- गांव का निर्णय- पेड़, टहनी या तना काटने पर 11-11 हजार, जलस्त्रोत से पानी चोरी की तो 5100 रुपए का जुर्माना लगेगा
भास्कर न्यूज | चित्तौड़गढ़/गंगरार
पर्यावरण एवं पशुधन संरक्षण के प्रति एक गांव की जागरूकता प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई। जहां ग्रामवासियों ने पहले तो 400 बीघा चरागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाया। फिर जल, जंगल व जमीन की सुरक्षा की शपथ ली। वो भी ऐसी कि इनके साथ किसी भी तरह के खिलवाड़ पर जुर्माना तय कर दिया।
यह उदाहरण गंगरार पंस मेंं ग्राम पंचायत कांटी का सिंगोला गांव का है। गांव की चारागाह विकास समिति ने शामलात भूमि, चारागाह, तालाब, नाडी व जोहड़ आदि की सुरक्षा के लिए जुर्माना राशि तय कर दी। समिति के रामपाल शर्मा के अनुसार ग्राम समुदाय ने मिलकर गत जुलाई में चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया था। अब सभी ने इस भूमि पर स्थित पेड़ों की सुरक्षा व संवर्धन विकास की शपथ ली।
तय हुआ कि पेड़ या पेड़ की टहनी या तना काटने पर 11-11 हजार रुपए व जल स्त्रोत से पानी चोरी करने पर 5100 रुपए जुर्माना लगेगा। यह राशि गांव के ही पशुओं पर ही खर्च होगी। चरागाह भूमि पर घासरोपण भी किया जाएगा ताकि पशुओं को चराने में सहायता मिल सके। जल, जंगल, जमीन व जैव विविधता सुरक्षा और संवर्धन विकास की शपथ सभा में पूर्व सरपंच गजराज सिंह चौहान, बदाम देवी, कैलाश गुर्जर, नगजीराम गुर्जर, भूरसिंह चौहान, सावंतसिंह, नारायण सिंह, लादूलाल गुर्जर, प्रहलाद गुर्जर, श्यामलाल गुर्जर, मांगू भील,रामचंद्र भांबी, रामपाल शर्मा , रतन भोपाजी कालूलाल तेली, मांगू सेवक, घीसा लाल सुथार कालू सिंह, कालूदास वैष्णव सहित सभी जाति समाज के लोग मौजूद रहे। सिंगोला गांव में 2020 में यह समिति बनी।
तब चारागाह भूमि पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा था। ग्रामीणों ने प्रशासन गांवों के संग अभियान 2021-22 में कार्रवाई की अर्जी दी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। लगातार पत्र लिखते रहे। सरकार ने सार्वजनिक भूमि प्रकोष्ठ की स्थापना कर कलेक्टर को अध्यक्ष बनाया तो ग्रामीणों ने फिर अर्जी लगाई। अब कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार ने चिन्हित अतिक्रमियों को नोटिस जारी किए। कुछ लोगों ने तो खुद कब्जे हटा दिए, लेकिन कुछ प्रभावशाली अतिक्रमियों ने उल्टा दबाव बनाने का प्रयास किया। ग्रामीण एकजुट रहे तो आखिरकार प्रशासन मैदान में आया। तीन दिन जेसीबी लगाकर मोतबीरों की मौजूदगी में चले अभियान में पूरी चरागाह जमीन अतिक्रमण मुक्त करवाई गई। अब उसकी पुख्ता सुरक्षा के लिए नियम बनाए। पहले गांव का कोई पशु अतिक्रमण शुदा भूमि पर चला जाता था तो उसे खदेड देते थे। ग्राम पंचायत भी मनरेगा सहित विकास कार्य नहीं कर पा रही थी। श्रमिकों को रोजगार नहीं मिलता था।
मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/chittorgarh/news/singola-village-freed-400-bighas-of-pastureland-from-encroachment-now-fines-have-been-imposed-on-tampering-with-the-forest-and-land-136158224.html
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