटाना है.
ग्रामवासी खेडा अहीरान ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर गांव की चारागाह भूमि पर निर्माणाधीन मकान हटाने की मांग की गई। ज्ञापन में बताया कि भंवरलाल अहीर द्वारा चारागाह भूमि पर पक्का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जो की गांव के समक्ष व गुमानखेड़ी जाने का आम रास्ता है, जिसकी मंत्री ने डामरीकरण रास्ता की घोषणा कर रखी है एवं समस्त समाज का होलीका दहन भी यहा होता है, वही श्मशान का रास्ता भी यही एवं एलीराम द्वारा आम रास्ता पर दीवार बना कर अतिक्रमण कर दिया है, जिस पर गांव में भारी वाहन एवं अग्निश्मन वाहन गांव में नहीं आ सकते है। इस सम्बन्ध में पूर्व में भी प्रशासन को अवगत कराया गया है जिस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
अतिक्रमण जल्द से जल्द हटा कर समस्त ग्रामवासियो को राहत प्रदान कराने की मांग की गई। ज्ञापन के दौरान भेरुलाल, किशनलाल, रामलाल, दयाराम, देवीलाल, भेरुलाल, घासीलाल, उंकार लाल, मोहनलाल, वरदीचंद, प्रेमचंद, रामेश्वर लाल, नारायणलाल, गोवर्धन लाल, परसराम, किशनलाल, शंकर लाल, मिट्ठू लाल, शंकरलाल भेरुलाल, कालुलाल, विष्णु, मनीष अहीर, शंकर लाल आदि ग्राम वासियान मौजूद थे।
लाठी के मरुस्थलीय क्षेत्र में सेवण घास से विकसित चारागाह शनिवार देर रात अचानक भीषण आग की चपेट में आ गया। हाइटेंशन लाइन में स्पार्किंग से निकली चिंगारी और तेज हवाओं के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया। करीब 7–8 बीघा क्षेत्र में फैली आग से वनस्पति व पौधों को भारी नुकसान हुआ, ग्रामीणों और पुलिस ने आग बुझाने के प्रयास किए।
जैसलमेर | Deepak Vyas | Jul 05, 2026
लाठी ( जैसलमेर ). लाठी कस्बे में मरुस्थलीय वानस्पतिक संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के उद्देश्य से ग्राम पंचायत की ओर से विकसित सेवण घास चारागाह शनिवार देर रात भीषण आग की चपेट में आ गया। रात करीब नौ बजे अचानक लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार चारागाह के ऊपर से गुजर रही हाइटेंशन विद्युत लाइन में हुई स्पार्किंग से निकली चिंगारी सूखी सेवण घास पर गिर गई। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैलती चली गई और देखते ही देखते करीब सात से आठ बीघा क्षेत्र इसकी चपेट में आ गया।
आग की लपटों ने चारागाह में उगी सेवण घास, वानस्पतिक झाड़ियों तथा अनेक पौधों को अपनी चपेट में लेकर भारी नुकसान पहुंचाया। आग की ऊंची लपटें और धुएं का गुबार दिखाई देने पर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। ग्राम पंचायत लाठी के प्रशासक महेंद्र चावला, निवर्तमान उपसरपंच भारस खां, वार्ड पंच मजीद खां, रामसिंह सिसोदिया, खेतनाथ, जसनाथ, खेताराम भील, ललित कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उपलब्ध संसाधनों से आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया। ग्रामीणों ने टहनियों, मिट्टी और अन्य साधनों की मदद से आग को फैलने से रोकने की कोशिश की, लेकिन तेज हवा के कारण आग लगातार विकराल होती चली गई। कुछ ही देर में चारागाह का बड़ा हिस्सा आग की चपेट में आ गया। घटना की सूचना मिलते ही लाठी थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। थानाधिकारी ईशराराम परिहार, कांस्टेबल भींयाराम चौधरी, कैलाश चौधरी, नेनाराम, सुरेंद्र साऊ तथा अन्य पुलिसकर्मियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर आग पर नियंत्रण पाने के प्रयास किए। साथ ही अग्निशमन वाहन को भी तत्काल सूचना दी गई, लेकिन दमकल के पहुंचने से पहले ही मौसम ने अचानक करवट ले ली।
... और टल गया बड़ा हादसा
आग लगातार फैल रही थी और उसके आसपास के क्षेत्र तक पहुंचने की आशंका बढ़ती जा रही थी। इस दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश ने कुछ ही देर में आग की तीव्रता कम कर दी और धीरे-धीरे आग पूरी तरह बुझ गई। यदि समय पर बारिश नहीं होती तो आग चारागाह के साथ आसपास के क्षेत्र में भी फैल सकती थी, जिससे नुकसान कई गुना बढ़ जाता। बारिश के कारण बड़ा हादसा टल गया और ग्रामीणों के साथ पुलिस प्रशासन ने भी राहत की सांस ली।
पर्यावरण और जैव विविधता को भारी क्षति
आग से सेवण घास चारागाह को व्यापक नुकसान पहुंचा है। सेवण घास मरुस्थलीय क्षेत्र की महत्वपूर्ण वनस्पति मानी जाती है और पशुओं के लिए पौष्टिक चारे का प्रमुख स्रोत भी है। इसके अलावा यह मरुस्थलीय पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आग की वजह से बड़ी मात्रा में सेवण घास, प्राकृतिक झाड़ियां और नव विकसित पौधे जलकर नष्ट हो गए। इससे चारागाह की जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी गहरा झटका लगा है।
स्थायी अग्निशमन केंद्र की उठी मांग
घटना के बाद ग्राम पंचायत लाठी के प्रशासक महेंद्र चावला ने क्षेत्र में दमकल सुविधा की कमी पर चिंता जताई। उनका कहना है कि लाठी क्षेत्र पहले भी कई बार आग लगने की घटनाओं का सामना कर चुका है, लेकिन हर बार अग्निशमन वाहन के समय पर नहीं पहुंचने से नुकसान बढ़ने का खतरा बना रहता है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मांग की कि लाठी क्षेत्र में स्थायी अग्निशमन केंद्र स्थापित किया जाए, ताकि भविष्य में आग जैसी घटनाओं पर तत्काल नियंत्रण पाया जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर दमकल सुविधा उपलब्ध होने से पर्यावरण, वनस्पतियों और जन-धन की सुरक्षा बेहतर ढंग से सुनिश्चित की जा सकेगी।