Sunday, 28 September 2025

हाईकोर्ट- क्षेत्राधिकार वाली चारागाह भूमि का उपयोग कर सकता है जेडीए

  • सेज स्थापित करने के लिए चारागाह जमीन आवंटन को दी थी PIL में चुनौती

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जेडीए एक्ट की धारा 2(8) के तहत जयपुर क्षेत्राधिकार में आने वाली भूमि शहरी भूमि की श्रेणी में आती है, इसलिए धारा 54 के तहत जेडीए ऐसी भूमि को सेज सहित अपनी किसी भी अन्य स्कीम के लिए आवंटित कर सकता है। जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश रामकरण व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका को खारिज कर दी।

मामले में अदालत ने कहा कि संबंधित भूमि का सार्वजनिक उपयोग किया जा रहा है और प्रार्थियों ने प्रभावितों को याचिका में पक्षकार नहीं बनाया है। यह भूमि साल 2008 में अधिग्रहित की गई थी, जबकि याचिका 7 साल की देरी से साल 2015 में दायर की गई है।

याचिका में कहा गया कि पूर्व में स्थानीय सरपंच ने जनहित याचिका दायर की थी। दूसरी भूमि उपलब्ध कराए बिना जेडीए ने गोचर भूमि को अवाप्त कर लिया है। हाई कोर्ट ने यह याचिका निस्तारित करते हुए विभाग को प्रार्थी का अभ्यावेदन तय करने के लिए कहा था, लेकिन प्रमुख राजस्व सचिव ने अभ्यावेदन खारिज कर दिया। जिस पर उन्होंने याचिका में कहा कि वे स्थानीय ग्रामीण हैं। जेडीए ने भूमि अधिग्रहित करते समय चारागाह के लिए दूसरी समान भूमि नहीं दी है और धारा 54 के आधार पर अभ्यावेदन खारिज किया है। ऐसे में अधिग्रहण को खारिज किया जाए।

इसके जवाब में जेडीए के अधिवक्ता अमित कुड़ी ने कहा कि जेडीए एक्ट की धारा 2(8) के तहत जयपुर के क्षेत्राधिकार में आने वाली भूमि शहरी भूमि की श्रेणी में आती है, धारा 54 के तहत सार्वजनिक उद्देश्य के लिए इस भूमि का उपयोग करने के लिए जेडीए स्वतंत्र है। भूमि अवाप्त कर रीको को दी गई और बाद में इसे महिंद्रा वर्ल्ड सिटी को आवंटित किया गया। मौजूदा समय में यहां कई शैक्षणिक संस्थान और इंडस्ट्री संचालित हो रहे हैं, इसलिए जनहित याचिका को खारिज किया जाए। खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर और जेडीए से सहमत होते हुए पीआईएल को खारिज कर दिया।

मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jaipur/news/high-court-jda-can-use-pasture-land-under-its-jurisdiction-136033719.html

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