भीलवाड़ा। भीलवाड़ा के विधायक अशोक कोठारी ने प्रदेश में चारागाह और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के विकास को लेकर सरकार को लिखे पत्र में महत्वपूर्ण मांग कर आगामी 2 अक्टूबर को होने वाली ग्राम सभाओं में 2026-27 की वार्षिक कार्य-योजना में प्रस्ताव शामिल करने के लिए आदेश जारी करने का आग्रह किया है। विधायक कोठारी ने राज्य के मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, पंचायतीराज मंत्री व प्रमुख शासन सचिव को पत्र के माध्यम से बताया कि राजस्थान में कुल 3.42 करोड़ हेक्टेयर भूमि है, जिसमें से केवल 4.86 प्रतिशत (16.38 लाख हेक्टेयर) ही चारागाह के रूप में उपलब्ध है। उन्होंने जोर दिया कि ये चारागाह सिर्फ पशुधन के लिए ही नहीं, बल्कि गांवों के पारिस्थितिक संतुलन और जल संचयन क्षमता को बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। कोठारी ने इस बात पर चिंता जताई गई है कि चारागाहों के विकास के अभाव में विलायती बबूल का तेजी से फैलाव हुआ है, जिससे ये जमीनें बंजर हो रही हैं। यह बबूल न सिर्फ देशी घास को उगने से रोकता है, बल्कि भूमि की उर्वरकता को भी कम करता है। उन्होंने विलायती बबूल को हटाकर सेवण, धामण और रोहिड़ा जैसी देशी प्रजातियों के पौधे लगाने का सुझाव दिया है। विधायक कोठारी ने ग्रामीण विकास विभाग से 2 अक्टूबर की ग्राम सभा के लिए हर ग्राम एक चारागाह योजना के तहत वर्ष 2026-27 में प्रत्येक गांव में महात्मा गांधी नरेगा और जलग्रहण योजना के माध्यम से कम से कम 15 हेक्टेयर चारागाह भूमि विकसित करने के लिए बजट स्वीकृत किया जाए। गांवों को जल और चारे के लिए आत्मनिर्भर बनाने के लिए इन साझा संसाधनों पर सामुदायिक अधिकारों को मजबूत किया जाए। राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 के तहत, वार्ड पंच की अध्यक्षता में हर गांव में एक चारागाह विकास समिति का गठन किया जाए।राजस्व अधिकारियों की मदद से सभी शामलात भूमियों (जैसे चारागाह, ओरण, तालाब आदि) का सीमांकन (सीमाज्ञान) करके उन्हें पंचायत के रजिस्टर में दर्ज किया जाए। जिन गांवों में चराई योग्य भूमि नहीं है, वहां बिलानाम (सरकारी) भूमि को चारागाह के रूप में चिन्हित कर विकसित किया जाए। उन्होंने पत्र में बताया कि आजीविका विकास के लिए राजीविका के स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को सुनिश्चित किया जाए ताकि वे स्थानीय घास और बीजों को इकट्ठा कर सकें। ग्राम पंचायतों में विलायती बबूल को हटाने का प्रस्ताव लिया जाए और इससे कोयला बनाकर पंचायतों के लिए आय के साधन पैदा किए जाएं। पंचायतें अपने गांवों के लिए जल बजट तैयार करने का प्रस्ताव लें।
विधायक कोठारी का कहना है कि प्रधानमंत्री के विकसित गांव के सपने को साकार करने के लिए चारागाहों का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन मांगों पर ध्यान देकर नरेगा के माध्यम से प्रदेश के चारागाहों का विकास किया जा सकेगा।
मूल ऑनलाइन लेख - https://www.khaskhabar.com/local/rajasthan/bhilwara-news/news-mla-ashok-kotharis-demand-request-to-bring-proposal-in-gram-sabhas-for-pasture-development-in-rajasthan-news-hindi-1-753054-KKN.html
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