- पहल. एनिकट बना रहे, जिसका पानी 100 बीघा में भरा रहेगा, गर्मी में मिल सकेगा पानी
भास्कर न्यूज। बूंदी
कोरोनाकाल में ऑक्सीजन की कमी से लोगों को मरते हुए देखकर ग्राम पंचायत बड़ाखेड़ा ने क्षेत्र की बंजर पड़ी चारागाह भूमि को ऑक्सीजन जोन बनाने का संकल्प लिया। महज ढाई साल में ही फलदार व अन्य पौधों से बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर हरा-भरा कर दिया। 200 बीघा से अधिक भूमि को संरक्षित करते हुए यहां फलदार व अन्य छायादार पौधों लगाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस पहल की है। वहीं, इससे पंचायत की आमदनी बढ़ाने पर भी फोकस है। पंचायत के इस कार्य को देखने के लिए 18 राज्यों के विशेषज्ञ इस कार्य को देखने व समझने के लिए आ चुके हैं।
बूंदी में चारागाह भूमि के विकास को लेकर योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन धरातल पर नहीं उतरती। इससे अलग पहचान बनाते हुए बड़ाखेड़ा पंचायत ने पर्यावरण व चारागाह भूमि के संरक्षण की ठोस पहल की। सीमित संसाधनों से 200 बीघा चारागाह भूमि को फलदार व छायादार पौधों से हरा-भरा कर दिया। इस पहल को लेकर पंचायत प्रशासन के साथ ग्रामीण खुश हैं। वहीं, जिला प्रशासन ने भी इस पहल की तारीफ की है। पंचायत के सरपंच प्रदीप सिंह ने बताया कि क्षेत्र का जलस्तर बनाए रखने, पौधों और जंगली जानवरों के लिए गर्मी में पानी उपलब्ध कराने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर एनीकट बनाया जा रहा है, जिसका पानी करीब 100 बीघा में भरा रहेगा। इससे गर्मी में जंगली जानवरों को पीने का पानी उपलब्ध हो सकेगा, ताकि वे पानी की तलाश में गर्मी में आबादी क्षेत्र में नहीं आए।
ऑक्सीजन जोन और इको टूरिज्म पर फोकस पंचायत के सरपंच प्रदीप सिंह बताते हैं कि इस पहल के पीछे ग्रामीणों को चारागाह के संरक्षण से जोड़ना है। साथ ही ग्रामीण स्तर पर एक ऐसा क्षेत्र विकसित करना था, जो पर्यावरण की दृष्टि से लाभकारी हो और ग्रामीण इसके प्रति जवाबदेह बने। कोरोनाकाल में ऑक्सीजन जोन खूब चर्चा में आए, इसलिए भी इस पहल को लेकर रुझान बढ़ा।
मूल ऑनलाइन लेख - https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/bundi/news/in-two-and-a-half-years-the-barren-land-was-filled-with-fruit-trees-134696856.html
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