सरिस्का में खरपतवार हटाने से पहले जंगल और बाद में साफ दिख रहा।
सरिस्का के जंगल से बिलायती बबूल के अलावा हानिकारक खरपतवार को हटाने का काम शुरू हो गया है। पहले चरण में 500 हैक्टेयर वन भूमि से जूलीफ्लोरा हटाया जाएगा। इस क्षेत्र में चारागाह विकास होगा। यहां बिलायती बबूल और खरपतवार उखाड़ कर स्वदेशी घास, जैसे धामण, करड़, दूब व फूलेरा आदि प्रजातियों का रोपण किया जाएगा। ताकि जल संरक्षण, मृदा स्थिरीकरण हो सकें।
इसका मुख्य उद्देश्य चीतल, सांभर, नीलगाय व एवं अन्य वन्यजीवों के लिए उपयुक्त चारा उपलब्ध कराना एवं जैव विविधता की रक्षा करना है। इस पहल के अन्तर्गत घास युक्त क्षेत्रों का विस्तार किया जा रहा है। पारिस्थितिक असंतुलन उत्पन्न करने वाली प्रजातियां जैसे कि लेन्टाना, पार्थेनियम (गाजर घास), कासिया टोरा एवं जूलीफ्लोरा को चिह्नित कर वैज्ञानिक विधियों से हटाया जा रहा है।
इस तरह सरिस्का के जंगल में बिलायती बबूल और खरपतवार अधिक है। इसे अभियान के तौर पर हटाने का काम जारी है। पहले फेज में 500 हैक्टेयर जमीन पर खरपतवार उन्मूलन किया जा रहा है।
इन कामों से सरिस्का की पारिस्थितिकी को दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा एवं वन्यजीवों की आहार श्रृंखला सुदृढ़ होगी।
मूल ऑनलाइन लेख -https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/alwar/news/foreign-acacia-is-being-removed-from-sariska-forest-135261036.html


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